Generated by All in One SEO v4.9.7.2, this is an llms.txt file, used by LLMs to index the site. # CLIMATE EAST ## Sitemaps - [XML Sitemap](https://climateeast.in/sitemap.xml): Contains all public & indexable URLs for this website. ## Posts - [ब्लॉग](https://climateeast.in/blog/) - [मेधा पाटकर ने सरदार सरोवर बांध पर केंद्र की मध्यस्थता व समाधान पर उठाए सवाल](https://climateeast.in/medha-patkar-raised-questions-on-the-centres-mediation-and-solution-on-the-sardar-sarovar-dam/) - नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर ने कहा है कि सरदार सरोवर संबंधी आंतरराज्य विवाद पर केंद्र की मध्यस्थता और उसके जरिये ढूंढे गए समाधान से उपजे सवालों का जवाब जरूरी है। 7669 करोड़ रुपये की डूबक्षेत्र की वैध भरपाई तथा उर्वरित पुनर्वास के लिए 2900 करोड़ रुपये के दावे की अनदेखी किस आधार - [क्या मुंबई में तेज बारिश की वजह सिर्फ अल नीनो है या इसके पीछे और भी हैं वजहें?](https://climateeast.in/is-el-nino-the-only-reason-for-heavy-rains-in-mumbai/) - अल नीनो हो या न हो, भविष्य में बारिश कम समय में और अधिक तीव्रता के साथ होने की संभावना बढ़ती जाएगी। अरब सागर के रिकॉर्ड स्तर तक गर्म होने से उत्तर-पश्चिम भारत में भी बारिश का पैटर्न बदल रहा है। इस साल मानसून ने भारत में अजीब तस्वीर पेश की है। जून के अंत - [वर्ल्ड बैंक ने हटाया 45% क्लाइमेट फाइनेंस लक्ष्य, क्या अब जलवायु अनुकूलन के लिए पैसे की होगी दिक्कत?](https://climateeast.in/world-bank-drops-45-percent-climate-finance-target/) - वर्ल्ड बैंक ने अपने कुल वार्षिक ऋण का 45 प्रतिशत हिस्सा जलवायु से जुड़े कार्यों पर खर्च करने का लक्ष्य वापस ले लिया है। जलवायु अनुकूलन से जुड़ी परियोजनाओं पर इसका असर दिख सकता है। जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए सिर्फ़ लक्ष्य तय करना काफी नहीं होता। उसके लिए पैसा भी चाहिए। बाढ़ से - [दुमका के पांजनबोना में ओलचिकी जागरूकता अभियान, एक भाषा-एक लिपि की उठी मांग](https://climateeast.in/olchiki-awareness-campaign-in-panjanbona-dumka-demand-for-one-language-one-script-raised/) - दुमका: दुमका प्रखंड के पांजनबोना गांव में लेखा होड़ (संताल गांव संचालक) की पहल पर परंपरागत स्वशासन मांझी-परगना व्यवस्था के तहत कुल्ही दुरुप (ग्रामसभा) का आयोजन कर ओलचिकी जागरूकता अभियान चलाया गया। बैठक की अध्यक्षता संयुक्त रूप से मंझी बाबा( ग्राम प्रधान) लखन हांसदा एवं प्राणिक सुबान सोरेन ने की। बैठक में लेखा होड़ एवं - [कोशी पीड़ितों के हितैषी व पत्रकार अमरनाथ झा की श्रद्धांजलि सभा का सुपौल में आयोजन](https://climateeast.in/tribute-meeting-of-journalist-amarnath-jha-organised-in-supaul-bihar/) - कोशी नवनिर्माण मंच की ओर से दिवंगत पत्रकार अमरनाथ झा की श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया और कोशी क्षेत्र व बिहार में उनके योगदान को याद किया गया। सुपौल (बिहार) : कोशी नव निर्माण मंच की ओर से वरिष्ठ पत्रकार, नदी, पानी और पर्यावरण को समर्पित, कोशी के हितैषी अमरनाथ झा की श्रद्धांजलि सभा - [यूरोप में भी अब भारत जैसी गर्मी, जलवायु परिवर्तन ने जून की हीटवेव को बना दिया और खतरनाक](https://climateeast.in/europe-has-been-struck-by-severe-heatwaves/) - यूरोप में सिर्फ जलवायु परिवर्तन की वजह से हीटवेव नहीं आया, इसकी एक वजह हीटडोम भी है। हीटवेव से लगभग 32.7 करोड़ लोग और 15.6 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। इनमें 26.4 करोड़ लोग और 13.4 ट्रिलियन डॉलर की आर्थिक गतिविधियां सबसे गंभीर श्रेणी की गर्मी के दायरे में थीं। एक समय - [हीट इंडेक्स, वेट बल्ब टेम्परेचर और वेट बल्ब ग्लोब टेम्परेचर क्या हैं, समझिए](https://climateeast.in/what-are-heat-index-wet-bulb-temperature-and-wet-bulb-globe-temperature/) - चरम गर्मी को सिर्फ बढा तापमान नहीं कई अन्य कारक प्रभावित करते हैं। हवा का सूखा होना, हवा में नमी होना गर्मी से मानव शरीर पर पड़ने वाले असर को प्रभावित करते हैं। आप यहां इससे जुड़े कुछ तकनीकी टर्म को आसान भाषा में समझ सकते हैं। दिल्ली वालों ने पिछले कुछ दिनों में मौसम - [भड़भूत बैराज निर्माण स्थल के पास मिट्टी की चोरी, लिखित शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं](https://climateeast.in/soil-theft-near-bhadbhut-barrage-project-site-no-action-taken-despite-written-complaint/) - मछुआरों के नेता व वकील कमलेश एस मढीवाला ने भरूच के जिला कलेक्टर को पत्र लिख कर बैराज निर्माण कार्य में संलग्न कंपनी पर अनियमितता का आरोप लगाया है। उन्होंने शिकायत के साथ जीपीएस लोकेशन वाला वीडियो भी साझा किया है। भरूच (गुजरात) : गुजरात के भरूच जिले में समस्त भरूच जिला मछीमार समाज के - [भारत में सिर्फ बढ़ती गर्मी ही नहीं, बढ़ती उमस भी बन रही है परेशान का सबब](https://climateeast.in/increasing-humidity-that-is-becoming-a-cause-for-concern-in-india/) - गर्मी पड़ती है तो लोग तापमान पूछते हैं। आज कितना पारा पहुंचा? 40 डिग्री? 42 डिग्री? 45 डिग्री? लेकिन कई बार असली खतरा उस संख्या में छिपा ही नहीं होता। क्योंकि शरीर सिर्फ तापमान नहीं महसूस करता। वह हवा में मौजूद नमी भी महसूस करता है। यही वजह है कि 38 डिग्री की उमस भरी - [भाजपा से चाय बागान मजूदरों का टूटा भरोसा, बंगाल के बजट में उन्हें कोई लाभ नहीं](https://climateeast.in/tea-garden-workers-lose-faith-in-the-bjp-west-bengal-budget-offers-no-benefits/) - गैर राजनीतिक चाय मजदूर यूनियन पश्चिम बंग चा मजूर समिति ने राज्य के बंद पड़े चाय बागानों के मजदूरों के 400 करोड़ रुपये बकाया की मांग उठायी है और कई बिंदुओं पर अमल की सरकार से अपील की है। कोलकाता: पश्चिम बंग चा मजूद समिति (PBCMS) ने राज्य में नई भाजपा सरकार द्वारा पेश किए - [जलवायु जोखिमों के बीच हमारे डेटा सेंटर, एआई क्रांति के बीच चुनौतियों का रखना होगा ख्याल](https://climateeast.in/our-data-centers-amid-climate-risks/) - एआई पर खरबों डॉलर का दांव, लेकिन बढ़ती गर्मी और बाढ़ के बीच बनेंगे दुनिया के डेटा सेंटर दुनिया इस समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, यानी एआई, के पीछे भाग रही है। तकनीकी कंपनियां नए डेटा सेंटर बना रही हैं। सरकारें डिजिटल अर्थव्यवस्था को भविष्य की ताकत बता रही हैं और निवेश का पैमाना इतना बड़ा है - [पश्चिम बंगाल में ग्रामीण रोजगार गारंटी के लिए 29,752 करोड़ के आवंटन की मांग](https://climateeast.in/pbkms-seeks-budgetary-allocation-of-29752-crore-for-rural-employment-guarantee-in-west-bengal/) - पश्चिम बंगाल के बजट से पहले पश्चिम बंग खेत मजूर समिति पीबीकेएमएस ने राज्य के वित्त मंत्री के सामने रखी ग्रामीण रोजगार गारंटी से संबंधित मांगें कोलकाता: चुनावी वर्ष होने की वजह से पश्चिम बंगाल की नई सरकार अब राज्य का बजट पेश करने की तैयारी में है। इसको लेकर राज्य के वित्त मंत्री स्वप्न - [जनसरोकारी पत्रकार व नदी प्रेमी अमरनाथ का निधन, प्रशसंकों ने जताया शोक](https://climateeast.in/bihar-based-journalist-and-river-activist-amarnath-passes-away/) - अमरनाथ झा एक जनसरोकारी पत्रकार थे और वे नदी और पानी से जुड़े मुद्दों पर विशेष रूप से सक्रिय रहते थे। इससे जुड़े जन आंदोलन व आयोजन में उनकी उपस्थिति महत्वपूर्ण होती थी। पटना: जनसरोकार से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार व नदी प्रेमी अमरनाथ झा का बुधवार, 17 जून 2026 की रात को पटना में ब्रेन - [जापान से एशिया पहुंच रही अमेरिकी एलएनजी, जलवायु पर असर 17 कोयला बिजलीघरों के बराबर](https://climateeast.in/us-lng-arriving-in-asia-from-japan-has-climate-impact-equivalent-to-17-coal-power-plants/) - जब एशिया के कई देश ऊर्जा सुरक्षा की बात करते हैं, तो अक्सर उनकी नज़र एलएनजी पर जाती है। इसे कोयले की तुलना में अपेक्षाकृत कम उत्सर्जन वाला ईंधन बताया गया। इसे एनर्जी ट्रांजिशन का एक पुल कहा गया। और, इसे ऐसी व्यवस्था के रूप में पेश किया गया जो देशों को धीरे-धीरे रिन्यूएबल एनर्जी - [84 प्रतिशत भारतीय ने ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों को महसूस किया: स्टडी](https://climateeast.in/84-percent-indians-feel-the-effects-of-global-warming-study/) - येल प्रोग्राम ऑन क्लाइमेट चेंज कम्युनिकेशन और सी-वोटर इंटरनेशनल एक नए अध्ययन में बढती गर्मी और ग्लोबल वार्मिंग को लेकर नए तथ्य सामने आए हैं। गर्मी अब सिर्फ मौसम नहीं रही। यह आम बातचीत का एक प्रमुख हिस्सा बन चुकी है। गांव के चौपाल से लेकर शहर के दफ्तर तक, लोग अब सिर्फ यह नहीं - [धरती तेज हो रही गर्म, 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा अब सिर्फ चार साल दूर?](https://climateeast.in/earth-is-heating-up-rapidly-is-the-1-5c-limit-now-just-four-years-away/) - पिछले 10 वर्षाें में मानव गतिविधियों की वजह से धरती की गर्मी काफी बढी है। इंडिकेटर ऑफ ग्लोबल क्लाइमेट चेंज की रिपोर्ट के अनुसार, अतिरिक्त गर्मी महासागरों, वायुमंडल, बर्फ़ और ज़मीन में जमा हो रही है। कई सालों तक जलवायु परिवर्तन को भविष्य का संकट कहा जाता रहा। एक ऐसा खतरा जो आने वाली पीढ़ियों - [एशिया में ऊर्जा सुरक्षा के लिए अब आयात नहीं, उत्पादन जरूरी](https://climateeast.in/electrotech-revolution-in-asia-ember-new-report/) - थिंक टैंक एंबर की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक एशिया के पास दुनिया के केवल चार प्रतिशत तेल और गैस संसाधन हैं, लेकिन वैश्विक विद्युत प्रौद्योगिकी विनिर्माण का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा एशिया में होता है, हालांकि इसका बड़ा भाग चीन में केंद्रित है। एशिया की अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है। नई फैक्ट्रियां बन - [जोगियाटीकर में आदिम जनजाति परिवारों को बुनियादी सुविधाएं भी मयस्सर नहीं](https://climateeast.in/primitive-tribal-families-in-jogiatikar-do-not-even-have-access-to-basic-amenities/) - दुमका: झारखंड के दुमका जिले के जामा प्रखंड के अंतर्गत गायबथान गांव के जोगियाटीकर टोला के आदिम जनजाति के करीब सत्रह परिवार कई भूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। इस टोले में लोगों के पास न पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था है और न सड़कें पक्की हैं। यह टोला पक्की सड़क दलदली से लगभग एक किलोमीटर की - [अलनीनो की आहट से डरा मानसून, भारत के सामने सूखा, गर्मी और पानी संकट का खतरा](https://climateeast.in/el-nino-threatens-monsoon-india-faces-drought-heat-and-water-crisis/) - अलनीनो कोई साधारण समुद्री घटना नहीं। यह पूरी पृथ्वी के मौसम तंत्र को प्रभावित करता है। खासकर भारत जैसे उपोष्णकटिबंधीय देशों को। अलनीनो बनने पर प्रशांत महासागर के ऊपर चलने वाला वॉकर परिसंचरण कमजोर पड़ जाता है। इसका असर यह होता है कि भारतीय उपमहाद्वीप के ऊपर उच्च दबाव बनने लगता है। नम हवा ऊपर - [चरम गर्मी से झुलसता उत्तर भारत और शहरी नियोजन की चुनौतियां](https://climateeast.in/extreme-heat-sweltering-north-india-and-the-challenges-of-urban-planning/) - गर्मी बढने के साथ देश के विभिन्न राज्यों व हिस्सों में बिजली की मांग बढने की खबरें आ रही हैं। अब आमलोगों के लिए बिजली सिर्फ विकास का प्रतीक नहीं, बल्कि चरम गर्मी से बचने का उपाय है। अब भारत की बिजली की मांग विकास नहीं, गर्मी तय कर रही है। नौतपा शुरू हो चुका - [बिजली संकट से देश बच जाए, अगर एसी की दक्षता दोगुनी हो जाए](https://climateeast.in/india-can-be-saved-from-power-crisis-if-the-efficiency-of-ac-is-doubled/) - एक नई रिपोर्ट का अनुमान है कि ज्यादा कुशल एयर कंडिशनर अगले दशक में उपभोक्ताओं को 90 हजार करोड़ करोड़ से 2.4 लाख करोड़ तक की शुद्ध बचत दे सकते हैं। शुरुआती कीमत थोड़ी ज्यादा हो सकती है, लेकिन कम बिजली बिल के जरिए दो से तीन साल में वह पैसा वापस आ सकता है। - [छह महीने से पेयजल संकट झेल रहे हैं नामोडीह पहाड़िया टोला के ग्रामीण](https://climateeast.in/villagers-in-dumka-have-been-facing-drinking-water-crisis-for-the-last-six-months/) - नामोडीह पहाड़िया टोला के 22 परिवार पिछले छह महीने से पानी की भारी किल्लत का सामना कर रहे हैं। यह गांव पहाड़िया परिवारों का है और पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए महिलाओं व बच्चों को पहाड़ी से करीब एक किलोमीटर नीचे खेत में स्थित कुएं से पानी लाना होता है। दुमका : - [भारत के आठ राज्यों के कोर हीट वेव जोन में बढ गई है गर्म हवाओं की आवृत्ति व अवधि](https://climateeast.in/frequency-and-duration-of-heatwaves-have-increased-in-the-core-heatwave-zones-of-eight-indian-states/) - भारत के आठ राज्य जिसमें राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना और महाराष्ट्र के हिस्से शामिल हैं, कोर हीटवेव जोन में आते हैं। वहां चलने वाली गर्म हवा के थपेड़े के बारे में नई रिपोर्ट चिंताजनक है। उत्तर प्रदेश के बांदा में पारा 48 डिग्री तक पहुंच चुका है। दोपहर की सड़कें - [दुनिया में सिकुड़ रहा कोयले का भूगोल, भारत-चीन में कोयला बिजली उत्पादन में नजर आ रहा बदलाव](https://climateeast.in/the-global-coal-landscape-is-shrinking-global-energy-monitor-report/) - दुनिया अजीब मोड़ पर खड़ी है। एक तरफ नए कोयला बिजलीघर अब भी बन रहे हैं। दूसरी तरफ उन्हीं देशों में कोयले से बनने वाली बिजली घट रही है। यानी प्लांट बढ़ रहे हैं, लेकिन कोयला पहले जितना जल नहीं रहा। यही तस्वीर सामने आई है Global Energy Monitor की नई रिपोर्ट Boom and Bust - [37% ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन के लिए भवन निर्माण सेक्टर जिम्मेवार, हर हफ्ते तैयार हो जा रहा एक पेरिस](https://climateeast.in/the-construction-sector-is-responsible-for-37-of-greenhouse-gas-emissions/) - दुनिया इस समय दोहरी मार झेल रही है। एक तरफ घरों की भारी कमी। दूसरी तरफ महंगी होती बिजली और ईंधन। ऐसे समय में एक नई वैश्विक रिपोर्ट ने साफ कहा है कि अगर इमारतों और घरों को जलवायु के हिसाब से नहीं बदला गया, तो आने वाले सालों में रहने की लागत और बढ़ेगी, - [अब कीटनाशक नहीं, फैक्टरी में तैयार मच्छरों से डेंगू-चिकुनगुनिया वाले मच्छरों से लड़ी जाएगी लड़ाई](https://climateeast.in/factory-grown-mosquitoes-will-be-used-to-fight-dengue-and-chikungunya-mosquitoes/) - कोलंबिया में इस प्रयोग के नतीजे काफी चौंकाने वाले रहे हैं। मेडेलीन और उसके आसपास के अबूरा घाटी इलाके में वोल्बाकिया आधारित प्रोग्राम लागू होने के बाद डेंगू के मामलों में 95 से 97 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई। दुनिया का शायद सबसे अजीब सवाल इस वक्त कोलंबिया के शहर मेडेलीन में पूछा जा - [छह दिन में छह हजार किमी की बिना रुके उड़ान, यह है अमूर बाज की तेज चाल](https://climateeast.in/amur-falcons-nonstop-flight-of-nearly-6000-km-in-six-days/) - केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने दो बाजों की बिना रुके लंबी यात्रा की जानकारी अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर शेयर की है। केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि इन बाजों को सैटेलाइट टैग पिछले साल लगाया गया था। इसके माध्यम से इनके बारे में कई और महत्वपूर्ण जानकारियां पता चली - [हॉर्मुज़ संकट ने सिखाया, जीवाष्म आधारित अर्थव्यस्था नाजुक, नवीनीकृत ऊर्जा ही भविष्य](https://climateeast.in/hormuz-crisis-has-taught-us-that-a-fossil-fuel-based-economy-is-fragile/) - मध्य पूर्व में ईरान के साथ शुरू हुए युद्ध और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में आई बाधा ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ार को हिला दिया है। एनर्जी ट्रांजिशन कमिशन की नई रिपोर्ट कहती है कि यह 1973 के अरब ऑयल एम्बार्गो के बाद सबसे बड़ा ऊर्जा झटका है। समुद्र कभी सिर्फ पानी नहीं होता। उसके भीतर व्यापार चलता - [निलगिरि मार्टेन: भारतीय मूल का एक आकर्षक जीव, जिसके परिवार में बचे हैं मात्र 1000 सदस्य](https://climateeast.in/nilgiri-marten-know-about-endangered-rare-small-mammal/) - निलगिरि मार्टेन एक ऐसा संकटग्रस्त जीव है, जिस पर काफी कम अध्ययन किया गया है और कम मीडिया रिपोर्टिंग हुई है। दक्षिण भारत में पाया जाने वाला यह जीव पूर्व में शहद के छत्तों पर हमले की वजह से लोगों के निशाने पर होता था और इसका शिकार किया जाता था, लेकिन सख्त नियमों व - [सीडब्ल्यूएस की प्रमुख डॉ कृति के करंत को रोलेक्स एक्सप्लोरर ऑफ द ईयर सम्मान](https://climateeast.in/krithi-k-karanth-named-rolex-national-geographic-explorer-of-the-year/) - डॉ कृति के करंत ने इस सम्मान को एक अविश्वसनीय सम्मान और गहरी जिम्मेदारी बताया है और कहा है कि यह मान्यता एक शक्तिशाली वैश्विक मंच प्रदान करता है। बेंगलुरु: बेंगलुरु स्थित वन्यजीवों पर अध्ययन व रिसर्च करने वाली संस्था सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ स्टडीज (CWS) की प्रमुख डॉ कृति के करंत को वर्ष 2026 का - [महात्मा बुद्ध की जन्मस्थली के निकट उद्योगों पर रोक की वजह क्या है?](https://climateeast.in/ban-on-industries-near-the-birthplace-of-mahatma-buddha-in-lumbini-nepal/) - नेपाल की सर्वोच्च अदालत ने लुम्बिनी शहर से 15 किलोमीटर के दायरे में स्थित उद्योगों को दो साल के भीतर बंद करने या स्थानांतरित करने का आदेश जारी किया है। लुम्बिनी भगवान बुद्ध की जन्मस्थली के रूप में दुनिया भर में मशहूर है और नेपाल में लुप्तप्राय प्रजाति सारस क्रेन की सबसे बड़ी आबादी का - [ग्लोबल वार्मिंग 0.26°C प्रति दशक की दर से बढ़ रही है: नई रिपोर्ट](https://climateeast.in/global-warming-increasing-at-the-rate-of-0-26c-per-decade-new-report/) - लीड्स विश्वविद्यालय द्वारा संचालित और 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक नए अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि मानव जनित ग्लोबल वार्मिंग की दर 0.26°C प्रति दशक की अप्रत्याशित गति से बढ़ रही है। यह प्रवृत्ति अब तक की सबसे ऊंची है, जो इस बात की पुष्टि करती है कि जलवायु संकट पहले - [बदलती जलवायु ने किसानों को किया नयी बागवानी पद्धतियों को अपनाने पर मजबूर](https://climateeast.in/changing-climate-forces-farmers-to-adopt-new-gardening-methods/) - ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते प्रभाव के कारण उत्तराखंड में बागवानी उत्पादन में एक महत्वपूर्ण बदलाव चल रहा है। एक समय सेब, नाशपाती, आड़ू, प्लम और खुबानी जैसे शीतोष्ण फलों की समृद्ध पैदावार के लिए प्रसिद्ध, आज इस राज्य में इन फसलों की उपज और खेती के क्षेत्र में उल्लेखनीय गिरावट देखी जा रही है। पिछले सात वर्षों में, यह प्रवृत्ति - [रिन्यूबल एनर्जी में ट्रांज़िशन को न्‍यायसंगत बनाना जरूरी: विशेषज्ञ](https://climateeast.in/it-is-important-to-make-the-transition-to-renewable-energy-equitable-experts/) - पूरी दुनिया में जलवायु परिवर्तन के विनाशकारी दुष्परिणामों के मद्देनजर भारत में रिन्यूबल एनेर्जी से जुड़े महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किये गये हैं। इसके तहत कार्बन एमिशन को खत्म करने के लिये कोयला खदानों को दीर्घकाल में बंद करना होगा। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहे हैं कि इन खदानों में काम करने वाली बड़ी - [उत्तराखंड में गर्मी के नए रिकॉर्ड, जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई संकट की स्थिति](https://climateeast.in/new-records-of-heat-in-uttarakhand-climate-change-increases-the-crisis-situation/) - उत्तराखंड ने पिछले दो महीनों में चरम मौसम की स्थितियों का सामना किया है। जून में जहां अधिकतम तापमान ने रिकॉर्ड तोड़े, वहीं जुलाई में मूसलधार मानसूनी बारिश ने बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति पैदा कर दी। 1 जून से 10 जुलाई तक उत्तराखंड में कुल बारिश 328.6 मिमी दर्ज की गई, जो सामान्य 295.4 मिमी से 11% अधिक है। जलवायु वैज्ञानिकों के अनुसार, इन चरम मौसम की - [वाराणसी: 2023 में वायु गुणवत्ता मानकों को पूरा करने वाला इकलौता भारतीय शहर](https://climateeast.in/varanasi-the-only-indian-city-to-meet-air-quality-standards-by-2023/) - एक उल्लेखनीय उपलब्धि में, भारत के अपेक्षाकृत अधिक प्रदूषित सिंधु-गंगा के मैदानी क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद, मंदिरों की नगरी वाराणसी साल 2022-23 और 2023-24 दोनों के सर्दियों के महीनों के दौरान पीएम 2.5 स्तरों के लिए राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप रही। इस उपलब्धि के साथ वाराणसी प्रमुख भारतीय शहरों के बीच पर्यावरणीय प्रगति का एक चमकदार उदाहरण बनकर खड़ा हो गया है। - [वायनाड त्रासदी: जलवायु परिवर्तन की नज़र से](https://climateeast.in/wayanad-tragedy-through-the-lens-of-climate-change/) - केरल के वायनाड ज़िले में, ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, डेढ़ सौ से ज़्यादा भरी बारिश के कारण हुए भूस्खलन में अपनी जान गंवा चुके हैं। वायनाड जिला लगातार मॉनसून बारिश के कारण हुए भूस्खलन से बर्बादी का सामना कर रहा है। 30 जुलाई की शुरुआती घंटों में, कई जगह हुए भूस्खलन ने जिले के कई - [केरल भूस्खलन: जलवायु परिवर्तन से बढ़ी आपदा की तीव्रता, विशेषज्ञों ने दी कठोर मूल्यांकन की सलाह](https://climateeast.in/kerala-landslide-intensity-of-disaster-increased-due-to-climate-change-experts-advised-rigorous-assessment/) - केरल के वायनाड जिले में हाल ही में हुए घातक भूस्खलनों की मुख्य वजह बनी भारी बारिश, जिसे मानव-जनित जलवायु परिवर्तन ने 10% अधिक तीव्र बना दिया था। वर्ल्ड वेदर एट्रीब्यूशन (डब्ल्यूडब्ल्यूए) के प्रमुख वैज्ञानिकों द्वारा की गई एक त्वरित विश्लेषण में यह जानकारी सामने आई है। डब्ल्यूडब्ल्यूए की रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर - [जलवायु जोखिम झेलने वाले देश सौर ऊर्जा अपनाने में विकसित देशों से आगे : रिपोर्ट](https://climateeast.in/climate-vulnerable-countries-outpace-developed-nations-in-adopting-solar-energy-ember-report/) - रिपोर्ट बताती है कि 2024 में इन देशों ने 155 अरब डॉलर सिर्फ फॉसिल फ्यूल आयात पर खर्च किए। अगर तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहती है, तो यह बिल और 30 अरब डॉलर बढ़ सकता है। यानी फॉसिल फ्यूल सिर्फ पर्यावरण का नहीं, अर्थव्यवस्था का भी बोझ है। और, इसका - [मोहनपुर गांव में शुरू हुई साप्ताहिक मांझी थान पूजा, संस्कृति व परंपरा को सहेजने का प्रयास](https://climateeast.in/weekly-manjhi-than-puja-started-in-mohanpur-village-in-dumka-district-of-jharkhand/) - दुमका: दुमका जिले के रानीश्वर प्रखंड के मोहनपुर गांव में समाजसेवी सच्चिदानंद सोरेन, आनंद टुडू, संजय मुर्म की संयुक्त पहल पर गांव के लेखा होड़ (गांव को संचालित करने वाले) तथा ग्रामीणों ने संताल आदिवासी समुदाय द्वारा अपने पारंपरिक पूजा स्थल मांझी थान में साप्ताहिक पूजा की शुरुआत की। इस अवसर पर गांव के महिला, - [जलवायु परिवर्तन की चपेट में पशुओं के प्राकृतिक आवास](https://climateeast.in/natural-habitats-of-animals-vulnerable-to-climate-change/) - उत्सर्जन पर काबू नहीं पाया गया, तो 2050 तक दुनिया के 74 प्रतिशत जानवरों के आवास हीटवेव का सामना करेंगे जंगल हमेशा से बदलते रहे हैं। मौसम भी। लेकिन अब जो बदल रहा है, वह रफ्तार है, और पैटर्न है। अब खतरा धीरे-धीरे बढ़ती गर्मी का नहीं, बल्कि एक के बाद एक आने वाले झटकों - [क्या गर्मी ने भी भड़काया नोएडा में मज़दूरों का गुस्सा, क्या कहते हैं विशेषज्ञ?](https://climateeast.in/did-the-heat-also-provoke-the-anger-of-workers-in-noida-what-do-experts-say/) - 13 अप्रैल 2026। नोएडा के औद्योगिक सेक्टरों में भीड़ उमड़ी। सेक्टर 60, 62, 84 की सड़कों पर हजारों मजदूर। मांगें साफ थीं, बेहतर वेतन, तय काम के घंटे, ओवरटाइम का हिसाब। चार दिन तक तनाव बढ़ा, हालात बिगड़े, और फिर सरकार ने अंतरिम वेतन वृद्धि की घोषणा की। यह कहानी यहीं तक सुनाई गई। लेकिन, - [संताल समाज के बीच ओलिचिकी जागरूकता अभियान, नामपट्ट में लिपि के प्रयोग की मांग](https://climateeast.in/ol-chiki-awareness-campaign-within-the-santhal-community-in-dumka-district-of-jharkhand/) - संताल समाज के लोगों का कहना है कि संताली भाषा व ओलचिकी लिपि में स्कूली शिक्षा मिलने से ड्रापआउट को कम करने में मदद मिलेगी। दुमका: दुमका जिले के रानीश्वर प्रखंड के कठालिया गांव में लेखा होड़ (संताल गांव संचालक) की पहल पर कुल्ही दुरुप(बैठक) आयोजित कर ओलचिकी जागरूकता अभियान चलाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता - [डरावने मोड़ पर पहुंचे अमेजन के जंगल, टूट रहा बारिश का जलचक्र](https://climateeast.in/amazon-rainforest-reaches-a-terrifying-tipping-point-the-rainfall-cycle-is-breaking-down/) - अमेजन के 17 से 18 प्रतिशत जंगल खत्म हो गए हैं। यह स्थिति खतरे वाले दायरे के काफी करीब है और इस बदलाव की वजह से बारिश का चक्र प्रभावित हुआ है। अमेज़न के जंगल को अक्सर “धरती के फेफड़े” कहा जाता है। लेकिन अब वैज्ञानिक कह रहे हैं कि ये फेफड़े सिर्फ कमजोर नहीं - [रांची भी अर्बन हीट आइलैंड बनने के करीब, सूचना व संवाद के लिए मीडिया बने पुल](https://climateeast.in/ranchi-is-on-the-verge-of-becoming-an-urban-heat-island/) - जलवायु विषयों पर काम करने वाली संस्था असर व रांची प्रेस क्लब ने संयुक्त रूप से हीटवेव या चरम गर्मी पर एक कार्यशाला का आयोजन किया, जिसमें जलवायु वैज्ञानिक, चिकित्सक, पर्यावरणविद व पत्रकार शामिल हुए। रांची: असर सोशल इम्पैक्ट एडवायजर्स और रांची प्रेस क्लब के साझा प्रयासों से “हीट वेव जागरूकता एवं प्रतिक्रिया” विषय पर - [मीथेन की उपयोगिता बढा कर 200 बिलियन क्यूबिक मीटर एलएनजी बचाना संभव](https://climateeast.in/it-is-possible-to-save-200-billion-cubic-meters-of-lng-by-enhancing-the-utility-of-methane/) - इंटनेशनल एनर्जी एजेंसी की ग्लोबल मेंटेनेंस ट्रैकर रिपोर्ट बताती है कि 2025 में ऊर्जा क्षेत्र से मीथेन उत्सर्जन लगभग रिकॉर्ड स्तर पर बने रहे। मौजूदा तकनीक का प्रयोग कर इसकी उपयोगिता बढायी जा सकती है। दुनिया इस वक्त ऊर्जा संकट और जलवायु संकट, दोनों के बीच खड़ी है। एक तरफ गैस की कमी की चिंता - [हेमंत सोरेन ने जनगणना में सरना धर्म कोड कॉलम शामिल करने के लिए राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री को लिखा पत्र](https://climateeast.in/hemant-soren-writes-to-president-and-prime-minister-to-include-sarna-religion-code-column-in-census/) - झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सरना धर्म कोड को लेकर अपनी पुरानी मांग को दोहराया है और देश में होने जा रही जनगणना में इससे संबंधित कॉलम शामिल करने की मांग की है। रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व - [शिकारीपाड़ा के बलीजोर गांव में शुरू हुई साप्ताहिक मांझी थान पूजा, शामिल हुए ग्रामीण](https://climateeast.in/weekly-manjhi-than-puja-started-in-balijor-village-of-shikaripara-dumka/) - ऐसा आयोजन संताल समाज का धार्मिक व सांस्कृतिक पुनर्जागरण का मौका है, ग्रामीण इसमें उत्साह से शामिल हो रहे हैं। दुमका: झारखंड के दुमका जिले के शिकारीपाड़ा प्रखंड के बलीजोर गांव में संताल आदिवासी समुदाय ने सापतहिक मांझी थान पूजा शुरू की। सामान्यतः संताल आदिवासी समाज में साप्ताहिक मांझी थान पूजा की परंपरा नहीं रही - [पंडित रघुनाथ मुर्मू की जयंती पर संताल अस्मिता का जश्न, कई गांवों व शिक्षा संस्थानों में कार्यक्रम का आयोजन](https://climateeast.in/celebration-of-santal-identity-on-the-birth-anniversary-of-pandit-raghunath-murmu/) - एक मई को पंडित रघुनाथ मुर्मू की 101वीं जयंती मनायी गयी। पंडित रघुनाथ मुर्मू का जन्म ओडिशा के मयूरभंज जिले में हुआ था और उन्होंने मात्र 20 वर्ष की उम्र में संताली भाषा के लिए ओलिचिकी लिपि का आविष्कार किया, जिसे अब वैश्विक स्तर पर मान्यता मिली हुई है। दुमका: झारखंड के दुमका जिले के - [जलवायु की बात आम बोलचाल में स्वास्थ्य से जोड़ कर समझाना बेहतर, तकनीक में लोगों को न