गर्म होते दिन से प्रभावित हो रही है कॉफी की फसल, आपूर्ति पर दबाव बढने का खतरा

30 डिग्री सेल्सियस से अधिक का तापमान काफी की फसल के लिए प्रतिकूल माना जाता है। 25 प्रमुख कॉफी उत्पादक देश, जो वैश्विक उत्पादन का 97 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करते हैं, जलवायु परिवर्तन के कारण कॉफी की फसल के लिए अधिक हानिकारक गर्मी का सामना कर रहे हैं।

नई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन ने दुनिया के प्रमुख कॉफी उत्पादक क्षेत्रों में ऐसे गर्म दिनों की संख्या तेज़ी से बढ़ा दी है, जो कॉफी फसल के लिए हानिकारक हैं। 2021 से 2025 के बीच के प्रेक्षित तापमान आंकड़ों की तुलना एक काल्पनिक, बिना कार्बन प्रदूषण वाली दुनिया से की गई इस विश्लेषण में क्लाइमेट शिफ्ट इंडेक्स का उपयोग कर यह आंका गया कि हर वर्ष कितने अतिरिक्त दिन ऐसे थे, जब तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर गया और जिनका सीधा संबंध जीवाश्म ईंधन आधारित प्रदूषण से है।

दुनिया के शीर्ष पांच कॉफी उत्पादक देश हैं – ब्राज़ील, वियतनाम, कोलंबिया, इथियोपिया और इंडोनेशिया। इन सभी ने औसतन 57 अतिरिक्त हानिकारक गर्म दिन प्रति वर्ष अनुभव किए। ये देश मिलकर वैश्विक कॉफी आपूर्ति में लगभग 75 प्रतिशत योगदान देते हैं।

ब्राज़ील, जो दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक है, वहां औसतन 70 अतिरिक्त गर्म दिन हर वर्ष दर्ज हुए किए गए। कुल मिलाकर विश्लेषण में शामिल सभी 25 प्रमुख कॉफी उत्पादक देश, जो वैश्विक उत्पादन का 97 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करते हैं, जलवायु परिवर्तन के कारण अधिक कॉफी हानिकारक गर्मी का सामना कर रहे हैं। औसतन प्रत्येक देश में 47 अतिरिक्त दिन प्रति वर्ष ऐसे रहे जो बिना कार्बन प्रदूषण के नहीं होते।

जब तापमान 30 डिग्री से ऊपर जाता है, कॉफी पौधे तनाव में आते हैं। ऐसे दिनों से उत्पादन घट सकता हैं। बीन्स की गुणवत्ता प्रभावित होती है और रोगों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ जाती है। यही वह कड़ी है जो खेत से लेकर कप तक असर डालती है।

दुनिया भर में रोज़ लगभग 2.2 अरब कप कॉफी पी जाती है। अमेरिका में दो तिहाई से अधिक वयस्क प्रतिदिन कॉफी का सेवन करते हैं। मांग स्थिर है, लेकिन आपूर्ति पर दबाव बढ़ रहा है।

कॉफी की फसल। फोटो स्रोत: https://www.greenlife.co.ke/

इस दबाव का सबसे बड़ा असर छोटे किसानों पर पड़ रहा है। वैश्विक स्तर पर लगभग 80 प्रतिशत उत्पादक छोटे किसान हैं और वे कुल आपूर्ति का लगभग 60 प्रतिशत उगाते हैं, लेकिन 2021 में जलवायु अनुकूलन के लिए आवश्यक वित्त का मात्र 0.36 प्रतिशत ही उन्हें मिला। एक हेक्टेयर खेत को अनुकूल बनाने की औसत लागत 2.19 डॉलर प्रतिदिन है। कई देशों में एक कप कॉफी की कीमत इससे अधिक है।

इथियोपिया में, जहां कॉफी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है, अत्यधिक गर्मी और सीधी धूप अरैबिका उत्पादन को प्रभावित कर रही है। ओरमिया कॉफी फार्मर्स कोऑपरेटिव यूनियन के जनरल मैनेजर देजेने दादी के अनुसार, पर्याप्त छाया के बिना पेड़ कम फल देते हैं और रोगों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। उनका कहना है कि सरकारों को जलवायु कार्रवाई के साथ छोटे किसानों में निवेश बढ़ाना होगा। उनका संगठन ऊर्जा दक्ष चूल्हों का वितरण कर रहा है ताकि जंगल सुरक्षित रहें, जो कॉफी के लिए प्राकृतिक छाया प्रदान करते हैं।

भारत में साउथ इंडिया कॉफी कंपनी के सह.संस्थापक अक्षय दशरथ बताते हैं कि उनके खेत पर सेंसर लंबे गर्म दौर, गर्म रातें और मिट्टी की नमी के तेज़ नुकसान को दर्ज कर रहे हैं। उनके अनुसार कॉफी एक संकीर्ण संतुलन पर निर्भर फसल है। छाया, नमी और ठंडे रिकवरी समय का संतुलन जितना घटेगा, अनुकूलन उतना अनिवार्य होगा।

क्लाइमेट सेंट्रल की विज्ञान उपाध्यक्ष डॉ. क्रिस्टिना डाहल के अनुसार, लगभग हर प्रमुख कॉफी उत्पादक देश अब अधिक चरम गर्म दिनों का सामना कर रहा है। इसका असर समय के साथ खेत से उपभोक्ता तक पहुंचेगा, गुणवत्ता और कीमत दोनों पर।

विश्लेषण में 25 देशों और उनके 532 जिलों, राज्यों या क्षेत्रों का डेटा शामिल है। यह स्पष्ट संकेत देता है कि कॉफी उत्पादन का भूगोल और जोखिम प्रोफाइल बदल रहा है।

कॉफी तथाकथित बीन बेल्ट में उगती है, कर्क और मकर रेखा के बीच का क्षेत्र। यही क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। बढ़ती गर्मी केवल एक पेय की कहानी नहीं, यह कृषि अर्थव्यवस्था, ग्रामीण आजीविका और वैश्विक खाद्य प्रणाली की कहानी है।

आपके हाथ में जो कप है, वह अब सिर्फ स्वाद का नहीं, वह तापमान का रिकॉर्ड भी है।

(हमारे कॉन्टेंट सहयोगी क्लाइमेट कहानी द्वारा तैयार आलेख।)

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