जलवायु विषयों पर काम करने वाली संस्था असर व रांची प्रेस क्लब ने संयुक्त रूप से हीटवेव या चरम गर्मी पर एक कार्यशाला का आयोजन किया, जिसमें जलवायु वैज्ञानिक, चिकित्सक, पर्यावरणविद व पत्रकार शामिल हुए।
रांची: असर सोशल इम्पैक्ट एडवायजर्स और रांची प्रेस क्लब के साझा प्रयासों से “हीट वेव जागरूकता एवं प्रतिक्रिया” विषय पर सात मई, 2026 (दिन गुरूवार) को रांची प्रेस क्लब में एक मीडिया कार्यशाला और संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जलवायु परिवर्तन और बढ़ती गर्मी के दौर में जागरूकता, चुनौती से निबटने में जरूरी कार्रवाई, मीडिया की भूमिका और आम जनमानस पर पड़ने वाले प्रभावों पर गहन चर्चा करना था। कार्यशाला में मौसम वैज्ञानिक, पर्यावरणविद, चिकित्सक और वरिष्ठ पत्रकारों ने हिस्सा लिया।
रांची प्रेस क्लब में आयोजित इस कार्यक्रम के शुरुआत में नसीरुद्दीन शाह द्वारा निर्मित और तेज सिसोदिया द्वारा निर्देशित लघु फिल्म ‘इट्स ओनली 47 डिग्री’ दिखाई गई, जिसने हीटवेव की भयावहता को बेहद संजीदगी से पेश किया।
रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभुनाथ चौधरी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए भविष्य में भी ऐसे जन-जागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन पर बल दिया। असर के क्लाइमेट एक्शन डायरेक्टर मुन्ना झा ने कहा कि मीडिया हीटवेव जैसे गंभीर संकट को नीति-निर्माताओं और आम जनता के बीच सेतु बनकर प्रभावी ढंग से पहुंचाता है। उन्होंने अपने अनुभवों से एक बुजुर्ग महिला के अनुभवों का उदाहरण देते हुए कहा कि रांची जैसे ऊंचाई पर बसे शहर में में गर्मी से परेशानी किस कदर बढ रही है।

कार्यशाला में शामिल प्रतिभागी पत्रकार।
रांची मौसम केन्द्र में वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि झारखंड के लिए पिछला दशक सबसे गर्म रहा है और 2026 में सुपर अल नीनो विकसित होने की प्रबल आशंका है, जिससे मानसून और वैश्विक तापमान पर गहरा असर पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब मैदानी क्षेत्रों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस पार कर जाता है, तो उसे हीटवेव की श्रेणी में रखा जाता है, जिसका सबसे बुरा प्रभाव समाज के गरीब और मेहनतकश तबके पर पड़ता है। पर्वतीय क्षेत्र के लिए यह मानक 37 डिग्री है।
रांची विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर नीतीश प्रियदर्शी ने कहा, धरती खुद को री-बैलेंस करने में सक्षम है, चुनौती इंसानों को खुद के अस्तित्व को बचाने की है। उन्होंने रांची का उदाहरण देते हुए बताया कि अंधाधुंध कंक्रीट निर्माण ने शांत शहर को अर्बन हीट आइलैंड में तब्दील कर दिया है। उन्होंने कहा कि हम बगीचे तो लगा सकते हैं, लेकिन सदियों पुराने प्राकृतिक जंगलों को फिर से उगाना मानवीय क्षमता से परे है, इसलिए मौजूदा जंगलों को बचाना जरूरी है।
प्रभात खबर अखबार, रांची के स्थानीय संपादक और वरिष्ठ पत्रकार संजय मिश्रा ने हिंदी मीडिया की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि हिंदी समाचार पत्रों का कवरेज क्षेत्र व्यापक है, लेकिन अभी भी ग्राउंड रिपोर्टिंग और स्थानीय जलवायु के अनुरूप नीति निर्माण की दिशा में नवाचार की बहुत आवश्यकता है। उन्होंने पत्रकारों से इस विषय पर और अधिक संवेदनशील होने की अपील की। उन्होंने कहा कि मुख्यधारा अखबारों व मीडिया में जलवायु व परिवर्तन को लेकर खबरों का कवरेज बढा है, लेकिन इसे अभी और संवेदनशील और प्रभावी बनाना जरूरी है। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि अभी कई दफा हम जलवायु से जुड़ी खबरों को लेकर संवेदनशील के बजाय सनसनी बनाते हैं।

कार्यशाला में शामिल वक्ता।
हीटवेव की स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से चर्चा करते हुए रांची स्थित चिकित्सक डॉ अत्रि गंगोपाध्याय ने सलाह दी कि भीषण गर्मी के दौरान सिर ढंकना और पर्याप्त पानी पीना सबसे प्राथमिक सुरक्षा है। उन्होंने ओआरएस पीते रहने की सलाह दी और कहा कि उसे खरीदते समय उसमें डब्ल्यूएचओ का मार्क देख कर ही खरीदें। उन्होंने कहा कि गर्मी के कारण शरीर में प्रोटीन की कमी हो जाती है, जो बच्चों, बुजुर्गों और हृदय रोगियों के लिए घातक हो सकती है।
स्वतंत्र पत्रकार राहुल सिंह ने डेटा आधारित रिपोर्टिंग की वकालत की। उन्होंने बताया कि वर्तमान में अंग्रेजी मीडिया में हीटवेव को जलवायु परिवर्तन से जोड़ते हुए रिपोर्ट करने का स्तर 14 प्रतिशत व हिंदी मीडिया व क्षेत्रीय मीडिया में 10 प्रतिशत के करीब है। ऐसे में इस स्थिति को सुधारने के लिए पत्रकारों को विश्वसनीय स्रोतों और डेटा पर ध्यान देना चाहिए। उन्हें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि वे सिर्फ हीटवेव को लेकर पाठकों को सूचना न दें बल्कि उनकी समझ भी बढायें, क्योंकि मीडिया ही उनके लिए ऐसी जानकारियों का प्राथमिक स्रोत है।
वहीं, स्वतंत्र पत्रकार विशाल जैन ने कहा कि हीटवेव की रिपोर्टिंग केवल आंकड़ों तक सीमित न रहकर प्रभावित लोगों की मानवीय कहानियों पर आधारित होनी चाहिए, ताकि उनकी आवाज नीतियों का हिस्सा बन सके। सत्र के आखिरी में प्रतिभागियों के लिए खुला संवाद व प्रश्नोत्तर का आयोजन किया गया।