चाय मजदूरों का वेतन देने में विफल रहे प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, आंदोलन की चेतावनी

टीएमसी नेता द्वारा महिला चाय मजदूरों से किये गए दुर्व्यवहार के खिलाफ राज्य सरकार से कार्रवाई की मांग

अलीपुरद्वार (पश्चिम बंगाल) : पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले के राइमाटांग चाय बागान मजदूरों ने तीन मार्च को अपने बकाया वेतन की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। मजदूरों को मजबूरन यह कदम तब उठाना पड़ा जब दो मार्च 2025 तक वेतन भुगतान के वादे को पूरा करने में प्रबंधन विफल रहा।

राइमाटांग चाय बागान अलीपुरद्वार जिले के कलचीनी ब्लॉक में स्थित है। यह चाय बागान 21 दिसंबर 2023 से दो साल से अधिक समय तक बंद रहने के बाद 21 जनवरी 2025 को पुनः खोला गया। राज्य सरकार ने पुराने मालिक की लीज रद्द कर नए मालिक को बागान सौंप दिया, लेकिन इसके बावजूद श्रमिकों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।

बागान के श्रमिकों का दो पखवाड़े (एक महीने) का वेतन बकाया है। कई शिकायतों के बाद मजदूरों को आश्वासन दिया गया था कि उन्हें दो मार्च 2025 तक वेतन दिया जाएगा, लेकिन यह भुगतान इस निर्धारित समय पर नहीं हुआ। इसके बाद मजदूरों ने विरोध प्रदर्शन का निर्णय लिया।

थाना में शिकायत और प्रशासन की उदासीनता


तीन मार्च 2025 को चाय बागान की महिला श्रमिकों ने अपने वेतन भुगतान की मांग को लेकर कलचीनी थाना का रुख किया। मजदूरों का कहना है कि श्रम विभाग उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं देता और कोई समाधान नहीं निकलता। जब भी वे अपने हक के लिए आंदोलन करते हैं, पुलिस उन्हें रोकती है और वेतन दिलाने का आश्वासन देती है, इसलिए मजदूरों ने थाने में अपनी शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया।

महिला श्रमिकों ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने के बाद लिखित ज्ञापन थाना में जमा करना चाहा, लेकिन थाना ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद, बागान प्रबंधन की ओर से मजदूरों को दोपहर 12 बजे तक वेतन भुगतान का आश्वासन दिया गया, जिस पर मजदूर अपने कार्यस्थल पर लौटने को तैयार हुए। मजदूरों ने यह भी मांग रखी कि उन्हें आज की हाजिरी दी जाए, क्योंकि वे सीधे थाना से अपने काम पर लौट रहे थे, जिसे मैनेजर ने स्वीकार कर लिया।

कालचीनी थाने में अपनी मांग के समर्थन में जुटे राइमाटांग चाय बागान के श्रमिक।

टीएमसी नेता द्वारा मजदूरों का उत्पीड़न


पश्चिम बंग चा मजूर समिति ने कहा है कि जब महिला श्रमिक अपने कार्यस्थल लौट रही थीं, तब कारगिल चौक, कलचीनी के सामने टीएमसी के ब्लॉक अध्यक्ष पवन लामा ने उन्हें रोका, उनके साथ बदतमीजी की, अभद्र भाषा का प्रयोग किया और उन्हें धमकाया, जो एक असंवैधानिक और निंदनीय कृत्य है। मजदूरों को अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का मौलिक अधिकार है। किसी भी महिला श्रमिक के साथ इस प्रकार की अभद्रता करना महिला सम्मान के खिलाफ है।

पश्चिम बंग चा मंजूर समिति के सचिव बिरबल उरांव ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए मांग की है कि महिला श्रमिकों के साथ किए गए दुर्व्यवहार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। दोषी टीएमसी नेता पवन लामा पर कानूनी कार्यवाही हो। श्रमिकों का बकाया वेतन अविलंब भुगतान किया जाए।
श्रमिकों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए उचित कदम उठाए जाएं। महिला श्रमिकों द्वारा अपने अधिकारों के लिए खुद से आवाज उठाने पर टीएमसी के कुछ नेताओं द्वारा रोकना और दबाने के लिए उनको डरने धमकाने का प्रयास लोकतंत्र की हत्या है। समिति ने सवाल उठाया है कि क्या पश्चिम बंगाल सरकार इन लोगों को समर्थन करके लोकतंत्र को खत्म करना चाहती है?

पश्चिम बंग चा मजूर समिति ने कहा है यदि इन मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं होती है, तो मजदूर अपने हक की लड़ाई के लिए बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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