झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सरना धर्म कोड को लेकर अपनी पुरानी मांग को दोहराया है और देश में होने जा रही जनगणना में इससे संबंधित कॉलम शामिल करने की मांग की है।
रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार को पत्र लिख कर जनगणना 2027 में सरना धर्म कोड के लिए कॉलम शामिल करने की मांग की है।
तीन मई 2026 को हेमंत सोरेन द्वारा लिखे गए इस पत्र में प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा गया है कि जनगणना के द्वितीय चरण में धर्म से संबंधित जानकारी प्रपत्र/कॉलम को लेकर राज्य की आकांक्षा, विधानसभा का संकल्प और सभी आदिवासी समजा की भावना व राज्य सरकार के आग्रह पर गंभीरता से विचार किया जा रहा होगा।
हेमंत सोरेन ने पत्र में लिखा है कि झारखंड गठन के दौरान यहां की आदिवासी पहचान, संस्कृति, अस्मिता व स्थानीय जनभावनाओं का विशेष महत्व रहा है। राज्य का विभिन्न आदिवासी समुदाय आज भी अपने पारंपरिक पूजा पद्धति, रीति रिवाज, प्रकृति आधारित जीवन को संरक्षित करते हुए सामाजिक जीवन का संचालन कर रहा है।

रांची में वर्ष 2026 में सरहुल पर्व के दौरान पूजा करते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन। फाइल फोटो।
राज्य के बुद्धिजीवियों, सामाजिक संगठनों, आदिवासी संगठनों द्वारा यह भावना निरंतर व्यक्त की जाती रही है कि जनगणना में उनकी विशिष्ट धार्मिक पहचान को अलग से दर्ज किया जाना चाहिए।
देश की आजादी के पूर्व जनगणना प्रक्रिया में विभिन्न समाज द्वारा अपनाये जा रहे धार्मिक विशिष्टताओं, उनके रीति रिवाज एवं पहचान को अंकित किया जाता रहा है। पर, स्वतंत्र भारत में आदिवासी समाज के धर्म को अंकित करने की पंरपरा नहीं रखी गई।
आदिवासी समाज के द्वारा अपनाये जा रहे सरना धर्म की विभिन्न विशिष्टताओं, अलग-अलग पूजा पद्धति एवं स्थल, कुल देवता-प्रकृति देवता एवं ग्राम देवता का प्रचलन, परंपरा एवं त्योहार, पूजारियों के द्वारा पूजा किये जाने की व्यवस्था ही सरना धर्म को विशिष्ट धर्म के रूप में अलग पहचान देता है।
हेमंत सोरेन ने पत्र में मांग की है कि धर्म के कॉलम में सरना धर्म को अथवा अन्य ऐसे सादृश धार्मिक अस्तित्व को मान्यता देते हुए अलग कोड दिये जाने से आंकड़ों का संकलन बेहतर तरीके से किया जाना सुनिश्चित हो सकेगा।