प्रस्तावित तोरसा लैंड पोर्ट के निर्माण स्थल को लेकर चल रहे आंदोलन के मामले में दर्ज एफआइआर में सामाजिक कार्यकर्ता अनुराधा तलवार व चाय मजदूरों के अधिकार के लिए संघर्ष करने वाले बिनय केरकेट्टा का नाम शामिल किया गया है, लेकिन ये दोनों घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे।
अलीपुरद्वार/कोलकाता: पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले के तोरसा चाय बागान की भूमि पर अधिकार के मामले में कलकत्ता हाइइाकोर्ट में छह नवंबर 2026 को एक सुनवाई प्रस्तावित है। यह मामला चाय मजदूरों के अधिकार के लिए संघर्ष करने वाले मजदूर संगठन पश्चिम बंगाल चा मजूर समिति(PBCMS) बनाम भारत संघ WPA(P) 364 of 2026) एवं अन्य का है। इसमें उन परिवारों के भूमि अधिकारों से जुड़े मामले को उठाया गया है जो पीढियों से अलीपुरद्वार जिले के तोरसा चाय बागान में रह रहे हैं। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सब्यसाची भट्टाचार्य और न्यायमूर्ति अर्जुन रे मुखर्जी की अवकाशकालीन बेंच करेगी। हाल में यह जमीन लैंड पोटर्स ऑथरिटी ऑफ इंडिया को सौंप दी गई है, ताकि वहां जयगांव लैंड पोर्ट का निर्माण किया जा सके।
इससे पहले 22 सितंबर को अदालत ने इस मामले में कहा था कि परियोजना पर कोई रोक नहीं है और काम जारी रह सकता है। हालांकि अदालत ने तब यह भी दर्ज किया कि यदि अंततः प्रभावित परिवारों को मुआवजे का हकदार पाया जाता है तो उन्हें मुआवजा दिया जाना चाहिए।
https://www.facebook.com/profile.php?id=100088380016150
इस मामले को लेकर दायर एक नई अर्जी में यह मांग की गई है कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना बेदखली, तोड़फोड़ और जमीन से बेदखल किए जाने के खिलाफ सुरक्षा प्रदान किया जाए। इस आशय के आश्वासन की मांग की गई है कि कोई नई दीवार या फेंसिंग विवादित जमीन के उन हिस्सों में रूकावट न बने, जहां प्रभावित परिवार रह रहे हैं। मुआवजे के हकरदार लोगों की पहचान करने और मुआवजे की राशि तय करने के लिए एक पारदर्शी समयबद्ध प्रक्रिया अपनाई जाए। इसमें हर प्रभावित परिवार को नोटिस दिया जाए और उन्हें अपनी बात रखने का मौका दिया जाए।
https://www.facebook.com/profile.php?id=100088380016150
छह नवंबर को ही अलीपुरद्वार जिला अदालत में 11 प्रदर्शनकारियों की जमानत याचिका पर सुनवाई होगी, जिन्हें इस मुद्दे पर आंदोलन करने की वजह से पुलिस द्वारा एफआइआर दर्ज कर गिरफ्तार किया गया है।
अनुराधा तलवार व बिनय केरकेट्टा का भी नाम शामिल
पुलिस द्वारा दर्ज मामले में सामाजिक कार्यकर्ता अनुराधा तलवार और चाय मजदूर अधिकार कार्यकर्ता बिनय केरकेट्टा का नाम भी शामिल किए जाने की बात सामने आयी है। इन दोनों पर अपने हक को लेकर प्रदर्शन कर रहे चाय मजदूरों को उकसाने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में पश्चिम बंग चा मजूर समिति ने एक बयान जारी कर कहा है कि अनुराधा तलवार जो एक वरिष्ठ नागरिक हैं, वे दो नवंबर को बेंगलुरु में हैं, जहां वे अपनी पोती की देखभाल कर रही हैं। जबकि बिनय केरकेट्टा घटनास्थल से 20 किमी दूर मधु चाय बागान में थे।
पीबीसीएमएस ने कहा है कि बिनय पहले से ही दो अन्य मामलों में उलझे हैं, जिन्हें उन्होंने अनुचित बताया है। उनसे एक लाख रुपये की जमानत राशि और अच्छा व्यवहार बनाए रखने का आश्वासन देने को कहा गया है। संगठन ने कहा है कि ऐसा करना आंदोलन के नेतृत्व को निशाना बनाकर उसे कुचलने की कोशिश है। समिति ने सवाल उठाया है कि क्या बार-बार आपराधिक मामले दर्ज करके, गिरफ्तारियां करके और पुलिस द्वारा परेशान करके पश्चिम बंगाल चा मजूर समिति और तोरसा भूमि अधिकार आंदोलन के नेतृत्व को कमजोर और पंगु बनाने की कोई सुनियोजित कोशिश की जा रही है।
गिरफ्तार किए गए 11 प्रदर्शनकारी कौन हैं?
