मौसुनी द्वीप नदी के मुहाने पर है और वहां से आगे बंगाल की खाड़ी शुरू होती है। यह द्वीप भारतीय सुंदरबन के पश्चिमी तट पर स्थित है, जहां अपेक्षाकृत कम मैंग्रोव कवर है और भूतल के समुद्र में समाने की गति अपेक्षाकृत कहीं अधिक। यह स्थिति इसे जलवायु आपदाओं के लिए अधिक संकटग्रस्त बनाता है।
जलवायु आपदाओं के कारण लोगों के मन में खेती के प्रति एक निराशा का भाव है, चक्रवात के कारण पर्यटन के जरिये आजीविका के सीमित विकल्प भी असर पड़ता है और लोग स्थायी व अस्थायी दोनों तरह के पलायन को मजबूर हैं।
मौसुनी द्वीप से राहुल सिंह की रिपोर्ट
मौसुनी द्वीप (दक्षिण 24 परगना जिला, पश्चिम बंगाल) : पश्चिम बंगाल के सुंदरबन क्षेत्र के कुछ सबसे अधिक संकटग्रस्त द्वीपों में एक है मौसुनी द्वीप। अपनी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति के कारण सुंदरबन के द्वीपों में इसकी एक अलग स्थिति है। यह द्वीप ऐसी जगह पर स्थित है, जहां नदी समुद्र में मिलती है और यह स्थिति इसे विशिष्ट बनाती है। और, यह स्थिति यहां के लोगों को पर्यटन के जरिये भी बेहद सीमित मात्रा में आजीविका कमाने का विकल्प देती है।
दक्षिण 24 परगना जिले (South 24 Parganas) के नामखाना ब्लॉक में स्थित मौसुनी द्वीप (mousuni island) के पश्चिम में मुरी गंगा नदी, पूर्व में पिट्स क्रीक और दक्षिणी भाग में बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) स्थित है। इस कारण यह मछुआरों (Fishermen) की आजीविका का एक प्रमुख ठिकाना होने के साथ ही पर्यटक भी इसकी ओर आकर्षित होते हैं। यह भारतीय सुंदरबन के पश्चिमी छोर पर स्थित है।

मौसुनी द्वीप के शंकर दास एक रिसॉर्ट संचालक है जो बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन का यहां के लोगों के जीवन पर बहुत असर पड़ रहा है।
मौसुनी भारतीय सुंदरबन (Indian sunderbans) क्षेत्र के दक्षिण 24 परगना जिले में चक्रवातों से सर्वाधिक प्रभावित होने वाले 10 द्वीपों में यह एक है। सुंदरबन के सबसे संकटग्रस्त द्वीपों में घोड़ामाड़ा, सागर और मौसुनी जैसे द्वीपों का नाम लिया जाता है।
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) की तीव्रता व उससे जनित परिस्थितियों ने इस द्वीप और यहां के निवासियों को संकटग्रस्त स्थिति में धकेला है। ऐसे हालाल में लोगों का खेती के प्रति निराशा का भाव भरा है। साथ ही बड़ी जलवायु आपदा के बाद दूसरी जगह पलायन और आजीविका कमाने के लिए बाहर पलायन को मजबूर किया है।
इस द्वीप के संकट से अधिक जूझने की एक ऐतिहासिक वजह यह भी है कि यहां मैंग्रोव जंगलों को खत्म कर मानव बस्तियां बसायी गई थीं। यह इलाका सुंदरबन डेल्टा के पश्चिमी हिस्से में है जो कम मैंग्रोव कवर वाला इलाका है जो इस द्वीप के संकट से अधिक जूझने की एक ऐतिहासिक वजह यह भी है कि यहां मैंग्रोव जंगलों को खत्म कर मानव बस्तियां बसायी गई थीं। यह इलाका सुंदरबन डेल्टा के पश्चिमी हिस्से में है जो कम मैंग्रोव कवर वाला इलाका है।मैंग्रोव जलवायु आपदा में एक प्राकृतिक ढाल का काम करते हैं। इससे उलट सुंदरबन के पूर्वी हिस्से में अपेक्षाकृत अधिक घना मैंग्रोव जंगल है जो प्राकृतिक आपदा को झेलने में अपेक्षाकृत अधिक मजबूत स्थिति में हैं।
कटाव का खतरा
एक रिसर्च बताता है कि वर्ष 1979 से 2011 के दौरान महज 32 साल में इस द्वीप का 3.82 किमी एरिया पानी के कटाव में समा गया। मौसुनी के पास समुद्र के स्तर में वृद्धि की दर सालाना आठ से 12 मिलीमीटर के करीब है जो वैश्विक स्तर से तीन से चार गुना अधिक है। कोलकाता के जादवपुर विश्वविद्यालय के समुद्र विज्ञान विभाग के एक अध्ययन के मुताबिक, 50 सालों में मौसुनी द्वीप ने अपने 28 किमी वर्ग क्षेत्रफल का लगभग छठा हिस्सा समुद्र के बढते स्तर में गंवा दिया।