उलझाएं](https://climateeast.in/explain-climate-issues-in-a-casual-conversation-by-relating-them-to-health/) - क्लाइमेट ऑपिनियन रिसर्च एक्सचेंज द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह तथ्य सामने आया कि लोगों के स्वास्थ्य से जलवायु परिवर्तन की व्याख्या करने व उसके बारे में समझाने पर वे आसानी से बातों को समझते हैं और इसे आमलोगों का समर्थन मिलता है। जलवायु परिवर्तन को समझाने के कई तरीके हैं। तापमान, कार्बन, ग्लेशियर, - [बाघों के संरक्षण के लिए सिर्फ शिकार उपलब्धता नहीं, सुरक्षित गलियारा व टकराव कम करना जरूरी](https://climateeast.in/tiger-conservation-not-just-prey-availability-safe-corridors-and-reducing-conflict-is-essential/) - तेलंगाना के कवल टाइगर रिजर्व में वर्ष 2010 से 2022 सात बार किए गए सर्वेक्षण पर आधारित अध्ययन में कहा गया है कि केवल शिकार की पुनर्बहाली कवल बाघ अभ्यारण्य में बाघों की वापसी में प्राथमिक बाधा नहीं है, बल्कि कमजोर वन्यजीव गलियारा संपर्क और मानव वन्यजीव संघर्ष महत्वपूर्ण कारक हैं। बेंगलुरु : सेंटर फॉर - [माचखिचा गांव में शुरू हुई साप्ताहिक बोंगा बुरु, संताल युवाओं में जागरूकता की पहल](https://climateeast.in/weekly-santal-bonga-buru-started-in-machkhicha-village-in-dumka-jharkhand/) - दुमका: दुमका प्रखंड के माचखिचा गांव के लेखा होड़ (संताल गांव संचालक) की पहल पर ग्रामीणों द्वारा पारंपरिक पूजा स्थल मांझी थान मांझी स्थान में साप्ताहिक पूजा की शुरुआत की गई है। ऐसा आयोजन बीते रविवार यानी 26 अप्रैल को हुआ। इस अवसर पर गांव के महिला, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चों ने सामूहिक रूप से - [दुनिया ये 100 सबसे गर्म शहरों में 97 भारत से, अब रात की गर्मी भी एक खतरा](https://climateeast.in/97-of-the-worlds-100-hottest-cities-are-in-india/) - हमारे शहर अब अर्बन हीट आइलैंड बन रहे हैं। पिछले चार दशकों में भारत का औसत तापमान लगभग 0.5 से 0.9 डिग्री तक बढ़ा है। यह स्थिति अब हीटवेव को तेज बना रही है। अप्रैल की दोपहर है। सड़क पर हवा चल रही है, लेकिन ठंडक नहीं, जैसे किसी ने गर्म हवा को ही पंखे - [असम या बंगाल कहां है चाय मजदूरों के लिए बेहतर व्यवस्था, जमीनी कार्यकर्ताओं से समझिए](https://climateeast.in/assam-or-west-bengal-where-tea-workers-get-better-facilities/) - असम व पश्चिम बंगाल, ये दो राज्य भारत के सबसे बड़े चाय बागान इलाके हैं। असम व पश्चिम बंगाल संयुक्त रूप से देश के 75 से 80 प्रतिशत चाय बागान क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। टीमएसी शासित पश्चिम बंगाल और भाजपा शासित असम के चाय बागानों व वहां के मजदूरों की स्थिति की चुनाव में - [पृथ्वी दिवस पर विशेष: ग्लोबल वार्मिंग से कैसे खतरे में हैं समुद्र के अंदर बसे जीव?](https://climateeast.in/earth-day-how-are-marine-life-endangered-by-global-warming/) - आज यानी 22 अप्रैल 2026 को पृथ्वी दिवस है। इस मौके पर जानिए समुद्री जीवन पर बढता संकट कैसे हम सबके लिए परेशानी की वजह बनता जा रहा है… रजत मुखर्जी का आलेख आज विश्व उष्णायन से सभी प्रभावित हैं - मानव, पशु,-पक्षी, पेड़-पौधे। मनुष्य इससे निबटने की तैयारी में लगा है, लेकिन अन्य प्राणियों - [कौरशिला गांव के मांझी थान में शुरू हुई साप्ताहिक पूजा, मरांग बुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त](https://climateeast.in/weekly-puja-begins-at-manjhi-than-in-kaurshila-village-in-dumka/) - संतालों की नई पीढी को परंपरा से जोड़ने की पहलदुमका : झारखंड के दुमका जिले के रानीश्वर प्रखंड के कौरशिला गांव के लेखा होड़ (संताल गांव संचालक) की पहल पर ग्रामीणों द्वारा पारंपरिक पूजा स्थल मांझी थान में साप्ताहिक पूजा की 19 अप्रैल 2026 को शुरुआत की गई। इस अवसर पर गांव के महिला, पुरुष, - [निजी आर्थिक लाभ वाले वृक्षारोपण के प्रति किसानों का आकर्षण ज्यादा: अध्ययन](https://climateeast.in/understanding-farmers-multi-dimensional-preferences-for-trees-in-india/) - अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ डैनी टोबिन कहते हैं, "यह अध्ययन दर्शाता है कि निजी भूमि पर पेड़ लगाने की पहलें, जिन्हें नागरिक समाज और सार्वजनिक संस्थाएं आगे बढ़ाती हैं, भूमि धारकों, जैसे किसानों के साथ संवाद स्थापित करके अपने डिज़ाइन में सुधार कर सकती हैं। बेंगलुरु: एक नए अध्ययन से पता चलता है कि - [संताल गांवों में बुजुर्गाें की संख्या नशे की वजह से हो रही कम, इसलिए सांस्कृतिक चेतना लाना जरूरी](https://climateeast.in/the-number-of-elderly-people-in-santal-villages-is-decreasing-due-to-drug-addiction/) - कई आदिवासी इलाकों में नशापान सबसे बड़ी समस्या है। इसके बाद लोगों के बीचं स्वास्थ्य जागरूकता व संसाधन की भी कमी जैसी समस्याएं हैं। संताल समाज को उनकी परंपराओं से जोड़ने के लिए सच्चिदानंद सोरेन पिछले कुछ सालों से अभियान चला रहे हैं। दुमका (झारखंड): समाजसेवी सच्चिदानंद सोरेन द्वारा विभिन्न आदिवासी गांवों में कुल्ही दुरुप(बैठक) - [हॉर्मुज़ संकट के बीच सौर व पवन ऊर्जा ने संभाली दुनिया की बिजली](https://climateeast.in/solar-and-wind-energy-take-over-the-worlds-electricity-amid-the-hormuz-crisis/) - पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर आई रुकावट ने दुनिया की ऊर्जा सप्लाई को झकझोर दिया। यह वही रास्ता है जहां से वैश्विक एलएनजी का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे हर संकट में एक पुराना डर लौट आता है, क्या दुनिया फिर से कोयले की तरफ भागेगी? लेकिन इस बार कहानी - [मधु चाय बागान: अधिकारियों के साथ वार्ता का लिखित न्यौता मिलने के बाद खत्म हुआ आंदोलन](https://climateeast.in/madhu-tea-garden-protest-ends-after-receiving-written-invitation-for-talks-with-officials/) - 28 जनवरी को डुअर्स कन्या (अलीपुरद्वार जिले का समाहरणालय) में चाय बागान मजदूरों के साथ अधिकारी उनकी मांगों व मुद्दे पर वार्ता करेंगे। मजदूर अधिकारियों के वार्ता के लिए तैयार होने को अपनी सफलता मान रहे हैं। अलीपुरद्वार: चाय मजदूरों के संघर्ष की कड़ी में 20 जनवरी 2026 का दिन महत्वपूर्ण रहा। 28 जनवरी को - [कठालिया गांव में संताल आदिवासियों ने शुरू की साप्ताहिक बोंगा बुरु](https://climateeast.in/santal-tribals-in-kathalia-village-of-dumka-district-started-the-weekly-bonga-buru/) - दान में आने वाले पैसों का दुरुपयोग नहीं करने की दी गयी सलाह। सार्वजनिक धन का सही कार्याें में ग्रामीण करेंगे उपयोग। दुमका: झारखंड के दुमका जिले के रानीश्वर प्रखंड के कठालिया गांव में समाजसेवी सच्चिदानंद सोरेन, आनंद टुडू, अर्जुन मुर्मू की संयुक्त पहल पर गांव के लेखा होड़ (गांव को संचालित करने वाले) तथा - [परमाणु ऊर्जा की नई सुबह : भारत ने ईंधन खत्म होने के डर को दी चुनौती](https://climateeast.in/india-achieved-stunning-success-at-the-kalpakkam-nuclear-plant/) - तमिलनाडु के कल्पक्कम में समुद्र के किनारे खड़ा एक रिएक्टर, बाहर से देखने पर किसी और पावर प्लांट जैसा ही लगता है। लेकिन 6 अप्रैल 2026 को यहां कुछ ऐसा हुआ, जिसने भारत की ऊर्जा कहानी को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया। Prototype Fast Breeder Reactor ने “पहली क्रिटिकलिटी” हासिल की। आसान भाषा - [पश्चिम बंगाल चुनाव में उतरे राजनीतिक दलों को नहीं है मछुआरों की चिंता](https://climateeast.in/political-parties-contesting-the-west-bengal-elections-are-not-concerned-about-fishermen/) - पश्चिम बंगाल के मछुआरे लगातार हाशिये पर धकेले जा रहे हैं। इसके खिलाफ वे कई क्षेत्रों में मुद्दा आधारित लड़ाइयां लड़ रहे हैं। ऐसा ही एक संघर्ष कुलतली ब्लॉक में चल रहा है। मिलन दास कुलतली (सुंदरबन) : सुंदरबन इलाके में गुरगुरिया के मछुआरों पर वन विभाग का ज़ुल्म दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। इस - [समुद्र के बढते स्तर पर क्या हैं द लैंसेट के कमीशन का प्रमुख सुझाव?](https://climateeast.in/a-lancet-commission-on-sea-level-rise-health-and-justice/) - सदी के अंत तक 41 करोड़ लोग ऐसे इलाकों में रह सकते हैं जो हाई टाइड के स्तर से नीचे होंगे। यानी हर ज्वार के साथ खतरा उनके दरवाजे तक आएगा। सुबह का वक्त है। किसी तटीय गांव में लोग रोज़ की तरह अपने काम पर निकल रहे हैं। लेकिन अब पानी पहले से थोड़ा - [घर बनने वक्त तय हो जाता है कार्बन कर्ज, बिल्डिंग सेक्टर को डिकार्बानाइज करना चुनौती](https://climateeast.in/making-decarbonizing-the-building-sector-a-challenge/) - जब हम नया घर बनाते हैं, तो अक्सर सोचते हैं कि बिजली का बिल कितना आएगा, AC कितना चलेगा, या घर कितना ठंडा रहेगा। लेकिन एक सच्चाई ऐसी भी है, जो घर बनते ही शुरू हो जाती है, और दिखती नहीं। वो है उस घर में “छिपा हुआ कार्बन”। ग्रीनटेक नॉलेज सॉल्यूशंस (Greentech Knowledge Solutions) - [डुहुमुर्गा गांव में संताल आदिवासियों ने साप्ताहिक पूजा की शुरुआत की, युवा पीढी में नैतिक मूल्य बढाने पर जोर](https://climateeast.in/santal-tribals-in-duhumurga-village-begin-weekly-pujas-focus-on-inculcating-moral-values-in-the-younger/) - संताल आदिवासी गांवों में साप्ताहिक पूजा के आयोजन के जरिए समाजसेवी सच्चिदानंद सोरेन समाज के लोगों की धार्मिक, सांस्कृतिक चेतना बढाने की कोशिश कर रहे हैं और ऐसे आयोजन के जरिए नई पीढी में अच्छे जीवन मूल्य लाने का प्रयास हो रहा है। रानीश्वर(दुमका) : झारखंड के दुमका जिले के रानीश्वर प्रखंड के डुहुमुर्गा गांव - [गुजरात के कच्छ में एक दशक बाद ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के चूजे का जन्म](https://climateeast.in/successful-hatching-of-great-indian-bustard-chick-in-gujarat-after-a-decade/) - अंतर राज्यीय संरक्षण प्रयासों से गुजरात में एक दशक बाद ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के चूजे को सफलता पूर्वक अंडे से निकाला गया। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इसे इस लुप्तप्राय पक्षी के संरक्षण प्रयास की दिशा में एक बड़ी सफलता बताते हुए आगे के कदमों का उल्लेख किया है। नई - [धीमी पड़ी एमिशन की रफ्तार, क्या भारत एनर्जी ट्रांजिशन के मोड़ पर है?](https://climateeast.in/emissions-have-slowed-down-is-india-on-the-cusp-of-an-energy-transition/) - 2025 में ऊर्जा क्षेत्र के उत्सर्जन 3.8% तक घट गए, जिसकी मुख्य वजह रिकॉर्ड स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ोतरी और अपेक्षाकृत कमजोर बिजली मांग रही। भारत की अर्थव्यवस्था के साथ उत्सर्जन के तेजी से बढ़ने का जो पुराना पैटर्न रहा है, उसमें 2025 एक अलग संकेत लेकर आया है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी - [प्रवासी वन्यजीवों के शिकार के खिलाफ वैश्विक पहल पर सहमति](https://climateeast.in/global-initiative-on-the-taking-of-migratory-species/) - वन्यजीवों की प्रवासी प्रजातियों के शिकार पर एक वैश्विक पहल पर ब्राजील में जारी सीएमएस-कॉप 15 में सहमति बनी है। इस पहल में मूल निवासियों और स्थानीय समुदायों को शामिल किया जाएगा ताकि समुदाय के नेतृत्व वाले समाधानों को बढ़ावा दिया जा सके। कैम्पो ग्रांडे (ब्राजील) : वन्यजीवों की प्रवासी प्रजातियों के शिकार पर एक - [भारत का जलवायु लक्ष्य: तेल संकट के बीच सरकार की संतुलित चाल](https://climateeast.in/cabinet-approves-indias-nationally-determined-contribution-2031-203/) - वैश्विक तेल व गैस संकट के बीच भारत सरकार ने एनडीसी - 3 को मंजूरी दी है। भारत ने 2005 के स्तर से 2035 तक अपने सकल घरेलू उत्पादकी उत्सर्जन तीव्रता को 47 प्रतिशत तक कम करने का संकल्प लिया है। दिल्ली में कैबिनेट की एक बैठक खत्म होती है। बाहर दुनिया में हालात अलग - [सीएमएस सूची : 49 प्रतिशत प्रजातियों की जनसंख्या में गिरावट, एक चौथाई संकटग्रस्त](https://climateeast.in/49-percent-of-all-cms-listed-species-have-decreasing-population-trends/) - सीएमएस में सूचीबद्ध 24 प्रतिशत प्रजातियां वैश्विक स्तर पर संकटग्रस्त हैं, पिछली रिपोर्ट में यह प्रतिशत 22 था। यानी संकट और बढा है। दुनिया भर में प्रवासी प्रजातियों का संकट बढता जा रहा है। स्टेट ऑफ द वर्ल्डस माइग्रेटरी स्पेसिज की दूसरी रिपोर्ट State of The World’s Migratory Species Interim Report (2026) से यह पता - [गुजरात के मछुआरा समाज ने अब जलमार्ग प्राधिकरण से की नर्मदा में अवैध खनन की शिकायत](https://climateeast.in/gujarat-fishermen-community-has-complained-to-the-inland-waterways-authority-about-illegal-sand-mining-in-narmada-river/) - भरूच जिले के मच्छीमार समाज ने गुजरात सरकार के विभिन्न विभागों व अधिकारियों को पत्र लिखने के बाद अब भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) को पत्र लिख कर अवैध रेत खनन का मुद्दा उठाया है। यह क्षेत्र जलमार्ग - 73 है और यह प्राधिकरण के नियंत्रण में आता है। भरूच (गुजरात) : गुजरात के भरूच - [दुमका: खड़ीबाड़ी गांव के पहाड़िया आदिम जनजाति परिवार झरना का पानी पीने को मजबूर](https://climateeast.in/ahadia-tribal-families-of-dumkas-khadibari-village-are-forced-to-drink-polluted-water/) - खड़ीबाड़ी गांव के पहाड़िया टोला में सारे चापानल खराब, दो सोलर टंकी में एक बंद, एक ठीक से नहीं कर रहा है काम गोपीकांदर (दुमका) : झारखंड के दुमका जिले के गोपीकांदर प्रखंड अंतर्गत खड़ीबाड़ी गांव के पहाड़िया टोला के लोग पीने के पानी के गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। इस टोला में - [तेल संकट पर इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की नई रिपोर्ट आमलोगों को क्या सुझाव देती है?](https://climateeast.in/new-iea-report-highlights-options-to-ease-oil-price-pressures-on-consumers/) - इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने आमलोगों को तेल व गैस बचाने और वैकल्पिक उपाय से समाधान पाने के लिए कुछ आसान सुझाव दिए हैं, जिसे अपना कर आप न सिर्फ खुद की ईंधन के अन्य स्रोतों पर निर्भरता को कम कर सकते हैं, बल्कि मौजूदा वैश्विक संकट को कम करने में भी थोड़ा योगदान दे सकते - [झारखंड में 25 साल बाद पेसा लागू, फिर भी समुदाय व जन संगठनों के क्यों हैं सवाल?](https://climateeast.in/pesa-implemented-in-jharkhand-after-25-years-yet-why-are-still-questioning-on-it/) - झारखंड गठन के करीब ढाई दशक बार राज्य में पहली बार पेसा नियमावली को लागू किया गया है। लेकिन, इस नियमावली के कई प्रावधानों को लेकर बहस तेज हो गई है। एक पक्ष का आरोप है कि शब्दों के हेर-फेर से पेसा कानून कमजोर हो गया है। वहीं दूसरा पक्ष नियमावली के सकारात्मक पक्षों को - [दिखने लगा EVs का असर, 2025 में ईरान के 70% निर्यात के बराबर तेल की बचत](https://climateeast.in/impact-of-evs-is-visible-saving-the-equivalent-of-70-percent-of-iran-oil-exports-by-2025/) - दुनिया की सड़कों पर एक शांत बदलाव चल रहा है, और अब उसके असर आंकड़ों में साफ दिखने लगे हैं। 2025 में वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहनों ने मिलकर करीब 1.7 मिलियन बैरल प्रति दिन तेल की खपत टाल दी, जो लगभग ईरान के कुल तेल निर्यात के 70% के बराबर है। यह आकलन ग्लोबल - [हॉर्मुज़ की हलचल से खेतों तक पहुंचा संकट, भारत की उर्वरक निर्भरता पर बड़ा सवाल](https://climateeast.in/indias-fertilizer-dependence-and-strait-of-hormuz-poses-a-crisis/) - भारत पहले से ही उर्वरकों पर भारी सब्सिडी खर्च कर रहा है। ऐसे में अगर गैस महंगी होती है, तो सरकार पर वित्तीय दबाव और बढ़ेगा। यानी एक तरफ आयात निर्भरता, दूसरी तरफ बढ़ती सब्सिडी, दोनों मिलकर सिस्टम को और अस्थिर बनाते हैं। रातों-रात कुछ नहीं बदलता। लेकिन, दुनिया की सबसे अहम समुद्री गलियों में - [1970 के बाद से दुनिया भर में मीठे पानी की प्रवासी मछलियों की आबादी में 81 प्रतिशत की गिरावट](https://climateeast.in/hundreds-of-migratory-fishes-species-need-urgent-coordinated-cross-border-collaboration-cms-report/) - मीठे पानी की मछलियां सबसे अधिक संकटग्रस्त कशेरुकी जीव हैं। कई प्रवासी प्रजातियां एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए कनेक्टिविटी के नुकसान, पानी के बहाव में बदलाव, आवास विखंडन, दोहन, प्रदूषण और सीमा पार दबाव के कारण कम होते जा रही हैं। ऐसे में प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर अंतरराष्ट्रीय संधि (सीएमएस-Convention - [ईरान तनाव से ऊर्जा चिंता बढ़ी, आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना क्यों जरूरी है?](https://climateeast.in/iran-us-war-raise-energy-concerns-and-dependence-on-fossil-fuels/) - इंस्टीट्यूट फ़ॉर एनर्जी इकनॉमिक्स एंड फाइनेंशियल एनालिसिस ने अपनी एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि अगर आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम नहीं की गई तो ऐसे झटके अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे ऊर्जा बाज़ार पर दिखने लगा है। ईरान के आसपास - [युद्ध और LNG दांव दक्षिण एशिया के सामने 107 अरब डॉलर का सवाल](https://climateeast.in/war-and-lng-south-asia-is-increasing-investment-in-the-petroleum-sector/) - दुनिया के ऊर्जा बाज़ार इस समय अस्थिरता के दौर से गुजर रहे हैं। मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव, ईरान पर अमेरिकी और इज़राइली हमलों और होरमुज़ जलडमरूमध्य में शिपिंग बाधाओं ने तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई को एक बार फिर अनिश्चित बना दिया है। इसी बीच एक नई रिपोर्ट चेतावनी देती है कि - [कोयला खत्म, कहानी नहीं: नेयवेली की खदानों में शुरू हुआ दूसरा जीवन](https://climateeast.in/neyveli-coal-mines-begin-a-second-life/) - मयूरी सिंह तमिलनाडु के कड्डालोर ज़िले में नेयवेली के आसपास का इलाका आज भी उस इंडस्ट्रियल दौर की कहानी सुनाता है जिसने कई दशकों तक भारत की एनर्जी व्यवस्था को चलाया। दूर तक फैले खुले गड्ढे, सीढ़ीनुमा मिट्टी के ढलान, और मशीनों से तराशी हुई ज़मीन यह याद दिलाती है कि लिग्नाइट माइनिंग ने इस - [मध्य पूर्व संकट से अमेरिकी एलएनजी कंपनियों की कमाई कैसे बढ़ रही है?](https://climateeast.in/how-is-the-middle-east-crisis-affecting-the-earnings-of-us-lng-companies/) - मध्य पूर्व के संकट से अमेरिकी एलएनजी निर्यातकों का मुनाफा बढ गया है। एक विश्लेषण के अनुसार, इससे अमेरिकी एलएनजी निर्यातकों को प्रति सप्ताह 870 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त मार्जिन मिल सकता है। संकट जितना लंबा चलेगा, उनकी कमाई उतनी बढेगी। दुनिया में युद्ध सिर्फ़ मोर्चों पर नहीं लड़ा जाता ।कई बार उसका सबसे गहरा - [भारत कार्बन कनक्लेव में समुदाय केंद्रित जलवायु समाधान पर जोर](https://climateeast.in/bharat-carbon-conclave-calls-for-community-centred-climate-solutions/) - भारत कार्बन कनक्लेव में इस बात पर जोर दिया गया कि 'समुदाय को बाद की चीज' समझने के बजाय किसी परियोजना की दीर्घकालिकता के लिए उन्हें मुख्य ड्राइवर के रूप में देखना जरूरी है। नई दिल्ली: भारत कार्बन कनक्लेव 2026 में एक उच्च स्तरीय पैनल चर्चा में समुदाय केंद्रित जलवायु समाधानों को तलाशने पर विमर्श - [सिर्फ धुआँ नहीं, मौसम भी बढ़ा रहा शहरों की हवा में जहर, नई रिसर्च में खुलासा](https://climateeast.in/weather-is-also-increasing-the-toxicity-of-urban-air-climate-trends-study/) - भारत के बड़े शहरों में बढ़ते प्रदूषण को अक्सर सिर्फ उत्सर्जन का नतीजा माना जाता है। गाड़ियों का धुआँ, उद्योगों का धुआँ, कूड़ा जलाना। मगर एक नई स्टडी बताती है कि कहानी इससे कहीं ज़्यादा जटिल है। दरअसल कई शहरों में हवा की गुणवत्ता सिर्फ इस बात से तय नहीं होती कि कितना प्रदूषण निकल - [डिजिटल कॉमन्स की नेटवर्क के बीच उपलब्धता से पर्यावरण व स्थानीय शासन में बढेगी उपयोगिता](https://climateeast.in/digital-commons-conference-2026-experts-call-for-robust-digital-commons-ecosystem-for-india/) - दिल्ली में आयोजित दो दिनों का डिजिटल कॉमन्स कान्फ्रेंस मंगलवार को संपन्न हो गया। चर्चा के दौरान यह सहमति बनी कि डेटा की एक नेटवर्क के बीच उपलब्धता हो जिससे पर्यावरण व स्थानीय शासन में उसकी उपयोगिता बढे और अच्छे परिणाम आएं। नई दिल्ली: नौ एवं 10 मार्च 2026 को नई दिल्ली में आयोजित डिजिटल - [डिजिटल कॉमन्स की जलवायु कार्रवाइयों में अहम भूमिका](https://climateeast.in/digital-commons-conference-2026-digital-commons-plays-a-vital-role-in-climate-action/) - दिल्ली में नौ एवं 10 मार्च को डिजिटल कॉमन्स पर दो दिन की कार्यशाला आयोजित की गई है। इस कान्फ्रेंस में हुए संवाद में यह तथ्य उभर कर सामने आया कि डिजिटल डेटा और टेक्नोलॉजी जलवायु कार्रवाई, पुनर्भरण और समुदाय की अगुवाई वाले विकास से संबंधित फैसले लेने में अहम भूमिका निभाते हैं। नई दिल्ली: - [गुजरात: लो-टाइड में फंसी दो डॉल्फिन, लोगों ने ऐसे उन्हें सुरक्षित समुद्र में पहुंचाया](https://climateeast.in/two-dolphins-trapped-in-low-tide-at-dahej-port-in-gujarat-rescued-safely/) - गुजरात के भरूच जिले के दहेज में जेटी पर काम कर रहे कर्मियों ने लो टाइड की वजह से कम पानी में फंसी दो डॉल्फिन का सुरक्षित रेस्क्यू किया। स्थानीय कर्मियों के द्वारा इस संकटग्रस्त प्रजाति की जान बचाने के लिए किए गए प्रयास की सराहना हो रही है। दहेज/भरूच (गुजरात) : गुजरात के भरूच - [गुलामसुली गांव में संतालों की साप्ताहिक पूजा की शुरुआत, संस्कृति को बचाए रखने की कोशिश](https://climateeast.in/weekly-santal-prayers-begin-in-gulamsuli-village-in-dumka-district/) - संताल आदिवासियों ने सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के उद्देश्य से साप्ताहिक मांझी थान पूजा शुरू की, जिसे लोग संगठित हो सकें, नई पीढी में अच्छे मूल्य आ सकें और वे अपनी परंपरा को समझें दुमका (झारखंड) : दुमका जिले के रानीश्वर प्रखंड के गुलामसुली गांव के छोटा गुलामसुली टोला में गांव के लेखा होड़ - [पर्यावरण पत्रकारिता की दुनिया में ‘हम’ महिला पत्रकार](https://climateeast.in/why-women-participation-in-environment-journalism-is-important-by-varsha-singh/) - आठ मार्च यानी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर पत्रकार वर्षा सिंह बता रही हैं कि पर्यावरण पत्रकारिता और इसमें महिलाओं की हिस्सेदारी क्यों जरूरी है। संपादकीय टीम में नेतृत्व के पदों पर उनकी उपस्थिति क्यों अहम है और दूर-दराज के क्षेत्र से ग्राउंड रिपोर्ट कवर करने के दौरान क्या चुनौतियां हैं। “बिना चाँदणी देखे, - [नदियों पर संवाद में उसके संसाधन का मुद्दा गौण, उसे केंद्र में लाना जरूरी](https://climateeast.in/veditum-and-india-sand-watch-organised-workshop-in-gwalior-and-chatarpur-in-madhya-pradesh/) - वेदितम इंडिया फाउंडेशन व आइएसडब्ल्यू ने छतरपुर व ग्वालियर में किया डेटा स्प्रिंट व मीडिया कार्यशाला का आयोजन ग्वालियर/छतरपुर : भारतीय नदियों पर काम करने वाली कोलकाता स्थित संस्था वेदितम इंडिया फाउंडेशन और उसकी सहयोगी इकाई इंडिया सैंड वॉच (ISW) ने फरवरी के आखिरी सप्ताह और मार्च के शुरुआत में मध्यप्रदेश के छतरपुर व ग्वालियर - [पश्चिम एशिया संकट के बीच 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिफिकेशन के करीब भारतीय रेलवे](https://climateeast.in/indian-railways-nears-100-percent-electrification-amid-west-asia-crisis/) - मार्च 2026 तक भारतीय रेलवे के ब्रॉड गेज नेटवर्क का 99.4 प्रतिशत हिस्सा इलेक्ट्रिफाई हो चुका है। करीब 70,001 किलोमीटर ट्रैक में से 69,427 किलोमीटर पर बिजली के इंजन दौड़ रहे हैं। यानी अब सिर्फ कुछ छोटे हिस्से ही बचे हैं, जो पांच राज्यों में फैले हैं। दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध की आहट - [दुमका के गरडी गांव में तीन दिनों का बाहा पर्व संपन्न, देखिए ये तसवीरें](https://climateeast.in/three-day-baha-festival-concludes-in-gardi-village-of-dumka-jharkhand/) - दुमका : दुमका जिला अंतर्गत दुमका प्रखंड के गरडी गांव में ग्रामीणों द्वारा बाहा पर्व अत्यंत धूमधाम और हर्षाेल्लास के साथ मंगलवार को मनाया गया। बाहा तीन दिनों तक मनाया जाने वाला पारंपरिक आदिवासी पर्व है। इसके प्रथम दिन को जाहेर दाप माह, द्वितीय दिन को बोंगा माह तथा तृतीय एवं अंतिम दिन को शरदी - [बाहा पर्व के वे दृश्य जो आपको सादगी, संस्कृति और प्रकृति से जुड़ाव महसूस कराएंगे…](https://climateeast.in/baha-parba-a-santal-tribe-festival/) - बाहा पर्व तीन दिनों का होता है। तीन दिनों में अलग-अलग आयोजन होते हैं। बाहा के दौरान लोग सादा पानी एक-दूसरे पर डाल कर उत्सव मनाते हैं। आदिवासी समुदाय प्रकृति के साथ जीता है। उनके पर्व, उत्सव, त्योहार और परंपरा प्रकृति से न सिर्फ जुड़ी होती हैं, बल्कि उसके संरक्षण का भी संदेश देती हैं। - [होर्मुज़: दो मील की जलधारा की एशिया की ऊर्जा सुरक्षा में क्यों है इतनी अहमियत?](https://climateeast.in/hormuz-why-is-this-two-mile-strait-so-important-to-asias-energy-security/) - ईरान व अमेरिका के बीच युद्ध जारी है। ऐसे में दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव और बढने की स्थिति में अगर ईरान होर्मुज़ के संकरे जलमार्ग को अवरुद्ध करता है तो इससे एशियाई देशों में कच्चे तेल व तरल गैस की आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा है। दुनिया की ऊर्जा राजनीति कभी-कभी नक्शे पर - [संताल आदिवासी परिवारों में बाहा पर्व की धूम, जानिए क्या है यह परंपरा](https://climateeast.in/baha-festival-is-celebrated-with-great-enthusiasm-among-santhal-tribal-families/) - दुमका/गोड्डा : इन दिनों संताल आदिवासी बाहा पर्व मना रहे हैं। बसंत के दिनों में होने वाला यह पर्व लोग एक-दूसरे के साथ सादा पानी से मनाते हैं। इस पर्व के अलग-अलग दिन अलग-अलग रस्म निभायी जाती है। प्रथम दिन - जाहेर दाप माह इस दिन पूज्य स्थल जाहेर थान में छावनी बनाई जाती है - [भारी निवेश के बावजूद 2030 के लक्ष्य के लिए ईवी सेक्टर में एकीकृत निवेश ढांचा जरूरी](https://climateeast.in/integrated-investment-framework-in-the-ev-sector-requires/) - भारत में ईवी सेक्टर के ग्रोथ में एक अहम दिक्कत चार्जिंग स्टेशन बढने की धीमी रफ्तार है। इसमें निवेशकों की रुचि सीमित है। ऐसे में एकीकृत ईवी वित्त मंच का सुझाव दिया गया है। सड़क पर इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ दिख रही हैं। तीन पहिया ईवी ने शहरों की लास्ट माइल डिलीवरी बदल दी है। प्रीमियम इलेक्ट्रिक - [समुदाय के नेतृत्व वाले शासन व स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना जरूरी](https://climateeast.in/rayagada-call-to-action-emerges-from-grameen-charcha-2026/) - समुदाय के साथ रोडमैप बनाने पर ओडिशा के रायगड़ा में मंथन, दो हजार से अधिक प्रतिनिधि हुए शामिल रायगड़ा (ओडिशा) : ओडिशा के रायगड़ा जिले के बिसम कटक में ग्रामीण चर्चा 2026 एक मज़बूत और एकजुट रायगड़ा़ कॉल टू एक्शन के साथ 24 फरवरी को खत्म हुई। विभिन्न सहयोगी संस्थाओं की साझा पहल के तहत - [परगनैत राम सोरेन के 157वें जन्मोत्सव के मौके आदिवासी अधिकारों व चेतना पर जोर](https://climateeast.in/parganait-ram-soren-157th-birth-anniversary-organised-in-godda-district-of-jharkhand/) - परगनैत राम सोरेन आदिवासी स्वशासन व्यवस्था के तहत 80 मौजा के परगना थे। उनके पुत्र डॉ धुनि सोरेन ब्रिटेन में चिकित्सक हैं और अपनी माटी में सामाजिक कार्य से नियमित रूप से जुड़े हुए हैं। बोआरीजोर (गोड्डा): परगनैत राम सोरेन मेमोरियल ट्रस्ट एवं आदिवासी युवा क्लब, बोआरीजोर के संयुक्त तत्वावधान में परगनैत राम सोरेन का - [भारत में इलेक्ट्रिसिटी ट्रांजिशन की रफ्तार तेज, कुछ ऐसा है राज्यों का रिपोर्ट कार्ड](https://climateeast.in/indian-states-electricity-transition-2026-report-highlights/) - इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी इकानॉमिक्स एंड फिनांशियल एनालिसिस और एम्बर की एक नई रिपोर्ट में भारत के 21 राज्यों में इलेक्ट्रिसिटी ट्रांजिशन का आकलन किया गया है। दिल्ली में रात भर पंखा चलता है। कर्नाटक में सोलर पार्क चमक रहे हैं। बिहार स्मार्ट मीटर लगा रहा है। राजस्थान ग्रीन टैरिफ सस्ता कर रहा है। भारत की - [ओलचिकी को मिले गौरव को लेकर मरांग बुरू की विशेष पूजा का आयोजन, राष्ट्रपति का जताया आभार](https://climateeast.in/santal-goddess-marang-buru-puja-organised-at-dumka/) - दुमका : संताली भाषा की लिपि ओलचिकी के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में तथा इसके आविष्कारक गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू के सम्मान में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा ऐतिहासिक पहल की गई। 