भुवनेश्वरः ओडिशा के पुरी जिले के अस्तारंगा में प्रस्तावित बंदरगाह के खिलाफ स्थानीय समुदाय लंबे समय से आवाज उठा रही है। हाल में फिर इसका विरोध शुरू हुआ है। ओडिशा के युवा पर्यावरण कार्यकर्ता व ओडिशा पर्यावरण संरक्षण अभियान के संस्थापक सौम्या रंजन बिस्वाल ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस इस बंदरगाह को शुरू करने को लेकर पुनर्विचार का आग्रह किया है।
सौम्या ने अपने एक लिंक्डइन पोस्ट में कहा है कि हम ओडिशा में प्रस्तावित अस्तारंगा बंदरगाह का कड़ा विरोध करते हैं। प्रभावित क्षेत्र में एक भी निवासी अपनी जमीन छोड़ने के लिए सहमत नहीं हुआ है। सौम्या के अनुसार, यह क्षेत्र जैव विविधता के लिहाज से काफी संवेदनशील और हॉटस्पॉट है। इसलिए इसके निर्माण से न केवल पारिस्थितिकीय नुकसान होगा, बल्कि जलवायु परिवर्तन के लिहाज से पूर्वी तट का संकट भी बढेगा।
सौम्या ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि इस परियोजना के दीर्घकालिक परिणामों पर विचार किया जाए, खास कर खनिज संसाधनों की सीमित प्रकृति और बंदरगाह के लिए व्यवहार्य भविष्य की कमी के मद्देनजर।

सौम्या का तर्क है कि ओडिशा में पारादीप बंदरगाह पहले से मौजूद है, जो दक्षिण एशिया के सबसे प्रमुख बंदरगाहों में एक है और यह अस्तारंगा बंदरगाह परियोजना को अनावश्यक बनाता है। इस परियोजना को आगे बढाने से समुदाय का विस्थापन, जलवायु जोखिम व पर्यावरण में क्षरण जैसे संकटों का सामना करना होगा। इसलिए इसके लिए किए गए एमओयू को सरकार रद्द करे।
लगभग चार हजार एकड़ भूमि में प्रस्तावित है अस्तारंगा बंदरगाह
अस्तारंगा बंदरगाह लगभग 3899.987 एकड़ भूमि में प्रस्तावित है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 7417 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके लिए परिधीय सड़कों और रेल कनेक्टिविटी का निर्माण किया जाएगा। इसको लेकर सितंबर 2024 में एक जन सुनवाई आयोजित की गई थी।

स्थानीय निवासियों को इस बात की चिंता है कि इसे समुद्र की प्राकृतिक संुंदरता व जैव विविधता को नुकसान होगा और यहां प्रवासी पक्षी व ओलिव रिडले कछुओं का घौंसला है जिसे नुकसान होगा। स्थानीय मछुआरा समुदाय की आजीविका भी इससे प्रभावित होगी।