मधु चाय बागान के श्रमिकों का वेतन अब भी कई पखवाड़ों का बकाया है। साथ ही उनके पीएफ व ग्रेच्युटी में गड़बड़िया की जाती हैं और सत्ताधारी दल के समर्थकों द्वारा दबाव बनाया जाता है।
अलीपुरद्वार (पश्चिम बंगाल) : पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले के मधु चाय बागान के मजदूर पिछले कुछ सप्ताह से अपने वाजिब हक के लिए आंदोलन कर रहे हैं। उनके इस प्रयासों में अपने वेतन व अन्य मांगों को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मिलने की कोशिश भी शामिल है। पश्चिम बंग चा मजूर समिति पीबीसीएमएस के नेतृत्व में चाय मजदूरों ने वेतन में देरी और अपनी मांगों के लिए अपनी दृढता का प्रदर्शन किया है और वे अपने हक की आवाज लगातार उठा रहे हैं।
मधु चाय बागान के मजदूरों ने 28 दिसंबर 2024 को वेतन में देरी और असुरक्षित कामकाजी परिस्थितियों के विरोध में सड़क की नाकेबंदी की थी, जिससे अधिकारियों को हस्तक्षेप करने के लिए मजबूर होना पड़ा। इसके बाद अलीपुरद्वार के अतिरिक्त श्रम आयुक्त, उप श्रम आयुक्त और अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट(भूमि सुधार) के साथ हुई बैठक में आश्वासन मिला कि लंबित वेतन का भुगतान एक महीने के अंदर कर दिया जाएगा। इस वादे के लगभग एक महीने पूरे होने को हैं, लेकिन 23 जनवरी 2025 तक की अद्यतन जानकारी के अनुसार, चाय मजदूरों का प्रबंधन का बकाया अब भी है।
वाउचर पर भुगतान वाले श्रमिक जिन्हें वाउचर श्रमिक कहा जाता है, उनका 10 पखवाड़े से मजदूरी भुगतान नहीं किया गया है। स्थायी कर्मचारियों का पांच पखवाड़े का वेतन बकाया है। जनवरी 2025 में केवल एक पखवाड़े के वेतन का भुगतान किया गया।
23 जनवरी, 2025 की श्रमिकों की गतिविधियां
प्रबधन के अधूरे वादों से निराश होकर, लगभग 70-80 श्रमिकों ने सुभासिनी चाय बागान की यात्रा के दौरान सीधे मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी शिकायतें रखने का फैसला किया। श्रमिकों ने सत्तारूढ़ पार्टी से कारों की रिश्वत और एक दिन की मुफ्त मज़दूरी को अस्वीकार करते हुए बैनर और तख्तियों के साथ सुभासिनी चाय बागान तक पैदल मार्च किया, जिसे उन्होंने एक खोखला इशारा माना और इसमें भाग लेने से इनकार कर दिया।
अपनी मांग उठाने के दौरान श्रमिकों की आवाज को दबाने का प्रयास किया गया। श्रमिकों को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। पुलिस ने शुरू में उनके प्लेकार्ड, पर्चे और बैनर जब्त कर लिए।
पीबीसीएमएस केंद्रीय समिति की सदस्य अनुराधा तलवार ने इस मामले में हस्तक्षेप.किया, जिसके बाद राज्य के श्रम मंत्री मोलॉय घटक को पुलिस को इन सामग्रियों को वापस करने का निर्देश देने के लिए मजबूर होना पड़ा।
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अधिकारियों से मुलाकात
श्रमिकों ने अपनी शिकायतें जयगांव पुलिस स्टेशन के प्रभारी निरीक्षक को सौंपी, उन्होंने श्रमिकों कों आश्वासन दिया कि वह उनकी चिंताओं को मुख्यमंत्री तक पहुंचाएंगे।
निरीक्षक के हस्तक्षेप के बाद, बगान प्रबंधक और नियोक्ता ने 24 जनवरी 2025 तक पिछले एक पखवाड़े का भुगतान और 30 जनवरी 2025 तक पूरे लंबित वेतन का आधा भुगतान करने के लिए प्रतिबद्धता जताई।
जिल के अतिरिक्त एसपी ने सभी बकाया राशि का भुगतान करने के लिए उद्यान प्रबंधन पर दबाव डालने का वादा किया।
इसके साथ ही राज्य के श्रम मंत्री मोलॉय घटक ने आने वाले हफ्तों में श्रमिकों से मिलने का वादा किया है।
श्रमिकों के मुद्दे कया हैं?
तीन वर्षों से, वाउचर श्रमिकों के रूप में नामित 140 श्रमिकों के लिए कोई पीएफ नंबर जारी नहीं किया गया है। कंपनी द्वारा फॉर्म 5ए जमा नहीं कर पाने के कारण मार्च 2022 से स्थायी कर्मचारियों की पीएफ कटौती जमा नहीं की गई है।
ग्रेच्युटी विवादः लगभग 200 सेवानिवृत्त कर्मचारियों की ग्रेच्युटी निपटाने का समझौता अधूरा रह गया है। पिछले तीन वर्षों में, 25 सेवानिवृत्त कर्मचारियों की भूख और इलाज के अभाव में, उनका वाजिब पीएफ और ग्रेच्युटी न मिलने के कारण दुःखद मौत हो गई है।
गार्डन स्तर के टीएमसी नेताओं द्वारा धमकीः सत्ताधारी दल यानी गैर-टीएमसी यूनियन सदस्यों को अपनी मांगें उठाने के दौरान उत्पीड़न, धमकियों और रुकावट का सामना करना पड़ता है।
मजदूरों का संकल्पः मजदूरों ने घोषणा की है कि यदि निर्धारित तिथि तक उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे अपना विरोध प्रदर्शन तेज कर देंगे। उन्होंने निरंतर प्रतिरोध और धमकियों के बावजूद भी न्याय हासिल करने की अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दिया।
पीबीसीएमएस की चाय बागान प्रबंधन, राज्य सरकार व संबंधित प्राधिकारियों से मांगें इस प्रकार हैं –
- वाउचर और स्थायी श्रमिकों दोनों के सभी बकाया वेतन का भुगतान करें।
- पीएफ और ग्रेच्युटी से जुड़े विवाद सुलझाएं।
- धमकी और उत्पीड़न के खिलाफ श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।