दुमका स्टेशन के नाम पट्ट से ओलचिकी लिपि को मिटाने से आदिवासी समाज में आक्रोश

आदिवासी समाज का कहना है कि यह हमारी सांस्कृतिक व भाषाई पहचान का मुद्दा है और ऐसा कृत्य क्षेत्रीय भाषाओं के सम्मान और संवैधानिक अधिकारों पर भी सीधा आघात है।


दुमका: दुमका रेलवे स्टेशन के नाम पट्ट पर हिंदी भाषा की देवनागरी लिपि, अंग्रेजी की रोमन लिपि और क्षेत्रीय व जनजातीय भाषा संताली की लिपि ओलिचिकी में लिखा गया था। पर, पिछली रात असामाजिक तत्वों ने ओलचिकी लिपि में लिखे नाम को मिटा दिया, जिससे आदिवासी समाज में रोष व गुस्सा है। इस घटना के बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, रेलवे व राज्य सरकार के समक्ष सोशल मीडिया के माध्यम से आदिवासी समाज के लोगों ने अपनी चिंता पहुचंायी है।

आदिवासी समाज और संगठनो का कहना है कि यह कृत्य न केवल संताली भाषा और ओलचिकी लिपि व आदिवासी संस्कृति का अपमान करता है, बल्कि क्षेत्रीय भाषाओं के सम्मान और संवैधानिक अधिकारों पर भी सीधा आघात है। चार मार्च को दुमका के आदिवासी संगठनों के एक संयुक्त प्रतिनिधि मंडल ने मिलकर दुमका रेलवे स्टेशन प्रबंधक को लिखित आवेदन देकर मांग की है कि दोषियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की जाए और इस घटना की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों को जल्द से जल्द चिह्नित कर कठोर कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही यह भी मांग की गई है कि अविलंब दुमका स्टेशन के नाम पट्ट पर फिर से संताली भाषा और उसकी लिपि ओलचिकी को स्थान दिया जाए। इसके साथ ही ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए रेलवे स्टेशन पर सीसीटीवी निगरानी और सुरक्षा कड़ी की जाए।

https://x.com/rpferasn/status/1896869606209601781?t=Q2Ltzsyxtz0GbTGNt35kJw&s=08

आदिवासी सामाजिक संगठन समान्वयक प्रतिनिधि मंडल ने इस विषय पर सरकार, रेलवे प्रशासन और स्थानीय प्रशासन से तत्काल संज्ञान लेने की अपील की है और कहा है कि यदि इस पर उचित कार्रवाई नहीं की जाती है तो आदिवासी समाज बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने के लिय मजबूर होगा, क्योकि यह केवल एक भाषा, लिपि या साइन बोर्ड की बात नहीं है, बल्कि यह हमारी पहचान, संस्कृति और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का विषय है।

संगठन ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर रेलमंत्री को भी ट्वीट कर कार्रवाई करने का मांग की है। इस मौके पर सुभाष किस्कू, परेश मुर्मू, सोनाधन बेसरा, बलदेव सोरेन, संजय किस्कू, पिंटू हांसदा, दास सोरेन, महेश हेंब्रम, सुनील टुडू, महेंद्र हेंब्रम, कमीशनर मुर्मू, रधुनाथ मरांडी, सुंदर हांसदा, हेमलाल बास्की, सुरथ मुर्मू, सोनेलाल मुर्मू, रमेश टुडू, धर्मेंद्र मुर्मू, मानवेल हांसदा, लखीराम हांसदा, ऐमेल मरांडी, सुनील मरांडी आदि मौजूद थे।

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