कटाव से बचाव के लिए बनायी गयी संरचनाएं।
इस संवाददाता ने जब सितंबर 2025 के आरंभ में इस द्वीप की यात्रा की तो मानसून के उन आखिरी दिनों में भी इस द्वीप के बलियाड़ा गांव में पानी के तेज थपेड़ों की वजह से लगातार तटों का कटाव जारी थी और उन तटों पर कोई लॉज व रिसॉर्ट बने हुए हैं जो पर्यटकों को इस वजह से आकर्षित करते हैं, क्योंकि यहां नदियां समुद्र में मिल रही हैं। यहां मछली व केकड़े जैसे जलीय जीव के साथ सुंदरबन की आकर्षक चिड़िया व सूर्यास्त का खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है। कई मीडिया रिपोर्ट यह बताती है कि चक्रवाती तूफानों से यह द्वीप बार-बार प्रभावित होता रहा है और यहां के लोगों को दूसरे जगह पर शरण लेनी होती है।

आप इस तसवीर में देख सकते हैं कि जहां रिसॉर्ट बना है, वहीं पर कटाव जारी है। रिसॉर्ट संचालकों ने कटाव की गति को धीमा करने के लिए लकड़ियों के बड़े-बड़े खंभे लगाकर मजबूत संरचना बनायी है जो पानी के थपेड़ों को झेल सकें।
यहां के बलियाड़ा गांव में तट पर स्थित एक रिसॉर्ट के संचालक शंकर दास ने इस संवाददाता को बताया, “जब अम्फान चक्रवात (2020 में) आया था तो यहां के तटों को काफी नुकसान हुआ था। यहां कटाव अभी भी काफी मात्रा में होती है, लेकिन सरकार कदम नहीं उठाती तो हम खुद उस कटाव को रोकने का उपाय करते हैं। लोगों ने लकड़ी-बांस से तटों को बांध रखा है, ताकि वह एक प्रतिरोध का काम करे और कटाव की गति कम हो”।

मौसुनी द्वीप के शंकर दास एक रिसॉर्ट संचालक है जो बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन का यहां के लोगों के जीवन पर बहुत असर पड़ रहा है।
शंकर दास ने इस संवाददाता से कहा, यहां खेती तो होती है, लेकिन इस द्वीप के तटीय क्षेत्र के लोगों में चक्रवात को लेकर डर रहता है और उससे नुकसान के भय से वे चास (खेती) करने में डरते भी हैं। अध्ययन भी बताता है कि बांधों के टूटने, मानव बसावटों व स्थानीय लोगों की आजीविका के साधन रिसॉर्ट के टूटने से यहां के लोगों का जीवन प्रभावित हुआ है और सुंदरबन के कई दूसरे क्षेत्र की तरह खेतों में खारा पानी जाने से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हुई है, जिससे लोगों की कृषि की मुख्य फसलों की उपलब्धता कम हुई है।
उन्होंने बताया कि अम्फान चक्रवात (Amphan Cyclone) के बाद यहां के करीब 200 लोगों ने दूसरी जगह घर बनाया।

शंकर दास बताते हैं कि यहां करीब 40 रिसॉर्ट है, जो इस द्वीप की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख आधार है और ठंड के दिनों में लोग यहां घूमने आते हैं। हालांकि स्थानीय युवाओं के पास रोजगार के बेहद सीमित विकल्प हैं, जिस वजह से पलायन भी काफी होता है। शंकर दास के बेटे भी दुबई में काम करने जाते हैं।

मछुआरा शेख कबीरुद्दीन अपनी जाल की मरम्मत करते हुए जो बताते हैं कि मछलियों की संख्या व उपलब्धता पर उनकी आजीविका निर्भर है।
यहां के एक 27 वर्षीय मछुआरा शेख कबीरुद्दीन ने बताया कि वे पिछले 10 सालों से मछलियां पकड़ते हैं और यहां चिंगड़ी और इलिश यानी हिलसा मछली उन्हें मिलती है। वे बताते हैं कि यह जगह गंगासागर का मुहाना है। हालांकि वे यह भी बताते हैं कि मछली की मात्रा में कमी से उनकी व उनके जैसे अन्य मछुआरों की आजीविका प्रभावित होती है। वे कहते हैं, “माछ नहीं होगा तो हम खायेंगे कैसे”। उनके पास नून पानी यानी खारे या समुद्री पानी में मछली पकड़ने का सरकारी कार्ड है।
यहां एक चाय की दुकान चलाने वाली बुजुर्ग महिला मफेदन बीवी से मुलाकात होती है, जिनके पास कुछ लोकल ग्राहक तो कुछ पर्यटक चाय-बिस्कुट के लिए आते हैं।

मौसुनी द्वीप के 28 वर्षीय युवक शेख फारुख कभी प्रवासी श्रमिक के रूप में कर्नाटक में काम करते थे। फारुख ने कहा, मैंने कर्नाटक में डेढ साल काम किया और उसके बाद पिछले तीन-चार सालों से अपने गांव में ही टोटो रिक्सा चला कर गुजारा कर रहा हूं। बंगाल के प्रवासियों के लिए कर्नाटक और केरल सुरक्षित जगह है, जबकि कई राज्यों की परिस्थितियां उनके अनुकूल नहीं हैं।
अम्फान चक्रवात (Amphan Cyclone) : अम्फान चक्रवात 20 मई 2020 को 175 किमी प्रति घंटे के रफ्तार से आया था और बाक्खाली के तट से टकराया था।