भरूच जिले के मच्छीमार समाज ने गुजरात सरकार के विभिन्न विभागों व अधिकारियों को पत्र लिखने के बाद अब भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) को पत्र लिख कर अवैध रेत खनन का मुद्दा उठाया है। यह क्षेत्र जलमार्ग – 73 है और यह प्राधिकरण के नियंत्रण में आता है।
भरूच (गुजरात) : गुजरात के भरूच जिले के समस्त भरूच जिला मछीमार समाज (ऑल भरूच डिस्ट्रिक्ट फिशरमैन सोसाइटी) ने भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) को एक एक पत्र लिख कर नर्मदा नदी में अवैध खनन की शिकायत की है। संगठन ने यह शिकायत इस आधार पर की है कि नर्मदा नदी के जिस प्रवाह क्षेत्र में अवैध खनन किया जा रहा है, वह राष्ट्रीय जलमार्ग – 73 (National Water Way – 73) के अंतर्गत आता है और यह परियोजना भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण के तहत संचालित है।
समस्त भरूच जिला मछीमार समाज के अध्यक्ष कमलेश एस मढीवाला ने यह पत्र 22 मार्च 2026 को विश्व जल दिवस के दिन भेजा है। पत्र में उन्होंने लिखा है कि गुजरात राज्य के वडोदरा, नर्मदा और भरूच जिलों में लोटे की नावों-बार्जाें में ड्रेजिंग मशीनों का प्रयोग करके पानी के रास्तों में पाइप लाइनें डालकर नर्मदा नदी से गैर कानूनी रेत खनन किया जा रहा है। उन्होंने यह पत्र पूर्व में राज्य सरकार के प्राधिकारियों व विभागों को लिखे गए पत्र व प्राप्त जवाब के आधार पर लिखा है। मढीवाला इस संबंध में गुजरात मैरीटाइम बोर्ड के समक्ष पूर्व में पत्र लिख कर अपनी शिकायत रख चुके हैं।
मढीवाला ने पत्र में लिखा है कि गुजरात में नर्मदा के प्रवाह वाले तीनों जिलों में रेत खनन माफिया ने गैर कानूनी तरीके से 15 से 20 पक्की पुलिया का निर्माण का लिया है, जिससे नर्मदा का स्वाभाविक प्रवाह प्रभावित हुआ है। मढीवाला ने अपने पत्र में इस बात पर चिंता जतायी है कि कई इलाके में नर्मदा का प्रवाह कम हो गया है और तल सूख गया है। वहीं, नर्मदा नदी के किनारे निजी व सरकारी जमीन का कटाव साल-दर-साल बढ रहा है। उन्होंने यह भी कहा है कि ऐसी कार्रवाइयों से नर्मदा नदी की पारिस्थितिकी बिगड़ रही है और राज्य की इस जीवन रेखा पर बुरा असर हो रहा है।

उन्होंने पत्र में बताया है कि गुजरात मैरीटाइम बोर्ड ने उनके पत्र के जवाब में अपने सीमित अधिकार क्षेत्र का जिक्र करते हुए अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण से संपर्क करने को कहा है।
पत्र में आरोप लगाया गया है कि रेत खनन के काम में कई विधायक व सांसद शामिल हैं और भरूच के सांसद मनसुखभाई वसावा ने आरोप लगाया है कि रेत माइनिंग माफिया की किश्तें नीचे से ऊपर तक जा रही हैं और इन्हीं वजहों से, विभाग नर्मदा नदी में खनन माफिया द्वारा किये जा रहे गैर कानूनी रेत खनन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है और जानबूझकर अपनी ड्यूटी और ज़िम्मेदारी निभाने में नाकाम रहा है।
