रखाल पहाड़ी में संतालों ने शुरू की साप्ताहिक पूजा, सांस्कृतिक चेतना जागृत करने की कवायद

दुमका: झारखंड के दुमका जिले के रानीश्वर प्रखंड के रखाल पहाड़ी गांव में चार जनवरी 2025 को संताल समुदाय के लोगों ने मांझी थान में साप्ताहिक पूजा शुरू की। इस पूजा की शुरुआत समाजसेवी सच्चिदानंद सोरेन और गांव के मंझी बाबा, नायकी, गुडित, जोग मांझी, प्राणिक, कुडम नायकी और ग्रामीणों की साझा पहल पर हुई है।

इस तरह की पूजा के आयोजन का उद्देश्य संताल समाज के लोगों, खासकर युवाओं में सांस्कृतिक-धार्मिक चेतना भरना है।

रविवार को इस साप्ताहिक मांझी थान पूजा के पूर्व मांझी थान का सफाई की गई। इसके बाद सभी महिला, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे सामूहिक रूप से पूज्य स्थल मांझी थान में पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार धूप, अगरबत्ती, जल, लड्डू, चूड़ा आदि के साथ पूजा की गयी।

संताल अपने ईष्ट देव मरांग बुरु की पूजा करते हैं।

इस दौरान ग्रामीणों ने कहा कि हर रविवार को सामूहिक रूप से मांझी थान में पूजा की जाएगी। वर्तमान समय में धार्मिक आस्था और संस्कृति को संरक्षित करने के लिए मांझी थान में साप्ताहिक सामूहिक पूजा बहुत जरूरी है। पूजा का आयोजन इष्ट देवता मरांग बुरु की श्रद्धा में किया जा रहा है, जिसे संताल आदिवासी के लोग अपने आराध्य देव के रूप में पूजते हैं। ग्रामीणों के अनुसार साप्ताहिक मांझी थान पूजा का मुख्य उद्देश्य सामुदायिक एकता, आध्यात्मिक शांति और सांस्कृतिक विरासत को संजोना है और नई पीढी को इसे हस्तांतरित करना है।

मांझी थान में पूजा के लिए जाती संताल महिलाएं एवं बच्चे।

यह पहल खासकर युवा पीढ़ी और बच्चों को अपनी परंपरा से जोड़ने के लिए की गयी है, ताकि वे अपने रीति-रिवाजों को समझें, उसका सम्मान करें और गर्व अनुभव करें। इसके साथ-साथ बच्चों को सकारात्मक दिशा में चलने के लिए प्रोत्साहित करना भी इसका उद्देश्य है। साप्ताहिक मांझी थान पूजा सामाजिक समरसता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। साप्ताहिक मंझी थान पूजा से गांव व परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और भाईचारा बढ़ेगा, इसके साथ-साथ धर्म, संस्कृति और सभ्यता को बचाये रखने में मदद मिलेगी। इसके साथ-साथ साप्ताहिक मांझी थान पूजा में बच्चों का समग्र विकास के लिए विशेष विनती(प्रार्थना) भी की जा रही है। इसमें नशा नहीं करने, स्कूल जाने, माता-पिता और बुजुर्गाे का सेवा व सम्मान करना जैसा संकल्प शामिल है।

इस सप्ताहिक मांझी थान पूजा में अनिल हेम्ब्रम, मिसिल टुडू, अमीन मुर्मू, आनंद टुडू, मलुती हेम्ब्रम, ईश्वर हेम्ब्रम, मानेश्वर टुडू, सुजीत हेम्ब्रम, बोड़ो बेसरा, बिबिधन सोरेन, मोडल सोरेन, सोमाय टुडू, रामलाल सोरेन, प्रजा हेम्ब्रम के साथ काफी संख्या में महिला, पुरुष, बच्चे उपस्थित थे।

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