25 दिसंबर 2025 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में संताली भाषा की ओलचिकी लिपि में भारत का - [सिमट रहे हैं चरागाह, मंडरा रहा है मवेशियों की दुनिया पर जलवायु संकट का खतरा](https://climateeast.in/pastures-are-shrinking-the-threat-of-climate-crisis-looms-over-the-cattle-world/) - सिमट रहे हैं चरागाह, मंडरा रहा है मवेशियों की दुनिया पर जलवायु संकट का खतराआज घास आधारित चराई प्रणाली पृथ्वी की लगभग एक तिहाई सतह पर फैली है। यह दुनिया की सबसे बड़ी खाद्य उत्पादन प्रणालियों में से एक है। लेकिन, अध्ययन बताता है कि जलवायु परिवर्तन इन चरागाहों के “सुरक्षित जलवायु दायरे” को सिकोड़ - [प्रशासन की उदासीनता के बाद लोगों ने खुद हिजला मेले में लगाया संताली व ओलचिकी का बैनर](https://climateeast.in/people-themselves-put-up-banners-in-santali-and-olchiki-at-the-hijla-fair-dumka/) - दुमका: झारखंड के दुमका जिले के शहर के करीब स्थित हिजला गांव में लगने वाला हिजला मेला राज्य में आदिवासी संस्कृति को प्रस्तुत करने वाला 136 वर्ष पुराना राजकीय मेला है। इस मेले में स्थानीय लोगों ने निजी खर्च पर संताली भाषा व ओलचिकी लिपि में बैनर लगवाए हैं। यह मेला विशेष रूप से आदिवासियों - [ओलचिकी पर डाक टिकट व स्मारक सिक्के जारी होने से संताल समाज में खुशी](https://climateeast.in/santhal-community-happy-with-the-release-of-postage-stamps-and-commemorative-coins-on-olchiki/) - ओलचिकी लिपि का आविष्कार पंडित रघुनाथ मुर्मू ने वर्ष 1925 में किया था। यह संताली भाषा की आधिकारिक लेखन प्रणाली है और इसे भारत सरकार के विभिन्न संस्थानों के साथ ही वैश्विक टेक कंपनी गूगल से भी स्वीकार्यता हासिल है। दुमका: संताली भाषा की लिपि ओलचिकी के 100 वर्ष पूर्ण होने तथा इसके आविष्कारक पंडित - [गर्म होते दिन से प्रभावित हो रही है कॉफी की फसल, आपूर्ति पर दबाव बढने का खतरा](https://climateeast.in/warmer-days-are-affecting-the-coffee-crop/) - 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक का तापमान काफी की फसल के लिए प्रतिकूल माना जाता है। 25 प्रमुख कॉफी उत्पादक देश, जो वैश्विक उत्पादन का 97 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करते हैं, जलवायु परिवर्तन के कारण कॉफी की फसल के लिए अधिक हानिकारक गर्मी का सामना कर रहे हैं। नई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन - [राष्ट्रपति ने ओलचिकी लिपि के शताब्दी समारोह का किया उदघाटन, लोगों से लिपि सीखने की अपील](https://climateeast.in/president-inaugurates-the-centenary-celebrations-of-the-ol-chiki-script/) - राष्ट्रपति ने ओलचिकी लिपि के 100 वर्ष पूरे होने पर स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया। साथ ही, संताल समुदाय के 10 विशिष्ट व्यक्तियों को संताली लोगों के बीच ओलचिकी लिपि के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सम्मानित किया। नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 16 फरवरी 2026 को ओलचिकी लिपि के - [हिजला मेले में आदिवासी भाषा-लिपि, परंपरा व कलाकारों की उपेक्षा का आरोप, फूंका पुतला](https://climateeast.in/villagers-angry-at-the-neglect-of-tribal-language-script-tradition-and-artists-at-the-hijla-mela-dumka/) - हिजला व उसके आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने बैठक कर कहा है कि अगर उनकी मांगें मेला समिति, जिला प्रशासन व सरकार द्वारा नहीं मानी गई तो आंदोलन को तेज किया जाएगा। दुमका: झारखंड सरकार ने 136 वर्ष पुराना हिजला मेला के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए वर्ष 2015 में इसे राजकीय - [झारखंड : मानव-हाथी टकराव से मौत के आंकड़े नई ऊंचाई पर, हरकत में आयी राज्य सरकार](https://climateeast.in/human-elephant-conflict-in-jharkhand-reach-new-highs/) - साल 2025-2026 के ठंड के महीनों में झारखंड में मानव-हाथी ठकराव चरम पर पहुंच गया। इस दौरान राज्य के कई क्षेत्रों से हाथियों के हमले में लोगों के सामूहिक तौर पर मौत होने की खबरें आती रही हैं, ताजा मामला हजारीबाग जिले का है; वहीं हाथियों की मौत हुई है। ग्रामीण हाथियों के व्यवहार में - [क्या बदल रहा है हिजला मेला, दुर्लभ कला चदर बदोनी को नहीं मिलेगा मंच?](https://climateeast.in/hijla-mela-changing-will-the-rare-art-form-chadar-badoni-not-get-a-platform/) - लोगों में जागरूकता से संबंधित कई तरह के नुक्कड़ नाटक के आयोजन पर भी संकट दुमका: झारखंड के दुमका के हिजला गांव में लगने वाला हिजला मेला सिर्फ एक आयोजन भर नहीं है, जहां लोग जुटते हैं, सामान खरीदते हैं, खाते-पीते हैं और चले जाते हैं। हिजला मेला आदिवासी व विशिष्ट रूप में संताल संस्कृति - [हाइकोर्ट ने काबर झील की जमीन वापसी मामले में मांगा एटीआर](https://climateeast.in/patna-high-court-asked-state-authorities-why-kabar-tal-in-begusarai-has-not-reclaimed/) - काबर ताल को लेकर मछुआरों एवं किसानों के बीच हितों के टकराव की स्थिति भी रही है। यहां के किसान आसपास के क्षेत्र में कृषि करना चाहते हैं, जबकि मछुआरे चाहते हैं कि पानी रहे ताकि मछलियां हों। पटना: पटना हाइकोर्ट ने बिहार के बेगूसराय जिले में स्थित काबर ताल या काबर झील की ग्राउंथ - [हिजला मेले में ओलचिकी लिपि का बोर्ड नदारद, मेहनताना को लेकर कला दल में नाराजगी](https://climateeast.in/olchiki-script-board-missing-at-hijla-meta-dumka-jharkhand/) - दुमका: झारखंड के दुमका जिले के हिजला गांव में लगने वाला राजकीय जनजातीय हिजला मेला 13 फरवरी से शुरू हो रहा है, जो 20 फरवरी चल चलेगा। मेले की तैयारी से पूर्व मेला परिसर के आसपास लगाए गए बैनर, बोर्ड व छपवाये गए कार्ड को लेकर लोगों में नाराजगी है। साथ ही प्रस्तुति देने वाले - [परिवहन उत्सर्जन डेटा के समन्वित फ्रेमवर्क की हो सकती है पहल](https://climateeast.in/institutionalizing-freight-emissions-accounting-in-india/) - अगर किसी देश को अपना उत्सर्जन घटाना है, तो क्या वह उन सेक्टरों को नज़रअंदाज़ कर सकता है जो चुपचाप सबसे तेज़ी से बढ़ रहे हैं? भारत के लिए जवाब साफ है, नहीं। इसी पृष्ठभूमि में स्मार्ट फ्रेट सेंटर इंडिया, TERI और IIM-Bangalore ने मिलकर एक व्हाइट पेपर जारी किया है। नाम थोड़ा तकनीकी है - [बिहार में बाढ़ की अदृश्य कीमत और गरीबी का मुश्किल गणित](https://climateeast.in/hidden-cost-of-bihar-flood-and-brutal-math-of-poverty-megh-pyne-abhiyan-study/) - एक नए अध्ययन से पता चलता है कि बिहार के उत्तरी हिस्से में एक बार बाढ़ आने पर एक परिवार को आम तौर पर दो लाख रुपये की संपत्ति का नुकसान होता है। इस इलाके के गांवों में साल में 60 बार अचानक बाढ़ आती है। मेघ पायन अभियान के अध्ययन पर आधारित इस स्टोरी - [दुनिया में नवीनीकृत ऊर्जा की रफ्तार तेज़, पर जी7 देशों की हिस्सेदारी मात्र 11 प्रतिशत](https://climateeast.in/global-renewable-energy-deployment-is-accelerating-but-g7-countries-account-for-only-11-percent/) - नवीनीकृत ऊर्जा का नेतृत्व अब अमीर देशों के हाथ में नहीं बल्कि विकासशील देशों के हाथ में है। जानिए ग्लोबल एनर्जी मीटर की नई रिपोर्ट में क्या कहा गया है। दुनिया भर में हवा और सूरज से बिजली बनाने की रफ्तार पहले से कहीं तेज हो गई है। लेकिन इस तेज़ी की कहानी में एक - [कार्बन रिमूवल पर ऑक्सफोर्ड के शोधकर्ताओं की सख्त चेतावनी](https://climateeast.in/university-of-oxford-researchers-issue-a-dire-warning-on-carbon-removal/) - यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कई देश अपनी नेट ज़ीरो योजनाओं में भविष्य की बड़े पैमाने पर कार्बन हटाने वाली तकनीकों पर दांव लगा रहे हैं। समस्या यह है कि इन तकनीकों की व्यवहारिकताए सामाजिक स्वीकार्यता और समयसीमा को लेकर अब भी काफी अनिश्चितता है। दुनिया जब रिकॉर्ड तोड़ - [मेची नदी के उदगम की यात्रा और दुर्लभ असाला मछली के संरक्षण की कोशिश करता समुदाय](https://climateeast.in/journey-to-the-of-the-mechi-river-source-and-asala-fish-in-himalaya/) - मेची नदी भारत के दार्जिलिंग जिले से लगे नेपाल के महाभारत पर्वत श्रृंखला से निकलती है। यह जगह बिल्कुल शांत है। उदगम स्थल के पास ध्वज लगे हैं और चारों आरे घने पेड़ों की हरियाली है। यहां बोर्ड पर नेपाली भाषा में इस स्थल के मेची नदी का उदगम स्थल होने का जिक्र है और - [बजट प्रावधानों से VB-GRAMG के तहत मात्र 52 दिन का रोजगार मिल सकेगा](https://climateeast.in/budget-provisions-will-only-provide-employment-for-52-days-under-vb-gramg/) - नरेगा संघर्ष मोर्चा से सरकार के बजट भाषण, बजट दस्तावेज और मनरेगा के खर्च के ट्रेंड, देनदारियों आदि का विश्लेषण कर अपने बयान में कहा है कि बजट आवंटन विकसित भारत - जी राम जी बिल के तहत 125 दिन का ग्रामीण रोजगार उपलब्ध कराने के लिए जरूरी राशि का मात्र 42 प्रतिशत है। यहां - [हिजला मेला 2026 को लेकर बैठक में ओल-चिकी को व्यापक स्वीकार्यता देने व मूल परंपराओं के संरक्षण की मांग](https://climateeast.in/meeting-on-hijla-mela-2026-demands-wider-acceptance-of-ol-chiki/) - ग्रामीणों ने बैठक में जिला प्रशासन सह हिजला मेला समिति के समक्ष रखी गई मांगों पर चर्चा की, ग्रामीणों ने हिजला मेला में आदिवासी संस्कृति को अधिक से अधिक महत्व देने की मांग उठायी दुमका: राजकीय जनजातीय हिजला मेला महोत्सव 2026 की तैयारी को लेकर दुमका के हिजला गांव में मंझी बाबा इमानुवेल हांसदा की - [झारखंड वन विभाग ने गिद्ध संरक्षण के लिए बीएनएचएस से किया करार](https://climateeast.in/jharkhand-forest-department-and-bnhs-have-signed-a-mou-for-vulture-conservation/) - मुंबई: झारखंड सरकार के वन विभाग एवं बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) ने राज्य में पांच साल तक गिद्ध संरक्षण के लिए साझा परियोजना चलाने के लिए एक करार पर हस्ताक्षर किया है। दोनों पक्षों के बीच यह करार मुंबई में हुआ। झारखंड सरकार की ओर से राज्य के पीसीसीएफ एंव मुख्य वन्य जीव संरक्षक - [आर्थिक सर्वे में साझा जमीन पुनर्जीवित करने पर जोर, विशेषज्ञों का क्या है नजरिया?](https://climateeast.in/economic-survey-202526-emphasises-revival-of-village-commons/) - साझा जमीन या कॉमन्स लैंड भारत के 35 करोड़ लोगों की आजीविका का है साधन नई दिल्ली : केंद्र सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-’26 में स्थायी ग्रामीण विकास, मज़बूत आजीविका और ज़्यादा लचीले समुदायों की नींव के तौर पर गांव की साझा ज़मीनों को फिर से ज़िंदा करने पर नए सिरे से ज़ोर दिया गया - [हिजला मेले में बैनर, पोस्टर व स्मारिका संताली भाषा व ओलचिकी लिपि में छपवाने की मांग](https://climateeast.in/demand-to-print-banners-posters-and-souvenirs-in-santali-language-and-olchiki-script-at-hijla-mela/) - हिजला मेले का आयोजन फरवरी महीने में 13 से 20 तारीख के बीच होना है, इसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं। इससे पहले आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से अपनी मांगें रखी हैं। दुमका : विभिन्न सामाजिक संगठनों - पारसी आ़रीचा़ली मरांड़ बुरू आखड़ा, दुमका; संताल एसोसिएशन फॉर अवेयरनेस एंड रिफॉर्म, दुमका; दिसोम - [मेघालय के लिविंग रूट ब्रिज की वो खूबियों जिसने इसे विश्व विरासत सूची की दौड़ में शामिल कराया](https://climateeast.in/meghalayas-living-root-bridges-dossier-has-been-submitted-to-unesco/) - लिविंग रूट ब्रिज जिसे मेघालय में जिंगकिएंग जरी कहा जाता है, एक परंपरागत आदिवासी ज्ञान और उसके अभ्यास का बेहतरीन नमूना है। रबर के पेड़ की जड़ों से बनाए जाने वाले ऐसे पुल आसपास के 75 गांवों को कनेक्टिविटी प्रदान करते हैं। मेघालय के लिविंग रूट ब्रिज जिंगकिएंग जरी (Jingkieng Jri) भविष्य में यूनोस्को की - [छत्तीसगढ़ की हरित गुफा की वो दुर्लभ खूबियां जिसको लेकर अब चिंतित हैं संरक्षणवादी](https://climateeast.in/chhattisgarh-unique-green-cave-in-kanger-valley/) - छत्तीसगढ़ सरकार का वन एवं पर्यटन विभाग हरित गुफा तक पर्यटकों के आवागमन के लिए आधारभूत संरचना का विकास कर रहा है। राज्य सरकार के इस कदम पर संरक्षणवादी सवाल उठा रहे हैं। लोगों की आवाजाही बढने से इस दुर्लभ गुफा के स्वरूप के प्रभावित होने और यहां आश्रण पाने वाली प्रजातियों के अस्तित्व को - [भारत-EU के बीच आज हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट क्या है, इसका क्या असर होगा?](https://climateeast.in/what-is-the-free-trade-agreement-signed-between-india-and-eu/) - फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत 90 प्रतिशत से अधिक वस्तुओं पर टैरिफ घटाने या हटाने से दोनों पक्षों को अरबों यूरो की सालाना बचत होगी, लेकिन इस डील की असली पहचान इसके आर्थिक आंकड़ों से ज्यादा, इसके ग्रीन स्ट्रक्चर में छुपी है। दिल्ली और ब्रुसेल्स के बीच 18 साल लंबी बातचीत के बाद जब 27 - [भारत में इन्फ्रा बूम, पर जलवायु आपदा के मद्देनजर बीमा तैयारी अधूरी](https://climateeast.in/climate-risk-and-insurance-for-indias-infrastructure-projects-climate-trends-study/) - क्लाइमेट ट्रेंडस की एक नई रिपोर्ट का एक अहम निष्कर्ष यह है कि भारत की कई सबसे बड़ी इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं उन्हीं इलाकों में स्थित हैं जो जलवायु के लिहाज़ से सबसे ज़्यादा संवेदनशील हैं। भारत इस समय अपने इंफ्रास्ट्रक्चर इतिहास के सबसे आक्रामक विस्तार के दौर में है. सड़कें, बंदरगाह, सुरंगें, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स, शहरों का - [नर्मदा जयंती के मद्देनजर मछुआर संघ ने नर्मदा डैम से पानी छोड़ने की मांग की](https://climateeast.in/fishermens-association-demands-release-of-water-from-narmada-dam-in-gujarat/) - भरूच (गुजरात) : ऑल भरूच डिस्ट्रिक्ट फिशरमैन सोसाइटी (समस्त भरूच जिला मच्छीमार समाज) ने भरूच के जिला कलेक्टर के माध्यम से राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल और सरदार सरोवर नर्मदा निगम लिमिटेड के चेयरमैन को लिखे एक पत्र में आग्रह किया है कि 25 जनवरी को नर्मदा जयंती से दो दिन पहले सरदार सरोवर - [अरावली को बचाने के लिए 700 किमी की 40 दिन लंबी यात्रा का ऐलान](https://climateeast.in/a-700-km-long-save-the-aravallis-yatra-announced-by-rajendra-singh/) - दिल्ली के वुमेन प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कान्फ्रेंस में जलपुरुष राजेंद्र सिंह द्वारा लिखित पुस्तक अरावली पर नया संकट का भी विमोचन किया गया। नई दिल्ली: जलपुरुष व तरुण भारत संघ के संस्थापक राजेंद्र सिंह ने 22 जनवरी 2026 को दिल्ली के वुमेन प्रेस क्लब में एक प्रेस कान्फ्रेंस में ऐलान किया कि अरावली - [जलवायु संकट के साये में 2026 विंटर ओलंपिक, कृत्रिम बर्फ के भरोसे आयोजन](https://climateeast.in/2026-winter-olympics-and-climate-change-impact/) - हालात ऐसे हैं कि 2026 के खेलों के लिए इटली को 30 लाख क्यूबिक यार्ड से ज़्यादा कृत्रिम बर्फ़ तैयार करनी पड़ेगी। यानी ऊँचे आल्प्स में होने के बावजूद प्राकृतिक बर्फ़ पर भरोसा नहीं किया जा सकता। यह स्थिति सिर्फ आयोजन की लागत नहीं बढ़ाती, बल्कि खेलों की निष्पक्षता और खिलाड़ियों की सुरक्षा पर भी - [टाटा स्टील झारखंड में ग्रीन स्टील में करेगी 11,000 करोड़ रुपये का निवेश](https://climateeast.in/tata-steel-to-invest-rs-11000-crore-in-green-steel-in-jharkhand/) - झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इन दिनों दावोस की यात्रा पर हैं, जहां वे 19 से 23 जनवरी 2026 तक चलने वाली वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की सालाना बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में ग्रीन स्टील, अर्बन ट्रांसपोर्ट सहित अन्य क्षेत्रों में सहयोग व निवेश की संभावनाएं तलाशी हैं। रांची/दावोस/स्विट्ज़रलैंड - [भोपाल में कम ज्ञात प्रजातियों पर तीन दिनों के कान्फ्रेंस में संरक्षण गैप को भरने पर विमर्श](https://climateeast.in/national-conference-on-lesser-known-species-of-central-indian-landscape-in-bhopal/) - कान्फ्रेंस के दौरान 23 प्रतिभागियों ने विभिन्न विषयों व संरक्षण परियोजनाओं पर अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया। भोपाल: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 16 से 18 जनवरी तक मध्य भारत में कम ज्ञात प्रजातियां कान्फ्रेंस (Conference on Lesser-Known Species of Central Indian Landscape) का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में वन अधिकारी, वन्यजीव विशेषज्ञ, रिसर्चर एवं - [अंडमान में क्यों बढ़ रहा है मगरमच्छ का संकट?](https://climateeast.in/crocodiles-into-closer-contact-with-people-across-south-andaman/) - जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाली बाढ़ और बदलते नाले सिस्टम की वजह से दक्षिण अंडमान में खारे पानी के मगरमच्छ लोगों के ज्यादा करीब आ रहे हैं। लीशा के नायर पोर्ट ब्लेयर (अंडमान और निकोबार) : सितंबर 2025 के आखिर में दक्षिण अंडमान ज़िले में हुई भारी बारिश थोड़ी कम होने पर, नवीन हलधर - [मीठे पानी की प्रवासी मछलियों के लिए अंतरराष्ट्रीय संरक्षण प्रयास नाकाफी](https://climateeast.in/international-conservation-efforts-for-freshwater-migratory-fishes-are-inadequate/) - प्रवासी जीवों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय संधि में सूचीबद्ध 1100 से अधिक प्रवासी जीवों में मीठे पानी की प्रवासी मछलियों की मात्र 23 प्रजातियां सूचीबद्ध हैं। नए अध्ययन में प्रवासी मछलियों के संरक्षण से जुड़ी चुनौतियों को चिह्नित करने के साथ कुछ उपाय भी सुझाए गए हैं। क्लाइमेट ईस्ट मीठे पानी की प्रवासी मछलियों - [दार्जिलिंग की पहाड़ियों पर दुर्लभ हिमालयन सैलामैंडर के संरक्षण की चुनौतियां](https://climateeast.in/himalayan-salamander-conservation-challenges-in-india-and-nepal/) - भारत में मुख्य रूप दार्जिलिंग की पहाड़ियों और उससे लगे नेपाल के क्षेत्र में पाए जाना वाला हिमालयन सैलामैंडर की संख्या में विभिन्न मानव रचित कारणों गिरावट देखी गयी थी। लेकिन अब स्थानीय युवा इसके संरक्षण का काम कर रहे हैं। राहुल सिंह की रिपोर्ट दार्जिलिंग: दार्जिलिंग की पहाड़ियों पर बसे एक गांव के निवासी सपन - [परंपरा का पुनर्जीवन: बोआरीजोर गांव में 30 सालों बाद सोहराय पर हुआ खूंटव](https://climateeast.in/revival-of-tradition-after-30-years-sohrai-was-celebrated-in-boarijor-village/) - खूंटव में बैल के सींगों में सिंदूर व तेल लगाया जाता है और उसे फूलों की माला पहनाई जाती है। इस तरह पशुओं के प्रति सम्मान प्रकट किया जाता है। बोआरीजोर (गोड्डा) : संताल आदिवासी समाज द्वारा सोहराय पर्व के तीसरे दिन, 11 जनवरी 2026 को खूंटव माह का आयोजन किया जाता है। गोड्डा जिले - [माधव गाडगिल: एक पारिस्थितिकीविद की 80 सालों की बदलाव यात्रा](https://climateeast.in/madhav-gadgil-an-ecologists-journey-through-80-years-of-transformation/) - भारत के शीर्ष इकोलॉजिस्ट (पारिस्थितिकीविद) ने 80 सालों के पारिस्थितिकीय बदलावों के प्रत्यक्ष अनुभव के ज़रिए भारत की जैव विविधता के लिए एक निजी प्रेम पत्र लिखा है। यह इंसानों और उनके पर्यावरण के बीच जटिल संबंधों को एक्सप्लोर करता है और देश के परिदृश्य में हुए बदलावों पर गहरी नज़र डालता है। A Walk - [आज सोहराय का दूसरा दिन, इस वजह से लोग घरों के दरवाजे पर टांगते हैं चटाई](https://climateeast.in/sohrai-second-day-people-hang-mats-at-the-doors-of-their-houses/) - परिवार व गोतिया के साथ गोडा पूजा करने की है परंपरा बोआरीजोर(गोड्डा): झारखंड के संताल परगना क्षेत्र के संताल आदिवासियों द्वारा आज 10 जनवरी 2026 सोहराय पर्व के दूसरे दिन की पूजा की गई और उससे जुड़ी परंपरा का निर्वाह किया गया। इस दिन को सभी घरों में अपना-अपना गोड़ा पूजा (गोहाल पूजा) की जाती - [मैरिको के चाय मजदूर वार्ता विफल होने के बाद धरने पर बैठे](https://climateeast.in/merico-tea-estate-workers-stage-protest-after-talks-fail/) - बागान प्रबंधन सिर्फ सत्ताधारी पार्टी और मुख्य विपक्षी के यूनियन से वार्ता की बात कह रहा है। कूच बिहार (पश्चिम बंगाल): 29 दसंबर 2025 को डुअर्स कन्या में हुए धरने के बाद पांच जनवरी 2025 को चाय बागान प्रबंधन से वार्ता के लिए पांच जनवरी 2026 को बुलाई गई बैठक विफल हो गई। बैठक विफल - [रखाल पहाड़ी में संतालों ने शुरू की साप्ताहिक पूजा, सांस्कृतिक चेतना जागृत करने की कवायद](https://climateeast.in/santhal-tribes-begin-weekly-worship-at-rakhal-village-in-dumka-district/) - दुमका: झारखंड के दुमका जिले के रानीश्वर प्रखंड के रखाल पहाड़ी गांव में चार जनवरी 2025 को संताल समुदाय के लोगों ने मांझी थान में साप्ताहिक पूजा शुरू की। इस पूजा की शुरुआत समाजसेवी सच्चिदानंद सोरेन और गांव के मंझी बाबा, नायकी, गुडित, जोग मांझी, प्राणिक, कुडम नायकी और ग्रामीणों की साझा पहल पर हुई - [अरावली को प्राकृतिक-सांस्कृतिक हक चाहिए](https://climateeast.in/aravalli-needs-natural-and-cultural-rights-waterman-rajendra-singh/) - सनातनता अरावली का हक है। जलपुरुष राजेन्द्र सिंह अरावली एक संपूर्ण परिस्थितिकी-पर्यावरण तंत्र है। इसे मेवाड़ में ‘अड़ावल संस्कृति’ कहा जाता है, जो कई संस्कृतियों के योग से बनी है। ब्रज, मत्स्य, मेवात, ढूढ़ाण, मगरा मेवाड़, मारवाड़, बागड़, शेखावटी, हाड़ोती, मेवाड़, डांग, चंबल ये सभी मिलकर एक संपूर्ण संस्कृति का अरबों साल का योग हैं। - [मौसुनी : धीमी गति से समुद्र में डूबते सुंदरबन के एक द्वीप की कहानी](https://climateeast.in/mousuni-island-the-story-of-a-sundarbans-island-slowly-sinking-into-the-sea/) - मौसुनी द्वीप नदी के मुहाने पर है और वहां से आगे बंगाल की खाड़ी शुरू होती है। यह द्वीप भारतीय सुंदरबन के पश्चिमी तट पर स्थित है, जहां अपेक्षाकृत कम मैंग्रोव कवर है और भूतल के समुद्र में समाने की गति अपेक्षाकृत कहीं अधिक। यह स्थिति इसे जलवायु आपदाओं के लिए अधिक संकटग्रस्त बनाता है। - [ओलचिकी लिपि व संताली भाषा में संविधान का लोकार्पण करने पर दुमका के संताल छात्रों ने जताया हर्ष](https://climateeast.in/santal-students-expressed-happiness-over-the-launch-of-the-constitution-in-olchiki-script-and-santali-language/) - संताल परगना महाविद्यालय के छात्रों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा भारत के संविधान का संताली संस्करण जारी किये जाने को ऐतिहासिक बताते हुए उनके प्रति आभार प्रकट किया दुमका : संताल परगना महाविद्यालय, दुमका के आदिवासी कल्याण महाविद्यालय छात्रावास संख्या 1 एवं 4 के छात्रों ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू द्वारा 25 दिसंबर 2025 को - [साल 2025: 157 दिन चरम मौसम घटनाएं, बाढ़ और तेज गर्मी वाले दिन अधिक](https://climateeast.in/extreme-weather-in-2025/) - वैज्ञानिकों के मुताबिक 2025 में तीन साल का औसत तापमान पहली बार 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार कर गया है। यह वही सीमा है, जिसे पेरिस समझौते में सुरक्षित भविष्य के लिए अहम माना गया था। 2025 दुनिया के लिए एक और चेतावनी भरा साल बनकर उभरा है। गर्मी, सूखा, बाढ़, तूफान और - [कोशी नव निर्माण मंच डीएम से मुलाकात कर बाढ़ पीड़ितों के मुआवजे का मुद्दा उठाएगा](https://climateeast.in/koshi-nav-nirman-manch-will-meet-the-supaul-dm-and-raise-the-issue-of-compensation-for-flood-victims/) - कोशी कटाव पीड़ितों को गृह क्षति का भुगतान नहीं होने पर रोष व्यक्त किया गया सुपौल (बिहार) : कोशी नव निर्माण मंच, सुपौल की जिला कमिटी की एक बैठक संगठन के गजना चौक के समीप स्थित कार्यालय पर 28 दिसंबर 2025 को आयोजित की गई। यह बैठक बाढ प्रभावितों को मिलने वाले सरकारी राहत की - [राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से सम्मानित होंगे भारत सेवाश्रम संघ, पाथरा के सचिव स्वामी नित्यव्रतानंद जी महाराज](https://climateeast.in/swami-nityavratananda-ji-maharaj-secretary-of-bharat-sevashram-sangh-pathra-will-be-honored-by-president-draupadi-murmu/) - रानीश्वर /दुमका / जामशेदपुर : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कल से दो दिवसीय दौरे पर झारखंड पहुंच रही हैं। अपने इस दौरे के क्रम में वे 29 दिसंबर को जमशेदपुर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करनडीह स्थित दिसोम जाहेरगढ़ में आयोजित ओल चिकि लिपि शताब्दी समारोह में - [तीन दशक पुराने मैप के आधार पर नर्मदा में रेत खनन की मिली है पर्यावरण मंजूरी, इसलिए हो रही भारी गड़बड़ी](https://climateeast.in/environmental-clearance-for-sand-mining-in-narmada-river-was-granted-based-on-a-three-decade-old-map/) - भरूच जिला मच्छीमार समाज के अध्यक्ष ने अपने पत्र में लिखा है कि भरूच जिला खनन अधिकारी ने बातचीत में इस आधार पर कार्रवाई करने से मना कर दिया कि खनन मालिकों को तीन दशक पुराने मैप के आधार पर पर्यावरण मंजूरी दी गई है और वह हिस्सा अब नदी में समा गया है। चूंकि - [जी राम जी बिल को मंजूरी के बावजूद मनरेगा पर लड़ाई खत्म नहीं हुई है](https://climateeast.in/vbgramg-act-vs-mgnrega-people-organizations-will-wage-a-struggle/) - विभिन्न जन संगठन नई रणनीति के साथ अगले चरण के संघर्ष की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। नई दिल्ली/कोलकाता: केंद्र सरकार की ओर से ग्रामीण श्रमिकों को साल में 125 दिनों का रोजगार देने के वादे के साथ विकसित भारत - जी राम जी विधेयक लाये जाने, उसे संसद के दोनों सदनों में स्वीकृति और - [झारखंड सरकार ने पेसा नियमावली को मंजूरी दी, पंचायती राज मंत्री ने कहा - कहीं कोई सवाल तो हमारे दरवाजे खुले हैं](https://climateeast.in/jharkhand-government-approves-pesa-rules/) - झारखंड में पेसा को लेकर लंबे समय से जद्दोजहद चलती रही है। सरकार व नागरिक समूहों के बीच लंबी वार्ता के बाद आखिरकार इसने आकार लिया है। इस फैसले के बाद सरकार ने फिर दोहराया है कि अगर कहीं कोई सवाल हो तो हम बातचीत करने के लिए तैयार हैं। रांची: झारखंड कैबिनेट ने 23 - [अरावली का संकट: अपनी आंखों के सामने महाविस्फोट को स्वीकार नहीं करना चाहिए](https://climateeast.in/aravalli-law-to-save-the-mountains-is-now-necessary-waterman-rajendra-singh/) - पहाड़ बचाने का कानून अब जरूरी, फिर वैसी नहीं बन सकती है। जलपुरुष राजेंद्र सिंह हम सभी को यह समझना होगा कि खनन से नष्ट हुए पहाड़ कभी पुनर्जीवित नहीं हो सकते। 20 नवंबर 2025 का उच्चतम न्यायालय का निर्णय अरावली पहाड़ों को खनन की छूट देकर उन्हें स्थायी रूप से नष्ट कर देगा, और - [पुनर्जीवित अरावली अब पुनः विनाश की दिशा में है](https://climateeast.in/aravalli-hills-are-now-heading-towards-destruction-again/) - अरावली का जंगल बचेगा, तो दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात पानीदार बनेगा जलपुरुष राजेंद्र सिंह अरावली बचाओ आंदोलन ने देश को पानीदार बनाने की प्रक्रिया शुरू की थी। 