संताल आदिवासियों का सवाल, बंगाल, असम व ओडिशा में ओलचिकी लिपि मान्य तो झारखंड में क्यों नहीं?

दुमका: दिसोम मरांग बुरु संताली अरीचली आर लेगचर अखड़ा और ग्रामीणों ने संताली भाषा, ओलचिकी लिपि…

संताली भाषा व ओलचिकि लिपि में पढाने की मांग किस आधार पर कर रहे हैं झारखंड के संताल आदिवासी?

मुख्यमंत्री को मांग सौंप कर अमल करने की विभिन्न संगठनों ने किया है आग्रहदुमका : झारखंड…

स्थानीय समुदाय की भागीदारी प्रवासी प्रजातियों के अस्तित्व के लिए महत्वपूर्णः रिपोर्ट

बॉनः संयुक्त राष्ट्र वन्यजीव संधि (Convention on the Conservation of Migratory Species of Wild Animals-सीएमएस) की…

संताल आदिवासियों की माघ बोंगा का सामाजिक जीवन में क्या है महत्व, जानिए

दुमका के मसलिया गांव में संताल आदिवासियों का माघ बोंगा (माघ पूजा) संपन्न दुमका : झारखंड…

क्या है संताल आदिवासियों का सकरात पर्व, क्या है मान्यताएं व रस्म?

पूर्वजों व ईष्ट देवताओं को याद करने व गांव को चलाने वालों के प्रति सम्मान प्रकट…

आदिवासी अस्मिता व राष्ट्रीय गौरव बोध के लिए जरूरी है संताल परगना स्थापना दिवस को व्यापक मान्यता मिलना

संताल परगना की स्थापना देश के पहले संगठित विद्रोह 1855 के संताल हूल की परिणति है।…

पशुओं के सम्मान और जीवन में उनके महत्व को बताता है सोहराय पर्व : सोमाई किस्कू

पशुओं के ससोहराय पर्व में पशुओं की पूजा की जाती है, उन्हें आराम करने का मौका…

पश्चिमी भारत में आदिवासी आंदोलनों के अगुवा थे कालूराम काका

आदिवासी एकता परिषद के संस्थापक कालूराम धोडरे का जन्म महाराष्ट्र के पालघर में हुआ था और…