बिनोद उरांव: आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक बिनोद किडनी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। पीबीसीएमएस ने कहा है कि संगठन को मिली जानकारी के अनुसार, वे जेल में बेहोश हो गए थे, उनके सिर में चोट लगी जिससे खून बहने लगा और उनका हाथ भी गंभीर रूप से घायल हो गया। उनके परिवार का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें इस घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं दी।
आनंद छेत्री: आंदोलन के एक प्रमुख आयोजक, आनंद के परिवार के दो सदस्य, जिनमें उनकी बेटी भी शामिल है, कैंसर से पीड़ित हैं। उन्हें 18 नवंबर को अपनी बेटी को इलाज के लिए बेंगलुरु ले जाना था। उनकी गिरफ्तारी के कारण अब बेटी के इलाज पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।
बिलास उरांव: गिरफ्तारी से ठीक 18 दिन पहले ही बिलास पिता बने थे। परिवार में कमाने वाले वे अकेले सदस्य हैं। उनकी गैर-मौजूदगी में उनके नवजात बच्चे और पूरे परिवार के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
मरियम उरांव: आंदोलन की शुरुआत से ही इसमें अहम भूमिका निभाने वालीं मरियम के पति बीमार रहते हैं, जबकि उनका बेटा काम की तलाश में भूटान गया हुआ है। उनके छोटे-छोटे पोते-पोतियां अपनी दादी के लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
सुनीता उरांव, अर्पिता उरांव, बिश्राम उरांव और राज उरांव, एक ही परिवार के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। सुनीता और अर्पिता दोनों के बच्चे हैं और वे परिवार की आय में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। बिश्राम मिर्गी से पीड़ित हैं और उनका परिवार हिरासत में उनकी सेहत और सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित है।
रत्ना उरांव और सागर विश्वकर्मा: ये दोनों पीबीसीएमएस के सदस्य हैं, जो शुरू से ही तोरसा के प्रदर्शनकारी मजदूरों के साथ खड़े रहे हैं। रत्ना किलकोट चाय बागान से हैं और सागर चिंचुला चाय बागान से।
सूरज लोहार: आंदोलन के पहले दिन से ही सक्रिय रहे सूरज अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद उनकी पत्नी और बच्चे गंभीर आर्थिक असुरक्षा का सामना कर रहे हैं।
तोरसा बागान के मजदूर आंदोलन क्यों कर रहे हैं?
चाय मजदूर पीढियों से चाय बागान की जमीन पर बसे हैं और उसे अपने खून-पसीने से सींच कर उन्होंने आबाद किया है। पर, आजादी के आठ दशक बाद भी वे अबतक अपनी जमीन पर मालिकाना हक व अधिकार से वंचित हैं। तोरसा चाय बागान के नौ परिवारों के सामने प्रस्तावित निर्माण कार्य से अपना घर खोने का खतरा मंडरा रहा है। वहीं, 60 परिवार अन्य परिवारों के समक्ष आजीविका का साधन खोने का खतरा है। राखी उरांव के परिवार को बांग्ला आवास योजना के तहत घर बनाने के लिए आर्थिक मदद मिली है।

उनके घर में सरकारी बिजली कनेक्शन है, यानी उक्त जमीन पर निवास का सरकार से एक तरह से उनको मान्यता हासिल है। वे अपने अधूरे घर के निर्माण पर करीब साढे आठ लाख खर्च कर चकी हैं, लेकिन अब उन्हें मात्र साढे पांच लाख मुआवजे की बात कही जा रही है। ऐसे में उनके समक्ष यह समस्या है कि वे कैसे इतने पैसे में नई जगह जमीन ले पाएंगी और अपना नया घर बना पाएंगी।