80 के दशक में जब पूरा अरावली खनन के दबाव में पिस रहा था, तब पश्चिम की हवा के साथ अरावली के 12 गैप में से रेत - [संताल परगना स्थापना दिवस पर निकाली पदयात्रा, संताल काटा पोखर पर शहीदों को अर्पित किया श्रद्धा सुमन](https://climateeast.in/foot-march-was-taken-out-on-the-foundation-day-of-santhal-pargana/) - दुमका : संताल परगना स्थापना दिवस के अवसर पर भारत सेवाश्रम संघ, स्वामी प्रणवानंद विद्या मंदिर, पाथरा और सामाजिक संगठन द्वारा रानीश्वर के पाथरा परिसर से संताल काटा पोखर, दिगुली तक एक भव्य पदयात्रा निकाली गई। पदयात्रा को मांझी बाबा कंपनी मुर्मू एवं भारत सेवाश्रम संघ के सचिव स्वामीजी नित्यव्रतानंद जी ने संयुक्त रूप से - [दुमका: धानकुनिया गांव में साप्ताहिक मांझी थान में पूजा की हुई शुरुआत, बुराइयों से दूर रहने की अपील](https://climateeast.in/santal-worship-begins-at-the-weekly-manjhi-than-in-dhankuniya-village-in-dumka/) - संताल समाज को ऐसे धार्मिक आयोजन के जरिए अपनी संस्कृति व गौरवशाली परंपराओं की रक्षा के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही उनसे बुराइयों से दूर रहने की अपील की जा रही है। दुमका: झारखंड के दुमका जिले के रानीश्वर प्रखंड के धानकुनिया गांव में समाजसेवी सच्चिदानंद सोरेन और गांव के मंझी बाबा, - [खूंटी के महिला संचालित एफपीओ को मिला एफपीओ ऑफ द ईयर का ज्वाइंट विनर अवार्ड](https://climateeast.in/murhu-nari-shakti-kisan-producer-company-ltd-named-joint-winner-fpo-of-the-year-awards-2025/) - झारखंड के खूंटी जिले के मुरहू ब्लॉक की एक महिला संचालित एफपीओ ने अपने शानदार कामकाज का एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह एफपीओ कृषि और कृषि आधारित उत्पादों के विपणन से जुड़ा हुआ है। खूंटी (झारखंड) : इस महीने की शुरुआत में झारखंड के खूंटी जिले की महिलाओं द्वारा संचालित किसान उत्पादक कंपनी, मुरु - [दुनिया में कोयले की रफ्तार थमी, IEA रिपोर्ट ने दिखाया बड़ा बदलाव](https://climateeast.in/global-coal-consumption-slows-down-iea-report-shows-significant-change/) - वैश्विक स्तर पर कोयले की रफ्तार थमनेे की वजह चीन है। रिपोर्ट के अनुसार चीन में कोयला आधारित बिजली उत्पादन की वृद्धि पिछले तीन साल से सपाट बनी हुई है। इसकी बड़ी वजह है रिकॉर्ड स्तर पर सौर और पवन ऊर्जा की क्षमता का जुड़ना। पिछले एक दशक में दुनिया भर में कोयले की मांग - [नेपाल के संताल आदिवासी अपनी जड़ों को तलाशने पहुंचे झारखंड](https://climateeast.in/santhal-tribals-from-nepal-come-to-jharkhand-to-find-their-roots/) - नेपाल से आए संताल आदिवासी दुमका पहुंच कर भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि यह संतालों का मूल स्थान है। उनका कहना था कि अपने इतिहास की खोज और संस्कृति की तलाश उन्हें यहां तक खींच कर ले आयी। दुमका: नेपाल के झापा जिला अंतर्गत भद्रपुर नगरपालिका के वार्ड संख्या 3 से आए संताल आदिवासियों - [भरूच के मच्छीमार समाज ने नर्मदा में अवैध रेत खनन करने वालों पर की कार्रवाई की मांग](https://climateeast.in/gujarat-fishermen-demands-action-against-illegal-sand-mining-in-narmada-river/) - संगठन के अध्यक्ष कमलेश एस मढीवाला ने नर्मदा के प्रवाह वाले गुजरात के तीन जिलों के कलेक्टर व मैरीटाइम बोर्ड के चेयरमैन को पत्र लिख कर कहा है कि करीब 400 से 500 बोट के जरिये नर्मदा नदी में मशीन से अवैध रेत उत्खनन हो रहा है। इससे न सिर्फ नदी का प्रवाह प्रभावित हो - [VB–G RAM G Bill 2025 मजदूरों व राज्यों के अधिकारों का हनन](https://climateeast.in/nrega-sangharsh-morcha-condemns-the-proposed-vb-g-ram-g-bill-2025/) - मनरेगा को खत्म करने लाया गया नया विधेयक मजदूरों व राज्यों के अधिकारों का हनन: नरेगा संघर्ष मोर्चानरेगा संघर्ष मोर्चा ने मनरेगा को खत्म करने के लिए केंद्र के नए रोजगार विधेयक पर उठाए सवाल नई दिल्ली: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार संसद में ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के लिए विकसित भारत - रोजगार आजीविका - [कॉमन्स पर कॉन्फ्रेंस : लोगों ने सामुदायिक संसाधनों के संरक्षण के प्रयासों के अनुभव को किया साझा](https://climateeast.in/community-conference-on-commons-eight-countries-virtually-participated/) - 10 से 12 दिसंबर तक वर्चुअल मोड में कॉमन्स यानी सामुदायिक संपदा पर आयोजित कम्युनिटी कान्फ्रेंस में भारत के विभिन्न राज्यों और विदेश के कई देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और प्राकृतिक संसाधन के संरक्षण के प्रयासों, चुनौतियों और संभावनाओं पर अपने अनुभव साझा किये। आणंद (गुजरात) : कम्युनिटी कॉन्फ्रेंस ऑन कॉमन्स यानी प्राकृतिक - [सुप्रिया साहू: वर्ष 2025 का यूएन एनवॉयरमेंट अवार्ड पाने वाली नौकरशाह](https://climateeast.in/ias-supriya-sahu-wins-2025-un-environment-award/) - वर्तमान में तमिलनाडु की एडिशनल चीफ सेक्रेटरी के रूप में तैनात आइएएस अधिकारी सुप्रिया साहू के जलवायु अनुकूल प्रयोग व प्रयासों ने यह दिखाया है कि सरकारी सेवा के दायरे में भी रह कर कैसे कोई अधिकारी एक पर्यावरणविद की तरह सोच और प्रयोग कर लोगों के जीवन में बदलाव ला सकता है। आप जब - [भारत में एप्पल के आपूर्तिकर्ता हरित ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने में पीछे: रिपोर्ट](https://climateeast.in/apple-suppliers-fall-behind-on-green-energy-goals-in-india/) - एप्पल ने वर्ष 2030 तक 100 प्रतिशत स्वच्छ बिजली अपनाने का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में एप्पल के पांच में एक फोन भारत में असेंबल हो रहे हैं और भारत में उसके 13 सक्रिय आपूर्तिकर्ताओं में अधिकतर का प्रदर्शन उसके महत्वाकांक्षी हरित ऊर्जा लक्ष्यों के अनुरूप नहीं दिखता। नई दिल्ली: पर्यावरण थिंकटैंक क्लाइमेट रिस्क होराइजन्स - [राजमार्गाें को लेकर मांसाहारी जानवर सतर्क, सामान्य स्तनधारी अधिक सहज: रिसर्च](https://climateeast.in/impacts-of-a-major-highway-on-mammal-occurrence-in-a-biodiverse-tropical-forest/) - सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ स्टडीज के एक नए अध्ययन ने इस धारणा को बदल दिया कि स्तनधारी राजमार्ग के किनारे आवास से बचते हैं। अध्ययन में पाया गया कि सामान्य स्तनधारी आसान भोजन उपलब्धता व राजमार्ग के किनारे शिकारी या मासांहारी पशुओं की कम उपस्थिति की वजह से रहना अधिक पसंद करते हैं। वहीं, मांसाहारी स्तनधारियों - [कॉमन्स पर कम्युनिटी कॉन्फ्रेंस कल से, 164 समुदायों की आवाज को मिलेगा मंच](https://climateeast.in/community-conference-on-commons-being-organised-under-the-promise-of-commons-initiative-from-december-10/) - तीन दिनों के कान्फ्रेंस का आयोजन वर्चुअल माध्यम से होगा, जिसमें भारत के 21 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे और वे जंगल, नदी, चारागाह, भूजल, समुद्र जैसे साझा प्राकृतिक संसाधनों पर अपनी बात रखेंगे। आणंद (गुजरात): कॉमन्स यानी सामुदायिक संसाधनों पर तीन दिन के वर्चुअल कम्युनिटी कॉन्फ्रेंस का आयोजन 10 दिसंबर - [सुंदरबन में मछुआरों के आंदोलन का आज 16वां दिन, डीएम की पहल के बावजूद उत्पीड़न बढ़ा](https://climateeast.in/sundarbans-fishermen-protest-enters-its-16th-day-harassment-by-forest-department-continues/) - सुंदरबन क्षेत्र में वन अभ्यारण्य के नाम पर मछुआरों के बढते दमन के खिलाफ आज उनका आंदोलन 16वें दिन में प्रवेश कर गया है। इस दौरान दक्षिण 24 परगना जिले के डीएम ने डीएफओ को मामले में हस्तक्षेप करने के लिए पत्र लिखा है, लेकिन डीएफओ की ओर से अबतक कोई पहल नहीं की गई - [झारखंड में हाथियों की जान पर सबसे अधिक खतरा, रांची, जमशेदपुर व सरायकेला में सबसे अधिक मौत](https://climateeast.in/elephant-mortality-in-jharkhand-has-reached-critical-levels-ramesh-kumar-pandey-study/) - 23 सालों में झारखंड में 225 हाथियों की मौत हुई है। आधारभूत संरचना के निर्माण, जंगलों के कम होने व परस्पर टकराव उनकी मौत के पीछे की प्रमुख वजह हैं। रांची: वर्ष 2000 से 2023 तक झारखंड में 225 हाथियों की मौत हुई है। इस अवधि में रांची जिला, पूर्वी सिंहभूम जमशेदपुर व सरायकेला खरसावां - [पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम स्कूली बच्चों को वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील बनाने में मददगार: स्टडी](https://climateeast.in/western-ghats-wild-shaale-led-to-measurable-environmental-learning-gains/) - सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ स्टडीज के तीन राज्यों पर केंद्रित एक अध्ययन में पाया गया कि वन्य अभ्यारण्यों के आसपास स्थित स्कूलों के बच्चों के लिए पर्यावरण अनुकूल शिक्षण पद्धति विकसित करने से वन्यजीवों के प्रति उनकी संवेदशीलता बढी है और उनके अंदर सह अस्तित्व की भावना विकसित होने में मदद मिली है। बेंगलुरु: सेंटर फॉर - [विदेशी कोयला और स्टील उद्योग का संकट](https://climateeast.in/dependence-on-foreign-metallurgical-coal-could-deepen-the-crisis-in-indias-steel-industry/) - ऑस्ट्रेलिया खुद 2050 नेट जीरो की ओर बढ़ रहा है । वहां कोयला विस्तार पर कानूनी चुनौतियां बढ़ रही हैं । ऐसे में भारत के लिए खतरा बढ़ रहा है क्योंकि हमारी निर्भरता बहुत ज्यादा है। भारत के स्टील सेक्टर पर मंडरा रहा बादल अब साफ दिखाई दे रहा है । दरअसल IEEFA की एक - [कोरापुट : अब आसमान हमसे झूठ बोलता है, बारिश के बदलते पैटर्न से बिगड़ता फसल चक्र](https://climateeast.in/changing-rainfall-patterns-are-erasing-koraput-odishat-raditional-seeds/) - ओडिशा के आदिवासी इलाकों में अचानक आने वाला मॉनसून देसी फसलों को खत्म कर रहा है और उनके साथ, सदियों पुराना खेती का ज्ञान और सांस्कृतिक यादें भी खत्म हो रही है। प्रतिभा घोष की रिपोर्ट कोरापुट, (ओडिशा) : ओडिशा के कोरापुट जिले के सेमिलगुडा गांव की किसान टिकिमा पंगी (56) ने 101 रिपोर्टर्स को - [बंगाल के छोटे मछुआरों ने मांगा पानी पर अधिकार, जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान की भी हो भरपाई](https://climateeast.in/west-bengal-small-fishermen-demand-water-rights-and-compensation-for-losses-caused-by-climate-change/) - छोटे मछुआरों के संगठन का कहना है कि तटों व पानी में बढते इन्फ्रास्ट्रक्चर व विकास परियोजनाओं के कारण उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है। मछुआरों ने राज्य सरकार से वेस्ट बंगाल इनलैंड फिशरीज पॉलिसी 2023 रद्द करने की भी मांग की है। कांथी (पूरब मेदिनीपुर) : पश्चिम बंगाल में मछुआरों के सबसे बड़े संगठन - [अहमदाबाद के कामगार : 12 घंटे की ड्यूटी, 400 से 700 रुपये की दिहाड़ी, फिर भी संतोष का भाव](https://climateeast.in/ahmedabad-narol-workers-12-hour-shifts-and-daily-wages-of-400-to-700-rupees/) - अहमदाबाद का नारोल एक औद्योगिक क्षेत्र है, जहां कई तरह के छोटे-बड़े कारखाने व वर्कशॉप हैं। यहां के श्रमिकों की औसत मजदूरी 400 से 700 रुपये प्रतिदिन है और काम 12 घंटे का। इसके बावजूद न कोई तीखा असंतोष है और न ही विरोध। यह स्थिति भारत में कमजोर पड़ चुके श्रमिक संगठनों व गुम - [भारत की स्टील क्रांति फंडिंग पर अटकी, तकनीक की गलती पीढ़ियों पर भारी पड़ेगी](https://climateeast.in/indias-steel-revolution-stalled-on-funding-ieefa-report/) - रिपोर्ट का बड़ा खुलासा यह है कि दुनिया में ग्रीन स्टील का खर्च बहुत व्यापक रेंज में है। कहीं एक टन CO₂ कम करने में 110 डॉलर लगते हैं, कहीं 1168 डॉलर तक। यानी सिर्फ कार्बन प्राइसिंग पर भरोसा करके संक्रमण संभव नहीं। ऐसे में दुनिया जिन रास्तों पर जा रही है, वह भारत के - [मछुआरों पर बढते सरकारी दमन के खिलाफ सुंदरबन के मछुआरे आंदोलन को हुए मजबूर](https://climateeast.in/fishermen-of-sundarbans-were-forced-to-protest-against-increasing-government-repression-on-fishermen/) - पश्चिम बंगाल के सुुंदरबन क्षेत्र के मछुआरे अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि वन अभ्यारण्य व संरक्षित क्षेत्र के नाम पर लगातार उनके अधिकारों का हनन हो रहा है और पुलिस व वन विभाग उन पर गलत ढंग से कार्रवाइयां करता है। मछुआरों की मांग है कि उन्हें मछली - [G20 समिट में ग्लोबल साउथ की आवाज हुई तेज, भारत की भूमिका अहम](https://climateeast.in/voice-of-the-global-south-grew-louder-at-the-g20-summit-india-played-a-crucial-role/) - डिक्लेरेशन में साफ लिखा गया कि दुनिया को ऊर्जा सुरक्षा, सस्ते दाम, एक्सेस और स्थिरता को साथ लेकर चलना होगा। साथ ही देशों ने फिर से यह वादा दोहराया कि दुनिया को 2030 तक रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता को तीन गुना करना है। साउथ अफ्रीका में खत्म हुआ G20 लीडर्स समिट इस बार कई मायनों में - [कॉप30 में धरती को बचाने के लिए इस बार क्या-क्या हुआ, आसान शब्दों में बिंदुवार जानिए](https://climateeast.in/cop30-climate-cooperation-194-countries-have-said-in-one-voice-that-the-paris-agreement-is-working/) - साल 2025 में दुनिया की राजनीति वैसे ही अशांत थी, ऊपर से अमेरिका का पेरिस समझौते से दोबारा बाहर निकलना। इसके बावजूद 194 देशों का एक साथ आकर जलवायु कार्रवाई को आगे बढ़ाना दिखाता है कि जलवायु नेतृत्व अब देशों के लिए सिर्फ नैतिक मुद्दा नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा का रास्ता भी बन चुका है। - [डिजिटल मोर्चे पर बिग ऑयल की बड़ी चाल, कॉप30 से पहले ऐड में 2,900% उछाल](https://climateeast.in/big-oil-makes-big-moves-on-digital-ads-jump-2900-ahead-of-cop30/) - क्लाइमेइन्फो की शोधकर्ता रेनाता रिबेरो का कहना है कि तेल कंपनियाँ कॉप30 को लेकर बेहद बेचैन हैं, क्योंकि यही वह मंच है जहाँ दुनिया फ़ैसला करेगी कि जीवाष्म ईंधन का भविष्य क्या होगा। इसीलिए गूगल एड्स पर इतना पैसा लगाया गया। बेलेम की उमस भरी हवा में कॉप30 (COP30) का शोर गूंज ही रहा था, - [कॉप30 में समंदर ने चुप्पी तोड़ी, दुनिया ने सुना : ब्लू एनडीसी टास्कफोर्स का ऐलान](https://climateeast.in/blue-ndc-taskforce-announced-at-cop30/) - बेलम की गर्म, नम हवा में आज एक अलग हलचल थी। समंदर से उठती नमी और अमेज़न की हरियाली के बीच, पहली बार देशों ने साफ कहा कि क्लाइमेट की लड़ाई जमीन तक सीमित नहीं है। अब बारी उस नीली दुनिया की है, जो हमारी धरती का तीन-चौथाई हिस्सा संभाले हुए है।COP30 के हाई-लेवल ओशन - [भारत के ऊर्जा परिवर्तन में हाशिये पर बिहार के मुसहर परिवार](https://climateeast.in/bihar-mahadalit-families-on-the-margins-of-indias-energy-transition/) - बिहार के गया जिले में महादलित परिवार अभी भी धुएँं वाली लकड़ी के चूल्हे पर खाना पकाते हैं, जबकि गोबरधन योजना के तहत पास में ही बायोगैस संयंत्र स्थापित हो रहे हैं। युशा रहमान की रिपोर्ट गया: बिहार के गया ज़िले के बिहार्गेन गांव में बिहार के सबसे गरीब लोगों में से एक महादलित वर्ग - [तेज और लंबी हीटवेव ने 71 प्रतिशत भारतीयों को प्रभावित किया: स्टडी](https://climateeast.in/intense-and-prolonged-heatwaves-affected-71-of-indians-study/) - येल क्लाइमेट फोरम के एक नए अध्ययन में भारत में जलवायु परिवर्तन व ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों से जुड़े तथ्यों का खुलासा हुआ है। भारत का मौसम अब सिर्फ तापमान नहीं है। यह एक अनुभव है, एक बातचीत है, एक चेतावनी है. और अब पहली बार, यह बातचीत नक्शों पर दर्ज हो चुकी है। येल - [जलवायु और व्यापार की दुनिया को जोड़ने की पहल, COP30 में लॉन्च हुआ इंटीग्रेटेड फोरम](https://climateeast.in/integrated-forum-launched-at-cop30-an-initiative-to-connect-the-worlds-of-climate-and-business/) - बेलेम में चल रहे कॉप30 के बीच एक अहम घोषणा हुई। ब्राज़ील की प्रेसीडेंसी ने आधिकारिक तौर पर इंटीग्रेटेड फोरम ऑन क्लाइमेट चेंज एंड ट्रेड की शुरुआत की है। ब्राज़ील की यह पहल उन तनावों को कम करने का प्रयास हैए और खासकर विकासशील देशों को एक बराबरी का मंच देने का इरादा रखती है। - [बेलेम का संदेश: जलवायु संकट को स्वास्थ्य संकट की नज़र से देखने की शुरुआत](https://climateeast.in/message-from-belem-cop30-beginning-to-view-the-climate-crisis-as-a-health-crisis/) - बेलेम के इस व्यस्त COP30 में नेताओं की भीड़, पॉलिसी की बहसें और हर कोने में चल रही बातचीत के बीच एक घोषणा ऐसी हुई जिसने पूरे सम्मेलन का फोकस बदल दिया। ब्राज़ील की प्रेसीडेंसी ने औपचारिक रूप से Belem Health Action Plan for Health and Climate Adaptation लॉन्च किया। यह वही प्लान है जिसके - [उत्सर्जन घटाने के बजाय, जमीन के सहारे सबकुछ ठीक करने की उम्मीद: रिपोर्ट](https://climateeast.in/instead-of-reducing-emissions-hoping-to-fix-everything-with-land-report/) - ज़मीन पर टिके जलवायु वादे: नई रिपोर्ट ने खोला COP30 का सच बेलेम की हवा में इस हफ़्ते कई वादे तैर रहे हैं। हर देश अपने “नेट-ज़ीरो” के सपने दोहरा रहा है, मगर एक रिपोर्ट ने इस शोर के बीच वो सच्चाई सुना दी, जिसे सब जानकर भी अनदेखा कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेलबर्न की अगुवाई - [झारखंड की 25वीं वर्षगांठ के मौके पर महासभा ने राजनीतिक दलों को लिखा खुला पत्र - आपने हमें निराश किया है](https://climateeast.in/jharkhand-25th-anniversary-of-jjm-wrote-an-open-letter-to-the-political-parties-you-have-disappointed-us/) - सभी पार्टियों के विधायक और राजनीतिक नेतागण, झारखंड की 25वीं सालगिरह के मौके पर, हम आपको यह बताने के लिए लिख रहे हैं कि हम आपके काम से कितने निराश हैं, और आपसे अपील करते हैं कि आप अपने तरीके सुधारें। झारखंड का बनना एक लंबे संघर्ष का नतीजा था। सभी समुदायों के जनहितैषी लोगों - [COP30 में अमेरिकी राष्ट्रपति की गैर मौजूदगी के बीच कैलिफोर्निया के गर्वनर की मौजूदगी से जगी उम्मीद](https://climateeast.in/california-governors-presence-at-cop30-raises-hopes-amid-us-presidents-absence/) - कैलिफ़ोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूज़म ने खुद को एक ऐसे नेता के रूप में पेश किया जो कहने से ज़्यादा करने पर यक़ीन रखता है. उन्होंने साफ़ कहा, “जब ट्रम्प प्रशासन ने ज़िम्मेदारी छोड़ दी है, कैलिफ़ोर्निया आगे बढ़ रहा है. अमेरिका को इस सम्मेलन में फुटनोट नहीं बनना चाहिए.” बेलेम की हवा में इस - [सच की लड़ाई: जब जलवायु पर झूठ की आंधी उठी, तो कुछ लोगों ने कलम उठाई](https://climateeast.in/battle-for-truth-when-a-storm-of-climate-lies-raged-some-took-up-their-pens/) - बेलेम (ब्राजील) की हवा में इस वक़्त सिर्फ़ उमस नहीं है, बेचैनी भी है. COP30 के मंच पर जब दुनिया के नेता जलवायु के भविष्य की बातें कर रहे हैं, तब उसके पीछे की गलियों में एक और लड़ाई चल रही है, सच और झूठ की. झूठ, जो सोशल मीडिया के ज़रिए धीरे-धीरे नरेटिव बनता - [ऊर्जा सुरक्षा तभी संभव है जब भरोसा और साझेदारी हो : रिपोर्ट](https://climateeast.in/energy-security-is-possible-only-when-there-is-trust-and-partnership/) - दुनिया आज शायद अपने सबसे उलझे हुए दौर में है. तेल और गैस के पुराने खतरे तो हैं ही, अब लिथियम, निकल, कोबाल्ट जैसे नए नाम भी उसी लिस्ट में शामिल हो गए हैं. कहीं खदानों में खनिज की कमी है, तो कहीं देशों के बीच भरोसे की. इसी बीच, इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) की - [डेढ़ साल से चीन का कार्बन एमिशन लगभग स्थिर, आगे गिरावट के आसार](https://climateeast.in/chinas-carbon-emissions-have-remained-nearly-stable-for-a-year-and-a-half-with-further-decline-expected/) - पिछले डेढ़ साल में चीन ने जिस गति से सौर और पवन ऊर्जा अपनाई है, उसने ऊर्जा तंत्र की तस्वीर ही बदल दी है। साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की तेज़ी से बढ़ती मांग ने तेल और डीज़ल की खपत को कम किया, जिससे ट्रांसपोर्ट सेक्टर में एमिशन में 5% की गिरावट आई। कार्बन उत्सर्जकदुनिया - [तटवर्ती समुदाय की सुरक्षा व न्याय के लिए 12 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय तटीय दिवस के रूप में मनाना क्यों जरूरी है?](https://climateeast.in/international-coastal-day-why-is-it-important-to-celebrate-it-for-the-protection-and-justice-of-coastal-communities/) - बांग्लादेश के प्रमुख पर्यावरण पत्रकार रफ़ीकुल इस्लाम मोंटू अपने गहरे जमीनी अनुभवों व तथ्य एवं तर्क के आधार पर बता रहे हैं कि 12 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय तटीय दिवस के रूप में मान्यता देना दुनिया भर के तटवर्ती लोगों के प्रति संवेदना दिखाना होगा। रफ़ीकुल इस्लाम मोंटू 12 नवंबर तट का दिन है - एक - [जलवायु संकट का कहर, भारत फिर सबसे प्रभावित देशों में शामिल](https://climateeast.in/climate-crisis-india-again-among-worst-affected-countries-report/) - भारत को बाढ़, चक्रवात, लू और सूखे जैसी आपदाओं ने बार-बार झकझोरा है। देश के कई हिस्सों में चरम मौसम अब एक आवर्ती संकट बन चुका है। क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स 2026 के अनुसार भारत प्रभावित देशों में नौवें स्थान पर है। COP30 में पेश की गई जर्मनवॉच की नई रिपोर्ट क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स 2026 ने - [जलवायु संकट के दौर में जलवायु वित्त की कमी से कम संपन्न देशों में गहराता स्वास्थ्य संकट](https://climateeast.in/low-income-countries-face-a-climate-finance-crisis-report/) - रिपोर्ट की सह-लेखिका मैथिल्ड विल्केन्स ने कहा, “हमें यह समझना होगा कि क्लाइमेट फाइनेंस ही हेल्थ फाइनेंस है। जब तक जलवायु फंडिंग को देशों की हेल्थ प्राथमिकताओं से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक लचीली स्वास्थ्य प्रणालियाँ बनाना असंभव है।” गर्मी बढ़ रही है, बिमारियाँ भी। मगर इलाज के लिए पैसा नहीं। एडलफी (adelphi) की नई - [बिहार की नई सरकारी सभी 534 ब्लॉक के उपलब्ध डेटा का कंपोजिट इंडेक्स बना कर काम करे: डीएम दिवाकर](https://climateeast.in/bihar-government-should-work-by-creating-a-composite-index-of-the-available-data-of-all-534-blocks-dm-diwakar/) - पटना स्थित एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस के पूर्व निदेशक व अर्थशास्त्री डॉ डीएम दिवाकर बिहार के सामाजिक ताने-बाने, विकास व पिछड़ेपन से जुड़े मुद्दों की गहरी समझ रखते हैं। बिहार केंद्रित अध्ययन-अध्यापन का उनके पास लंबा अनुभव है। वे पिछले कुछ सालों से बिहार के मधुबनी जिले में स्थित अपने गांव जलसैन में - [अब भी बचाया जा सकता है 1.5°C का लक्ष्य, नई रिपोर्ट ने दिखाई उम्मीद की राह](https://climateeast.in/1-5c-target-can-still-be-met-a-new-report-offers-hope-report/) - दुनिया अभी भी 1.5°C के भीतर तापमान को सीमित करने की दौड़ में है, अगर अब से सबसे ऊँची स्तर की जलवायु प्रतिबद्धता के साथ कदम बढ़ाए जाएँ। क्लाइमेट एनालिटिक्स की नई रिपोर्ट “Rescuing 1.5°C” ने दिखाया है कि भले ही पिछले कुछ सालों में कार्रवाई धीमी रही हो, फिर भी दुनिया अपने तापमान को - [कैसे होती है परबल की खेती, जानते हैं क्या आप? नहीं तो यहां समझिए](https://climateeast.in/parwal-cultivation-in-bihar/) - परबल की खेती के लिए उसकी पुरानी लतों का प्रयोग किया जाता है, जिसका प्रमुख बाजार पश्चिम बंगाल व बिहार का गोपालगंज जिला है। महिलाओं व बच्चों को 100 बंडल बांधने के 10 रुपये मिलते हैं, जो बहुत कम पारिश्रमिक है। हालांकि यह एक अतिरिक्त आय का जरिया है। हाजीपुर (वैशाली): परबल भारत की एक - [संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में अनुकूलन के लिए फंडिंग के फासले का खुलासा](https://climateeast.in/un-report-reveals-funding-gap-for-adaptation/) - 172 देशों के पास कम से कम एक एडेप्टेशन पॉलिसी या स्ट्रैटेजी है, लेकिन उनमें से 36 देश ऐसे हैं जहाँ यह नीति दस साल पुरानी हो चुकी है। सिर्फ़ चार देश ऐसे हैं जिनके पास अभी कोई राष्ट्रीय योजना नहीं है। दुनिया के तापमान तेज़ी से बढ़ रहे हैं, तूफान और सूखा अब मौसम - [2032 के बाद नए थर्मल पावर प्रोजेक्ट घाटे का सौदा, प्रतिस्पर्धी कीमतों की वजह से स्वच्छ ऊर्जा की संभावनाएं बढेंगी](https://climateeast.in/new-thermal-power-projects-after-2032-are-a-loss-making-proposition-report/) - भारत के बिजली क्षेत्र में एक बड़ा मोड़ आ गया है। नई रिपोर्ट बताती है कि 2032 के बाद अगर देश ने और कोयला बिजलीघर जोड़े, तो वो “घाटे का सौदा” साबित होंगे। क्योंकि तब तक देश की ऊर्जा ज़रूरतें - अगर मौजूदा योजनाएँ पूरी हुईं, सौर, पवन और बैटरी स्टोरेज से ही पूरी की - [संताली संस्कृति का जीवंत संग्रहालय है चेंजोड़ा हैरिटेज विलेज, पर्यटक समृद्ध संताल संस्कृति से हो सकेंगे रू-ब-रू](https://climateeast.in/chenjora-heritage-village-opens-as-a-living-museum-of-santal-culture-in-jamshedpur-jharkhand/) - घाटशिला प्रखंड की काशिदा ग्राम पंचायत के तहत लगभग 2.5 एकड़ क्षेत्र में फैला चेंजोड़ा हैरिटेज विलेज संताल आदिवासियों की संस्कृति की जीवंत नमूना है। यहां संतालों की जीवन पद्धति, धर्म-उपासना, पर्व-त्योहार, संस्कृति व कला का एक साथ दर्शन होगा। इसकी स्थापना कला मंदिर के संस्थापक अमिताभ घोष की पहल पर हुई है। यहां संताल - [भारत में मजदूरों, बुजुर्गाें व बच्चों पर हीटवेव का खतरा बढा, लैंसेट रिपोर्ट की चेतावनी](https://climateeast.in/workers-elderly-and-children-in-india-are-at-increased-heatwaves-risk-warns-lancet-report/) - रिपोर्ट के मुताबिक, गर्मी और अनियमित वर्षा के कारण भारत में कृषि उत्पादकता में 7% की गिरावट दर्ज की गई, और इससे भोजन की कीमतें और कुपोषण का खतरा बढ़ गया। जलवायु संकट अब भविष्य का खतरा नहीं रहा, वो आज की हकीकत बन चुका है, जिसका असर हमारे शरीर, सांस, और जेब, तीनों पर - [रसोई में शुरू हुआ एनर्जी ट्रांज़िशन: बिजली से खाना पकाना अब गैस से सस्ता](https://climateeast.in/electric-cooking-in-india-37-cheaper-than-lpg-14-cheaper-than-png-policy-action-can-scale-adoption/) - भारत में अब रसोई की आग बदलने की बारी है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, बिजली से खाना पकाना (ई-कुकिंग) न सिर्फ़ साफ़ और सुविधाजनक है, बल्कि एलपीजी और पीएनजी, दोनों से सस्ता भी है। IEEFA (Institute for Energy Economics and Financial Analysis) द्वारा जारी अध्ययन में बताया गया है कि भारत में ई-कुकिंग का - [भारत, चीन और इंडोनेशिया में 2030 तक कोयले की खपत घटने की बंधी उम्मीद](https://climateeast.in/india-china-and-indonesia-are-expected-to-reduce-coal-consumption-by-2030/) - CREA की नई रिपोर्ट बताती है कि दुनिया के कोयले के इस्तेमाल का 73% हिस्सा तीन देशों चीन, भारत व इंडोनेशिया का रहता है। ऐसे में अगर यहाँ कोयले की मांग घटती है, तो इसका असर पूरे ग्लोबल एमिशन ट्रेंड पर पड़ेगा। शायद पहली बार, एशिया के तीन सबसे बड़े कोयला बाज़ार, भारत, चीन और - [पश्चिम बंगाल: मनरेगा पर केंद्र की याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज, टीएमसी झूठा श्रेय न ले, उसने कुछ किया नहीं](https://climateeast.in/pbkms-strongly-condemns-tmcs-false-claims-of-credit-over-supreme-court-verdict-on-mgnrega/) - पीबीकेएमएस ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र की याचिका को खारिज किया जाना मजदूरों की जीत है और टीएमसी जिसने इस मुद्दे पर कोई संघर्ष नहीं किया, उल्टे रोड़ा अटकाया, वह झूठी वाहवाही ले रही है। कोलकाता: सुप्रीम कोर्ट ने 27 अक्टूबर को केंद्र सरकार द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP (C) No. - [पुरुलिया: जलवायु चुनौतियों व घटते रोजगार अवसरों ने बढाया पलायन, बुजुर्गाें का जीवन एकाकी](https://climateeast.in/climate-change-is-threatening-jobs-and-livelihoods-in-purulia-district-of-west-bengal/) - पुरुलिया पश्चिम बंगाल के सर्वाधिक गरीब जिलों में एक है, जो जलवायु चुनौतियों, स्थानीय रोजगार के सीमित होते विकल्प से एक साथ जूझ रहा है। बारिश की अनिश्चितता ने कृषि की संभवनाओं को प्रभावित किया है और इस वजह से लोगों का पलायन बीते सालों में तेजी से बढा है। पुरुलिया से जॉयमाला बागची की - [ग्राउंड रिपोर्ट: गंगा के कटाव से खत्म हो गए गनियारी के दर्जनों लोगों के घर और खेत, चुनाव में यह हाशिये का मुद्दा](https://climateeast.in/dozens-of-residents-in-vaishali-district-of-bihar-lost-their-homes-and-farms-due-to-ganga-river-erosion/) - उत्तर बिहार के कई इलाके में हर साल हजारों लोग बाढ़ और कटाव के कारण अपने खेत, घर और अर्जित संपत्तियां गंवा देते हैं। इनमें कुछ उनके द्वारा खेती या नौकरी-रोजगार से अर्जित संपत्तियां होती हैं तो कुछ पैतृक, जिसकी किसी तरह भरपाई नहीं हो पाती। जिंदगी को फिर से पटरी पर लाने के लिए - [किसानों को चाहिए अनुकूलन के लिए मदद, सरकारों से मिल रही है सब्सिडी](https://climateeast.in/farmers-need-help-for-adaptation-they-are-getting-subsidies-from-governments-new-study/) - दुनिया भर के किसान जलवायु संकट की मार झेल रहे हैं। एक नए अध्ययन के अनुसार, किसानों को सब्सिडी सहायता के रूप में 470 बिलियन डॉलर की मदद मिल रही है, लेकिन इसे कम लागत यानी 443 बिलियन