दुमका: दुमका जिले के रानीश्वर प्रखंड के मोहनपुर गांव में समाजसेवी सच्चिदानंद सोरेन, आनंद टुडू, संजय मुर्म की संयुक्त पहल पर गांव के लेखा होड़ (गांव को संचालित करने वाले) तथा ग्रामीणों ने संताल आदिवासी समुदाय द्वारा अपने पारंपरिक पूजा स्थल मांझी थान में साप्ताहिक पूजा की शुरुआत की।
इस अवसर पर गांव के महिला, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चों ने सामूहिक रूप से मांझी थान में एकत्र होकर पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार धूप, अगरबत्ती, जल, लड्डू, गुड़, चूड़ा, पानी आदि अर्पित कर विधिवत पूजा-अर्चना की।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान समय में धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं को बनाए रखने के लिए मांझी थान में सामूहिक साप्ताहिक पूजा अत्यंत आवश्यक है। यह पूजा संताल आदिवासी समाज के आराध्य देव मरांग बुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए आयोजित की जाती है।

इस अवसर पर समाजसेवी सच्चिदानंद सोरेन ने कहा साप्ताहिक मांझी थान बोंगा बुरु (पूजा) का मुख्य उद्देश्य सामुदायिक एकता, आध्यात्मिक शांति तथा सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना और इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। यह पहल विशेष रूप से युवा पीढ़ी और बच्चों को अपनी परंपरा और संस्कृति से जोड़ने के लिए की गई है, ताकि वे अपने रीति-रिवाजों को समझें, उनका सम्मान करें और उस पर गर्व महसूस करें।
उन्होंने आगे कहा कि यह सप्ताहिक पूजा संताल समाज के लिए मील का पत्थर साबित होगी, जो आगे चलकर संताल समाज को धार्मिक, आर्थिक, सामाजिक रूप सेे मजबूती प्रदान करेगी। इस अवसर पर बच्चों को सकारात्मक जीवन मूल्यों की ओर प्रेरित करने के लिए विशेष विनती(प्रार्थना) भी की गई, जिसमें नशा से दूर रहने, नियमित रूप से विद्यालय जाने, माता-पिता एवं बुजुर्गों की सेवा और सम्मान करने का संदेश दिया गया।

ग्रामीणों का मानना है कि साप्ताहिक मांझी थान बोंगा बुरु (पूजा) से गांव और परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और भाईचारा बढ़ेगा तथा धर्म, संस्कृति और सभ्यता को बचाए रखने में मदद मिलेगी, जो आगे चलकर संताल समाज को धार्मिक, आर्थिक, सामाजिक रूप से मजबूत करेगा।
पूजा के उपरांत सभी श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस साप्ताहिक मांझी थान बोंगा बुरु (पूजा) में
मंझी बाबा प्रधान हेम्ब्रम, नायकी गोविंद मुर्मू, देवीसिंह मुर्मू, पुलिस मुर्मू, मोतीलाल मुर्मू, सिकंदर मुर्मू, नानी मरांडी, सुबोरी हेम्ब्रम, मिना मरांडी, सेबेन मुर्मू, चुकह सोरेन, राजू सोरेन, मंगल सोरेन, लुखी बास्की, रमनी मुर्मू के साथ काफी संख्या में महिला, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे उपस्थित थे।