गुजरात के कच्छ में एक दशक बाद ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के चूजे का जन्म

अंतर राज्यीय संरक्षण प्रयासों से गुजरात में एक दशक बाद ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के चूजे को सफलता पूर्वक अंडे से निकाला गया। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इसे इस लुप्तप्राय पक्षी के संरक्षण प्रयास की दिशा में एक बड़ी सफलता बताते हुए आगे के कदमों का उल्लेख किया है।

नई दिल्ली: केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज (28 मार्च 2026) को एक ट्वीट कर जानकारी दी है कि गुजरात के कच्छ में एक दशक बाद लुप्तप्राय ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के एक चूजे का जन्म हुआ है। मंत्री ने बताया है कि यह उपलब्धि जंपस्टार्ट नामक एक नए संरक्षण उपाय के कारण संभव हो सका, जिसकी योजना एक साल पहले बनायी गयी थी और इसका समन्यव पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालयन ने राजस्थान और गुजरात के राज्य वन विभागों व भारतीय वन्यजीव संस्थान के सहयोग से किया। ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को स्थानीय बोलचाल में गोडावण के नाम से जाना जाता है।

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री ने अपने पोस्ट में लिखा है, देश में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) को लेकर यह पहली अंतरराज्यीय पहल है। गुजरात के कच्छ में घास के मैदानों में केवर तीन मादा ग्रेट इंडियन बस्टर्ड ही बची हैं, जिससे जंगल में उपजाऊ अंडे मिलने की कोई संभावना नहीं है। ऐसे में एक सेए हुए अंडे को कच्छ में वांछित घोंसले के स्थान तक पहुंचाने के लिए 770 किलोमीटर की कठिन सड़क यात्रा करनी पड़ी, जिसे राजस्थान के सम से गुजरात के नालिया तक बिना रुके एक मार्ग बना कर पूरा किया गया।

गुजरात में कच्छ के मैदान में मादा ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (पालक मां) अपने नवजात बच्चे के साथ। फोटो स्रोत: केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव का ट्विटर एकाउंट।

मंत्री ने अपने पोस्ट में लिखा है, अगस्त 2025 में टैग की गई मादा ग्रेट इंडियन बस्टर्ड ने कच्छ में एक बांझ अंडा दिया, जहां स्थानीय आबादी के सभी नर पहले ही मर चुके थे। एक बड़े अंतरराज्यीय संरक्षण प्रयास के तहत, राजस्थान के संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम से एक बंदी प्रजनित जीआईबी अंडे को एक पोर्टेबल इनक्यूबेटर में 19 घंटे से अधिक की सड़क यात्रा करके सफलतापूर्वक 22 मार्च को घोंसले में वापस रख दिया गया।

मादा ने उपजाऊ अंडे को सेने की प्रक्रिया पूरी कर ली और 26 मार्च को चूजे को सफलतापूर्वक जन्म दिया। क्षेत्रीय निगरानी दल ने चूजे को उसके प्राकृतिक आवास में उसकी पालक माँ द्वारा पाला-पोसा जाते हुए देखा। उन्होंने इसे गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजाति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

गुजरात सहित इसके प्राकृतिक आवासों में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण की औपचारिक शुरुआत 2016 में की गई थी। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा है कि यह प्रयास ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की आबादी को पुनर्जीवित करने के लिए उठाए जा रहे कई कदमों में से एक है और वन्यजीव संरक्षण के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने जानकारी दी कि राजस्थान के सैम और रामदेवरा स्थित संरक्षण प्रजनन केंद्रों में पक्षियों की संख्या 73 हो गई है, जिसमें वर्तमान प्रजनन मौसम के दौरान पांच नए चूजे शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक संरक्षण योजना के तहत भारत निकट भविष्य में पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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