डॉलर का खर्च अगर उनके लिए अनुकूलन (adaptation) यानी पर किया जाए तो उनके लिए यह अधिक - [पश्चिम बंगाल सरकार आम मरीजों को नजरअंदाज कर स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण कर रही है: पीबीकेएमएस](https://climateeast.in/pbkms-denounces-west-bengal-government-move-to-privatize-sskm-hospital/) - 16 अक्टूबर 2025 को पश्चिम बंगाल सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर आइपीजीएमइआर एंड एसएसकेएम हॉस्पिटल के प्राइवेट केबिन बिल्डिंग में पांच हजार रुपये से 15 हजार रुपये प्रतिदिन की दर से निजी केबिन और 350 रुपये में सःशुल्क ओपीडी परामर्श की अनुमति दे दी। राज्य सरकार के इस कदम की पश्चिम बंगाल के प्रमुख - [बिहार में पर्यावरणीय चुनौतियों के अनुकूल विकास की जरूरत, जनता को व्यापक बहस में हिस्सेदार बनाना होगा: प्रो पुष्पेंद्र](https://climateeast.in/bihar-needs-development-suited-to-environmental-challenges-says-prof-pushpendra/) - बिहार में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी तेज है। फिलहाल सरकारी नौकरियां देने और बांग्लादेशी घुसपैठ को रोकने जैसे मुद्दे को हवा दिया जा रहा है। चुनाव प्रचार की तीव्रता के साथ कई और मुद्दे छाएंगे। हालांकि बिहार प्राकृतिक आपदा, बहु आयामी खतरों (multi hazard), पलायन व अत्यधिक गरीबी दर का सामना करने वाला एक राज्य - [संस्कृति के संरक्षण की पहल: तेतरीडंगाल में आदिवासियों ने मंझी थान में साप्ताहिक बोंगा बुरु शुरू किया](https://climateeast.in/tribal-cultural-preservation-initiative-santal-started-the-weekly-bonga-buru-at-manjhi-than-in-dumka-district-of-jharkhand/) - संतालों ने साप्ताहिक पूजा शुरू कर अपने इष्ट देवता मरांग बुरू के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की और यह नई पीढी से यह अपेक्षा व्यक्त की कि वे अपनी संस्कृति को समझें और उसे संरक्षित करें। दुमका: दुमका जिले के जामा प्रखंड के बरमसिया गांव के तेतरीडंगाल टोला में समाजसेवी सच्चिदानंद सोरेन और गांव के - [मॉनसून 2025: 2,277 बार भारी बारिश, 1,528 लोगों की मौत](https://climateeast.in/monsoon-2025-in-india-2277-heavy-rains-1528-deaths/) - मॉनसून अब छोटा हुआ है, लेकिन ज़्यादा तीव्र हो गया है। पहले 60 दिन में फैलने वाली बारिश अब 20-25 दिनों में हो रही है। उत्तर-पश्चिम भारत में 27% ज़्यादा बारिश हुई, और लद्दाख में तो औसतन से 342% ज़्यादा बारिश हुई। राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में भी 60 से 70 प्रतिशत तक ज़्यादा पानी - [बिहार में जलवायु अनुकूल खेती से भूख, गरीबी और कार्बन उत्सर्जन से लड़ना संभव](https://climateeast.in/tata-cornell-institute-presents-a-path-for-productive-climate-smart-agriculture-in-bihar/) - टाटा कार्नेल इंस्टीट्यूट फॉर एग्रीकल्चर एंड न्यूट्रिशन ने बिहार में खेती को अधिक उत्पादक बनाने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने का एक रोडमैप तैयार किया है। इस रोडमैप को तैयार करने वाले विशेषज्ञों का दावा है कि अगर इस पर अमल किया गया तो बिहार भूख और पर्यावरणीय दोनों चुनौतियों से निबट सकेगा। पटना: - [जलवायु व प्रकृति आधारित लचीलापन में निवेश नौकरियों व नए बाजार को सृजित करने में सक्षम: रिपोर्ट](https://climateeast.in/adaptation-investment-could-unlock-280-million-new-jobs-by-2035/) - जब दुनिया जलवायु आपदाओं की बढ़ती लागत से जूझ रही है, उस बीच Systemiq और 20 अग्रणी अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा जारी नई रिपोर्ट ने दिखाया है कि जलवायु और प्रकृति आधारित लचीलापन (रेज़िलिएंस-resilience) में निवेश केवल जीवन बचाने का नहीं, बल्कि एक बड़े आर्थिक अवसर का सवाल भी है। Returns on Resilience शीर्षक वाली यह - [कार्बन बॉर्डर टैक्स: भारत के लिए राहत के संकेत, पर अनिश्चितता बरकरार](https://climateeast.in/carbon-border-tax-signs-of-relief-for-india-but-uncertainty-remains/) - भारत ने CBAM का लगातार विरोध किया है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने पहले कहा था कि यह “फेयर प्ले की कसौटी पर खरा नहीं उतरता” और इसके खिलाफ “उचित प्रतिक्रिया” देने की बात कही थी। यूरोपीय संघ (EU) के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज़्म (CBAM) को लेकर भारत और यूरोप के बीच महीनों से - [केंद्र का रुख ग्रामीण गरीबों के प्रति गहरा अनादर वाला: पीबीकेएमएस](https://climateeast.in/non-implementation-of-mgnrega-in-west-bengal-centres-stand-is-deeply-disrespectful-says-pbkms/) - केंद्र सरकार ने कलकत्ता हाइकोर्ट के राज्य में फिर से एक अगस्त 2025 से मनरेगा का काम शुरू करने के आदेश पर अबतक अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया है। कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मनरेगा मजदूरों के काम के अधिकार की लड़ाई लड़ने वाले मजदूर संगठन पश्चिम बंग खेत मजूर समिति (पीबीकेएमएस) ने कहा है कि राज्य - [पेरिस समझौते की उम्मीद अब भी जिंदा है, अगर कर लिए जाएं ये उपाय](https://climateeast.in/hope-for-the-paris-agreement-is-still-alive-if-these-measures-are-taken/) - क्लामेट सेंट्रल की वैज्ञानिक डॉ. क्रिस्टिना डाल कहती हैं, “पेरिस समझौते ने दिशा दिखाई है, लेकिन हम अब भी खतरनाक भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं। कई देश अभी 1.3°C की गर्मी से ही जूझ रहे हैं, 2.6°C की दुनिया तो कहीं ज़्यादा निर्दयी होगी।” दुनिया की गर्मी बढ़ चुकी है। मौसम अब सिर्फ़ बदलता - [पीएम सूर्य घर योजना में 4,946 मेगावॉट क्षमता स्थापित, पर अभी लंबी है राह](https://climateeast.in/4946-mw-installed-capacity-under-pm-surya-ghar-yojana/) - IEEFA और JMK Research की नई रिपोर्ट बताती है कि जुलाई 2025 तक 57.9 लाख घरों ने रूफटॉप सोलर के लिए आवेदन किया। यह मार्च 2024 की तुलना में चार गुना वृद्धि है। फिर भी, कुल 1 करोड़ इंस्टॉलेशन के लक्ष्य का सिर्फ 13.1% ही पूरा हो सका है। भारत में अब छतें सिर्फ़ बारिश - [विश्व बैंक और आइएमएफ की वार्षिक बैठकों में कर्ज व जलवायु वित्त पोषण जैसे मुद्दों टिकी हैं नजरें](https://climateeast.in/world-bank-and-imf-annual-meetings-in-washington-and-debt-and-climate-financing-issue/) - विश्व बैंक और आइएमएफ के भीतर राजनीति गरम है। अमेरिका की नई ट्रंप-समर्थक टीम इन संस्थाओं से कह रही है-फॉसिल प्रोजेक्ट्स को मत भूलो। उनकी नज़र “गैस और न्यूक्लियर” को फिर से एनर्जी मिक्स में शामिल करने पर है। दूसरी तरफ़ यूरोप और ब्रिटेन जैसे शेयरहोल्डर्स वर्ल्ड बैंक को उसके क्लाइमेट मिशन पर टिके रहने - [अवैध कोयला खनन से परेशान ग्रामीण हुए गोलबंद, गांव के प्रवेश द्वार पर लगाया चेतावनी का बोर्ड](https://climateeast.in/illegal-coal-mining-villager-put-up-warning-board-at-the-village-entrance-in-dhanbad/) - धनबाद: धनबाद जिले के बाघमारा प्रखंड के अंतर्गत महुदा थाना क्षेत्र में पड़ने वाले हाथुडीह ग्राम पंचायत के ग्रामीण अवैध कोयला उत्खनन के खिलाफ गोलबंद हो गए हैं और यह संकल्प लिया है कि वे अपने ग्राम क्षेत्र में कहीं भी अवैध कोयला का उठाव नहीं होने देंगे। ग्रामीणों ने रविवार, 12 अक्टूबर 2025 को - [रांगा गांव के संताल आदिवासियों ने साप्ताहिक बोंगा बुरु का लिया निर्णय, नई पीढी में सांस्कृतिक व धार्मिक चेतना लाने पर जोर](https://climateeast.in/santal-tribals-of-ranga-village-have-decided-to-launch-a-weekly-bonga-buru/) - दुमका : झारखंड के दुमका जिले के मसलिया प्रखंड के रांगा गांव में संताल आदिवासी समुदाय ने अपने पारंपरिक पूजा स्थल मांझी थान में साप्ताहिक बोंगा बुरु (पूजा) शुरू करने का निर्णय लिया है। 12 अक्टूबर को लिए गए निर्णय के मुताबिक हर रविवार को गांव के सभी महिला, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे सामूहिक रूप - [पतली चोंच वाली कर्ल्यू: अब इस पक्षी की तसवीर से संतोष कीजिए, क्योंकि यह लुप्त हो चुकी है](https://climateeast.in/slender-billed-curlew-officially-declared-extinct/) - 30 साल पहले आखिरी बार देखी गई पतली चोंच वाली कर्ल्यू आधिकारिक तौर पर आइयूसीएन द्वारा विलुप्त घोषित कर दी गई है। स्लेंडर बिल्ड कर्ल्यू की आखिरी अनुमनित संख्या 50 थी और इसका विलुप्ल होना एक गंभीर चेतावनी की तरह है और यह स्थिति इस जरूरत को रेखांकित करती है कि संरक्षण प्रयासों को तेज - [बिजली की मांग की तुलना में भारत में ग्रीन एनर्जी में तीन गुना वृद्धि, ऊर्जा नेतृत्व की राह पर बढा देश](https://climateeast.in/indias-green-energy-growth-the-country-on-the-path-to-energy-leadership-ember-report/) - एंबर की एक नई रिपोर्ट भारत में ग्रीन एनर्जी की ग्रोथ की रफ्तार को महत्वपूर्ण बताती है और इससे यह संकेत मिलता है कि भारत रिन्यूएबल एनर्जी में नेतृत्व की भूमिका में आ सकता है। दुनिया भर में क्लीन एनर्जी की कहानी अब किसी भविष्यवाणी की तरह नहीं, बल्कि एक वास्तविकता की तरह सामने आ - [नंदुरबार: हाइब्रिड बीजों पर बढती किसानों की निर्भरता और संकट के साथी मोटे अनाज पर मंडराता खतरा](https://climateeast.in/nandurbar-farmers-increasing-dependence-on-hybrid-seeds-and-the-threat-on-millets/) - हाइब्रिड बीज पर आदिवासी किसानों की बढती निर्भरता से उनमें कर्ज लेने के मामले बढ रहे हैं। हाइब्रिड बीज वाली फसलें मौसम की मार अधिक झेलती हैं, जबकि परंपरागत बीज वाली फसलें और मोटे अनाज मौसमी अनिश्चितताओं को झेलने में अधिक समर्थ होते हैं। इससे आदिवासी किसानों की आय की अनिश्चितता और खाद्य असुरक्षा बढ - [पेरिस समझौते के दस साल : दुनिया ने दिशा पाई, अब भारत की बारी और बड़ी चुनौती](https://climateeast.in/ten-years-of-the-paris-agreement-the-world-direction-and-role-of-india/) - विशेषज्ञों का मानना है कि पेरिस समझौते के लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में अगला 10 साल महत्वपूर्ण होगा। इसमें भारत की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होगी। भारत ने संस्थागत ढांचा तो मज़बूत किया है, पर राज्यों और केंद्र के बीच नीति समन्वय और डेटा.आधारित निगरानी अब भी कमजोर कड़ी है। 2015 की दिसंबर की - [क्या होता है सीसीएस, इस तकनीक की क्या हैं चुनौतियां?](https://climateeast.in/what-is-carbon-capture-and-storage-technology/) - एशियाा की कुछ बड़ी अर्थव्यवस्थाएं सीसीएस तकनीक अपनाने का सोच रही हैं, यह कार्बन उत्सर्जन को एक तरह से रोक लेने या स्टोर कर लेने की प्रक्रिया है, यह एक फौरी समाधान लग सकता है, लेकिन इसके पीछे कई चुनौतियां छीपी हैं। सोचिए, अगर घर में आग लगी हो और हम धुएं को खिड़की से - [संताली संस्कृति के संरक्षक व शिक्षक मंचन हांसदा की सड़क दुर्घटना में मौत](https://climateeast.in/santali-culture-protector-and-teacher-manchan-hansda-died-in-a-road-accident/) - गोड्डा (झारखंड) : झारखंड के गोड्डा जिले के निवासी व संताली साहित्यकार एवं शिक्षक मंचन हांसदा का रविवार, पांच अक्टूबर 2025 को सड़क दुर्घटना में निधन हो गया। उनके निधन पर संताल परगना क्षेत्र के संताल समाज के कई प्रमुख लोगों ने दुःख व शोक व्यक्त किया है। मंचन हांसदा एक अच्छे बांसुरी वादक व - [खेरवाड़ सॉंवता एभेन बायसी की बैठक में माक् मोडें मनाने का निर्णय, जानें इस पर्व के पीछे की वजह](https://climateeast.in/santa-tribe-and-mak-mode-festival/) - दुमका: दुमका जिले के रामगढ प्रखण्ड अंतर्गत केन्दुआ टीकर गाँव में खेरवाड़ साँवता एभेन बायसी का पांच अक्टूबर को एक अहम बैठक की गई, जिसमें सर्वसहमति से इस महीने के अंत में माक् मोडें मनाने का निर्णय लिया गया। इस बैठक में विभिन्न ग्रामों से माँझी बाबा एवं लेखाहोड ने भाग लिया। बैठक में माक् - [सुपौल में कोशी तटबंध के अंदर के गांवों से लोगों को निकालने का क्रम जारी, बढते जलस्तर को लेकर बढायी गई चौकसी](https://climateeast.in/evacuations-continue-in-villages-along-the-koshi-embankment-in-supaul-district-of-bihar/) - सुपौल (बिहार) : नेपाल में पिछले दो दिनों से हो रही बारिश की वजह से कोशी नदी अपने उफान पर है। बिहार के सुपौल जिले के वीरपुर स्थित कोशी बैराज का जलस्तर इस साल के शीर्ष पर पहुंच गया है और कोशी बैराज से पानी का बहाव पांच अक्टूबर को पांच लाख क्यूसेक के पार - [दार्जिलिंग में भू धंसान में 23 की मौत, 18 भारतीय व पांच नेपाली नागरिक शामिल, भूटान ने जारी की चेतावनी](https://climateeast.in/darjeeling-landslides-total-23-deaths-confirmed-so-far-18-indians-and-5-from-nepal/) - दार्जिंलिंग: पश्चिम बंगाल के सुदूर उत्तरी जिले दार्जिलिंग में भू धंसान में कम से कम 23 लोगों की मौत हो गई है। मरने वालों में 18 भारतीय नागरिक व पांच नेपाली नागरिक शामिल हैं। नेपाल के पांच नागरिकों की भारत-नेपाल सीमा पर स्थित मानेभंज्यांग में मौत हुई है। भारी बारिश की वजह से इस हिमालयी - [जलवायु परिवर्तन जीवों के प्रवास को संकट में डाल रहा, यह मनुष्य के लिए चेतावनी](https://climateeast.in/global-experts-find-climate-change-is-threatening-the-animal-migrations/) - प्रवासी जीवों पर संयुक्त राष्ट्र की संधि कन्वेंशन ऑन द कंजर्वेशन ऑफ माइग्रेटरी स्पेशीज ऑफ वाइल्ड एनिमल्स (CMS) की एक नई रिपोर्ट ने दुनिया भर में कई प्रवासी जीवों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से होने वाले असर का खुलासा किया है। हर साल जब साइबेरिया से हज़ारों किलोमीटर उड़कर पक्षी भारत की नदियों और - [जीजी पारिख : एक स्वतंत्रता सेनानी, समाजवादी, गांधीवादी और पर्यावरण हितैषी का सफर](https://climateeast.in/gg-parikh-life-and-journey/) - डॉ गुणवंतराय गणपतलाल पारिख जो जीजी पारिख के नाम से विख्यात थे, का जन्म 30 दिसंबर 1924 को हुआ था। वे एक सच्चे गांधीवादी, स्वतंत्रता सेनानी व पर्यावरण हितौषी थे। उन्होंने अपने पीछे समाज कल्याण की एक समृद्ध विरासत छोड़ी है। 101 साल की उम्र में गांधीवादी स्वतंत्रता सेनानी डॉ जीजी पारिख का मुंबई में - [डॉ जेन गुडॉल : मनुष्यों के सबसे करीबी रिश्तेदार पर दशकों रिसर्च करने वाली संरक्षणवादी की जीवन यात्रा](https://climateeast.in/jane-goodall-will-forever-remain-an-icon-of-global-conservation-movement/) - डॉ डेम जेन मॉरिस गुडॉल का अमेरिका के लॉस एंजिल्स में एक अक्टूबर 2025 को उम्र जनित वजहों से निधन गया। उनके निधन पर दुनिया भर के पर्यावरण हितैषियों, संरक्षणवादियों ने दुःख व्यक्त करते हुए उनकी महान विरासत को याद किया है। डॉ जेन गुडॉल द्वारा स्थापित संस्थान जेन गुडॉल इंस्टीट्यूट यूएसए ने उनके बारे - [नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम 2024 का लक्ष्य हासिल हो तो भारत में बीमारियों का बोझा एक तिहाई हो जाएगा कम](https://climateeast.in/health-benefit-assessment-dashboard-cleaner-air-can-lower-prevalence-of-some-diseases-by-33-percent/) - बरसात का मौसम ख़त्म होते ही राजधानी में एक अहम चर्चा हुई। क्लाइमेट ट्रेंड्स और आईआईटी दिल्ली ने मिलकर एक वर्कशॉप का आयोजन किया, जहाँ पहली बार ऐसा टूल लॉन्च हुआ जो हवा की गुणवत्ता और जनता की सेहत के बीच सीधा रिश्ता सामने रखता है। इसका नाम है हेल्थ बेनिफिट असेसमेंट डैशबोर्ड। यह डैशबोर्ड - [खेरवाड़ सांवता एभेन बायसी ने मनाया दासॉंय पर्व, संताल बच्चों को शिक्षित करने व नशे से दूर रखने का संकल्प](https://climateeast.in/kherwad-sanvata-eben-baisi-celebrated-dasay-festival-pledged-to-educate-santal-children/) - ईष्ट देवताओं की पूजा के बाद वक्ताओं ने कई महत्वपूर्ण बातें संताल समाज के समक्ष रखीं दुमका : झारखंड के दुमका जिले के सदर प्रखंड के मकरो गांव में मंगलवार को खेरवाड़ सांवता एभेन बायसी ने गुरु-शिष्य परंपरा पर आधारित दासाँय पर्व बडे धूमधाम से मनाया। दासॉंय पर्व के मौके पर विधि विधान से पूजा-अर्चना - [दॉसाय पर्व की शुभाकामना का सरकारी होर्डिंग लगने से संताल आदिवासी समाज में खुशी](https://climateeast.in/santhal-tribal-community-rejoices-after-government-hoardings-wishing-the-festival-of-dansay/) - दुमका: दुमका प्रखंड के लेटो गांव में दिसोम मरांग बुरु युग जाहेर अखड़ा और ग्रामीणों में दॉॅसाय पर्व का होर्डिंग सरकार द्वारा लगवाए जाने से खुशी की लहर है। दॉसाय संताल आदिवासियों की गुरु-शिष्य परंपरा का पर्व है और इसका मुख्य आयोजन 30 सितंबर को है। हालांकि इससे जुड़े विभिन्न आयोजन पिछले कई दिनों से - [अबुवा दिसोम अबुवा राज फिर भी संताल आदिवासी को दॉंसाय पर सरकार की ओर से शुभकानाएं नहीं देने पर आक्रोश](https://climateeast.in/abuwa-disom-abuwa-raj-yet-santhal-tribals-are-angry-over-the-government-not-giving-them-good-wishes-on-dansay/) - दुमका: दिसोम मरांग बुरु युग जाहेर अखड़ा और ग्रामीणों द्वारा दुमका प्रखंड के लेटो गांव में आदिवासी परंपरा व मंझी परगना स्वशासन व्यवस्था के तहत गांव में कुल्ही दुरूप(बैठक) की गई। इसमें ज़िला जनसंपर्क कार्यालय, दुमका द्वारा दुर्गा पूजा एवं दशहरा की सरकार की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं का बैनर/होडिंग लगाए जाने और संताल आदिवासी - [संतालों के दासाँय पर्व को लेकर बेलबोरोन पूजा का आयोजन, पांच दिनों तक चलता है मुख्य उत्सव](https://climateeast.in/belboron-puja-is-organised-for-the-santhal-dasayan-festival-in-dumka-jharkhand/) - दुमका : गुरु-शिष्य का पर्व दासाँय को लेकर खेरवाड़ साँवता एभेन बायसी की अगुवाई में झारखंड के दुमका जिले के मकरो गांव में बेलबोरोन पूजा का आयोजन विधि विधान एवं धूमधाम से किया गया। बेलबोरोन पूजा के उपरांत सभी गुरु एवं शिष्य मिल कर अगल-बगल के ग्रामों में पाँच दिनों तक घूम घूम कर अपने - [नगईसुरी चाय बागान के कर्मी दुर्गा पूजा के पहले बोनस की मांग को लेकर सड़क पर, प्रबंधन का प्रस्ताव खारिज](https://climateeast.in/nagaisuri-tea-garden-workers-forced-to-agitate-for-their-statutory-bonus-in-jalpaiguri-west-bengal/) - चाय मजदूर कम से कम 10 प्रतिशत बोनस दुर्गा पूजा से पहले मांग रहे हैं, लेकिन प्रबंधन काली पूजा से तीन किश्त में बोनस भुगतान देने की बात कह रहा है। मजदूर इसके विरोध में आंदोलन कर रहे हैं। उनके आंदोलन के दौरान 27 सितंबर को उन पर पुलिस लाठी चार्ज की गई। जलपाईगुड़ी : - [पर्यावरण कार्यकर्ता व इनोवेटर सोनम वांगचुक ने गंभीर आरोपों से पहले क्या काम किया था?](https://climateeast.in/what-work-did-environmental-activist-and-innovator-sonam-wangchuk-do-before-the-serious-allegations/) - गंभीर आरोप लगने से पहले सोनम वांगचुक पर्यावरण मुद्दों पर गहरी समझ, पर्यावरण अनुकूल नवाचार और शिक्षा में सुधार तीन कार्याें के लिए मुख्य रूप से जाने जाते रहे हैं। वे लद्दाख के पर्यावरणीय महत्व को बार-बार रेखांकित करते रहे हैं और उसको लेकर आगाह करते रहे हैं। पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 26 सितंबर 2025 - [संताल आदिवासियों के ऐतिहासिक गांव हिजला के प्रधान सुनिलाल हांसदा का निधन](https://climateeast.in/sunilal-hansda-head-of-the-historic-santhal-tribal-village-hijla-in-jharkhand-passed-away/) - दुमका: झारखंड के दुमका जिले में स्थित संताल आदिवासियों के ऐतिहासिक गांव हिजला के ग्राम प्रधान सुनिलाल हांसदा का शहर के फूलो-झानो मुर्मू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल 27 सितंबर 2025 को निधन हो गया। वे 55 वर्ष के थे। उन्हें सांस लेने में तकलीफ थी। सुनिलाल हांसदा हर साल हिजला गांव में बसंत के दिनों में - [बिहार के दो वेटलैंड को मिला रामसर साइट का दर्जा, अब राज्य में चार और देश में 93 रामसर साइट](https://climateeast.in/bihar-has-designated-two-new-ramsar-sites-gokul-jalashay-in-buxar-and-udaipur-jheel-in-west-champaran/) - नई दिल्ली: जल संपदा के मामले में काफी समृद्ध बिहार के दो और वेटलैंड या नम भूमि क्षेत्र को रामसर साइट का दर्जा मिल गया है। ये हैं बक्सर जिले में स्थित गोकुल जलाशय जो 448 हेक्टेयर भूमि में फैला है और पश्चिम चंपारण जिले में स्थित उदयपुर झील जो 319 हेक्टेयर क्षेत्र में स्थित - [कोशी पीड़ितों ने पुनर्वास की मांग को लेकर दिया धरना, मांगें नहीं पूरी होने पर करेंगे जल सत्याग्रह](https://climateeast.in/kosi-victims-staged-a-sit-in-demanding-rehabilitation-in-supaul-district-of-bihar/) - कटाव पीड़ितों को पुनर्वास या सरकारी जमीन में बसाने, बाढ़ प्रभावित घोषित करने सहित 17 सूत्री मांगों को लेकर कोशी नव निर्माण मंच ने दिया धरना सुपौल (बिहार) : कोशी नव निर्माण मंच के बैनर तले कोशी पीड़ितों ने 26 सितंबर, दिन शुक्रवार को शहर के डिग्री कॉलेज चौक पर एक दिवसीय धरना दिया। धरना - [न्यूयॉर्क क्लाइमेट समिट में चीन का पहला ‘एब्सॉल्यूट कट’ वादा, लेकिन उम्मीद से कमजोर](https://climateeast.in/xi-jinping-joins-the-un-climate-summit-chinas-2035-climate-pledge/) - दुनिया का सबसे बड़ा प्रदूषक होने के नाते चीन पर वैश्विक निगाहें हमेशा टिकी रहती हैं। अकेले चीन का हिस्सा 2024 में वैश्विक ग्रीनहाउस गैस एमिशन का लगभग 30% रहा, जो अमेरिका से दोगुना है। इस लिहाज़ से उसका हर नया वादा वैश्विक जलवायु राजनीति में मायने रखता है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो - [सारंडा को वन अभ्यारण्य घोषित करने पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद झारखंड सरकार ने लिया मंत्री समूह बनाने का निर्णय](https://climateeast.in/declaring-saranda-a-forest-sanctuary-the-jharkhand-government-decided-to-form-a-group-of-ministers/) - सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों झारखंड सरकार को सख्त हिदायत दी थी कि वह सारंडा को वन अभ्याण्य घोषित करने की दिशा में फैसला ले अन्यथा अधिकारियों पर कार्रवाई करते हुए इस संबंध में अदालत खुद कदम उठाएगा। रांची: सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद झारखंड सरकार ने राज्य के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा - [कोलकाता में चार दशक में दूसरी बार इतनी बारिश, 10 की मौत, सीएम ममता व मेयर ने क्या कहा?](https://climateeast.in/heavy-rains-in-kolkata-252-mm-of-rainfall-in-24-hours-ten-people-died/) - ममता बनर्जी ने अपने विस्तृत ट्वीट के जरिए कोलकाता में बारिश के बाद उत्पन्न हुए हालात पर बयान दिया है। कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में हुई भारी बारिश ने महानगर की जिंदगी को अस्त-व्यस्त कर दिया है और और मंगलवार (23 September 2025) रात 10 बजे तक मृतकों की संख्या 10 पहुंच गयी। - [पेरिस समझौते से और दूर ले जा रही है दुनिया की फॉसिल फ्यूल योजनाएँ : रिपोर्ट](https://climateeast.in/worlds-fossil-fuel-plans-are-moving-further-away-from-the-paris-agreement-production-gap-report/) - अगर पेरिस समझौते का लक्ष्य पाना है तो अब बहुत तेज़ी से और बड़े पैमाने पर फॉसिल फ्यूल उत्पादन घटाना होगा। वरना अरबों डॉलर की पब्लिक फंडिंग ऐसे प्रोजेक्ट्स पर बर्बाद होगी जो आगे चलकर बेकार साबित होंगे। स्टॉकहोम से जारी हुई एक रिपोर्ट ने साफ कहा है कि पेरिस समझौते के 10 साल बाद - [दुनिया में हैं मात्र 26,700 गैंडे, भारत व नेपाल इनका प्रमुख घर लेकिन अवैध शिकार है बड़ा खतरा](https://climateeast.in/state-of-the-rhino-2025-highlights/) - इंटरनेशनल राइनो फाउंडेशन (अंतरराष्ट्रीय गैंडा फाउंडेशन) ने विश्व गैंडा दिवस (22 सितंबर) से ठीक पहले एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें इस जीव के संरक्षण से जुड़ी चुनौतियों व संरक्षण प्रयास की उपलब्धियों का जिक्र किया गया है। स्टेट ऑफ द राइनो 2025 नामक इस रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में इस वक्त कुल गैंडों की - [रिन्यूएबल एनर्जी को लेकर फैली भ्रांतियाँ टूट रहीं, ताज़ा रिपोर्ट में सामने आए तथ्य](https://climateeast.in/renewable-energy-myths-and-zero-carbon-analytics-report/) - आँकड़ों के मुताबिक फॉसिल फ्यूल से उत्पन्न हर गीगावॉट-घंटा बिजली पर औसतन 5.2 पक्षियों की मौत होती है, जबकि विंड एनर्जी में यह संख्या महज़ 0.3 से 0.4 है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन खुद जैव विविधता के लिए कहीं बड़ा ख़तरा है और रिन्यूबल एनर्जी उसे रोकने में अहम भूमिका निभा सकती - [अमेजन के जंगल पर किए गए शोध का सबक: आदिवासियों के प्रबंधन वाला जंगल कई बीमारियों के नियंत्रण में मददगार](https://climateeast.in/amazon-countries-forests-on-indigenous-lands-reduce-spread-of-27-diseases/) - क्लाइमेट ईस्ट डेस्क अमेजन के जंगल पर किए गए एक रिसर्च में यह तथ्य उभर कर सामने आया कि जिन जंगलों का प्रबंधन आदिवासियों व मूल निवासियों के पास है, वहां बीमारियों की संख्या में लगातार गिरावट आयी है। मान लीजिए कि छत्तीसगढ़ के हसदेव का जंगल पूरी तरह खत्म हो जाए या झारखंड का - [सूखा और बाढ़ के बीच दुनिया: WMO की रिपोर्ट, दुनिया का जल चक्र असंतुलित हो गया है](https://climateeast.in/wmo-report-the-worlds-water-cycle-has-become-unbalanced/) - पानी, ज़िंदगी का सबसे बुनियादी जरिया, अब पहले से कहीं ज़्यादा अनिश्चित हो चला है। कभी इतना कम कि धरती फटने लगे, कभी इतना ज़्यादा कि शहर डूब जाएं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की ताज़ा स्टेट ऑफ ग्लोबल वॉटर रिसोर्सेज रिपोर्ट 2024 ने साफ़ कर दिया है कि दुनिया का जल चक्र पहले से - [खेरवाड़ साँवता एभेन बैसी में संताल युवाओं को नशे से दूर रखने व शिक्षा के करीब लाने का फैसला](https://climateeast.in/decision-to-keep-santal-youth-away-from-drugs-and-bring-them-closer-to-education/) - दुमका : दुमका जिले के रामगढ प्रखंड की बरमसिया पंचायत के ग्राम जालवे के उत्क्रमित मध्य विद्यालय प्रांगण में 17 सितंबर को शिवलाल मुर्मू की अध्यक्षता में खेरवाड़ साँवता एभेन बैसी की एक आवश्यक बैठक बुलाई गई। इस बैठक में समाज के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। बैसी के सदस्यों ने उपस्थित सभी ग्रामीणों - [फोटो स्टोरी : कीड़ा, कोकून और तितली, समझिए रेशम बनने की पूरी कहानी](https://climateeast.in/photo-story-worm-cocoon-and-butterfly-story-of-silk-formation/) - राहुल सिंह की रिपोर्ट चैनपुर (गिरिडीह) : रेशम के कपड़े कपड़ों की एक उन्नत किस्म मानी जाती है, जिसकी न सिर्फ भारत में बल्कि दुनिया भर में काफी अधिक मांग होती है। हालांकि प्रतिस्पर्धी कीमतों की वजह से बाजार में कृत्रिम रेशम भी उपलब्ध है, लेकिन असली रेशम की मांग हमेशा की तरह बनी हुई - [मादा गोरिल्ला का यह स्वभाव आपको अचरज में डालेगा, उनकी समझ आपको सोचने को करेगी मजबूर](https://climateeast.in/female-gorillas-inter-group-relationships-new-study/) - एक नई स्टडी Dispersed female networks: female gorillas’ inter-group relationships influence dispersal decisions ने मादा गोरिल्ला के स्वाभाव के बारे में दिलचस्प खुलासा किया है। उनका व्यवहार बहुत हद तक मनुष्यों की तरह होता है। रॉयल सोसाइटी के पिछले महीने पब्लिश हुई एक नई स्टडी के अनुसार, मादा गोरिल्ला खुद के लिए कभी ऐसे समूह - [कोशी के सवालों पर प्रशासन को अल्टीमेटम, पुनर्वास नहीं हुआ तो डेरा डालो सत्याग्रह करेंगे](https://climateeast.in/rehabilitation-is-not-done-then-we-will-do-satyagraha-says-kosi-sufferer/) - कोशी की विद्यमान चुनौती और हमारा दायित्व विषय पर कोशी नवनिर्माण मंच का जिला कार्यकर्ता सम्मेलन शहर के पब्लिक लाइब्रेरी में आयोजित किया गया। सुपौल: कोशी नदी और उसके मैदान में स्थित भूभाग की चुनौतियों और स्थानीय समाज व लोगों के दायित्व पर केंद्रित कोशी नव निर्माण मंच का कार्यकर्ता सम्मेलन 11 सितंबर 2025, दिन - [2050 तक झारखंड अपने कार्बन उत्सर्जन को 60 प्रतिशत तक कम कर सकता है: रिपोर्ट](https://climateeast.in/jharkhand-can-reduce-its-carbon-emissions-by-60-percent-by-2050-report/) - झारखंड जस्ट ट्रांजिशन टॉस्क फोर्स की मदद से यूएनडीपी व सीड ने झारखंड पर केंद्रित दो रिपोर्ट तैयार की है, दूसरी रिपोर्ट प्रमुख कोयला उत्पादक जिले चतरा पर केंद्रित है। रांची: झारखंड की अर्थव्यवस्था को भविष्य की चुनौतियों के अनुकूल बनाने के उद्देश्य से टास्क फोर्स सस्टेनेबल जस्ट ट्रांज़िशन (झारखंड सरकार), यूएनडीपी इंडिया और सेंटर - [बिहार चुनाव में कोशी के सवाल को मजबूती से उठाने के मद्देनजर कोशी नव निर्माण मंच करेगा कार्यकर्ता सम्मेलन](https://climateeast.in/kosi-nav-nirman-manch-will-organize-a-workers-conference-to-strongly-raise-the-issue-of-kosi-in-bihar-elections/) - कोशी नव निर्माण मंच का जिला कार्यकर्ता सम्मेलन 11 सितंबर को पब्लिक लाइब्रेरी में होगा आयोजित कोशी नव निर्माण मंच के जिला कार्यकर्ता सम्मेलन में तय होगी आगे के आंदोलन की रणनीति सुपौल: कोशी की विद्यमान चुनौतियां और हमारा दायित्व विषय पर कोशी नव निर्माण मंच का जिला कार्यकर्ता सम्मेलन आगामी 11 सितंबर को दिन - [उधवा के मछुआरों की साझा सामुदायिक पहल, जल निकायों का संरक्षण है आजीविका का माध्यम](https://climateeast.in/udhwa-fishermen-conserve-water-bodies-through-joint-community-initiative/) - उधवा के मछुआरे अपने पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने के लिए समुदाय-संचालित, पारंपरिक तरीकों का उपयोग करते हैं, लेकिन बाहरी चुनौतियों से निपटने के लिए उन्हें सरकारी सहयोग की आवश्यकता है। राहुल सिंह उधवा (झारखंड) : झारखंड का साहिबगंज जिला अपनी अनूठी भौगोलिक विशेषताओं के साथ, जैव विविधता से समृद्ध है। खासकर गंगा नदी का - [संताल आदिवासियों के गुरु-शिष्य परंपरा का महापर्व दासाँय के आयोजन की कार्ययोजना तय](https://climateeast.in/daasayan-the-grand-festival-of-guru-disciple-tradition-of-santal-tribal/) - दुमका: दुमका जिले के दुमका प्रखंड के मकरो गाँव में खेरवाड़ साँवता एभेन बैसी और ग्रामीणों ने संताल आदिवासियों के गुरु शिष्य के महापर्व दासाँय को लेकर आठ सितंबर को एक बैठक की। