झरिया की एक बस्ती की महिलाओं ने पानी की दिक्कतों और दूसरे मुहल्ले से लाने के दौरान अपमान झेलने के बाद अपने मुहल्ले के एक पुराने कुआं को पुनर्जीवित कर जल आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया। बाद में उनकी कोशिशों को सरकार व सिविल सोसाइटी का भी सहयोग मिला।
राहुल सिंह की रिपोर्ट
धनबाद: धनबाद-झरिया कोयलांचल के कई हिस्सों में पानी की दिक्कतें हैं। कोयला खदानों के आसपास बसी बसावट को पानी के लिए परंपरागत रूप से अधिक मुश्किलों का सामना करना होता है। परिवार के लिए पानी को संग्रह करने का भार वयस्क पुरुष सदस्यों की बजाय महिलाओं व बच्चों पर ही प्रमुख रूप से होता है। ऐसे में एक छोटी पहल ने झरिया के वार्ड नंबर 35 के नीचे मुहल्ला की महिलाओं की जिंदगी बदल दी।
दरअसल, इनके मुहल्ले का नाम नीचे मुहल्ला उसकी भौगोलिक आकृति की वजह से पड़ा है, जो अपेक्षाकृत नीचली भूमि या ढाल नुमा आकृति पर बसा है। इस मुहल्ले में बाउरी परिवार को लोग हैं जो झारखंड व पश्चिम बंगाल में अनुसूचित जाति वर्ग में आते हैं।
वह इस साल गुनगुने फरवरी की एक दोपहर थी, जब आइआइटी आइएसएम, धनबाद में शहरी क्षेत्रों के पानी प्रबंधन व उससे जुड़ी समस्याओं के मुद्दे पर आयोजित एक कार्यशाला में शामिल होने जुटे देश के अलग-अलग राज्यों के प्रतिनिधि इस मुहल्ले की महिलाओं द्वारा संकल्प शक्ति से हासिल जल आत्मनिर्भर महिलाओं से रू-ब-रू होने उनकी बस्ती में जुटे थे।

अपनी बस्ती में आए मेहमानों जिसमें जल विशेषज्ञ, सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि व पत्रकार शामिल हैं, को कुआं को पुनर्जीवित करने की कहानी बतातीं गांव की महिलाएं। Photo – Urban Waters Forum.
नीचे मुहल्ला की पूर्णिमा बाउरी ने बताया, “पहले हमारे यहां पानी की बहुत दिक्कत थी, हमलोग 300-400 मीटर दूर डोमपाड़ा पानी लाने जाते थे, लेकिन वहां हमारे साथ कुछ स्थानीय लोग अच्छा व्यवहार नहीं करते थे। कभी उनकी टिप्पणियां सहनी होती तो कभी कुछ और आरोप वे लगा देते, सड़क पर का मरा हुआ पशु भी हमारी बस्ती के लोगों को हटाने बोल देते तो फिर हमने कुआं को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया”।
वे बस्ती के पीछे के हिस्से में स्थित कुएं को दिखाते हुए कहती हैं कि हम कुदाल, फावड़ा, गैंता लेकर कुएं को खुद साफ करने और फिर से काम लायक बनाने के लिए आगे आए। कठोर चट्टान व पत्थरों के निकलने से जहां पुरुष सदस्य निराश हुए, वहीं महिलाएं इस जिद पर डंटी रहीं कि हम इस कुएं को पुनर्जीवित करेंगे।
गायत्री बाउरी ने कहा, “2017 में लड़कियों ने हमारी बस्ती में पहले से मौजूद कुएं की खुदाई शुरू की। हमारी बस्ती की 30 महिलाएं व लड़कियों ने इस काम को किया, शुरू में पत्थर निकलने से दिक्कतें भी आईं, लेकिन हमने खुदाई को नहीं रोका और आखिर कार हम इस कुआं से पानी हासिल करने में कामयाब हो गए। वे कहती हैं कि अब यह कुआं कभी नहीं सूखता है”।

