मुख्यमंत्री को मांग सौंप कर अमल करने की विभिन्न संगठनों ने किया है आग्रह
दुमका : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जब दो फरवरी को अपनी पार्टी झामुमो के सम्मेलन में शामिल होने पहुंचे थे तो उन्होंने मंच से हिंदी के साथ संताली में लोगों को संबोधित किया था। अब मुख्यमंत्री से संताल आदिवासी समाज के युवा संताली को राज्य में प्रथम राज भाषा का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। इतना ही नहीं वे संताली के लिए ओलचिकी लिपि के प्रयोग पर जोर दे रहे हैं और कह रहे हैं कि संताली भाषा और अन्य विषयों को ओलचिकि लिपि में पढाने की व्यवस्था की जाए। राज्य में मुख्य रूप से स्कूल व कॉलेजों में इस समय देवनागरी लिपि में पढाई होती है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से तीन फरवरी को दुमका स्थित राजभवन में विभिन्न आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुलाकात की और उन्हें एक मांग पत्र सौंपा। इस मांग पत्र में संताली भाषा को प्रथम राज भाषा का दर्जा देने व ओलचिकी में पढाई कराने का उल्लेख है।
आदिवासी सामाजिक संगठनो का कहना है कि झारखंड राज्य का गठन मुख्य रूप से आदिवासी समुदायों के सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास को ध्यान में रखते हुए किया गया था। झारखंड राज्य बनने के 25 वर्षों के बाद भी आदिवासी समुदायों का संपूर्ण सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास अपेक्षित स्तर तक नहीं हुआ है। संताल आदिवासी समुदाय झारखंड में सबसे अधिक संख्या वाला आदिवासी समुदाय है।
साथ ही संताल समुदाय का संपूर्ण सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास अपेक्षित स्तर तक नहीं हो पाया है। इसका मुख्य कारण आदिवासी समाज तक शिक्षा की रौशनी नहीं पहुंच पाना है। सुदूर इलाके में भाषाई दिक्कतें भी होती हैं। कई इलाके में लोग हिंदी से उतनी सहजता से नही जुड़ पाते, जिस तरह वे संताली से जुड़ते हैं। ऐसे में आदिवासियों को उनकी ही मातृभाषा में शिक्षा मिली होती तो उनकी सांस्कृतिक, धार्मिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास बेहतर होता।
संताल आदिवासियों की सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रखने और नई पीढ़ी को अपनी भाषा व लिपि से जोड़ कर रखने के लिए भी यह जरूरी है कि उन्हें संताली व ओलचिकि में शिक्षा दी जाए। संताली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में वर्ष 2003 में ही शामिल किया गया है, फिर भी इसे वास्तविक रूप से बढ़ावा देने के लिए और प्रयासों की जरूरत है।
संताल समाज और विभिन्य सामाजिक संगठनो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को दिये मांग पत्र में उल्लेख किया है कि संताली भाषा को प्रथम राज भाषा घोषित किया जाए, संताल बहुल क्षेत्र के सभी शिक्षण संस्थानों में संताली भाषा व ओलचिकि लिपि को पढाने की व्यवस्था हो। सरकारी स्कूलों, कॉलेजों व विश्वविद्यालय में ओलचिकि के शिक्षकों को नियुक्त किया जाए।
इन सभी मांगो को लेकर परसी अरिचली मरांग बुरु अखड़ा, संताल एसोसिएशन फॉर ऐवरनेस एंड रिफार्म, दिसोम मरांग बुरु युग जाहेर अखड़ा, दिसोम मरांग बुरु संताली अरिचली आर लेग्चार अखड़ा, मरांग बुरु अखड़ा, ऑल चिकी हुल बैसी, खेरवाड़ साँवता एभेन बा़ईशी ने संयुक्त रूप से मुख्यमंत्री को मांग पत्र सौंपा है। आदिवासी संगठनों ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर विचार व पहल नहीं किया गया तो आंदोलन किया जाएगा।