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी इस पर्व को बहुत धूमधाम से 30 सितंबर को मनाने का निर्णय लिया गया। इस - [जलवायु व मानव निर्मित आपदा से जूझते कोशी को शिक्षा से रोशन करने की छोटी-सी कोशिश](https://climateeast.in/bihar-koshi-region-affected-by-climate-disaster-and-efforts-to-educate-children/) - कोशी क्षेत्र जहां बाढ़ की वजह से बच्चों की शिक्षा बाधित होती है, वहां उनकी पढाई के लिए छोटी पहल के साकारात्मक नतीजे दिख रहे हैं। सुपौल शहर में स्थित लाइब्रेरी जहां बड़े बच्चों के लिए मददगार साबित हो रही है, वहीं तटबंध के बीच के बच्चे जीवनशाला में आरंभिक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। - [धनबाद के हाथुडीह के ग्रामीणों ने की ग्रामसभा, कहा - नहीं होने देंगे कोयले का अवैध उत्खनन, लगाएंगे बोर्ड](https://climateeast.in/dhanbad-hathudih-villagers-inheld-a-gram-sabha-will-not-allow-illegal-coal-mining/) - धनबाद जिले के बाघमारा ब्लॉक के हाथुडीह के ग्रामीण लंबे समय से कोयले के अवैध उत्खनन से परेशान हैं। अवैध उत्खनन से गांव की सामुदायिक संपत्ति, जंगल, चारागाह को नुकसान होता है, जिसके खिलाफ ग्रामीण अब एकजुट होकर उठ खड़े हुए हैं। बाघमारा (धनबाद) : झारखंड के धनबाद जिले के बाघमारा प्रखंड के हाथुडीह के - [क्रिटिकल मिनरल के पुनर्चक्रण के लिए प्रोत्साहन योजना को मंजूरी, नवीनीकृत ऊर्जा के लिए यह क्यों है जरूरी?](https://climateeast.in/cabinet-approves-rs-1500-crore-incentive-scheme-to-promote-critical-mineral-recycling-in-india/) - इस योजना के तहत महत्वपूर्ण खनिजों के निष्कर्षण के लिए बैटरी अपशिष्ट और ई कचरे के पुनर्चक्रण की क्षमता विकसित की जाएगी। यह योजना राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन(एनसीएमएम) का हिस्सा है। स्वच्छ ऊर्जा के भारत के लक्ष्यों का हासिल करने के लिए क्रिटिकल मिनरल और उसके लिए आत्मनिर्भरता जरूरी है। नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - [मौसम की मार से खराब हो रहा लोगों की सब्जी का बजट, छोटे व सीमांत किसान प्रभावित](https://climateeast.in/vegetable-budget-affected-due-to-extreme-weather-events/) - भारत में सामान्यतः आलू, प्याज, टमाटर सहित अन्य सब्जियां प्रमुख रूप से छोटे और सीमांत किसान उपजाते हैं, जो संसाधन से कम संपन्न होते हैं। ऐसे में अति बारिश, तेज गर्मी और अत्यधिक ठंड से होने वाले फसल नुकसान को वे झेल नहीं पाते, पैदावार कम हो जाती है और फिर इसका असर लोगों की - [पूर्वी सिंहभूम में ग्राम पंचायत हेल्प डेस्क की पहल से कम हो रहा सरकार व नागरिक के बीच का फासला](https://climateeast.in/gram-panchayat-help-desk-initiative-in-east-singhbhumdistrict-of-jharkhand/) - ग्राम पंचायत हेल्प डेस्क जीपीएचडी का संचालन टैगोर सोसाइटी फॉर रूरल डेवलपमेंट कर रही है पूर्वी सिंहभूम जिले में महिला सशक्तीकरण कार्यक्रम के तहत मनरेगा के माध्यम से 35 जीपीएचडी संचालित हो रहे हैं जीपीएचडी लोगों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं व विकास योजनाओं से जोड़ने में मददगार साबित हो रहा है राँची: झारखंड के - [पैंगोलिन की सभी आठ ज्ञात प्रजातियां विलुप्त होने के जोखिम में: रिपोर्ट](https://climateeast.in/all-eight-recognised-pangolin-species-remain-at-high-risk-of-extinction/) - पैंगोलिन पृथ्वी पर सबसे विशिष्ट स्तनधारियों में से एक और सबसे असाधारण जीवों में से एक है, जो आज शोषण और आवास के नुकसान के कारण भारी दबाव में हैं। 2016 से 2024 के बीच 75 देशों और 178 व्यापार मार्गों से पैंगोलिन उत्पादों की जब्ती में अनुमानित पाँच लाख से अधिक पैंगोलिन शामिल होने - [एनर्जी ट्रांजिशन की तरह पेड़ लगाने का भी दबाव विकासशील देशों पर अधिक, भारत आगे तो अमेरिका-यूरोप पीछे](https://climateeast.in/science-journals-report-on-tree-plantation-india-ahead-usa-behind/) - सिर्फ पेड़ लगाना नहीं, समझदारी से लगाना ज़रूरी है पेड़ लगाना जलवायु परिवर्तन से लड़ाई का आसान हल माना जाता है। लेकिन, साइंस जर्नल में छपी एक नई स्टडी कहती है कि हकीकत उतनी सीधी नहीं है। रिसर्च के मुताबिक दुनिया भर में अगर पेड़ लगाने और जंगल बहाल करने के काम सही जगह पर - [जम्मू कश्मीर में बारिश, बाढ़, भूस्खलन, अभी खतरा टला नहीं](https://climateeast.in/jammu-kashmir-floods-2025-updates/) - श्रीनगर/जम्मू : जम्मू कश्मीर मंगलवार से हो रही बेतहाशा बारिश से बाढ़, भूस्खलन व पक्की संरचनाओं के ध्वस्त होने के संकट का सामना कर रहा है। लगातार बारिश होने के कारण बाढ़ और भूस्खलन का खतरा अभी टला नहीं है। राज्य के विभिन्न जिलों में ऐहतियात बरती जा रही है और जिलाधिकारी खुद मौके पर - [क्लीन एनर्जी स्टोरेज क्षमता बढ़ा कर हर साल 60 हजार करोड़ की बचत संभव, बिल भी होगा कम](https://climateeast.in/clean-energy-storage-capacity-in-india/) - “हम 500 गीगावॉट के लक्ष्य के आधे रास्ते तक पहुँच चुके हैं। अब सबसे बड़ा कदम है स्टोरेज को तेज़ी से बढ़ाना ताकि साफ़ ऊर्जा 24x7 उपलब्ध हो सके। इसके लिए 2032 तक 3-4 लाख करोड़ रुपये का निवेश चाहिए होगा, लेकिन फायदा बहुत बड़ा है-हर साल उपभोक्ताओं को करीब 60 हज़ार करोड़ रुपये की - [अतिथि की कलम से: जलवायु आपदा की पहली पीड़ित महिला तो उन्हें अपने लेखन के केंद्र में रखें](https://climateeast.in/women-are-primary-victim-of-climate-disaster-so-put-them-at-the-centre-of-your-writing-researcher-pooja-kumari/) - क्लाइमेट ईस्ट ने आज एक साल पूरा कर लिया। ऐसे में एक महिला रिसर्चर - जिनके पास जमीनी कामकाज का अनुभव है - से यह समझना-जानना जरूरी है कि वे महिलाओं को केंद्र में रख कर क्लाइमेट ईस्ट के पिछले एक साल के कामकाज को कैसे देखती हैं, उसमें क्या सुधार की जरूरत महसूस करती - [कोशी की कटनिया की शिकार महिला ने कोशी नवनिर्माण मंच को लिखा पत्र, बतायी अपनी पीड़ा](https://climateeast.in/a-woman-who-was-a-victim-of-kosi-river-erosion-wrote-a-letter-and-asked-for-help/) - सुपौल: बिहार के सुपौल जिले के किशनपुर ब्लॉक के बेलागोठ गांव के वार्ड नंबर सात की रेणु कुमारी ने कोशी नवनिर्माण मंच को एक पत्र लिख कर अपने घर के कोशी के कटाव (स्थानीय शब्द कटनिया) में कट जाने की बात बतायी है और कहा है कि प्रभावितों की सूची से उनका नाम गायब कर - [गंगोत्री में बर्फ़ से मिलने वाला पानी घट रहा है और बारिश व बेसफ़्लो की हिस्सेदारी बढ़ रही है: अध्ययन](https://climateeast.in/rain-water-and-baseflow-is-increasing-in-gangotri-valley-iit-indore-study/) - आईआईटी, इंदौर की शोध छात्रा व अध्ययन की मुख्य लेखिका पारुल विन्ज़े कहती हैं, “चार दशकों का डेटा हमें साफ़ दिखाता है कि गंगोत्री का जल बहाव बदल रहा है। अब बर्फ़ के पिघलने पर कम, और बारिश पर ज़्यादा निर्भरता बढ़ रही है।” उत्तराखंड की ऊँचाइयों में बसी गंगोत्री घाटी, जहाँ से गंगा की - [रांची के नगड़ी में रिम्स - 2 के लिए जमीन अधिग्रहण का आदिवासी रैयतों ने खेत जोत कर जताया विरोध](https://climateeast.in/tribal-farmers-protested-against-land-acquisition-for-rims-2-in-nagri-ranchi-by-ploughing-their-fields/) - रांची से सटे नगड़ी में झारखंड के प्रिमियम सरकारी मेडिकल संस्थान रिम्स के नए परिसर के लिए जमीन अधिग्रहण की कोशिशों का स्थानीय रैयत लंबे समय से विरोध कर रहे हैं। इस कड़ी में आज किसानों ने प्रस्तावित जमीन पर हल जोत कर व रोपा कर अपना विरोध जताया। रांची: झारखंड की राजधानी रांची से - [भागलपुर के गुंजेश से मिलिए: नौकरी छोड़ खेती में बनाया कैरियर, बागवानी फसलों के हैं एक्सपर्ट](https://climateeast.in/gunjesh-gunjan-from-bhagalpur-left-his-job-and-start-farming-horticultural-crops/) - आम, परबल व कतरनी धान जैसी फसलों के लिए मशहूर भागलपुर के गुंजेश गुंजन ने परंपरागत खेती के बजाय वैसी फसलों का उत्पादन शुरू किया जो परंपरागत रूप से इस क्षेत्र में नहीं उपजाई जाती थी। उन्होंने खेती में आधुनिक तकनीक व रिसर्च एंड डेवलपमेंट को अपनाया और उसे फायदे के काम में तब्दील कर - [कोशी के लोगों के सवालों पर लड़ने वाले रिटायर्ड इंजीनियर विनय शर्मा का निधन](https://climateeast.in/engineer-vinay-sharma-who-fought-for-the-rights-of-kosi-victims-passed-away/) - विनय शर्मा बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग में एक इंजीनियर थे, जो सरकारी सेवा के अपने अनुभवों के आधार पर व्हिसलब्लोअर बन गए और सरकारी गड़बड़ियों को उजागार करते थे। कुसहा त्रासदी की जांच के लिए बने न्यायिक जांच आयोग के सामने वे शारीरिक दिक्कतों के बावजूद ऑटो या किसी अन्य माध्यम से पहुंचते - [मुंबई की बारिश के सबक, एक्सपर्ट बोले- अब सिर्फ चेतावनी और एडाप्टेशन ही सहारा](https://climateeast.in/mumbai-rains-2025-experts-say-necessary-to-adopt-warning-system-and-adaptation/) - मात्र चार दिनों में मुंबई में हुई बारिश ने 800 मिमी का आंकड़ा पार कर लिया। यह स्थिति जलवायु परिवर्तन के मद्देनजर बचाव के नए उपाय की चेतावनी देती है। भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई एक बार फिर भारी बारिश से जूझ रही है। 16 अगस्त से शुरू हुई लगातार बरसात ने 19 अगस्त की - [अलविदा मोहनमाला: काजीरंगा की एक बुजुर्ग हथिनी की भावपूर्ण विदाई](https://climateeast.in/kazirangas-oldest-forest-dept-elephant-mohanmala-passes-away/) - गोवाहाटी: असम स्थित राष्ट्रीय उद्यान काजीरंगा की बुजुर्ग हथिनी मोहनमाला का 14 अगस्त 2025 को निधन हो गया। उन्हें भावपूर्ण तरीके से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के कर्मियों ने विदाई दी। इसके साथ ही उनके महान योगदान को याद किया गया। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान ने 14 अगस्त को अपने सोशल मीडिया एकाउंट एक्स पर जानकारी दी, - [भारत के 90% लोग ग्लोबल वार्मिंग को लेकर चिंतित, 78% लोग चाहते हैं सरकार और कदम उठाए : सर्वे](https://climateeast.in/90-percent-people-in-india-are-worried-about-global-warming-yale-program-survey/) - येल प्रोग्राम ऑन क्लाइमेट चेंज कम्युनिकेशन और सीवोटर इंटरनेशनल के सर्वे में भारत में ग्लोबल वार्मिंग, चरम गर्मी व जलवायु परिवर्तन को लेकर कई नए तथ्य सामने आए हैं। भारत के 89% लोग कह रहे हैं कि उन्होंने खुद ग्लोबल वार्मिंग का असर महसूस किया है। कभी तपते हीटवेव, कभी बेहिसाब बारिश, कभी तूफ़ान, मौसम - [जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ में बादल फटने से तबाही, लंगर, दुकानें व इमारत पानी में बहे](https://climateeast.in/flash-flood-in-chashoti-area-in-kishtwar-jammu-and-kashmir/) - श्रीनगर: जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चशोती गांव में 14 अगस्त 2025 को दिन में बादल फटने से कई लोगों की जान जाने व दर्जनों लोगों के लापता होने की आशंका है। इस हादसे के बाद क्षेत्र में राहत एवं बचाव कार्य तीव्र किए गए हैं। इस हादसे को लेकर मीडिया रिपोर्टाें में बड़ी - [डीएम ने कोशी तटबंध के बीच के गांवों का लिया जायजा, प्रभावितों का पलायन जारी](https://climateeast.in/supaul-dm-visit-villages-kosi-affected-villages/) - सुपौल (बिहार) : सुपौल के डीएम सावन कुमार ने जिले के किशनपुर ब्लॉक की दुबियाही पंचायत के बेलागोठ में कोशी नदी से होने वाले कटाव की स्थिति का 11 अगस्त को निरीक्षण किया। डीएम ने इस दौरान पाया कि पानी का बहाव बहुत तेजी से हो रहा है। जिलाधिकारी के सोशल मीडिया हैंडल से दी - [विश्व आदिवासी दिवस और चाय बागानों में आदिवासियों का संघर्ष](https://climateeast.in/world-indigenous-day-and-the-struggle-of-tribals-in-tea-gardens-in-west-bengal/) - किरसेन खड़ियाचाय मजदूर अधिकार कार्यकर्ता 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस यह दिन आदिवासी समुदायों की संस्कृति, संघर्ष और अधिकारों को याद करने का अवसर है। लेकिन उत्तर बंगाल के चाय बागानों में रहने वाले आदिवासियों के लिए यह दिन केवल एक औपचारिक उत्सव बनकर रह गया है। अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग के चाय बागानों में - [संताली को बाजार की भाषा बनाना होगा, ओलिचिकी लिपि के लिए अभी और काम करना होगा: विलियम हांसदा](https://climateeast.in/santali-has-to-be-made-a-market-language-more-work-has-to-be-done-for-olichiki-script-says-william-hansda/) - विलियम हांसदा: कॉमर्स के एक छात्र के संताली प्रकाशक व लेखक बनने का यात्रा अनुभव विलियम हांसदा अपने युवावस्था के दिनों में एक सीए बनने की सोच के साथ कोलकाता गए थे। वे वहां सीए इंटरमीडिएट की पढाई कर रहे थे, इसी दौरान वे अस्वस्थ हुए और वे वहां से धनबाद आ गए। धनबाद में - [कोशी में बढ़ रहा बाढ़ व कटाव का खतरा, दर्जनों घर पानी में समाए, प्रभावितों के लिए सामुदायिक रसोई शुरू](https://climateeast.in/flood-and-erosion-is-increasing-in-kosi-dozens-of-houses-submerged-in-water/) - सुपौल: बिहार के सुपौल जिले में कोशी नदी का जलस्तर काफी बढ गया है। कोशी बराज का शनिवार को डिस्चार्ज लेवल 1.48 लाख क्यूसेक व रविवार को 1.70 लाख क्यूसेक पर पहुंच गया। इससे कटाव का खतरा लगातार बढता जा रहा है। पानी की तेज धार की वजह से अबतक नदी के आसपास के दर्जनों - [लुगू बुरू: एक पवित्र पहाड़, एक समृद्ध जंगल जिसे आदिवासियों ने बचाया](https://climateeast.in/lugu-buru-a-sacred-mountain-in-jharkhand-saved-by-tribals/) - बोकारो जिले में स्थित लुगू बुरू आदिवासियों का एक पवित्र तीर्थ स्थल है। यहां हर साल अंतरराष्ट्रीय सरना धर्म सम्मेलन का आयोजना होता है। यहां 1500 मेगावाट की एक प्रस्तावित जल विद्युत परियोजना प्रस्तावित थी, जिसके खिलाफ स्थानीय आदिवासियों की गोलबंदी ने राज्य सरकार को स्टैंड लेने पर मजबूर किया। राहुल सिंह आदिवासी प्रकृति जीवी - [उत्तराखंड की आपदा: जब हिमालय ने चुप्पी तोड़ी और हमारे तैयार न होने की कीमत चुकाई गई](https://climateeast.in/uttarakhand-disaster-when-the-himalayas-broke-their-silence-and-we-paid-the-price-for-our-lack-of-preparation/) - दोपहर का वक्त (दिन पांच अगस्त, 2025) था। बादल घिरे थे, पर कोई डर नहीं था। यह तो पहाड़ों का रोज़ का मिज़ाज है। लेकिन अचानक, जैसे किसी ने आसमान के दरवाज़े को खोल दिया हो। एक गगनचुंबी जलधारा सीधी पहाड़ से उतरती हुई धाराली की गलियों में घुस गई। जो सामने आया, उसे बहा - [आदिवासी परिवारों को कागज पर मिल गया भूमि पट्टा, पर जमीन पर गायब है जमीन](https://climateeast.in/land-lease-to-tribals-face-irregularities-bhumi-patta-in-panna-district-of-madhya-pradesh/) - मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के कई गांवों में आदिवासी परिवारों को राज्य सरकार की ओर से खेती के लिए करीब दो दशक पहले जमीन का पट्टा मिला है, लेकिन उस जमीन का चिह्निकरण नहीं होने की वजह से कई लोग अपनी जमीन पर अधिकार पाने से वंचित हैं। कई ऐसे परिवार हैं जो खुद को - [कोशी का पानी बढने से दर्जनों घर कटाव की चपेट में, लोग ऊँची जगह ढूंढ रहे ठिकाना](https://climateeast.in/rising-water-level-of-kosi-river-affects-life/) - सुपौल से कम्युनिटी जर्नलिस्ट राजेश मंडल की रिपोर्ट दुबियाही पंचायत, सुपौल जिला, बिहार: कोशी नदी में अगस्त के पहले सप्ताह में जलस्तर बढ गया है। बीरपुर बैराज से पानी छोड़े जाने से सुपौल जिले के तटबंध के बीच स्थित कई गांव प्रभावित हुए हैं। कई इलाके में नदी के अधिक करीब स्थित घरों को कटाव - [विनोद हेंब्रम: 10 दिन रेल पटरियों पर भूखे पैदल चलने वाले प्रवासी मजदूर की कहानी](https://climateeast.in/vinod-hembrom-the-story-of-a-tribal-migrant-worker-from-jharkhand-who-walked-on-railway-tracks-for-10-days/) - यह कहानी दुमका जिले के एक ऐसे प्रवासी श्रमिक की है जो पैसे के बिना पैदल ही रेल पटरियों के सहारे अपने घर के लिए निकले। कोरोना के दौर के बाद यह संभवतः इस तरह का पहला मामला है। इससे पहले उन्होंने जहां काम किया वहां उन्हें तनख्वाह नहीं मिली और काम के लिए साथ - [उत्तराखंड के धराली गांव में बादल फटने से चार की मौत, 50 लापता](https://climateeast.in/uttarkashi-cloudburst-incident-dharali-flash-floods-harsil-flash-floods-four-dead-50-missing/) - देहरादून: उत्तराखंड के उत्तरकाशी के धराली में पांच अगस्त 2025 को बादल फटने से कम से कम चार लोगों की मौत हो गई व करीब 50 लोग लोग लापता हो गए। इस घटना को लेकर एनडीआरएफ के आइजी मोहसिन शाहीदी ने बताया कि यह घटना दिन के करीब दो बजे हर्षिल टाउन में हुई। उन्होंने - [मजदूर हित में एनएमएमएस ऐप रद्द कर सोशल ऑडिट को मजबूत किया जाए](https://climateeast.in/nrega-sangharsh-morcha-demands-nmms-app-be-revoked/) - नरेगा संघर्ष मोर्चा ने कहा है कि गांव में डिजिटल शिक्षा का स्तर बुरा है, नरेगा साथियों के पास स्मार्ट फोन नहीं है। कार्यस्थल का फोटो लोड करने के लिए स्थित इंटरनेट कनेक्शन जरूरी है। ऐप में कई तकनीकी खामियां हैं, ऐसे में इसे रद्द कर सामाजिक अंकेक्षण यानी सोशल ऑडिट की पद्धति को मजबूत - [संताली भाषा व उसके रचना संसार को सहेजते श्याम चरण टुडू](https://climateeast.in/shyam-charan-tudu-preserving-the-santali-language-and-literature/) - श्याम चरण टुडू ने बांग्ला माध्यम से पढाई की और संताली व हिंदी में पोस्ट ग्रेजुएट किया। उनका रचना संसार संताली, हिंदी व बांग्ला भाषा के बीच फैला हुआ है, हालांकि संताली भाषा व ओलचिकी लिपि उसके केंद्र में है। उनके रचना संसार के विभिन्न आयाम हैं, जिसके जरिये वे आदिवासी संस्कृति, परंपरा व ज्ञान - [बंगाल में मनरेगा के तहत काम शुरू करने के आदेश की अवहेलना कर रही है केंद्र व राज्य सरकार: पीबीकेएमएस](https://climateeast.in/central-and-west-bengal-government-defy-calcutta-high-court-order-says-pbkms/) - कोलकाता: पश्चिम बंग खेत मजूर समिति (PBKMS) ने पश्चिम बंगाल में मनरेगा मजदूरों की काम की मांग और उस पर केंद्र व राज्य सरकार के रुख पर एक बयान जारी कर आरोप लगाया है कि केंद्र व राज्य की सरकार कलकत्ता हाइकोर्ट के आदेश की अवहेलना कर रही है। पश्चिम बंग खेत मजूर समिति ने - [डॉ क्रिथी करंथ व सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ स्टडीज मैकनल्टी पुरस्कार पाने वाले पहले वन्यजीव संरक्षणकर्ता](https://climateeast.in/dr-krithi-k-karanth-and-the-centre-for-wildlife-studies-have-been-awarded-the-2025-john-p-mcnulty-prize/) - बेंगलुरु: बेंगलुरु स्थित वन्य जीव संरक्षण से संबंधित संस्थान सेंटर फॉर वाइल्ड लाइफ स्टडीज की सीईओ डॉ क्रिथी के करंथ व उनकी अगुवाई वाले संस्थान सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ स्टडीज (CWS) को वैश्विक संरक्षण में उनके साहसिक और प्रभावशाली योगदान के लिए 2025 जॉन पी मैकनल्टी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 23 जुलाई 2025 को एस्पेन, - [छोटी बिल्लियों को जैव विविधता नीति और वन प्रबंधन योजनाओं में शामिल किया जाए : स्टेटस रिपोर्ट](https://climateeast.in/incorporate-small-cats-into-biodiversity-policy-and-forest-management-plans/) - भारत सरकार द्वारा जारी एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण में पाया गया कि जंगल कैट देश में सबसे अधिक फैली हुई छोटी बिल्ली प्रजाति है, जबकि रस्‍टी-स्‍पॉटेड कैट की उपस्थिति में 21% की गिरावट आई है। रेगिस्तानी बिल्ली की उपस्थिति शुष्क और अर्ध-शुष्क वनों में स्थिर पाई गई, जबकि क्लाउडेड लेपर्ड और मार्बल्ड कैट जैसी दुर्लभ प्रजातियां - [देश में बाघ अभ्यारण्यों की संख्या 46 से बढ़कर 58 हुई, केंद्र ने छोटी बिल्लियों पर स्टेटस रिपोर्ट भी जारी की](https://climateeast.in/the-number-of-tiger-reserves-in-india-increased-from-46-to-58-the-center-also-released-a-status-report-on-small-cats/) - विश्व बाघ दिवस के मौके केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने कई नई पहल की है, जिसके तहत बाघ अभ्यारण्यों में पौध रोपण व एकल उपयोग वाली प्लास्टिक का पूर्ण रूप से उपयोग रोकने की कोशिश शामिल है। नई दिल्ली: केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 29 जुलाई को विश्व बाघ - [सुंदरबन की महिला मछुआरों का नून जल से संघर्ष : सिमटती आजीविका, बढता स्वास्थ्य संकट](https://climateeast.in/sundarbans-fisherwomen-struggle-with-salinity-and-climate-change-shrinking-livelihoods-growing-health-crisis/) - उत्तर चौबीस परगना के धमाखाली से राहुल सिंह की रिपोर्ट सुंदरबन में नदियों में बढता खारापन सभी तरह के मछुआरों को प्रभावित करता है, लेकिन मछुआरा महिलाएं इससे खासतौर पर प्रभावित होती हैं। इसकी वजह है कि वे खासतौर पर नदी में डूब कर घंटों छोटी मछलियां पकड़ती हैं जिसे बीज के रूप में इस्तेमाल - [हमारे खेत पानी में डूब जाते हैं तो हमारे लोग पंजाब-हरियाणा में धान की बोआई करते हैं](https://climateeast.in/when-our-fields-get-submerged-in-water-our-people-sow-paddy-in-punjab-haryana-a-kosi-man-says/) - सुपौल से राजेश मंडल सुपौल (बिहार) : हमारे इलाके में तीन दिन पहले कोशी नदी में पानी बढने से खेत व रास्ते जब जलमग्न हो गए हैं। अब सिर्फ लोगों का घर ही बचा है। 23 जुलाई को बीरपुर स्थित कोशी बराज से पानी छोड़े जाने के बाद नदी में पानी का स्तर काफी बढ - [पश्चिम बंगाल के 29 बागान मालिकों के पास मजदूरों के पीएफ का 65.86 करोड़ रुपया बकाया](https://climateeast.in/29-tea-plantation-of-west-bengal-owe-rs-65-86-crore-to-workers-pf/) - जिस गरगेंडा चाय बागान के मजदूर गुंजन नायक की मौत पैसे के अभाव में हो गई, उस बागान के पास कर्मचारियों के पीएफ का 4.46 करोड़ रुपये बकाया है। चाय मजदूर वेतन के साथ अपने पीएफ और ग्रेच्युटी का लाभ पाने के लिए भी प्रबंधन से जूझते हैं। अलीपुरद्वार (पश्चिम बंगाल) : पश्चिम बंगाल के - [उत्तर बंगाल के चाय बागानों में भय, भूख और मौत…एक और चाय मजदूर की चली गई जान](https://climateeast.in/fear-hunger-and-death-in-the-tea-gardens-of-north-bengal/) - चाय मजदूर गुंजन नायक की मौत से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य - गुंजन नायक जिस चाय बागान के स्थायी श्रमिक थे, वहां चार महीने से वेतन नहीं मिलने के बाद श्रमिकों ने दो महीने से काम बंद कर रखा है। यानी बिना पैसे के वे छह महीने से जीवन गुजार रहे थे। गुंजन नायक व उनकी - [कोशीः दुःख की नदी, दुःख की अंतहीन कहानियाँ](https://climateeast.in/kosi-river-of-woe-by-tushar-a-gandhi/) - हर गर्मियों और मानसून के अंत में, नदी में बाढ़ आती है और वह तटबंधों को तोड़कर ज़मीन को निगलने की कोशिश करती है। असहाय ग्रामीण अपने खेतों को पानी में डूबते और ज़मीन को नदी में विलीन होते देखते हैं। वे बमुश्किल अपना सामान बचा पाते हैं और ऊँची जगहों पर भागते हैं। कुछ - [2032 तक इलेक्ट्रिक गाड़ियों की चार्जिंग के लिए भारत की कुल सौर-वायु क्षमता का सिर्फ 3% होगा काफी](https://climateeast.in/solar-wind-capacity-will-be-enough-for-charging-electric-vehicles/) - भारत की इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) क्रांति के लिए जरूरी स्वच्छ ऊर्जा के लिए भारी बिजली उत्पादन की नहीं, बल्कि बेहतर प्लानिंग और स्मार्ट पॉलिसी की ज़रूरत है। ऊर्जा थिंक टैंक 'एम्बर' की नई रिपोर्ट बताती है कि अगर सही नीतिगत बदलाव किए जाएं और चार्जिंग ढांचे को समय के अनुसार ढाला जाए, तो साल 2032 - [झारखंड सरकार मानसून सत्र में पंचायती राज एक्ट में संशोधन कर पेसा को लागू करे: महासभा](https://climateeast.in/jharkhand-government-should-amend-the-panchayati-raj-act-2001-in-the-monsoon-session-and-implement-pesa/) - रांची: झारखंड जनाधिकार महासभा ने 24 जुलाई 2025 को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम एक सार्वजनिक पत्र जारी कर विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान राज्य में पेसा कानून लागू करने की मांग की। इस पत्र के माध्यम से महासभा ने मुख्यमंत्री को याद दिलाया है कि 2024 विधान सभा चुनाव में राज्य - [जलवायु संकट की मार, भारत समेत दुनिया भर में खाने-पीने की चीजें हुईं महंगी](https://climateeast.in/climate-crisis-has-hit-food-prices-across-the-world-barcelona-supercomputing-centre-study/) - भारत में मई 2024 की हीटवेव के बाद प्याज़ और आलू की कीमतों में 80% तक उछाल आया। वैज्ञानिकों के अनुसार यह हीटवेव सामान्य से कम से कम 1.5°C अधिक गर्म थी और इसे एक असामान्य और गंभीर घटना माना गया है। अगर आपने हाल के महीनों में सब्ज़ियों, प्याज़, आलू या चाय-कॉफ़ी की कीमतों - [चंबल के बीहड़ की बिल्ली कैराकल पर क्यों गहराया संकट?](https://climateeast.in/caracal-an-endangered-small-cat-and-chambal-ravines/) - छोटी बिल्ली या स्मॉल कैट श्रेणी में कैराकल सबसे भारी, सबसे तेज और सबसे बड़ी होती है। यह एक दुर्लभ नस्ल है, जो भारत में राजस्थान, मध्यप्रदेश व गुजरात के कुछ हिस्सों में मिलती है। हाल में मध्यप्रदेश के गाँधी सागर वन्य जीव अभ्यारण्य में 20 सालों पर कैराकल की तसवीर कैमरा ट्रैप में कैद - [क्रिकेट मैचों पर बढता चरम गर्मी का खतरा, नई रिपोर्ट ने क्रिकेट जगत को चिंता में डाला](https://climateeast.in/extreme-heat-impact-on-ipl-cricket-matches-climate-central-new-report/) - आइपीएल के एक तिहाई मैच ऐसी गर्मी में खेले गए जो खिलाड़ियों की सेहत के लिए ख़तरनाक मानी जाती है। आइपीएल 2025 के मैच तो लोगों ने खूब देखे होंगे, लेकिन अब जो रिपोर्ट आई है, वो चिंता बढ़ाने वाली है। रिपोर्ट कहती है कि इस साल IPL के करीब आधे मैच ऐसे मौसम में - [गरगेंडा बागान में चाय मजदूर की मौत भूख से, पश्चिम बंगाल सरकार जवाबदेही सुनिश्चित करे: जन संगठन](https://climateeast.in/garganda-tea-garden-workers-starvation-case-west-bengal-government-should-ensure-accountability/) - अलीपुरद्वार: 10 व 11 जुलाई 2025 को राइट टू फूड एंड वर्क अभियान (आरटीएफडब्ल्यूसी) और पश्चिम बंग चा माजूर समिति (पीबीसीएमएस) के द्वारा गरगेंडा टी गार्डन में एक प्रारंभिक तथ्य-खोज (फैक्ट फाइंडिंग) जांच की गई। इस बागान का प्रबंधन मेरिको कंपनी के जिम्मे है। जांच में एक भयावह मानवीय संकट सामने आया है। 