भारत के नौ प्रमुख शहरों में गर्मी से बचाव की तैयारी सिर्फ तात्कालिक उपायों तक सीमित है, जबकि दीर्घकालिक समाधान नदारद हैं। सस्टेनेबल फ्यूचर्स कोलैबोरेटिव (एसएफसी) की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, देश में बढ़ती भीषण गर्मी को देखते हुए लंबे समय तक असरदार रहने वाले उपायों की जरूरत है, लेकिन नीति निर्माताओं का ध्यान फिलहाल सिर्फ तत्काल राहत देने पर केंद्रित है।
एसएफसी ने बेंगलुरु, दिल्ली, फरीदाबाद, ग्वालियर, कोटा, लुधियाना, मेरठ, मुंबई और सूरत में गर्मी से बचाव के इंतजामों की पड़ताल की। रिपोर्ट बताती है कि इन शहरों में पीने के पानी की उपलब्धता, कार्यस्थलों पर समय में बदलाव, और अस्पतालों की तैयारियों जैसे अल्पकालिक कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन हीट एक्शन प्लान (HAP) को लेकर कोई ठोस दीर्घकालिक रणनीति नहीं बनाई गई है।
इस अध्ययन के लिए नौ राज्यों के नौ शहरों को चुना गया जो देश की शहरी आबादी का 11 प्रतिशत से कुछ ज्यादा हिस्सा कवर करते हैं। इन शहरों को इस आधार पर चुना गया कि जैसे-जैसे पृथ्वी गर्म होता जा रहा है, तो ये गर्मी की घटनाओं में वृद्धि के प्रति कितने संवेदनशील हैं। सीएमआइपी6 क्लाइमेट मॉडल आउटपुट का उपयोग करते हुए यह स्थापित करने का प्रयास किया गया कि 2011 की जनगणना के अनुसार, 10 लाख से अधिक आबादी वाले भारतीय शहर ऐतिहासिक औसत की तुलना में खतरनाक ताप सूचकांक वैल्यू (तापमान और आर्द्रता के संयुक्त प्रभाव) वाले दिनों में सबसे ज्यादा वृद्धि का अनुभव करेंगे। जलवायु परिवर्तन से प्रेरित अत्यधिक ताप सूचकांक वितरण में तेज बदलाव लोगों की अनुकूलन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं और गर्मी से होने वाली मृत्यु दर और रुग्णता में पर्याप्त वृद्धि कर सकते हैं।
दीर्घकालिक समाधान क्यों जरूरी?
विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले वर्षों में हीटवेव की तीव्रता और अवधि बढ़ेगी। अगर इस पर काबू पाने के लिए शहरी नियोजन में बदलाव, ग्रीन कवर बढ़ाने, ऊर्जा व्यवस्था मजबूत करने और कमजोर आबादी की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया, तो गर्मी के कारण होने वाली मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ सकता है।
संस्थान और नीति निर्माताओं की बड़ी चूक
रिपोर्ट में पाया गया कि नगर निकाय और सरकारी एजेंसियां आपस में समन्वय नहीं कर पा रही हैं। हीट एक्शन प्लान का संस्थागत ढांचा कमजोर है, और गर्मी के प्रभावों से निपटने के लिए ठोस नीति लागू करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी दिखती है।
क्या करने की जरूरत?
रिपोर्ट में कुछ अहम सुझाव दिए गए हैं:
9 शहरों का अध्ययन, नतीजे चिंताजनक
स्थानीय प्रशासन को दीर्घकालिक रणनीति अपनानी होगी, जिसमें ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर, गर्मी सहन करने योग्य इमारतों और सार्वजनिक स्थानों को अधिक आरामदायक बनाने पर ध्यान देना होगा।
आपदा प्रबंधन निधि से हीटवेव से निपटने के लिए धन जुटाना होगा।
हीट ऑफिसर्स की नियुक्ति और उनके अधिकार बढ़ाने होंगे ताकि वे गर्मी से जुड़ी योजनाओं को सही तरीके से लागू कर सकें।
शहरी नियोजन में बदलाव लाकर गर्मी के सबसे ज्यादा शिकार होने वाले इलाकों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
एसएफसी के विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारत को बढ़ती गर्मी से बचना है, तो फौरी कदमों से आगे बढ़कर दीर्घकालिक समाधान अपनाने होंगे। अन्यथा, भीषण गर्मी का खतरा भविष्य में और गंभीर होता जाएगा।
रिपोर्ट के सार को अंग्रेजी में नीचे के लिंक पर जाकर पढें –