पीबीसीएमएस का वार्षिक सम्मेलन, सरकार की पूंजीपति समर्थक नीतियों के खिलाफ मजबूत लड़ाई लड़ेंगे चाय मजदूर

उत्तर बंगाल की तराई व डूवर्स में सक्रिय गैर राजनीतिक चाय श्रमिक संगठन पश्चिम बंग चाय मजदूर समिति का तीसरा वार्षिक सम्मेलन अलीपुरद्वार जिले के कालचीनी में आयोजित किया गया, जिसमें संगठन के पिछले कामकाज की समीक्षा करने के साथ आगामी रणनीति तय की गई।

बीरपाड़ा (अलीपुरद्वार) : पश्चिम बंगाल चाय मजदूर समिति ने अलीपुरद्वार जिले के कालचीनी के एक क्लब में 30 मार्च को अपने तीसरे वार्षिक सम्मेलन का आयोजन किया, जिसमें चाय मजदूरों की समस्याओं, पिछले कार्याें और आगामी रणनीति पर चर्चा की गई। इस सम्मेलन में तराई व डूवर्स क्षेत्र के लगभग 42 बागानों के 500 से अधिक चाय मजूदरों ने हिस्सा लिया।

सम्मेलन में चाय मजदूरों की समस्या जैसे वेतन भुगतान में अनियमितता, भविष्य निधि से जुड़ी गड़बड़ियां, ग्रेच्युटी जमीन का मालिकाना हक और राज्य सरकार द्वारा चाय बागानों की 30 प्रतिशत जमीन पूंजीपतियों को देने जैसे मुद्दे और इसके खिलाफ मजबूती से आंदोलन जारी रखने पर चर्चा हुई। इस दौरान यह नारा दिया गया कि सरकार हम से डरती है, इसलिए पुलिस को आगे करती है। चाय मजदूरों के विरोध प्रदर्शनों को अक्सर पुलिस की रोक व कार्रवाई का सामना करना होता है। यह नारा उसी संदर्भ में दिया गया।

सम्मेलन में शामिल तराई व डूवर्स के विभिन्न चाय बागानों से आए प्रतिनिधि।

सम्मेलन की शुरुआत कालचीनी थाना मैदान से एक विशाल रैली के साथ हुई। मजदूरों ने नारे लगाते हुए और मांदर व नगाड़ों की ताल पर चलते हुए सम्मेलन स्थल तक मार्च किया। रैली में मजदूरों ने अपनी एकजुटता और अधिकारों की मांग को जोरदार तरीके से प्रदर्शित किया। सम्मेलन स्थल पर पहुंचने के बाद संगठन के अध्यक्ष बाबुल लामा ने सभी साथियों का स्वागत किया। उन्होंने कार्यक्रम को संचालित करने का जिम्मा किरसेन खड़िया और विनय केरकेट्टा को सौंपा।

सम्मेलन में संगठन की सचिव बीरबल उरांव ने पूरे साल की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में पिछले वर्ष में संगठन के सदस्यों की संख्या में वृद्धि, विभिन्न आंदोलनों और पहलों का विवरण और मजदूरों के हित में उठाए गए कदमों की जानकारी शामिल थी। इसके साथ ही, आने वाले वर्ष में सदस्यता बढ़ाने और संगठन को और मजबूत करने की रणनीतियों पर भी प्रकाश डाला गया।

चाय मजदूरों के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करतीं पीबीसीएमस की केंद्रीय समिति सदस्य अनुराधा तलवार।

सम्मेलन में विभिन्न संगठनों से आए प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी और चाय बागान मजदूरों के सामने मौजूद चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया।
नेह अर्जुन इंदवार (ज्वाइंट एक्शन कमेटी के संयोजक): इंदवार ने चाय बागानों में जमीन के मालिकाना अधिकार, 30 प्रतिशत जमीन पूंजीपतियों को देने के प्रस्ताव, और प्रत्येक मजदूर परिवार को पांच डिसमिल जमीन का पट्टा देने जैसे मुद्दों पर जोर दिया। उन्होंने इन मुद्दों को मजदूरों के भविष्य के लिए निर्णायक बताया। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों एक स्वतंत्र ट्रेड यूनियन ही मजदूरों की अधिकार के लिए लड़ सकता।


हरिहर नागवंशी (एबीएएसए):
नागवंशी ने चाय बागानों की वर्तमान दयनीय स्थिति की चर्चा की और सरकार की उदासीनता को रेखांकित किया।
रतना उरांव (श्रमजीवी महिला समिति की अध्यक्ष): रतना ने महिलाओं के अधिकारों और उनकी सुरक्षा पर बात की। उन्होंने संगठन के माध्यम से महिला मजदूरों को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।


उत्तम गायेन: गायेन ने संगठन को मजबूत करने और सरकार की अनदेखी के खिलाफ एकजुटता की अपील की।


अनुराधा तलवार(पीबीसीएमएस): अनुराधा तलवार ने पुलिस प्रशासन द्वारा आंदोलनों को दबाने की कोशिशों, सरकार की उपेक्षा, जमीन के मुद्दे और उत्तर कन्या अभियान जैसे विषयों पर अपनी बात रखी। उन्होंने मजदूरों के संघर्ष को और तेज करने का आह्वान किया।

सम्मेलन को संबोधित करने के दौरान उत्तम गायेन, उन्होंने सरकार के द्वारा चाय मजदूरों की अनदेखी की चर्चा की।

सम्मेलन के दौरान विभिन्न बागानों से आए प्रतिनिधियों ने केंद्रीय समिति के लिए नए सदस्यों का चुनाव किया। इस प्रक्रिया में लोकतांत्रिक तरीके से सभी बागानों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया। इसके बाद, कई प्रतिनिधियों ने अपने-अपने बागानों की समस्याओं को उठाया। इनमें वेतन में देरी, पीएफ और ग्रेच्युटी का भुगतान न होना और जमीन पर अधिकार जैसे मुद्दे प्रमुख थे। मजदूरों ने इन समस्याओं के समाधान के लिए संगठन से ठोस कदम उठाने की मांग की।

सम्मेलन में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया, जिसमें मजदूरों ने अपनी कला और परंपराओं को प्रदर्शित किया। यह आयोजन न केवल मनोरंजन का साधन बना, बल्कि मजदूरों की एकता और सांस्कृतिक पहचान को भी उजागर किया। इसके बाद, सम्मेलन में एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें वेतन, पीएफ, ग्रेच्युटी, और जमीन के मालिकाना हक जैसे मुद्दों पर आंदोलन को जारी रखने का निर्णय लिया गया। साथ ही, 30 प्रतिशत जमीन पूंजीपतियों को देने के प्रस्ताव का विरोध करने की रणनीति भी बनाई गई।

चाय मजदूरों के सम्मेलन में श्रम अधिकारों के लिए संगठित लड़ाई का संकल्प और सांस्कृतिक विविधता एक साथ दिखी।

इस सम्मेलन में संगठन के केंद्रीय समिति के सभी सदस्य, अध्यक्ष बाबुल लामा, सचिव बीरबल उरांव, अनुराधा तलवार, किरसेन खड़िया, विनय केरकेट्टा, बीरेंद्र सिंह, श्रमजीवी महिला समिति की अध्यक्ष रतना उरांव, ज्वाइंट एक्शन कमेटी के संयोजक नेह अर्जुन इंदवार, एबीएएसए से हरिहर नागवंशी, और सभी यूनिट कमेटी के प्रतिनिधि शामिल थे।

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