48 वर्षीय - [मारी लूज: नदी, समुदाय व जीवों के हक के लिए लड़ने वाली एक कुकामा आदिवासी महिला](https://climateeast.in/mari-luz-canaquiri-murayari-an-indigenous-woman-who-won-goldman-prize-2025/) - पेरू की मारी लूज दुनिया भर में नदियों के दोहन के खिलाफ संघर्ष की लड़ाई की प्रतीक बन गई हैं। उन्होंने अदालत में मैरानोन नदी को एक व्यक्ति के रूप में मान्यता दिलाने व उसका हक दिलाने की लड़ाई लड़ी। उन्होंने नदी में तेल का रिसाव रोकने, ड्रेजिंग रोकने, उसे मुक्त प्रवाह में व प्रदूषण - [वाल्मीकि टाइगर रिजर्व :  हमारे जंगल का अपना एक पारिस्थितिकी तंत्र होता है](https://climateeast.in/valmiki-tiger-reserve-our-forest-has-its-own-ecosystem-a-travel-memoir/) - वाल्मीकि वन क्षेत्र अपने साल के विशाल पेड़ों की वजह से विशेष तौर पर आकर्षक लगता है। यहां बाघों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। तीन सुंदर नदियों इस क्षेत्र से होकर गुजरती हैं। इस आलेख को आप इस क्षेत्र का याता वृतांत समझ कर भी पढ सकते हैं, जिसमें प्रकृति, जैव विविधता - [जलवायु परिवर्तन से लड़ने व सामुदायिक संपदा के संरक्षण में पंचायती राज संस्थाएं मददगार](https://climateeast.in/panchayati-raj-institutions-are-helpful-in-fighting-climate-change-and-preserving-commons/) - बोकारो में पीडीएजी, असर व पंच सफर की पहल पर सात जिलों का कान्फ्रेंस ऑफ पंचायत आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य पंचायतों की भूमिका को जलवायु परिवर्तन व संसाधनों के संरक्षण में चिह्नित व प्रोत्साहित करना है। बोकारो: झारखंड में अब पंचायतें जलवायु परिवर्तन संकट से लड़ने के लिए आगे आ रही हैं। , 16 - [हम कोशी के धार के लोग हैं, हमारी ऐतिहासिक अनदेखी के खिलाफ हम अपनी पीड़ा बताना चाहते हैं](https://climateeast.in/kosi-pidit-samvad-tushar-gandhi/) - राजेश कुमार मंडलकम्युनिटी जर्नलिस्ट एंव कोशी पीड़ित सुपौल: हम कोशी के दो धार के बीच के लोग हैं। हमारी बातें और पीड़ा सरकार तक नहीं पहुंचती है। इसलिए कोशी के तटबंध के बीच रहने वाले लोगों की शासन की ओर की गई ऐतिहासिक अनदेखी के खिलाफ कोशी पीड़ित संवाद का आयोजन 15 व 16 जुलाई - [बैगा समुदाय की मैकाल पर्वतमाला पर संसाधनों तक सीमित होती पहुँच, बढता संकट](https://climateeast.in/baiga-tribe-access-to-resources-in-the-maikal-mountain-range-is-getting-limited/) - दिब्येंदु चौधरी कबीरधाम जिला, छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा से सटी मैकाल पर्वतमाला का दुर्गम क्षेत्र बैगा समुदाय का घर है, जो भारत के विशिष्ट रूप से कमजोर जनजातीय समूहों में से गिने जाते हैं। कभी इस समुदाय को जंगलों में बेरोकटोक विचरण और संसाधनों के उपयोग की पूरी आजादी थी, जो उनके जीवन - [पहाड़िया आदिवासियों ने अपने धर्म, सभ्यता और संस्कृति की रक्षा के लिए की साप्ताहिक पूजा](https://climateeast.in/pahariya-tribals-performed-weekly-puja-to-protect-their-religion-civilization-and-culture/) - दुमका : झारखंड के दुमका जिले के गोपीकांदर प्रखंड के खरौनी बाजार पंचायत के अंतर्गत नमोडीह गांव के पहाड़िया टोला में गुडित गणेश देहरी के अगुवाई में पहाड़िया आदिवासियों ने सप्ताहिक पूजा शुरू की है। 13 जुलाई 2025 को आयोजित इस साप्ताहिक पूजा में गांव के सभी महिला, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चों ने भाग लिया। - [जलवायु संकट की जद में दुनिया भर के 9000 डेटा सेंटर, बाढ़, तूफान और आग का खतरा](https://climateeast.in/nine-thousand-data-centers-around-the-world-are-facing-climate-disasters/) - XDI की रिपोर्ट चेतावनी देती है कि अगर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने और ढांचागत सुधारों पर तत्काल निवेश नहीं हुआ, तो डेटा सेंटर ऑपरेटरों को बीमा प्रीमियम में भारी बढ़ोतरी, लगातार परिचालन में रुकावट, और अरबों डॉलर के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। बैंकिंग से लेकर क्लाउड स्टोरेज, मेडिकल इमरजेंसी से - [2030 तक भारत में 70% स्वच्छ बिजली संभव, ग्रिड ऑपरेटरों को हो सकती है नौ हजार करोड़ की बचत](https://climateeast.in/70-percent-clean-electricity-possible-in-india-by-2030-transitionzero-analysis/) - जलवायु डेटा संस्था ट्रांजिशन जीरो ने अपने एक विश्लेषण में कहा है अगर भारत 2030 तक 24 घंटे 70 प्रतिशत स्वच्छ बिजली अपनाता है तो इससे नौ हजार करोड़ सालाना की बचत के साथ कार्बन उत्सर्जन में 2.4 प्रतिशत की कमी संभव है। वहीं, अगर भारत 100 प्रतिशत स्वच्छ बिजली अपनाता है तो कार्बन उत्सर्जन - [सूखारक्षक एआई के जरिए भारत के छोटे-सीमांत किसान पा सकेंगे सूखे का पुर्वानुमान](https://climateeast.in/sukharakshak-ai-the-drought-protector-for-indian-farmers/) - नई दिल्ली : भारत, जहां 12 करोड़ छोटे व सीमांत किसान हैं, उनके लिए सूखा एक बड़ी आपदा साबित होता है। सूखे के कारण किसानों का कृषि उपज कम हो जाती है और उनकी आय में कमी आ जाती है। इस कारण उन्हें लगातार नुकसान और बढते कर्ज के दबाव का सामना करना पड़ता है। - [झारखंड में मनरेगा में 100 दिन का रोजगार पूरा करने वाले श्रमिकों की संख्या में 18% गिरावट](https://climateeast.in/mgnrega-in-jharkhand-libtec-202425-report-highlights/) - झारखंड में आदिवासियों का मनरेगा में प्रतिनिधित्व उनकी आबादी की तुलना में और राष्ट्रीय स्तर पर उनके प्रतिनिधित्व के अनुपात से कम है। हालांकि महिलाओं का प्रतिनिधित्व सामान्य है। रांची: वित्त वर्ष 2024-25 के मनरेगा एमआइएस पर उपलब्ध डेटा के विश्लेषण से यह तथ्य उभर कर सामने आया है कि ग्रामीण मजदूरों को 100 दिन - [सरकार ने बिना यूनियन से चर्चा किए श्रम कानूनों को खत्म कर लेबर कोड बना दिया, कल देशव्यापी बंद](https://climateeast.in/center-abolished-the-labor-laws-and-made-the-labor-code-without-discussing-with-the-unions/) - नरेगा संघर्ष मोर्चा ने कहा है कि एक औसत श्रमिक 2014 में जितना कमाता था, आज भी उतना ही कमाता है। लेकिन, इस दौरान महंगाई काफी बढ गई है और मजदूरों के हित सीमित होते गए हैं। मोर्चा ने अपनी मांगों के समर्थन में नौ जुलाई के देशव्यापी बंद का समर्थन किया है। नई दिल्ली: - [झारखंड के एक गांव की सोलर चैंपियन लड़कियों की कहानी](https://climateeast.in/solar-energy-champion-girls-of-dantu-village-of-bokaro-district-in-jharkhand/) - झारखंड के कोयला संपन्न बोकारो जिले के एक गांव की लड़कियां सफल सौर ऊर्जा दक्ष बन रही हैं और लोगों को सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। इतना ही नहीं वे सौर ऊर्जा उपकरणों को बेचकर कमाई भी करती हैं। राहुल सिंह बोकारो: झारखंड के कोयला संपन्न बोकारो और रामगढ़ जिले की - [ग्राम प्रधान मांझी संगठन ने स्थानीय नीति व गंगा का पानी उपलब्ध करवाने की उठायी मांग](https://climateeast.in/gram-pradhan-manjhi-organization-raised-the-demand-of-domicile-policy-in-jharkhand/) - दुमका: आदिवासी व परंपरागत शासन व्यवस्था के लिए काम करने वाले संगठन ग्राम प्रधान मांझी संगठन ने 30 जून को हूल दिवस के मौके पर झारखंड सरकार से स्थानीय नीति लागू करने सहित पूरे संताल परगना क्षेत्र में सिंचाई के लिए गंगा नदी का पानी उपलब्ध करवाने की मांग की है। ग्राम प्रधान मांझी संगठन - [अदालतें बन रही हैं जलवायु लड़ाइयों की रणभूमि, लगभग एक चौथाई मामले सरकार के फैसलों के खिलाफ](https://climateeast.in/courts-are-becoming-the-battlefield-for-climate-justice/) - दुनिया भर में बढ़ते जलवायु मुक़दमे में भारत के लिए कई सबक हैं निहित एक ज़माना था जब जलवायु संकट का ज़िक्र सिर्फ़ वैज्ञानिक रिपोर्टों, यूएन सम्मेलनों या एनजीओ की याचिकाओं तक सीमित होता था। लेकिन, अब वही मुद्दा अदालतों की चौखट लांघ चुका है। कोर्टरूम अब सिर्फ़ न्याय का मंच नहीं, बल्कि जलवायु की - [बढती उम्र व बीमारी से रणथंभौर की चर्चित बाघिन एरोहेड की मौत, किया गया अंतिम संस्कार](https://climateeast.in/famous-arrowhead-tigress-from-ranthambore-was-given-last-rites/) - रणथंभौर की सबसे प्रसिद्ध बाघिन में एक एरोहेड की मौत हो गई। बढती उम्र व बीमारी की वजह से उसकी मौत हुई है। उसके योगदान के मद्देनजर पूरी गरिमा व सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया गया। एरोनहेड एक ऐसी बाघिन थी, जिसकी सबसे अधिक बार कैमरे में तसवीरें व वीडियो लिए गए। वह - [समंदर से पहाड़ तक जलवायु संकट की मार, लेकिन चेतावनी और तैयारी ने बचाई जानें](https://climateeast.in/climate-crisis-hits-from-sea-to-mountain-but-early-warning-system-save-lives/) - साल 2024 का साल एशिया के लिए सिर्फ गर्म नहीं था, ये एक जलवायु चेतावनी की घंटी जैसा था - कभी धधकते शहर, कभी पिघलते ग्लेशियर, तो कभी डूबते खेत। वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गनाइज़ेशन (WMO) की ताज़ा रिपोर्ट स्टेट ऑफ द क्लाइमेट इन एशिया 2024 बताती है कि एशिया अब पूरी दुनिया से लगभग दोगुनी रफ्तार - [संताल आदिवासियों की अम्बावती परंपरा धरती की उर्वरता के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?](https://climateeast.in/ambavati-tradition-of-santhal-tribals-important-for-the-fertility-of-the-earth/) - इस साल वर्ष 2025 में 22 जून से संताल आदिवासियों की अम्बावती परंपरा शुरू हुई है। इस परंपरा का पालन सदियों से संतालों में किया जाता है और इस दौरान न किसान हल चलाते हैं और न धरती पर किसी अन्य प्रकार का कार्य करते हैं। धरती हमारी माता है जो हमारा भरण-पोषण करती है, - [मनरेगा पर कलकत्ता हाइकोर्ट के आदेश का संदेश: कुछ के भ्रष्टाचार के लिए लोगों को सजा नहीं दी जा सकती](https://climateeast.in/calcutta-high-courts-mgnrega-order-centre-must-show-restraint-while-punishing-states-for-irregularities-in-schemes/) - न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र को योजनाओं में अनियमितताओं के लिए राज्यों को दंडित करते समय संयम बरतना चाहिए। सरकारों को योजनाओं को हथियार बनाने के खिलाफ न्यायालय के व्यापक संदेश को समझना चाहिए। हाल ही में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने केंद्र को निर्देश दिया है कि वह पश्चिम बंगाल में महात्मा - [सुपर एफिशिएंट एयर कंडीशनर के उपयोग से 2030 तक 60 गीगावॉट तक बिजली बचाना संभव](https://climateeast.in/save-up-to-60-gw-of-electricity-by-using-super-efficient-air-conditioners/) - नई दिल्ली की गर्म दोपहर में जब देश की ऊर्जा पर बात हुई, तो सिर्फ़ AC के रिमोट नहीं, सोच के स्विच भी ऑन हुए। दरअसल,18 जून को दिल्ली के इंटरनेशनल सेंटर में कुछ ऐसे लोग एक साथ बैठे, जो भारत की ऊर्जा नीति के मानचित्र पर कल की दिशा तय कर सकते हैं। गोलमेज़ - [बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में बिना कमीशन योजनाओं का लाभ हासिल करना मुश्किल, पीड़ित ने की डीएम से की शिकायत, दायर किया आरटीआई](https://climateeast.in/kosi-flood-affected-area-it-is-difficult-to-get-the-benefits-of-govt-schemes-without-commission/) - सुपौल(बिहार): बिहार के बाढ़ प्रभावित जिले सुपौल में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी ढंग से हासिल कर पाना आसान नहीं है। सबसे अधिक दिक्कत जमीनी स्तर पर योजनाओं का लाभ पहुंचने में होती है; जहां कमीशनखोरी, भ्रष्टाचार व लेट-लतीफी की शिकायत जमीन से आती है और ग्रामीण इस - [एक अगस्त से केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल में शुरू करे मनरेगा: कलकत्ता हाइकोर्ट](https://climateeast.in/calcutta-high-court-directs-central-govt-to-implement-mgnrega-scheme-in-west-bengal-form-august-2025/) - कोलकाता: कलकत्ता हाइकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में केंद्र सरकार को एक अगस्त 2025 से पश्चिम बंगाल में मनरेगा के तहत फिर से काम शुरू करने को कहा है। कलकत्ता हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगनम और न्यायमूर्ति चैताली चटर्जी की खंडपीठ ने 18 जून 2025 को ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार गारंटी देने वाले मनरेगा - [मानसून की पहली बारिश में रांची जिला प्रशासन की चेतावनी, गैर जरूरी यात्रा न करें](https://climateeast.in/ranchi-heavy-rain-threat-district-administration-advised-people-not-to-travel-unnecessarily/) - रांची में बारिश की अनिश्चितता या भिन्नता मात्र 15 सालों में 37.7 प्रतिशत तक बढ गई है। जून महीने के पहले 17 दिन में इस जिले में 70 प्रतिशत तक कम बारिश हुई, अब अगले दो दिन के लिए भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। यह जिला जलवायु परिवर्तन के - [बॉन सम्मेलन : जलवायु संकट, फाइनेंस और फॉसिल फ्यूल पर दुनिया की नजर](https://climateeast.in/unfccc-bonn-climate-conference-2025-major-issues-climate-crisis-finance-and-fossil-fuel/) - जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र की मध्य वर्ष की बैठक (UNFCCC Bonn Climate Conference) सोमवार (16 जून 2025) से शुरू हो गई। 26 जून तक चलने वाली यह बातचीत इस वक्त हो रही है जब हाल ही में मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी दी कि 2029 से पहले 1.5°C तापमान सीमा के टूटने की - [गुजरात से अपने हिस्से का पैसा लेकर नर्मदा विस्थापितों को उनका हक दे मध्यप्रदेश सरकार: मेधा पाटकर](https://climateeast.in/madhya-pradesh-government-should-take-its-share-from-gujarat-and-rehabilitate-narmada-displaced-medha-patkar/) - बारिश का महीना शुरू होने से पहले नर्मदा बचाओ आंदोलन ने एक प्रेस कान्फ्रेंस कर नर्मदा घाटी के पीड़ितों की मांगों को उठाया है और डूब से बचाव के लिए समय पर पहल करने की मांग उठायी है। इसके साथ ही गुजरात से अपने हिस्से का पैसाा लेकर पीड़ितों के पुनर्वास की मांग की है। - [वर्ष 2024 की कोशी की बाढ़ एक संकेतक है, सरकार पीड़ितों का पुनर्वास करे और आसान समाधान की ओर बढ़े : महेंद्र यादव](https://climateeast.in/kosi-flood-2024-is-an-indicator-of-danger-mahendra-yadav-interview/) - वर्ष 2024 में कोशी सहित बिहार की दो अन्य प्रमुख नदियों गंडक व बागमती में तीव्र बाढ़ आयी। उत्तर बिहार के कई जिलों में पिछले साल आयी बाढ़ के प्रभाव को अबतक महसूस किया जा सकता है। आधा जून बीत चुका है और यही वह वक्त होता है जब पूर्वी भारत में मानसूनी बारिश शुरू - [मौसमी बदलाव की वजह से अब मानसून के महीनों तक खींच रहा हीटवेव](https://climateeast.in/heatwave-is-now-extending-till-the-monsoon-months/) - जलवायु परिवर्तन की चाल से झुलस रहा है भारत उत्तर भारत, मध्य भारत और पूर्वी भारत इन दिनों भीषण गर्मी से जूझ रहे हैं। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में पारा 44 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुका है और भारत मौसम विभाग (IMD) ने लगातार पांच दिनों तक रेड अलर्ट जारी किया है। मौसम - [फिलिस्तीन हिंसा व कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई के विरोध में नदी बचाओ आंदोलन का प्रदर्शन](https://climateeast.in/protest-meeting-at-dharmatala-metro-channel-against-the-genocide-in-palestine-by-nadi-bachao-andolan/) - कोलकाता: फिलिस्तीन में जारी हिंसा व नरसंहार और गाजा में सहायता पहुंचाने वाले पर्यावरण व मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के खिलाफ नदी बचाओ आंदोलन ने कोलकाता के धर्मतल्ला मेट्रो चैनल पर 14 जून 2025 का विरोध प्रदर्शन किया। नदी बचाओ आंदोलन पश्चिम बंगाल का एक नागरिक संगठन समूह है जो पश्चिम बंगाल - [मध्यप्रदेश के आधे जिलों में डीएसआर उपलब्ध नहीं, अनियंत्रित रेत खनन से पर्यावरण व समुदाय को नुकसान](https://climateeast.in/50-percent-districts-in-madhya-pradesh-do-not-have-approved-district-survey-reports-rampant-sand-mining-continues-isw-fact-finding/) - मध्यप्रदेश में उपलब्ध जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट में अधिकांश डिजिटली पढने योग्य नहीं हैं और उनमें डेटा की अस्पष्टता है। जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट की अनुपलब्धता से अनियंत्रित व अवैध खनन को बढावा मिलता है, क्योंकि यह एक मार्गदर्शक दस्तावेज की तरह काम करता है। अवैध व अनियंत्रित खनन पारिस्थितिकी नुकसान, हत्या, मौत और अपराध की वजह - [जलवायु अनुकूलन है आर्थिक लाभ व जीवन के सुरक्षा की कुंजी](https://climateeast.in/climate-adaptation-is-the-key-to-economic-benefit-and-life-safety/) - अब तक हमने जलवायु परिवर्तन की बात डर से जोड़ते हुए की है; जैसे बाढ़ आएगी, आग लगेगी, बीमारियाँ बढ़ेंगी, और हमारी ज़िंदगी बदल जाएगी। लेकिन अब वक़्त है नज़रिया बदलने का। सोचिए अगर आपको पता चले कि आज आप हर 1 रुपया किसी काम में लगाते हैं, और अगले कुछ सालों में वह 10 रुपये से भी ज्यादा बनकर लौटे - तो - [झारखंड के डॉ. रणजीत कुमार सिंह को मिला पर्यावरण चौंपियन अवॉर्ड](https://climateeast.in/dr-ranjit-kumar-singh-received-the-environment-champion-award-from-wii-dehradun/) - देहरादून स्थित भारतीय वन्य जीव संस्थान में साहिबगंज के डॉ सिंह को किया गया सम्मानित साहिबगंज: इस साल पर्यावरण दिवस के मौके पर झारखंड की झोली में पर्यावरण संरक्षण के लिए अभिनव प्रयोग करने को लेकर एक महत्वपूर्ण आवार्ड हासिल हुआ। झारखंड के साहिबगंज जिले में स्थित मॉडल कॉलेज, राजमहल के प्राचार्य एवं पर्यावरणविद डॉ. - [नियमगिरि में पर्यावरण दिवस के मौके पर प्रस्तावित सभाओं में मेधा पाटकर सहित 24 के प्रवेश पर रोक](https://climateeast.in/medha-patkar-and-23-others-banned-from-attending-proposed-meetings-on-the-occasion-of-environment-day-in-niyamgiri-odisha/) - कालाहांडी/रायगढा: ओडिशा के नियमगिरि पहाड़ी श्रृंखला पर इस साल पर्यावरण दिवस के मौके पर पांच जून को स्थानीय समुदाय की ओर से कई अलग-अलग जगहों पर पर्यावरण सभाएं प्रस्तावित थीं, जिसमें शामिल होने पहुंची प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता व नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर को रायगढ स्टेशन पर पुलिस ने आगे जाने से रोक - [असम: कार्बी आंगलोंग के आदिवासियों की बड़ी जीत, एडीबी को रद्द करना पड़ा 500 मेगावाट सोलर पार्क की फंडिंग](https://climateeast.in/adb-cancels-loan-for-solar-park-in-karbi-anglong-district-of-assam/) - असम में कार्बी आंगलोंग जिले में एक विशाल सोलर पॉर्क बनाया जाना था। पर, इसके लिए 23 में से मात्र नौ गांवों से रायशुमारी की गई थी। हजारों लोगों को इस प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। जरूरी दस्तावेज़ का स्थानीय भाषाओं में अनुवाद नहीं कराया गया ताकि हर स्थानीय व्यक्ति उसे पढ सके और - [आदिवासी गांव पलासबनी का हाल बेहाल, पक्की सड़क नहीं होने से गर्भवती व बीमार लोगों को होती है परेशानी](https://climateeast.in/tribal-village-palasbani-pregnant-and-sick-people-face-problems-due-to-lack-of-a-paved-road/) - दुमका: देश की आजादी के 78 वर्ष बीत जाने व झारखंड राज्य गठन के 25 वर्ष होने के बाद भी दुमका जिले के जामा प्रखंड के आदिवासी गांव पलासबनी का भालुकसुगिया टोला पक्की सड़क मार्ग से नही जुड़ पाया है। इस टोला में करीब 15 घर हैं। पलासबनी गांव के सिर्फ बांध टोला में ही - [नर्मदा आंदोलन के स्तंभ लुवारिया भाई का निधन, जिनके विरोध ने विस्थापितों की आवाज को किया था बुलंद](https://climateeast.in/narmada-bachao-andolan-and-luvariya-bhilala/) - अलीराजपुर (मध्यप्रदेश) : नर्मदा बचाओ आंदोलन के एक अहम स्तंभ और 40 सालों के नर्मदा घाटी के संघर्ष के प्रतीक लुवारिया भिलाला (उम्र करीब 55 वर्ष) का दो जून 2025 को निधन हो गया। वे मध्यप्रदेश के अलीराजपुर जिले के अलीराजपुर तहसील के जलसिंधी गांव के रहने वाले थे। उनके पिता का नाम शंकर भिलाला - [कोशी तटबंध के भीतर के लोगों ने नौ सूत्री मांगों के समर्थन में दिया धरना, उचित पुनर्वास व बाढ़ राहत की मांग](https://climateeast.in/people-living-within-the-kosi-embankment-demanding-proper-rehabilitation-and-flood-relief/) - निर्मली (सुपौल) : कोशी नव निर्माण मंच ने कोशी तटबंध के भीतर हर साल भीषण बाढ़ की आपदा भोगने को विवश लोगों के पुनर्वास सहित नौ सूत्री मांगों को लेकर निर्मली अनुमंडल कार्यालय के समक्ष दो जून 2025 को एक दिवसीय धरना दिया। धरना के दौरानं निर्मली और मरौना प्रखंड के सैकड़ों बाढ़ व कटाव - [हिमालयी बर्फ को ब्लैक कार्बन से खतरा, दो अरब लोगों की जल सुरक्षा हो सकती है प्रभावित](https://climateeast.in/himalayan-snow-is-at-risk-from-black-carbon-water-security-of-two-billion-people-may-be-affected-climate-trends-research/) - जलवायु व पर्यावरण पर रिसर्च करने वाली संस्था क्लाइमेट ट्रेंडस के एक नए अध्ययन के अनुसार, हिमालय के पश्चिमी हिस्से की तुलना में पूर्वी हिस्से की बर्फ को ब्लैक कार्बन से अधिक खतरा है, क्योंकि पूर्वी हिस्सा अधिक घना बसा है। इसलिए स्वच्छ ईंधन अपनाना, पराली जलाने पर रोक और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में बदलाव जरूरी - [मधु चाय बागान के बंद होने से चाय मजदूरों के सामने गहराया संकट, प्रधानमंत्री के दौरे से लगाए हैं आस](https://climateeast.in/madhu-tea-garden-workers-job-crisis-in-west-bengal/) - मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल के अपने उत्तर बंगाल दौरे में चाय मजदूरों के मुद्दों पर कोई ठोस बयान नहीं दिया और न ही कोई कदम उठाने का संकेत दिया है। कालचीनी (अलीपुरद्वार) : पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले के कालचिनी ब्लॉक में स्थित मधु चाय बागान बंद होने से यहां के मजदूरों को परेशानियों - [बच्चों के जीवन का पहला 1000 दिन : जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने की क्या हो कार्ययोजना?](https://climateeast.in/action-plan-for-the-first-1000-days-of-a-childs-life/) - अनुभव गर्ग बाल पोषण व स्वास्थ्य के विशेषज्ञ मां के गर्भ से दूसरे जन्मदिन के पहले का 1000 दिन बच्चों के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। जर्मन वॉच द्वारा जारी ग्लोबल क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स 2021 में भारत को जलवायु परिवर्तन से सातवां सबसे अधिक प्रभावित देश बताया गया है। बिहार, उत्तर प्रदेश, असम, - [राजमहल कॉलेज को पर्यावरण संरक्षण के लिए मिलेगा प्रतिष्ठित पर्यावरण पुरस्कार](https://climateeast.in/rajmahal-college-selected-for-environmental-award-for-environmental-protection-from-wii-dehradun/) - साहिबगंज: झारखंड के उत्तर पूर्वी जिले साहिबगंज के मॉडल कॉलेज राजमहल का चयन प्रतिष्ठित पर्यावरण पुरस्कार के लिए हुआ है। भारतीय वन्य जीव संस्थान, देहरादून ने इस कॉलेज को प्रकृति के लिए चैंपियन संस्थान (समग्र उत्कृष्ठता) कटेगरी में पुरस्कार के लिए चयन किया है। राजमहल मॉडल कॉलेज की ओर से महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य और - [कोशी तटबंध के भीतर के बाढ़ कटाव पीड़ितों ने राहत-मुआवजा के लिया दिया धरना, मांगें पूरी नहीं होने पर करेंगे बड़ा आंदोलन](https://climateeast.in/kosi-flood-victims-staged-a-sit-in-for-flood-relief-in-supaul-district-bihar/) - धरना स्थल पर पहुंच कर अंचल पदाधिकारी ने लिया नौ सूत्री मांग पत्रकोशी नवनिर्माण मंच ने मांगें नहीं माने जाने पर जोरदार आंदोलन का किया आह्वान सरायगढ़ (सुपौल जिला, बिहार) : कोशी नव निर्माण द्वारा कोशी तटबंध के भीतर बाढ़ कटाव पीड़ितों को गृह क्षति दिलाने, सहित पुनर्वासित कराने की मांग को लेकर 13 मई - [पलामू में कोयला खनन फिर से शुरू होने से क्यों चिंतित हैं आसपास के ग्रामीण?](https://climateeast.in/why-are-the-palamu-villagers-worried-about-the-resumption-of-rajhara-coal-mining-project/) - झारखंड के सूखाग्रस्त जिले पलामू के पड़वा गांव में राजहरा उत्तर (मध्य और पूर्वी) कोयला ब्लॉक में वाणिज्यिक उत्पादन इस साल फरवरी में फिर से शुरू हो गया। इस परियोजना के प्रभावों को लेकर स्थानीय समुदाय को कई चिंताएं हैं, जिसमें एक सबसे प्रमुख पानी से जुड़ी चिंता है। अश्विनी कुमार शुक्ला एक दशक से ज्यादा समय से बंद - [एमटीआर में समुदाय स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर सचेत, पर जूनेटिक व वेक्टर जनित रोगों के प्रति कम जागरूकता : रिसर्च](https://climateeast.in/centre-for-wildlife-studies-studies-on-mudumalai-tiger-reserve-analyzed-healthcare-access-in-35-villages/) - सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ स्टडीज के अध्ययन में टाइगर रिजर्व के निकट के 35 गांवों के स्वास्थ्य स्थिति का विश्लेषण बेंगलुरु: वन्य जीव रिसर्च के क्षेत्र में काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त संस्था सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ स्टडीज (CWS) के नए अध्ययन में तमिलनाडु में मुदुमलाई टाइगर रिजर्व (एमटीआर) के पास 35 गांवों में स्वास्थ्य सेवा - [ग्रीन हाउस गैस कम करने में ग्रीन स्टील का योगदान और भारत की भूमिका](https://climateeast.in/green-steel-and-india/) - ग्लोबल एनर्जी मॉनिटर की रिपोर्ट बताती है, “ग्रीन स्टील” की दिशा में पूरी दुनिया की चाल अब भारत की दिशा पर निर्भर है। एक समय था जब…लोहा, यानी आयरन - धरती के गर्भ से निकलने वाला वो मजबूत, तपता हुआ तत्व - जब आग और कोयले की भट्ठियों में झोंका जाता, तो निकलती थी स्टील। - [गर्म लहरों व जलवायु परिवर्तन का असर माँ के गर्भ तक, समय से पहले बच्चे के जन्म लेने के बढ रहे खतरे](https://climateeast.in/heat-waves-and-climate-change-affect-the-mothers-womb-increasing-the-risk-of-premature-birth/) - जलवायु परिवर्तन का असर अब माँ की कोख तक आ पहुँचा है, जहाँ ज़िंदगी की शुरुआत होती है, वहीं अब संकट भी जन्म ले रहा है। गर्भवती महिलाओं को अब हर साल दोगुना ज्यादा गर्म दिनों को झेलना पड़ रहा है। बच्चे के समय पूर्ण जन्म लेने से कई तरह के स्वास्थ्य खतरे बने रहते - [मनरेगा : ओडिशा में काम में बड़ी गिरावट, एबीपीएस के अपात्र श्रमिकों में झारखंड तीसरे नंबर पर](https://climateeast.in/mgnrega-libtech-report-a-national-review-of-mgnrega-implementation-in-year-2024-2025/) - नई दिल्ली: एक नई रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि वर्ष 2024-25 में मनरेगा में पंजीकृत परिवारों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि इससे रोजगार में कोई सुधार नहीं हुआ है। लिबटेक नामक संस्था की इस रिपोर्ट के अनुसार, सृजित व्यक्ति दिवसों में 7.1 प्रतिशत (288.83 से 268.44 करोड़) की - [उत्तर बंगाल के चाय मजदूरों ने चलाया कानून मानो अभियान, बागान मालिकों के खिलाफ थाने में दर्ज करायी शिकायत](https://climateeast.in/west-bengal-tea-workers-launched-a-campaign-kanun-mano-abhiyan/) - अलीपुरद्वार/जलपाईगुड़ी: पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से में स्थित चाय बागान के मजदूरों ने 18 मई 2025 को कानून मानो अभियान चलाया। यह अभियान पश्चिम बंग चा मजूर समिति पीबीसीएमएस की पहल पर चलाया गया। चाय श्रमिकों के इस अभियान का उद्देश्य चाय बागान प्रबंधक पर कानून को मानने के लिए दबाव बनाना था और अपने - [डॉ लुईस मरांडी से आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों ने रखी ओलचिकी और संताली माध्यम से पढाई की मांग](https://climateeast.in/tribal-organizations-demanded-education-in-santali-medium-from-jharkhand-government/) - विधायक के माध्यम से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी ज्ञापन प्रेषित किया दुमका: झारखंड में केजी से पीजी तक पाठ्यक्रम को संताल आदिवासियों के ओलचिकी लिपि से भी पढ़ाने और संताली भाषा को राज्य का प्रथम राज्य भाषा घोषित करने के मांग को लेकर 18 मई 2025 को आदिवासी संगठनों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जामा - [ओडिशा के तटों पर ओलिव रिडले कछुओं के लिंग अनुपात को प्रभावित कर रहा है जलवायु परिवर्तन](https://climateeast.in/olive-ridley-turtle-sex-ratio-is-deteriorating-due-to-climate-change-dakshin-foundation-study/) - दक्षिण फाउंडेशन के एक दीर्घाकालिक अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है कि ओडिशा के रुशिकुल्या में स्थित समुद्री कछुओं के घोंसले के तापमान में वृद्धि के कारण उनमें मादा कछुओं का लिंगानुपात बढ रहा है। निधि जम्वाल की रिपोर्ट प्रकृति रहस्यों से भरी हुई है और अरिबाडा उनमें से एक है। अरिबाडा एक स्पेनिश - [तीन दशकों में कितना बदला मैंग्रोव कवर, क्या है खूबियां और क्या हैं चुनौतियां?](https://climateeast.in/how-much-has-mangrove-cover-changed-in-three-decades-and-its-strengths-and-challenges/) - वैश्विक स्तर पर मैंग्रोव का कवर कम होना एक चिंता की बात है। वैश्विक स्तर पर आइयूसीएन की रेड लिस्ट में सूचीबद्ध मैंग्रोव की 11 प्रजातियां संकटग्रस्त हैं, जिसमें भारत में दो प्रजातियां मौजूद हैं। ये कम बीज व्यवहार्यता व धीमे विकास के कारण