इस साल मानसून के महीनों में भी इतनी तीखी गर्मी क्यों महसूस हुई, आंकड़ों से समझिए

क्लाइमेट ईस्ट डेस्क

इस साल मानसून के महीने के कई दिन बहुत तेज धूप व गर्मी वाले रहे। अबतक मानसून के महीनों में सितंबर की महीना सबसे कष्टदायक बीता है और मानसून अपने आखिरी दौर में भी है। आखिर क्या वजह रही कि मानसून इतना गर्म गुजरा?

वैश्विक तापमान पर रिसर्च करने वाली संस्था क्लाइमेट सेंट्रल ने इस संबंध में हाल में एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की है और दुनिया के लगभग सभी देशों के जून से अगस्त 2024 के दौरान के तामपान में बदलाव का डेटा व ट्रेंड उसमें शामिल है।

क्लाइमेट सेंट्रल की इस रिपोर्ट के डेटा विश्लेषण से यह पता चलता है कि जून से अगस्त के बीच भारत में इस साल 30 साल के मानदंड पर प्रति व्यक्ति तापमान में औसत बदलाव 0.86 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। यहां यह गौर किया जाये कि यह एक औसत भारतीय व्यक्ति के लिए दर्ज किया गया बदलाव है, देश के किसी क्षेत्र के लोगों के लिए यह कम और और किसी अन्य क्षेत्र के लोगों के लिए ज्यादा हो सकता है। यह वैसा ही है, जैसा हम देश के प्रति व्यक्ति औसत आय निकालते हैं, भले वह सभी व्यक्ति के लिए एक समान नहीं होता है।

फिर इस डेटा के विश्लेषण से यह भी पता चलता है कि क्लाइमेट शिफ्ट इंडेक्स लेवल – 2 या उससे अधिक तक जून से अगस्त 2024 तक भारत के प्रति व्यक्ति के औसत 41 दिन शिफ्ट कर गये।

क्लाइमेट शिफ्ट इंडेक्स लेवल – 3 या उससे अधिक पर 29 दिन शिफ्ट कर गये। क्लाइमेट शिफ्ट इंडेक्स लेवल – 5 पर एक भारतीय (औसत) के 18 दिन शिफ्ट कर गये। यह इंडेक्स लेवल – 5 एक तरह से चरम गर्मी वाली स्थिति है, जिसमें इस साल भारत के दो करोड़ पांच लाख 85 हजार लोग कम से कम 60 दिन जून से अगस्त तक गुजारने को मजबूर हुए। जून से अगस्त के बीच 92 दिन दिन होते हैं, उसमें दो करोड़ से अधिक लोगों का दो तिहाई दिन इतना तीखी गर्मी वाला बीता। इसमें अधिकांश दिन तो मानसून के हैं। यहां यह ध्यान रखना चाहिए कि जून के शुरुआत में केरल के तट से मानसून की शुरुआत होती है और जून के अंत तक वह पूरे देश को कवर कर लेता है।

30 साल के औसत के आधार पर प्रति व्यक्ति इस अवधि में 22 ऐसे दिन थे जब तापमान 90 परसेंटाइल के औसत या उससे अधिक था। जबकि जलवायु परिवर्तन के कारण 90 परसेंटाइल या उससे अधिक तापमान वाले प्रति व्यक्ति आठ दिन इस अवधि में थे। 90 परसेंटाइल या उससे अधिक तापमान होने का मतलब यह है कि किसी निश्चित अवधि में 10 प्रतिशत संभावना है कि तापमान उस सीमा से अधिक होगा या रहा। 90 परसेंटाइल से अधिक का तापमान बेमौसम गर्म माना जाता है।

भारत के कम से कम 1.28 अरब़ लोगों ने एक दिन ऐसा तीव्र दिन इस 92 दिन की अवधि में महसूस किया, 1.06 अरब लोगों ने ऐसे सात दिन महसूस किये, करीब 40 करोड़ लोगों ने ऐसे 30 दिन इस अवधि के दौरान महसूस किये। 1.94 करोड़ लोगों ने 92 में ऐसे 61 दिन महसूस किये।

1.38 अरब लोगों के लिए इस अवधि के दौरान तापमान क्लाइमेट शिफ्ट इंडेक्स लेवल – 2 तक या उससे अधिक पर पहुंच गया, जबकि 1.16 अरब लोगों के लिए कम से कम एक दिन तापमान इंडेक्स – 2 पर या उसके पार पहुंच गया। 75.52 करोड़ लोगों के लिए सात दिन तापमान इंडेक्स – 2 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि 15.91 करोड़ लोगों के लिए यह 30 दिन तक तापमान इंडेक्स – 2 पर पहुंच गया। 30.88 लाख लोगों के लिए ऐसे 61 दिन रहे।

क्लाइमेट शिफ्ट इंडेक्स लेवल को ऐसे समझिए


क्लाइमेट शिफ्ट इंडेक्स लेवल जलवायु परिवर्तन की वजह से किसी क्षेत्र विशेष में किसी खास समय अवधि के दौरान तापमान में बदलाव का एक मापक है। हिंदी में आप इसे जलवायु परिवर्तन सूचकांक कह सकते हैं। जलवायु परिवर्तन सूचकांक दैनिक तापमान पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को मापता है। एक से पांच तक का स्कोर यह इंगित करता है मानव जनित कारणों से होने वाले जलवायु परिवर्तन की वजह से तापमान में कितनी वृद्धि हुई।

शहर/अवधि1-5 अगस्त6-10 अगस्त11-15
अगस्त
16-20
अगस्त
21-25
अगस्त
26-30
अगस्त
31अग-4 सितंबर5-9 सितंबर10-14
सितंबर
15-19
सितंबर
20-24
सितंबर
कोलकाता03510255235
पटना02352355415
रांची02551155315
पूर्वी भारत के तीन शहरों कोलाकाता, पटना व रांची का का अगस्त 2024 व सितंबर 2024 का अबतक का उपलब्ध क्लाइमेट शिफ्ट इंडेक्स इस टेबल में दिया गया है। संख्या क्लाइमेट शिफ्ट इंडेक्स को उस विशिष्ट अवधि के दौरान इगित करता है। डेटा स्रोत – क्लाइमेट शिफ्ट इंडेक्स (क्लाइमेट सेंट्रल)

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