झारखंड : मानव-हाथी टकराव से मौत के आंकड़े नई ऊंचाई पर, हरकत में आयी राज्य सरकार

साल 2025-2026 के ठंड के महीनों में झारखंड में मानव-हाथी ठकराव चरम पर पहुंच गया। इस दौरान राज्य के कई क्षेत्रों से हाथियों के हमले में लोगों के सामूहिक तौर पर मौत होने की खबरें आती रही हैं, ताजा मामला हजारीबाग जिले का है; वहीं हाथियों की मौत हुई है। ग्रामीण हाथियों के व्यवहार में बदलाव की बात कह रहे हैं। इस बीच राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण बैठक कर भावी कदम उठाने की संभावनाएं टटोली है।

रांची: झारखंड जैसे अत्यधिक खनन व सपंन्न जंगल वाले राज्य में हाथी व मानव के बीच टकराव साल भर चलने वाली घटना है। पर, ठंड के दिनों में जो धान की फसल की तैयार होने और उसकी कटाई का समय होता है, यह टकराव तेज हो जाता है। इसी कड़ी में एक हालिया घटना में हजारीबाग जिले के चुरचू प्रखंड में गोंडवार गांव में 12 व 13 फरवरी 2026 की दरमियानी रात हाथियों के झुंड ने छह लोगों ने हत्या कर दी। इनमें एक ही परिवार के चार लोग शामिल हैं।

इस हमले में दो बच्चों, दो महिलाओं व दो पुरुषों की मौत हो गई। इस दौरान हाथियों ने कई मकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया।

इससे पहले बोकारो जिले के गोमिया के छुटकी पुन्नू में हाथियों के हमले में तीन लोगों की मौत हुई थी। वहीं, कोल्हान-चाईबासा के सात वन क्षेत्र में 12 हमले में 17 लोगों की मौत हुई, जबकि 10 लोग घायल हुए। ऐसी खबरें और जगहों से आती रही हैं। वहीं, रामगढ, चांडिल आदि जैसे इलाके से हाथियों की मौत की भी खबरें आयीं।

हजारीबाग जिले की हालिया घटना के बाद स्थानीय लोगों ने वन विभाग, प्रशासन व सरकार के प्रति गुस्सा प्रकट किया और शव को उठाने से रोका दिया। ग्रामीणों का तर्क है कि हर बार मुआवजे की बात होती है, स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता है। मौके पर पहुंचे स्थानीय एसडीएम आदित्य पांडे ने कहा कि ग्रामीणों का गुस्सा जायज है, लेकिन हम यह कहना चाहते हैं कि प्रशासन उनके साथ है और वन विभाग के साथ जो भी आवश्यक कदम उठाने की जरूरत है, हम उठाएंगे।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के व्यवहार में बदलाव आया है और वे घरों में घुस कर लोगो को ढूंढ रहे थे। लोगों के अनुसार उस रात पांच-छह की संख्या में हाथी आए थे। घटना के बाद लोगों ने अपने स्तर पर जरूरी कदम उठाने को लेकर भी बैठक की।

इस घटना व लोगों के आक्रोश के बाद राज्य सरकार हरकत में आयी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 14 फरवरी को मुख्य सचिव व वन विभाग के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की।

हजारीबाग जिले के चुरचू ब्लॉक क्षेत्र में हाथियों के हमले के बाद 14 फरवरी 2026 को इस मुद्दे पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक करते मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन। फोटो स्रोत: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का ट्विटर एकाउंट।

मुख्यमंत्री सोरेन ने इस बैठक के बाद अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर लिखा – आज वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक में शामिल हुआ और हाथियों के हमलों से जान-माल की सुरक्षा के लिए जल्द प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया। साथ ही 12 दिनों के अंदर सभी प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की व्यवस्था सुनिश्चित करने एवं पिछले पांच साल की घटनाओं व मुआवजे की संख्या से संबंधित डेटा सरकार को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

प्रभात खबर की एक रिपोर्ट बताती है कि 2002 से 2025 तक हाथियों के हमले में राज्य में 1400 से अधिक लोग मारे गए। 2020 से 2025 के दौरान हाथियों के हमले में 525 लोगों की मौत हो गई। पिछले 23 सालों में 150 से अधिक हाथियों की भी राज्य में मौत हुई है।

