पलासबोना, श्रीकुंड और अंधारकोठा गांव के लोग सार्वजनिक जलस्रोतों पर पानी के लिए निर्भर हैं। ऐसे सार्वजनिक स्रोतों से पानी लाने का काम मुख्य रूप से महिलाओं व छोटे बच्चों का है। इस कारण दोनों अतिरिक्त दबाव का सामना करते हैं।
साहिबगंज से राहुल सिंह की रिपोर्ट
झारखंड के उत्तर पूर्व छोर पर स्थित साहिबगंज राज्य का एकमात्र जिला है जो गंगा नदी के तट पर स्थित है। केंद्रीय जल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, जिले का भूभाग मिश्रित स्वरूप का है, जिसमें जलोढ मिट्टी व बेसालटिक प्रवाह वाला भूभाग शामिल है। गंगा के अलावा गुमानी और मोरांग जिले में बहने वाली दो और महत्वपूर्ण नदियां हैं। इसके साथ ही जिले में पर्याप्त मानसूनी बारिश (1575 मिमी वार्षिक) भी होती है। इन विशिष्टताओं के बावजूद जिले के बरहरवा प्रखंड की पलासबोना और श्रीकुंड ग्राम पंचायत पानी की घोर संकट का सामना करती हैं। श्रीकुंड उससे सटे अंधारकोठा और वहां से करीब दो किमी दूर स्थित पलासबोना गांव पानी की घोर किल्लत का सामना करते हैं। इस इलाके के लोग बातचीत मे अपने गांव को ड्राइ जोन बताते हैं।

साहिबगंज-पाकुड़ रोड पर स्थित श्रीकुंड बाजार से लगे अंधारकोठा में एक बगीचे में कई बोरवेल व पेड़ों पर खींची गई पाइप लाइन को देख कर कोई नया व्यक्ति हैरत के पड़ सकता है। आमतौर पर ऐसी लाइनें बिजली आपूर्ति के लिए खींची जाती हैं, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए यह जिंदगी जीने व पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए यह जरूरी उपाय है। गांव में लोगों के घरों में बोरिंग(बोरवेल) सफल नहीं होता है और सरकार की ओर से घर-घर नल जल पहुंचाने का वादा अबतक पूरा नहीं हो सका है। ऐसे में लोगों ने बगीचे में बोरिंग करवा कर उससे पाइप लाइन के जरिये अपने घर तक पानी पहुंचाने का प्रबंध किया गया है।

इस गांव की बुजुर्ग महिला राबिया बीवी बातचीत में कहती हैं, “सबसे पहले हमने 15 साल पहले बगीचे में बोरवेल करवाया, जिससे हमारी पानी की जरूरतें पूरी हो गईं, उसके बाद हमें देख कर कई लोगों ने बगीचे में बोरेवेल करवाये, जिससे उन्हें पानी की सुविधा मिली”। हालांकि राबिया बीवी का घर बगीेचे के ठीक बगल में है, लेकिन अन्य कई लोग बोरवेल से पानी का उठाव कर उसे पाइप के जरिये दूर स्थित अपने घरों में ले जाते हैं। राबिया बीवी के घर के बगल में स्थित बगीचे में 17 बोरवेल हैं।

अंधारकोठा गांव के 27 वर्षीय अफसर अली कहते हैं, “लोगों के घरों में तो जमीन से पानी नहीं ही निकलता है, बगीचे में 45 से 50 फीट पर पानी मिल जाता है, पर यहां के पानी में आयरन की अधिक मात्रा है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी होती हैं, इसलिए हमलोग बोतल वाला पानी खरीद कर पीते हैं, घर के दूसरे काम इस पानी से करते हैं”। हालांकि आर्थिक वजहों से हर किसी के लिए जार या बोतल का पानी खरीद पाना संभव भी नहीं है। अफसर अली दूषित पानी से होने वाली बीमारी का उल्लेख करते हुए कहते हैं कि गांव में लोगों को यह भी नहीं पता चलता कि वे किस कारण बीमार पड़े हैं।
वहीं, पड़ोस के श्रीकुंड के स्थानीय ग्रामीण व दो नंबर वार्ड के वार्ड सदस्य सलीम शेख कहते हैं, “श्रीकुंड पंचायत में पानी की ही सबसे अधिक दिक्कत है, मेरे वार्ड में 400 वोटर हैं, लेकिन एक भी व्यक्ति के घर में बोरिंग नहीं है। बगीचे के बोरिंग के जरिये ही लोगों की पानी की जरूरतें पूरी होती है, लेकिन कभी-कभी उसमें भी दिक्कत आ जाती है”। श्रीकुंड गांव गुमानी नदी के किनारे बसा है जिससे नदी किनारे बसे लोगों की पानी की जरूरतें नदी से एक हद तक पूरी होती हैं, लेकिन जो नदी से दूर हैं, उन्हें दिक्कतों का सामना करना होता है।
पलासबोना का हाल और बुरा, महिलाओं व बच्चियों पर दबाव
श्रीकुंड से करीब दो किमी की दूरी पर पाकुड़-साहिबगंज मुख्य मार्ग पर स्थित है पलासबोना गांव। यह गांव इस पूरे इलाके में ड्राइ जोन के नाम जाना जाता है, जहां पानी की दिक्कत अंधारकोठा व श्रीकुंड जैसे गांव से भी अधिक है। पलासबोना 14 वार्ड में बंटा है, जिसमें पुराना पलासबोना में 12 वार्ड व नयी बसावट जिसे नया पलासबोना नाम दिया गया है, उसमें दो वार्ड हैं। यहां के हर वार्ड में पानी की भारी दिक्कत है। गांव में जहां भी सार्वजनिक जल स्रोत हैं, वहां बच्चों व महिलाओं की भीड़ दिखती है। बच्चो में भी लड़कियों की संख्या अधिक नजर आती है। ये अपनी घरेलू जरूरतो के लिए बरतनों में पानी भर कर उसे घर तक पहुंचाते हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट बताती है कि स्वच्छ पेयजल सुविधाओं से अबतक बहुत सी महिलाएं और लड़कियां वंचित हैं। दक्षिण एशिया में मात्र 67.5 प्रतिशत महिलाओं व लड़कियों की सुरक्षित पेयजल स्रोतों तक पहुंच है, जबकि 14.8 प्रतिशत महिलाएं और बच्चियां पेयजल के तीव्र अभाव का सामना करती हैं।
सार्वजनिक स्रोतों पर दबाव व स्वास्थ्य का संकट
पलासबोना गांव के दक्षिण टोला के निवासी तोफिकुल हक कहते हैं, “दक्षिण टोला में पानी की सबसे अधिक दिक्कत है, यहां 800-900 फीट की गहराई पर भी पानी नहीं निकलता है”। दक्षिण टोला में एक नहर के किनारे एक विशाल कुआं हैं, जिसमें कई मोटर लगे दिखते हैं, जिसके जरिये लोग अपने घर तक पानी ले जाते हैं। हालांकि गांव के लोग बताते हैं कि होली के बाद उसमें भी पानी कम हो जाता है और दिक्कत बढ़ जाती है। अधिकतर लोग नहाने व कपड़े धोने के लिए गांव में स्थित एक सार्वजनिक तालाब पर निर्भर हैं, जहां हर हर मौसम में भीड़ रहती है।