मच्छीमार समाज के पत्र में कहा गया है कि नर्मदा नदी में बिना रजिस्ट्रेशन वाली लोहे की नावों/बजरे और पानी के रास्ते में बनी गैर-कानूनी पुलियों की मदद से चल रहे खुलेआम गैर-कानूनी रेत खनन से जनता में यह संदेश जा रहा है कि विभाग में राजनीतिक खनन माफिया का डर है। ऐसा मैसेज जनता को नहीं जाना चाहिए। नर्मदा नदी और पानी के रास्ते में चल रही गैर-कानूनी गतिविधि को तुरंत रोककर जनता के सामने यह उदाहरण पेश करना ज़रूरी है कि विभाग किसी से नहीं डरता और हिम्मत से काम करता है। नर्मदा नदी और पानी के रास्ते में चल रहे गैर-कानूनी रेत खनन को हमेशा के लिए रोक देना चाहिए और पानी के रास्ते में बनी पुलियों को हमेशा के लिए हटा देना चाहिए।
पत्र में कहा गया है कि बिना नाम, पते या रजिस्ट्रेशन के पाइपलाइन और ड्रेजिंग मशीनों वाली 400-500 से ज़्यादा लोहे की नावों/बार्जों राष्ट्रीय जलमार्ग – 73 में संचालन की अनुमति देना किसी भी तरह उचित नहीं है।
भले ही तीनों जिलों की जिला पंचायतों के पास नर्मदा नदी के तल में कंक्रीट पुलिया बनाने या परमिशन देने का कानूनी अधिकार या पावर नहीं है, फिर भी जिला पंचायतें खुद गैर-कानूनी काम कर रही हैं और ऐसी गतिविधियों से माइनिंग माफिया के साथ उनकी छिपी हुई पार्टनरशिप का असली शक पैदा होता है, इसलिए जिला पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए।
पत्र में आरोप लगाया गया है कि रेत खनन के काम में कई विधायक व सांसद शामिल हैं और भरूच के सांसद मनसुखभाई वसावा ने आरोप लगाया है कि रेत खनन माफिया की किश्तें नीचे से ऊपर तक जा रही हैं और इन्हीं वजहों सेए डिपार्टमेंट नर्मदा नदी में माइनिंग माफिया द्वारा की जा रही गैर.कानूनी रेत माइनिंग के खिलाफ कोई एक्शन नहीं ले रहा है और जानबूझकर अपनी ड्यूटी और ज़िम्मेदारी निभाने में नाकाम रहा है।
पत्र में कहा गया है कि पिछले साल शुक्लतीर्थ में खनन क्षेत्र में डूबने से मरे तीन लोगों के परिजनों को अभी भी इंसाफ नहीं मिला है। देशहित में शिकायत करना हमारी देशभक्ति है, लेकिन हमारी शिकायत के बाद कार्रवाई के बोझ के बहाने हमारे खिलाफ कोई नाराज़गी, बदले की भावना और हमारे खिलाफ कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए, ताकि देशहित में लिखने, बोलने और काम करने वाले लोग भी शिकायत करना बंद कर दें और गैर कानूनी काम और माफिया की गतिविधियां बढ़ें और देश की जनता को परेशानी उठानी पड़े।
भरूच के मछुआरा संगठन ने सरकार से ये पांच प्रमुख मांगें रखी हैं –
- नर्मदा में जो लोग ड्रेजिंग मशीनों के साथ बिना रजिस्ट्रेशन वाली लोहे की मैकेनिकल नावों से लंबे पाइप खींचकर खुलेआम गैर-कानूनी रेत खनन का काम कर रहे हैं, उनकी सभी लोहे की नावों को हिरासत में लिया जाए।
- जलमार्ग – 73 में नर्मदा मैया के फ्लो-वे में रेत माइनिंग माफिया द्वारा बनाए गए पुलियों को फ्लो से हटाया जाए।
- जलमार्ग – 73 में नर्मदा के बहाव में रेत खनन के लिए दी गई पर्यावरण मंजूरी (EC) पर कानूनी आपत्तियां उठाई जाएं और जारी की गई पर्यावरण मंजूरी को रद्द करने के लिए कानूनी कार्रवाई की जाए।
- जलमार्ग – 73 में गैर-कानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए स्थायी चेकपॉइंट बनाए जाएं और रोज़ाना गश्ती के जरिए गैर-कानूनी गतिविधियों को रोका जाए।
- ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ अवैध खनन के लिए जिम्मेवार लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए और उन पर एफआइआर हो।