अपने संकल्प से पानी की आत्मनिर्भरता हासिल करने वाली नीचे मुहल्ला की महिलाएं, उत्साह में मुस्कुराती गायत्री बाउरी (बाएं से पहले) व अन्य। Photo – Urban Waters Forum.
बुजुर्ग कारी देवी इस उपलब्धि का श्रेय बस्ती की महिलाओें के संकल्प को देती हैं और कहती हैं कि इससे हमलोगों को बहुत आाराम हो गया और घर के काम के लिए पानी लाने के लिए अब दूर नहीं जाना होता है। कारी देवी गर्व के भाव के साथ कहती हैं कि मेरी बेटी और गांव की दूसरी महिलाओं व लड़कियों ने इस कुएं के लिए काम किया।

खुद के भुगते हुए अपमान और संकट ने नीचे टोला की महिलाओं को उदार भी बनाया है और वे अब अपने कुएं से आसपास के दूसरे मुहल्ले के जरूरतमंदों को पानी लेेने से नहीं रोकतीं।
अमृत 2.0 के तहत किया गया कवर
केंद्र सरकार ने घरों के लिए पानी व सीवरेज जैसी बुनियादी सुविधाओं को मुहैया कराने के उद्देश्य से देश के 500 शहरों में वर्ष 2015 में अमृत योजना शुरू की थी। इसके अगले चरण की शुरुआत अमृत 2.0 मिशन नाम से एक अक्टूबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया। इस चरण में जल निकायों का नवीनीकरण भी एक घटक है और महिलाओं के प्रयासों के बाद इस कुएं को अमृत 2.0 से भी कवर किया गया।

मेघ पईन अभियान के मैनेजिंग ट्रस्टी एकलव्य प्रसाद कहते हैं, “हमलोगों ने वर्ष 2022 में इसके तहत काम शुरू किया था। नीचे मुहल्ला की दीदी लोगों ने पहले कुआं खोदा था, फिर उसका पक्कीकरण किया गया और इस तरह से अन्य विरासत कुओं की मरम्मत की गई, इस कार्य में धनबाद नगर निगम का सहयोग मिला”। वे कहते हैं कि धनबाद नगर निगम की पहल पर 108 लोकेशन को चिह्नित किया गया था, जहां हमलोगों ने सेलो एक्वफर – छिछला जलीय चट्टानी परत या छिछला जलभृत (Shallow Aquifer Management -SAM)) को रिचार्ज कर पानी के स्तर को ऊपर लाया। इसमें एक्वाडेम, बायोम और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अरबन अफेयर (NIUA) की भूमिका रही है।
ऐना कोलियरी का है यह इलाका
किसी भी क्षेत्र में कोयला खनन की वजह से उसके आसपास का भूजल स्तर नीचे चला जाता है। कोयला खनन के लिए बड़े भूभाग में काफी अधिक गहराई होने से बनी रिक्तता की वजह से पानी का स्तर नीचे भागता है और उससे समस्याएं उत्पन्न होती हैं। ऐसी ही स्थिति ऐना कोलियरी के बगल में बसे नीचे मुहल्ला व अन्य बस्तियों में है।
अर्बन वॉटर फोरम क्या है़?
अर्बन वॉटर फोरम कुछ संस्थानों और पानी के क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं की एक साझा पहल है जिसके द्वारा धनबाद में पांच से सात फरवरी 2025 के दौरान आइआइटी आइएसएम, धनबाद के परिसर में कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह फोरम आइआइटी आएसएम, धनबाद; मेघ पईन अभियान, दिल्ली; एक्वाडेम, पुणे; बायोम इनवायरमेंटल ट्रस्ट, बेंगलुरु और विप्रो फाउंडेशन, बेंगलुरु की साझा पहला है।

आइआइटी आइएसएम में छोटे शहरों के जल प्रबंधन पर आयोजित कार्यशाला का एक दृश्य। Photo – UWF.
इस कार्यशाला में सिविल सोसाइटी संगठनों के प्रतिनिधि व पानी प्रबंधन के क्षेत्र में काम करने वाले प्रतिनिधि व विशेषज्ञ, शहरी जल प्रबंधन से जुड़े सरकारी अधिकारी, पर्यावरण पर काम करने वाले पत्रकार आदि शामिल हुए। प्रतिभागियों ने छोटे शहरों में जल प्रबंधन के विभिन्न पक्षों पर चर्चा की और धनबाद-झरिया के कुछ वैसे क्षेत्रों का भ्रमण किया, जहां जल प्रबंधन किया गया है।