झारखंड में हाथियों के संरक्षण व मानव-हाथी टकराव को कम करने की एडवोकेसी करने वाली संस्था वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन सोसाइटी ऑफ झारखंड ने एक समाचार स्रोत के हवाले से दिसंबर 2025 में अपने एक ट्वीट में कहा था कि पिछले 18 सालों में हाथियों के हमले में राज्य में 1270 लोगों की जान गई है। इस अवधि में 150 से 200 के बीच हाथी भी मारे गए हैं। हालिया आंकड़ों के हिसाब से प्रत्येक वर्ष औसतन 80 लोगो की मौत हो जाती है और 150 लोग घायल होते हैं।

खनन गतिविधियों की तेजी से साथ तेज हो रहे हैं हाथियों के हमले

आंकड़े व तथ्य खनन गतिविधियों के तेज होने के साथ हाथियों के हमले तेज होने का भी संकेत देते हैं। हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि अवैध खनन और खदानों में ब्लास्टिंग की वजह से हाथी गांव की ओर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि खनन, उससे जुड़ी ब्लास्टिंग व इसके साथ ही रात भर ट्रक, ट्रैक्टर चलने से हाथियों के व्यवहार में बदलाव आ रहा है। पहले भी घटना होती थी, लेकिन कम मामले सुनने को मिलते थे। उन्होंने राज्य सरकार से खनन गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा कि ऐसा नहीं होने पर हाथी और नुकसान पहुंचाएंगे।

इंडियास्पेंड की एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में इन तीन प्रमुख खनिजों के खनन के लिए अबतक कम से कम 87,706.759 हेक्टेयर (216727.929 एकड़) भूमि अधिग्रहित की गई है। जबकि कई खनन परियोजनाएं शुरू हो रही हैं और कई दूसरे खनिजों का भी राज्य में खनन होता है। इसके लिए खनन भूमि का भी बड़ी मात्रा में विचलन किया गया है और इससे न सिर्फ स्थानीय निवासी विस्थापित हुए हैं, बल्कि वन्य जीवों का भी आवास छीन गया है।

मोंगाबे हिंदी की एक खबर में झारखंड में बढते खनन से हाथी-मानव टकराव के बढते खतरे को रेखांकित किया गया है और एक डाक्यूमेंट्री फिल्म में भी मानव-हाथी टकराव की वजहों को रेखांकित किया गया है।

कुछ सकारात्मक कदम उम्मीद भी हैं, पर उनकी रफ्तार व प्रभाव अभी धीमा है

झारखंड में हाथियों से बचाव के लिए एक बहुत ही मजबूत मैकेनिज्म अबतक विकसित नहीं हुआ है, इसके उलट पड़ोस के छत्तीसगढ में हाथियों को लेकर पूर्व सूचना देने, ग्रामीणों को सतर्क करने और वन विभाग व आम लोगों के बीच समन्वय के लिए एक मजबूत मैकेनिज्म विकसित किया गया है। छत्तीसगढ़ में हाथियों को लेकर सूचना प्रसारित करने वाले लोग वन विभाग व स्थानीय वन अधिकारियों व हाथी विशेषज्ञों के मातहत काम करते हैं और उन्हें हाथी मित्र नाम दिया गया है। हालांकि झारखंड में लोगों के लिए हाथी के आसपास होने की सूचना फोन व एसएमएस के माध्यम से प्राप्त करने के लिए हमर हाथी नाम से झारखंड वन विभाग ने एक ऐप लांच किया गया है।

छत्तीसगढ़ में हाथी मित्र हाथियों को लेकर रात्रि गश्ती करने व लोगों को सतर्क करने के दौरान।

मानव-हाथी टकराव कम करने व दोनों ओर नुकसान को न्यूनतम करने के लिए एक आशाजनक खबर चक्रधरपुर रेल मंडल की ओर से पिछले साल के आखिरी दिनों में आयी थी। चक्रधरपुर रेल मंडल ने हाथियों की आवाजाही के लिए कुछ ट्रेनों को रद्द कर दिया था। इसी तरह इस साल जनवरी के आखिरी दिनों में गुमला जिले के भरनो थाना क्षेत्र में हाथियों के सुरक्षित आवागमन के लिए कर्फ्यू/निषेधाज्ञा लागू की गई थी।

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