स्थानीय लोग पानी की कमी के साथ पानी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का भी जिक्र करते हैं। गांव के 60 वर्षीय बुजुर्ग जाकिर हुसैन ने कुछ महीने पहले किडनी का ऑपरेशन कराया है और वे यह शंका व्यक्त करते हैं कि खराब पानी उनका स्वास्थ्य बिगड़ने की वजह हो सकता है। साहिबगंज जिले के कई हिस्सों में पानी में आर्सेनिक की शिकायत रही है।


ग्रामीण बताते हैं कि पलासबोना गांव में कुछ जगह सरकार बोरिंग करवाई गई है और पानी की टंकी भी बने हैं, लेकिन अभी सरकारी टंकी से पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हुई है। ऐसे में लोगों ने चंदा कर मोटर खरीद लिया है और उससे सार्वजनिक रूप से पानी ले रहे हैं। गांव में कहीं-कहीं सरकारी चापानल भी हैं, जिस पर लोगों की अत्यधिक निर्भरता है। इस गांव के निवासी व फल विक्रेता कौशर आलम कहते हैं कि हमने कई बार गुमानी से कोटलपोखर के लिए हमारे गांव से होकर पानी की आपूर्ति के लिए पाइप लाइन बिछाई गई है, लेकिन हमें उस योजना से वंचित रखा है। वे कहते हैं कि हमारी मांगों पर कोई सुनवाई नहीं होती है और हमारी दिक्कत को कोई समझने वाला नहीं है।
भारत सरकार के जल जीवन मिशन के डैसबोर्ड पर 24 फरवरी 2025 के डेटा के अनुसार, झारखंड में 54.68 प्रतिशत घरों को नल जल योजना से जोड़ दिया गया है, जबकि साहिबगंज जिले में 46.17 प्रतिशत घरों को अबतक नल जल से जोड़ा गया है। डैस बोर्ड के डेटा के अनुसार, पलासबोना पंचायत में 75 प्रतिशत घरों में नल जल की सुविधा उपलब्ध करवा दी गई है। वहीं आंकड़ों के अनुसार, श्रीकुंड में 92.85 प्रतिशत घरों को नल जल से जोड़ा गया है। डैसबोर्ड के अनुसार, पलासबोना के ग्रामीण घरों को कवर करने का आंकड़ा जिला व देश के औसत से अधिक है, जबकि श्रीकुंड का आंकड़ा जिला, राज्य व देश से अधिक है।
यह आंकड़ा साहिबगंज जिले में 46.17 प्रतिशत, राज्य में 54.68 प्रतिशत और देश में 79.95 प्रतिशत है। डैशबोर्ड से यह पता चलता है कि फिलहाल सिर्फ अंधारकोठा गांव ही नल जल योजना में पिछड़ा हुआ है, जहां अबतक मात्र 31.94 प्रतिशत घरों तक नल जल कनेक्शन पहुंच पाया है।
हजारीबाग से लोकसभा सांसद मनीष जायसवाल द्वारा संसद में छह फरवरी 2025 को पूछे गए एक सवाल के जवाब में सरकार ने बताया था कि झारखंड के 29398 गांवों में 6259 गांवों को 100 प्रतिशत जल जीवन मिशन के तहत नल जल से कवर कर लिया गया है। 24 जनवरी 2025 तक के आंकड़े के अनुसार, राज्य के 34.18 लाख घरों में पाइप लाइन से पानी की आपूर्ति हो रही है।

साहिबगंज में तैनात रहे पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के एक अधिकारी ने इस संवाददाता से बातचीत में यह माना कि श्रीकुंड और पलासबोना ड्राइ जोन है और वहां काफी गहरी बोरिंग करने पर भी पानी नहीं निकलता और यहां वैकल्पिक रूप से ही पानी की व्यवस्था की जा सकती है।