पुनर्वास के अपने हक की लड़ाई में कोयला खनन से प्रभावित वृद्धा को जेल की सजा

राहुल सिंह

बोकारो जिले के कारो गांव की कामिनी देवी अपने परिवार व कुछ रिश्तेदारों के साथ अपने खेत के अधिग्रहण से पहले उचित पुनर्वास और अन्य मांगों को लेकर कंपनी के काम का विरोध करने पहुंची थी, जिस पर उन पर सरकारी काम में बाधा डालने का मुकदमा दर्ज करा दिया गया।


बोकारो:
बोकारो जिले के बेरमो प्रखंड के कारो बस्ती की 81 वर्षीय वृद्धा कामिनी देवी अब भी उन दिनों को याद करती हैं, जब उन्हें कुछ महीने तेनुघाट तेल में बिताना पड़ा था। कामिनी देवी जेल के उन दिनों को याद कर कहती हैं कि वहां एक सिपाही की ड्यूटी थी जो नेक दिल इंसान था और मेरी उम्र को देख कर मेरा ख्याल रखता था। वह कहता – माता चाय ले लो, कुछ नहीं होगा आपको, आप कोई अपराध कर यहां नहीं आयी हैं।

कामिनी देवी का घर, जो कारो गांव में स्थित है और सीसीएल के कारो ओसीपी से सटा हुआ है।

कामिनी देवी ठीक से जेल के साज का साल नहीं बता पाती हैं, लेकिन कहती हैं – “यही पास साल पहले हमलोगों को हमारी मांग उठाने पर जेल भेज दिया था”। वे दिमाग पर थोड़ा जोर देकर कहती हैं कि वह 2018 या 2019 का साल था और चैत मास में जेल में डाला और सावन महीने के पहले छोड़ा, हम ने मारपीट कुछ नहीं किया था। कामिनी देवी का गांव कारो कोयला खनन परियोजना से प्रभावित है। यह खदान कारो गाव के सीमाने में ही है, इसलिए इसका नाम भी कारो प्रोजेक्ट है।

81 वर्षीया कामिनी देवी, जिन्हें अपने जमीन के अधिग्रहण से पहले उचित पुनर्वास की मांग को लेकर जेल की सजा भुगतनी पड़ी। Photo _ Rahul Singh.

कामिनी देवी कहती हैं, “जब खदान के विस्तार के लिए मशीनों से जमीन को काटा जा रहा था, तो हमलोग उसका विरोध करने यह कह कर गए थे कि पहले कंपनी हमारा पुनर्वास करे फिर खदान को आगे बढाए, इसी में हमको जेल भेज दिया”। कामिनी देवी बताती हैं कि सरकारी काम में बाधा डालने के ऐवज में उन्हें जेल की सजा हुई, जबकि हमलोग अपनी जमीन खदान में जाने को लेकर अपने हक और पुनर्वास की जायज मांग कर रहे थे।

अपने बेटे सेवा गंझू के साथ अलाव सेकती कामिनी देवी।

वे कहती हैं कि सीसीएल कंपनी का एक आदमी था, उसने ही हमाने खिलाफ काम रोकने का मामला दर्ज कराया था, हम नौ लोगों पर केस हुआ था और हम अकेली औरत थे। वे कहती हैं कि मेरे गोतिया के दो भैंसुर व दो चचेरा पोता भी उस विरोध में शामिल थे। वे कहती हैं, जब हम विरोध करने गए थे तब हमारे ही खेत में काम चल रहा था। खेती से ही हमारा गुजारा होता था, लेकिन अब दिक्कत है।

कामिनी देवी कहती हैं कि कान-कान (रो-रो) कर हमारा गला सूख गया था, मेरा पोता जेल में हमसे मिलने आता था। उनके पति मुनीलाल गंझू का 2017 में निधन हो गया और उनके परिवार में उनके बेटे सेवा गंझू व दो पोते सहित अन्य लोग हैं।

कामिनी देव के 55 वर्षीय पुत्र सेवा गंझू कोयला ट्रक चलाते हैं। वे कहते हैं, “हम विस्थापन प्रभावित हैं, लेकिन हमें कंपनी से कोई सुविधा नहीं मिली है। काम पर बाहर के लोगों को रखने को प्राथमिकता दी जाती है और स्थानीय लोगों द्वारा विरोध करने पर कार्रवाई हो जाती है”।

अपने घर की देहरी पर बैठीं कामिनी देवी, उन्हें इस बात का अफसोस है कि अपनी जमीन की लड़ाई के लिए उन्हें जेल जाना पड़ा।

बोकारो जिले के बोकारो एंड करगली कोल माइनिंग एरिया में पड़ने वाला कारो कोल माइनिंग प्रोजेक्ट एक बड़ी खदान है। सीसीएल के नियंत्रण वाली इस कोयला खदान का विस्तार भी किया जा रहा है। इस साल इस कोयला खदान से उत्पादन कुछ महीना हुआ लेकिन ग्रामीणों के विरोध की वजह से उत्पादन फिर से रुका हुआ है

सीसीएल की कारो ओपन कास्ट कोयला खदान।

स्थानीय ग्रामीण बबन रजक कहते हैं, ह”मारी जानकारी के अनुसार, 125 लोगों का विस्थापन होना है, लेकिन जिनकी दो एकड़ या उससे अधिक जमीन जा रही है, वे नौकरी की मांग कर रहे हैं और दूसरे लोग अपने उचित पुनर्वास की मांग कर रहे हैं”। बबन रजक कहते हैं, “मेरा दस डिसमिल जमीन मकान के साथ है, वह अधिग्रहण में जाएगा तो हम लोग उचित पुनर्वास चाहते हैं, जहां हम सहज ढंग से रह सकें”।

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