संकट में हैं। मैंग्रोव एक विशिष्ट प्रकार के पेड़ व झाड़ियां - [ओडिशा में जलवायु अनुकूलन को मजबूत करने के लिए सीजीआइआर क्लाइमेट एक्शन प्लान शुरू](https://climateeast.in/cgiar-climate-action-program-launched-in-odisha-to-strengthen-climate-resilience-and-adaptation/) - इस पहल का उद्देश्य ओडिशा जैसे जलवायु संवेदनशील राज्य में कृषि, जल प्रणाली व ग्रामीण आजीविका को जलवायु चुनौतियों के प्रति सक्षम बनाना है। भुवनेश्वर: अंतरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान (International Water Management Institute) ने आइसीएआर-आइआइडब्ल्यूएम (Indian agricultural research institute-Indian Institute of Water Management) के साथ साझेदारी में 14 मई 2025 को ओडिशा में सीजीआइएआर जलवायु - [फोटो स्टोरी : ओलिचिकी लिपि के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मू की जयंती पर आदिवासी समुदाय ने उन्हें किया याद](https://climateeast.in/santal-tribal-community-remembers-pandit-raghunath-murmu-on-his-birth-anniversary/) - दुमका: दुमका जिले के जामा प्रखंड के ऊपरबहाल गांव में ग्रामीणों ने संताली भाषा की ओलचिकी लिपि के जनक गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू की 120वीं जयंती बहुत धूमधाम से मनायी। इस अवसर पर आदिवासी रीति-रिवाज के अनुसार पूजा-अर्चना कर उपस्थित ग्रामीणों ने गुरु गोमके को श्रद्धांजलि अर्पित किया। ऊपरबहाल गांव के संताल आदिवासी समुदाय - [धनबाद-बोकारो में वायु गुणवत्ता की जांच व निगरानी का जिम्मा महिलाओं को देने की अनूठी पहल, प्रदूषण हॉटस्पॉट चिह्नित](https://climateeast.in/community-women-monitor-air-quality-and-identify-pollution-hotspots-in-jharkhand/) - झारखंड के धनबाद व बोकारो जैसे व्यापक कोयला खनन क्षेत्र वाले जिले में पर्यावरण सखियों ने वायु गुणवत्ता की निगरानी की और वैसे हॉटस्पॉट की पहचान की, जहां की वायु गुणवत्ता अत्यधिक खराब है। पर्यावरण सखियों द्वारा चिह्नित किये गए ऐसे 26 वायु प्रदूषण हॉटस्पॉट में स्वास्थ्य केंद्र, आंगनाबड़ी, सामुदायिक भवन व तालाब शामिल हैं। - [पंडित रघुनाथ मुर्मू: संतालों की भाषाई अस्मिता के सूत्रधार](https://climateeast.in/pandit-raghunath-murmu-the-architect-of-linguistic-identity-of-santhals-tribes/) - संताली समाज के प्रति समर्पित थे पंडित रघुनाथ मुर्मू उन्होंने संताली भाषा के लिए ओलचिकी लिपि का आविष्कार कर संतालों में भाषाई, लिपि व सांस्कृतिक अस्मिता का भाव भरा। कालीदास मुर्मू पंडित रघुनाथ मुर्मू एक प्रसिद्ध साहित्यकार और संताली भाषा के विद्वान एवं लिपि आविष्कारक थे। उन्होंने संताली भाषा और साहित्य के विकास में महत्वपूर्ण - [कार्बन फाइनेंस स्कीम में शामिल हुए झारखंड के किसानों को किस तरह मिलेगा इसका फायदा?](https://climateeast.in/what-is-carbon-credit-financing-and-benefit-for-jharkhands-farmers/) - झारखंड में बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत परती जमीन पर बागवानी लगाने वाले किसानों को अगले कुछ महीनों में कार्बन फाइनेंस का पैसा मिलने वाला है। इसका मकसद बागवानी के बेहतर रख-रखाव में किसानों की मदद करना है। फिलहाल 18 जिलों में चल रही कार्बन फाइनेंस योजना में अभी तक 30 हजार से ज्यादा - [तेज शहरीकरण व शहरी ढांचे पक्षी के लिए बड़े खतरे, सुधार व समुदाय की संवेदनशीलता जरूरी](https://climateeast.in/rapid-urbanization-and-urban-infrastructure-pose-a-major-threat-to-migratory-birds/) - दुनिया भर के शहर पक्षी के आवास के लिए एक खतरा बन कर उभरे हैं। शहरों के संरचनात्मक ढांचे न सिर्फ उनकी असमय मौत व दुर्घटना का कारण बनते हैं बल्कि उनके विलुप्त होने के संकट को भी बढाते हैं। वैश्विक स्तर पर सभी पक्षी प्रजातियों में से 49 प्रतिशत की संख्या कम हो रही - [पंडित रघुनाथ मुर्मू के बारे में जानिए, जिनकी आज जयंती है](https://climateeast.in/know-about-pandit-raghunath-murmu-whose-birth-anniversary-on-5th-may/) - पंडित रघुनाथ मुर्मू का बचपन में नाम चुनू मुर्मू था। उन्होंने तकनीशीयन के रूप में शुरुआत की और फिर भाषा और लिपि के प्रकांड विद्वान बने। उन्होंने कई किताबें लिखीं और देश की आजादी की लड़ाई में भी योगदान दिया। आजादी का अमृत महोत्सव पंडित रघुनाथ मुर्मू भारत में संताल जनजाति के महान सपूत हैं, - [पंडित रघुनाथ मुर्मू की जयंती के मौके पर दो संताल युवाओं ने शुरू किया बच्चों के लिए ओलिचिकी का निःशुल्क ट्यूशन](https://climateeast.in/pandit-raghunath-murmus-birth-anniversary-two-santal-youths-started-free-tuition-of-olichiki-for-children-in-dumka/) - ओलचिकी के साथ आदिवासी बच्चों को अन्य विषयों की भी शिक्षा दी जाती है, इसके साथ ही सप्ताह के आखिरी दिन आदिवासी संस्कृति से उन्हें अवगत कराया जाता है ताकि वे अपनी संस्कृति को न भूलें और उसका महत्व समझें दुमका: संताली भाषा की लिपि ओलचिकी के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मू के जयंती (5 मई) - [राजमहल बेसाल्ट विस्मयकारी प्राकृतिक चमत्कार, पृथ्वी की जैविक विरासत को समझने में मददगार](https://climateeast.in/rajmahal-basalt-is-an-amazing-natural-wonder-helpful-in-understanding-the-biological-heritage-of-the-earth/) - साहिबगंज: झारखंड में राजमहल क्रेटेशियस फ्लड बेसाल्ट एक विस्मयकारी प्राकृतिक चमत्कार और पृथ्वी के गतिशील अतीत की एक खिड़की की तरह हैं। ये विशाल, ज्यामितीय रूप से आकर्षक बेसाल्ट स्तंभ - जो व्यापक लावा प्रवाह से लाखों साल पहले बने थे - न केवल एक दृश्य आश्चर्य हैं, बल्कि अत्यधिक भूवैज्ञानिक, वैज्ञानिक और सामाजिक महत्व - [जलवायु परिवर्तन ने बदली उत्तराखंड की खेती, कम पानी-कम इनपुट वाली फसलों की ओर झुकाव](https://climateeast.in/climate-change-impact-on-uttarakhand-agriculture-climate-trends-research/) - आलू-गेहूं छोड़ किसानों ने पकड़ी दाल-मसालों की राह, बीते दशक में 27% कम हुई खेती की ज़मीन, 70% गिरी आलू की पैदावार उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में जलवायु परिवर्तन की मार ने खेती के नक्शे को पूरी तरह बदल दिया है। क्लाइमेट ट्रेंड्स की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक दशक में जहां खाद्यान्न और - [पृथ्वी के सबसे बड़े स्तनधारी प्रवास क्षेत्र का मानचित्र जारी, संरक्षण बढ़ाना व टकराव कम करना उद्देश्य](https://climateeast.in/largest-land-animal-migration-across-south-sudan-and-ethiopia-maps-released/) - बॉन(जर्मनी) : पृथ्वी के सबसे बड़े स्ताधारी पशु प्रवास क्षेत्र का मानचित्र कन्वेंशन ऑफ माइग्रेटरी स्पेसिज (सीएमएस- the Convention on the Conservation of Migratory Species of Wild Animals) की ओर से जारी किया गया। कन्वेंशन ऑफ माइग्रेटरी स्पेसिज संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रवासी जीवों के संरक्षण के लिए एक संधि है, जिसके तहत दुनिया भर में - [अगर मैं कोशी तटबंध के बीच के गांव नहीं जाता तो कोशी को नहीं समझ पाता : राहुल यादुका](https://climateeast.in/villages-between-the-kosi-embankments-and-there-porblems-by-rahul-yaduka/) - नीति निर्धारकों के लिए कोशी के तटबंध के बीच के लोगों के सवालों की अहमियत नहीं, कोशी-मेची नदी जोड़ परियोजना में नहीं है समस्या का समाधान सुपौल (बिहार) : ब्रिटेन के लंदन विश्वविद्यालय में दक्षिण एशियाई देशों के नदी और पानी के विषय पर एक शोधार्थी के रूप में चयनित डॉ राहुल यादुका का सुपौल - [अंतरिक्ष की 'उद्देश्यहीन उड़ान' जलवायु परिवर्तन के शिकार लोगों के साथ अन्याय](https://climateeast.in/aimless-space-mission-is-unfair-to-victims-of-climate-change/) - मयूरी सोचिए, एक तरफ़ दुनिया भयंकर गर्मी, बाढ़ और खाने के संकट से जूझ रही है और दूसरी तरफ़ चंद अमीर लोग कुछ मिनटों के लिए अंतरिक्ष घूमने निकल पड़े हैं। यह दौड़ सिर्फ़ शौक़ की नहीं है, बल्कि यह जलवायु अन्याय और गैर जिम्मेदारी की एक ज़िंदा मिसाल बन चुकी है। अभी हाल ही - [संताल अस्मिता के संरक्षण व नई पीढ़ी में चेतना जगाने के लिए अनूठी पहल](https://climateeast.in/a-unique-initiative-to-preserve-santal-identity-and-create-awareness-among-the-new-generation-in-dumka-jharkhand/) - दुमका के एक गांव के लोगों ने हर सप्ताह संताल देवता की पूजा व सामूहिक प्रार्थना के आयोजन का लिया निर्णयसाप्ताहिक बोंगा बुरु/ पूजा-अर्चना से संताल आदिवासियों के धर्म, संस्कृति और सभ्यता को बचाये रखने में मिलेगी मदद दुमका : झारखंड के दुमका जिले के जामा प्रखंड के ऊपरबहाल गांव में संताल आदिवासी समुदाय ने - [नागालैंड के ख्यामनियुंगन आदिवासियों का प्रकृति के साथ सहजीवन और प्रेम का अनूठा किस्सा](https://climateeast.in/khiamniungans-tribes-in-nagaland-speak-kindly-to-honey-bees/) - थांगसोई एम ख्यामनियुंगन मैं एक फिल्मकार हूं और नागालैंड राज्य के नोकलाक जिले में स्थित चोकलांगन गांव में रहता हूं। मैं मूल रूप से ख्यामनियुंगन समुदाय से हूं। वर्ष 2022 में मैंने ​हनी हंटर्स​ नामक एक डॉक्यूमेंट्री बनायी थी। यह फिल्म मेरे समुदाय द्वारा की जाने वाली शहद की खेती और ऊंची चट्टानों पर चढ़कर - [दुनिया भर के बिजनेस लीडर्स 2035 तक चाहते हैं मजबूत नवीनीकृत ऊर्जा तंत्र : सर्वे](https://climateeast.in/business-leaders-want-a-strong-renewable-energy-system-by-2035-survey/) - एक नए वैश्विक सर्वे में दुनिया के 15 देशों के बिज़नेस लीडर्स ने साफ़ कहा है – अब फॉसिल फ्यूल्स से हटकर रिन्यूएबल एनर्जी की तरफ तेज़ी से बढ़ना वक्त की ज़रूरत है। ये सर्वे दुनिया भर की मिड-साइज़ और बड़ी कंपनियों के टॉप एक्ज़ीक्यूटिव्स से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है, और - [नर्मदा घाटी के विस्थापितों के 32 हजार भूखंड की रजिस्ट्री क्यों नहीं : नर्मदा बचाओ आंदोलन](https://climateeast.in/why-is-there-no-registration-of-32-thousand-plots-of-narmada-valley-displaced-people-narmada-bachao-andolan/) - बड़वानी (मध्यप्रदेश) : नर्मदा बचाओ आंदोलन ने नर्मदा घाटी के विस्थापितों के मुद्दे पर 21 अप्रैल 2025 को एक विस्तृत बयान जारी कर सरकार से सवाल पूछा है। एनबीए के भगवान सेप्टा, श्यामा मछुआरा, कमला यादव, देवीसिंह तोमर, गजानंद यादव व मेधा पाटकर की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि मध्यप्रदेश में - [मलबे के निबटान का अब सरकार को देना होगा आपको जवाब, अगले साल लागू होंगे नियम](https://climateeast.in/construction-and-demolition-waste-management-rules-2024/) - मयूरी अब अगर आपने कोई बिल्डिंग गिराई या नया प्रोजेक्ट शुरू किया है, तो "क्या करेंगे मलबे का?" इस सवाल का जवाब आपके पास होना चाहिए — और वो भी लिखित में! दरअसल सरकार ने हाल ही में Construction and Demolition Waste Management Rules, 2024 लागू कर दिए हैं, जो 1 अप्रैल 2026 से ज़मीन - [झारखंड के 16 आदिवासी गांवों की वन संपदा को संरक्षित करने की अनूठी पहल](https://climateeast.in/14-tribal-villages-of-pakur-district-in-jharkhand-join-hands-to-protect-forest-through-fire-free-practices/) - परंपरागत ज्ञान, साझा जिम्मेवारी और आदिवासी स्व शासन व्यवस्था पर आधारित है पाकुड़ जिले की यह पहल पाकुड़: आदिवासी समाज में ऐसी कई स्वस्थ्य परंपराएं हैं, जो अहम बदलाव की वजह बन सकती हैं। और, उनकी इसी खूबी व क्षमता को परिवर्तन का आधार बनाया गया। झारखंड की राजधानी रांची से सुदूर उत्तर पूर्व में - [वायु प्रदूषण से प्रभावित होता है बच्चों का दिमागी विकासः रिसर्च](https://climateeast.in/air-pollution-affects-childrens-brain-development-research/) - अध्ययन से पता चला है कि कि जीवन के शुरूआती वर्षों में वायु प्रदूषण खासकर महीन कणों (पीएम2.5 और पीएम10), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड्स का संपर्क बच्चों के दिमागी विकास को प्रभावित कर सकता है। बचपन में दिमाग का सही तरीके से विकास बच्चों की सोचने-समझने की क्षमता के लिए बेहद मायने रखता है। - [कवक आपके जीवन को किस तरह प्रभावित करता है और उन पर संकट कितना गहरा है?](https://climateeast.in/fungi-importance-in-ecosystem-and-growing-threats/) - हम-आप में से हर किसी ने कवक को किसी न किसी रूप में देखा होगा, जिन्हें अंग्रेजी में फंगी (fungi) कहते हैं। बगीचों में पेड़ों के नीचे, उनकी जड़ों के आसपास, गीले पुआल के आसपास, सड़े हुए पत्तों के निकट, गीले खेतों में और किसी ऐसी जगह जहां नमी हो। कवक की दुनिया पृथ्वी के - [फोटो स्टोरी: झारखंड के साइकिल कोयला मजदूरों की दो पैरों पर मीलों की दूरियां तय करने की कहानियां](https://climateeast.in/jharkhands-cycle-coal-workers-covering-miles-of-distance-on-two-legs/) - राहुल सिंह झारखंड के 24 में 12 जिलों में कोयला खनन होता है। राज्य के कुछ जिलों को छोड़ हर जगह साइकिल कोयला मजदूर दिखते हैं। उत्तरी व दक्षिणी छोटानागपुर व संताल परगना में उनकी संख्या अधिक नजर आती है। ऐसे साइकिल कोयला मजदूर खनन परियोजनाओं के आसपास के लोग होते हैं और कई बार - [शिपिंग उद्योग के लिए नयी जलवायु नीति को मिली संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी](https://climateeast.in/new-climate-policy-for-shipping-industry-gets-un-approval/) - संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने शिपिंग उद्योग के लिए एक अहम जलवायु नीति को मंजूरी दी है, जिसमें एमिशन की कीमत तय करने के लिए एक नई प्रणाली शामिल है। इस फैसले के तहत, शिपिंग क्षेत्र से होने वाले एमिशन पर कार्बन शुल्क लगाया जाएगा, जिससे हर साल कम से कम 10 - [मनरेगा पर हाईकोर्ट के रुख से हम निराश, बंगाल में बढ़ेगा श्रमिकों का पलायन व अप्रिय घटनाएं: पीबीकेएमएस](https://climateeast.in/no-relief-for-mgnrega-workers-in-west-bengal-only-directions-from-high-court-says-pbkms/) - लंबी प्रतीक्षा (184 दिन) के बाद कलकत्ता हाइकोर्ट में 10 अप्रैल 12025 को मनरेगा मामले पर सुनवाई हुई। पश्चिम बंगाल में मनरेगा मजूदरों के लिए फिर से काम शुरू करने, उन्हें बेरोजगारी भत्ता देने के मुद्दे पर कानूनी लड़ाई लड़ रहे श्रमिक संगठन पश्चिम बंग खेत मजूर समिति ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि - [संताल आदिवासियों ने किया मोड़े मांझी का आयोजन, ओलिचिकी को व्यापक मान्यता के लिए अब सीएम से संवाद](https://climateeast.in/olichiki-andolan-santal-tribals-organized-mode-manjhi-in-dumka/) - संताल परगना के संताल आदिवासी पिछले कुछ महीनों से ओलचिकी व संताली को व्यापक मान्यता देने के लिए आंदोलन कर रहे हैं। उनका तर्क है कि पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में अगर संताली और ओलिचिकी को व्यापक मान्यता मिली है तो झारखंड में ऐसा क्यों नहीं हो सकता है? दुमका: दुमका जिले के मसलिया - [सिदो-कानू ने आदिवासी अस्मिता व स्वाभिमान को नई पहचान दी](https://climateeast.in/sido-kanu-gave-a-new-identity-to-tribal-identity-and-self-respect/) - राजमहल कॉलेज में सिदो मुर्मू की जयंती पर विचार गोष्ठी का आयोजन राजमहल (साहिबगंज): मॉडल कॉलेज, राजमहल में 11 अप्रैल को वीर सपूत सिदो मुर्मू की जयंती कार्यक्रम एवं 47वां संताली साहित्य दिवस हर्षाेल्लास एवं गौरव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर एक विमर्श गोष्ठी का आयोजन प्राचार्य डॉ. रणजीत कुमार सिंह की अध्यक्षता - [मौसम में बदलाव से बिहार में बड़ी क्षति, अगले पांच दिनों तक मौसम का कैसा रहेगा हाल?](https://climateeast.in/heavy-rain-in-bihar-24-people-died-rabi-crop-damaged/) - बिहार के सुपोल जिले में सबसे अधिक बारिश हुई है। जिले में दो केंद्रों पर 100 मिमी से अधिक और पांच केंद्रों पर 50 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई है। भारी बारिश से राज्य के कई हिस्सों में गेहूं और अन्य रबी फसलों को नुकसान हुआ है। पटना: 10 अप्रैल को बिहार में - [ओलचिकी लिपि को व्यापक स्तर पर लागू करने की आदिवासी संगठनों की सरकार से मांग](https://climateeast.in/tribal-organizations-demand-from-the-jharkhand-government-to-implement-olchiki-script-on-a-wide-scale/) - विधायक बसंत सोरेन को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम का ज्ञापन संताल युवाओं ने सौंपा दुमका: झारखंड में केजी से पीजी तक सभी शिक्षण संस्थानों में संताल आदिवासियों की ओलचिकी लिपि से सभी विषयों कि पढाई संताली से हो और दुमका व राज्य के संताल बाहुल्य क्षेत्र के सभी सरकारी भवनों के नामपट्ट संताली भाषा - [ट्रम्प के टैरिफ्स: ग्लोबल ट्रेड में भूचाल, क्या भारत के लिए छिपा है एक मौका?](https://climateeast.in/donald-trumps-tariffs-and-global-trade-and-opportunity-for-india/) - अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की एक सिग्नेचर ने फिर दुनिया भर के व्यापार समीकरणों को हिला कर रख दिया है। 2 अप्रैल को व्हाइट हाउस के रोज़ गार्डन से ट्रम्प ने ‘लिबरेशन डे’ की घोषणा करते हुए करीब 60 देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ्स लगाने का एलान किया। इस कदम ने ग्लोबल मार्केट्स में - [ओडिशा : जलवायु चुनौतियों से निबटने मैंग्रोव संरक्षण के कार्य में जुटी महिलाओं की कहानी](https://climateeast.in/the-women-mangrove-keepers-of-jhadling-village-in-odisha/) - पुरी से राखी घोष की रिपोर्ट पुरी (ओडिशा): 45 वर्षीया नलिनी कंडी अब अपने गांव झाड़लिंग को चक्रवाती तूफानों और बाढ़ से बचाने वाले मैंग्रोव वन के महत्व को समझती हैं। 2019 के चक्रवात फानी के आने से पहले के दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया, "भारतीय मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की थी - [कोशी-मेची नदी जोड़ परियोजना को कैबिनेट मंजूरी कई संकट को न्योता है : एनएपीएम](https://climateeast.in/kosi-mechi-river-interlinking-project-cabinet-approval-and-napnapmm-statement/) - NAPM राष्ट्रीय नदी घाटी मंच, कोशी नव निर्माण मंच और एनएपीएम की ओर से केंद्र सरकार के ताजा कदम के बाद इस परियोजना के खतरों के बिंदुवार उल्लेख किया गया है नई दिल्ली/सुपौल (बिहार) : कोशी-मेची नदी जोड़ो परियोजना को केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। केंद्र सरकार के इस कदम के बाद नदी - [पीबीसीएमएस का वार्षिक सम्मेलन, सरकार की पूंजीपति समर्थक नीतियों के खिलाफ मजबूत लड़ाई लड़ेंगे चाय मजदूर](https://climateeast.in/pbcms-3rd-annual-conference-bengal-tea-workers-will-fight-a-strong-battle-against-the-government-policies/) - उत्तर बंगाल की तराई व डूवर्स में सक्रिय गैर राजनीतिक चाय श्रमिक संगठन पश्चिम बंग चाय मजदूर समिति का तीसरा वार्षिक सम्मेलन अलीपुरद्वार जिले के कालचीनी में आयोजित किया गया, जिसमें संगठन के पिछले कामकाज की समीक्षा करने के साथ आगामी रणनीति तय की गई। बीरपाड़ा (अलीपुरद्वार) : पश्चिम बंगाल चाय मजदूर समिति ने अलीपुरद्वार - [सिक्किम में पर्यावरण की त्रासदी से लेप्चा समुदाय की संस्कृति के सामने चुनौतियां क्यों हैं?](https://climateeast.in/why-is-the-environmental-tragedy-in-sikkim-challenging-the-culture-of-the-lepcha-community/) - मयल्मित लेप्चा जोंगू क्षेत्र सिक्किम के उत्तरी जिले में कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान के बाहरी इलाके में स्थित है। यह लेप्चा आदिवासी समुदाय का पारंपरिक रहवास है। तीस्ता और उसकी कई सहायक नदियां जोंगू से होकर बहती हैं। लेकिन पिछले दो दशकों में जलवायु परिवर्तन और जलविद्युत संयंत्र (हाइड्रोपॉवर प्लांट) के चलते यहां की नाजुक पारिस्थितिकी और - [संताली भाषा की ओलचिकी लिपि को व्यापक मान्यता दिलाने के लिए कुल्ही दुरूह का आयोजन](https://climateeast.in/olchiki-script-and-santali-language-meeting-organized-tin-dumka-district-of-jharkhand/) - दुमका: झारखंड राज्य में केजी से पीजी तक सभी शिक्षण संस्थानों में संताल आदिवासी की ओलचिकी लिपि व संताली भाषा में करवाने के सवाल को लेकर दुमका जिले के मसलिया व जामा प्रखंड के कई गांवों में कुल्ही दुरुह यानी बैठक की गई। दुमका जिले के झिलुवा, मसलिया, उपरबहाल आदि गांवों में परंपरागत मंझी परगना - [समुद्र में मैकेनाइज जहाजों से मछली पकड़ने की प्रतिबंध अवधि को 180 दिन करे केंद्र सरकार](https://climateeast.in/central-government-should-180-days-ban-period-for-fishing-by-mechanized-vessels-in-the-sea/) - पूर्वी मेदिनीपुर मत्स्यजीवी फोरम ने केंद्र सरकार को लिखे पत्र में कहा है कि अनियंत्रित ढंग से मैकेनाइज जलयान से मछली पकड़ने से छोटे मछुआरों की आजीविका और परंपरागत जीवन पद्धति और हमारे देश के तटवर्ती इलाके व समुद्र की जैव विविधता को नुकसान हो रहा है। कोलकाता: पूर्वी मेदिनीपुर मत्स्यजीवी फोरम ने केंद्र सरकार - [देउचा पचामी पर पीबीकेएमएस की फैक्ट फाइंडिंग, 90 प्रतिशत लोग कोयला परियोजना के खिलाफ](https://climateeast.in/deucha-pachami-coal-mine-project-pbkms-fact-finding-report/) - पश्चिम बंगाल खेत मजूर समिति ने सवाल उठाया है कि जैसा कि सत्ताधारी दल के लोग प्रचार कर रहे हैं कि देउचा पचामी में कोयला परियोजना को स्थानीय लोगों की सहमति हासिल है तो फिर वहां भारी मात्रा में पुलिस क्यों है और नागरिक समूहों के प्रवेश पर रोक क्यों है? कोलकाता: पश्चिम बंग खेत - [बढ़ती गर्मी, बढ़ती AC की मांग: क्या ऊर्जा-कुशल AC भारत को बिजली संकट से बचा सकते हैं?](https://climateeast.in/rising-heat-rising-ac-demand-can-energy-efficient-acs-save-india-from-power-crisis/) - भारत में इस साल गर्मी ने रिकॉर्ड तोड़ने की ठान ली है। मार्च में ही तापमान 40°C के पार जा चुका है, और आने वाले महीनों में हालात और बिगड़ सकते हैं। भीषण लू और उमस भरी गर्मी से बचने के लिए AC की मांग तेज़ी से बढ़ रही है, लेकिन यह बढ़ती मांग बिजली - [झारखंड : पेसा नियमावली से पहले पंचायती राज कानून में संशोधन का महासभा ने सरकार को दिया सुझाव](https://climateeast.in/jharkhand-janadhikar-mahasabha-suggested-to-the-state-government-to-amend-panchayati-raj-act-before-pesa-rules/) - झारखंड जनाधिकार महासभा ने सरकार से पेसा नियमावली संशोधन का ड्राफ्ट साझा किया रांची: झारखंड जनाधिकार महासभा के प्रतिनिधिमंडल ने 25 मार्च 2025 को पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडे सिंह से मुलाकात कर राज्य में पेसा लागू करने पर चर्चा की। साथ ही, झारखंड पंचायती राज कानून (JPRA) में पेसा (PESA) के सभी प्रावधानों को - [सर्वे: कोशी की बाढ़ की 26% लोगों को सरकारी स्रोतों से मिली थी पूर्व सूचना, 40% को नहीं मिली मुआवजा राशि](https://climateeast.in/only-26-percent-people-received-prior-information-about-kosi-floods-2024-from-government-sources/) - सुपौल: कोशी नव निर्माण मंच ने कोशी क्षेत्र में शोध कर रहे मित्र शोधार्थियों जैसे आईआईटी से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक के बाद अंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली में शोध व यूनिवर्सिटी ऑफ़ लंदन से पोस्ट डॉक्टरेट शोध शुरू कर रहे राहुल यादुका, टाटा समाज अध्ययन संस्थान (TISS) से शोध कर रही सुभा सृष्टि और राजीव गाँधी - [कोशी पीड़ितों तक राहत क्षतिपूर्ति, पुनर्वास व योजनाओं के गैप को दूर किया जाए : जस्टिस अरुण कुमार](https://climateeast.in/kosi-flood-2024-kosi-navnirman-manch-organized-a-public-hearing-in-patna/) - पटना : कोशी पीड़ितों की गृहक्षति सहित अन्य क्षतिपूर्ति दिलाने, कोशी तटबंध के भीतर के लोगों के पुनर्वास के सवाल पर कोशी नव निर्माण मंच द्वारा पटना के गांधी संग्रहालय में 25 मार्च 2025 को जनसुनवाई का आयोजन किया गया । मुख्य अतिथि के रूप में जनसुनवाई को संबोधित करते हुए पटना उच्च न्यायालय के - [उत्तर बंगाल के कई चाय बागान मजदूरों का कई पखवाड़े से वेतन बकाया, सड़क पर उतरने को हुए मजबूर](https://climateeast.in/tea-garden-management-is-not-paying-wages-to-the-tea-garden-workers-of-north-bengal/) - अलीपुरद्वार: उत्तर बंगाल के कई चाय बागान मजूदरों का वेतन कुछ पखवाड़े से बाकी है। अलीपुरद्वार जिले के मदारीहाट ब्लॉक के गारगेंडा चाय बागान के मजदूरों का छह पखवाड़े यानी तीन महीने से वेतन बकाया है। यहां के मजदूर वेतन भुगतान की मांग को लेकर 24 मार्च को सड़कों पर उतरें, जिनमें बड़ी संख्या में - [झारखंड के साहिबगंज में 12 दिन में पांच पहाड़िया बच्चों की रहस्यमय बीमारी से मौत](https://climateeast.in/five-paharia-tribe-children-died-of-mysterious-disease-in-12-days-in-sahibganj-district-of-jharkhand/) - साहिबगंज: झारखंड के उत्तर-पूर्वी छोर पर स्थित जिले साहिबगंज के एक ही गांव नगरभिठ्ठा में 12 दिनों में पांच पहाड़िया बच्चों की अज्ञात बीमारी से मौत हो गई। यह गांव पहाड़ पर बसा है और घटना की सूचना एक दिन पहले मिली है। बच्चों की मौत की वजह अबतक स्पष्ट नहीं हो सकी है और - [झरिया: नीचे मुहल्ला की पानी वाली ऊँची महिलाओं की जिद और जुनून की कहानी](https://climateeast.in/jharia-coal-mining-area-and-water-crisis-story-of-passion-of-women-who-revived-dugwell/) - झरिया की एक बस्ती की महिलाओं ने पानी की दिक्कतों और दूसरे मुहल्ले से लाने के दौरान अपमान झेलने के बाद अपने मुहल्ले के एक पुराने कुआं को पुनर्जीवित कर जल आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया। बाद में उनकी कोशिशों को सरकार व सिविल सोसाइटी का भी सहयोग मिला। राहुल सिंह की रिपोर्ट धनबाद: धनबाद-झरिया - [30% जमीन सेठों को व 5 डिसमिल का पट्टा चाय मजदूरों को देने के फैसले के खिलाफ जुटे हजारों लोग](https://climateeast.in/tea-workers-gathered-against-the-decision-to-give-30-percent-land-to-industrialist-in-siliguri/) - चाय मजदूर ममता बनर्जी सरकार के उस फैसले का लगातार विरोध कर रहे हैं, जिसमें मुख्यमंत्री ने चाय बागानों की 30 प्रतिशत जमीन उद्योगपतियों को देने का ऐलान किया है। इस साल सात फरवरी को इससे संबंधित एक अधिसूचना भी राज्य सरकार की ओर से जारी की गई है। सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) : पश्चिम बंगाल - [नदियों को आजीविका और संस्कृति के लिए बचाना जरूरी : एसपी तिवारी](https://climateeast.in/save-rivers-for-livelihood-and-culture-says-sp-tiwari/) - पश्चिम बंग मत्स्यजीवी यूनियन की वार्षिक सभा में मछुआरा समुदाय के प्रमुख मुद्दों पर चर्चा, मत्स्यजीवी समुदायों के बढते पलायन पर वक्ताओं ने जतायी चिंता बक्खाली (दक्षिण 24 परगना) : पश्चिम बंगाल के दक्षिण चौबीस परगना जिले के बक्खाली में पश्चिम बंगाल मत्स्यजीवी यूनियन की वार्षिक सभा का 18 मार्च 2025 को आयोजन किया गया, - [भारत के शहर भीषण गर्मी से निपटने को तैयार नहीं, एसएफसी की रिपोर्ट में खुलासा](https://climateeast.in/indian-cities-are-not-prepared-to-deal-with-extreme-heat-sfc-report/) - भारत के नौ प्रमुख शहरों में गर्मी से बचाव की तैयारी सिर्फ तात्कालिक उपायों तक सीमित है, जबकि दीर्घकालिक समाधान नदारद हैं। सस्टेनेबल फ्यूचर्स कोलैबोरेटिव (एसएफसी) की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, देश में बढ़ती भीषण गर्मी को देखते हुए लंबे समय तक असरदार रहने वाले उपायों की जरूरत है, लेकिन नीति निर्माताओं का ध्यान - [तेंदुओं की अधिक संख्या मनुष्यों पर अधिक हमले की वजह नहीं, जलपाईगुड़ी पर केंद्रित स्टडी में खुलासा](https://climateeast.in/leopard-attacks-in-tea-garden-area-jalpaiguri-district-of-west-bengal/) - उत्तर बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के चाय बागान क्षेत्र में तेंदुओं के हमले के पैटर्न पर सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ स्टडीज का एक नया रिसर्च हाल में आया है जिसमें वन्य पशुओं के हमलों के तौर-तरीके के बहु प्रचारित धारणाओं को खारिज किया गया है। पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में 630 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में - [भारत का पर्यावरण इतिहास लिखने वाले क्रिस्टोफर वी हिल नहीं रहे](https://climateeast.in/christopher-v-hill-who-wrote-indias-environmental-history-no-more/) - भारत के पर्यावरण इतिहास पर शोध करने वाले और पुस्तक लिखने वाले प्रोफेसर क्रिस्टोफर वी हिल नहीं रहे। चार मार्च को 71 साल की उम्र में कार्डियक अरेस्ट से उनका निधन हो गया। उन्होंने अमेरिका के यूटा प्रांत की सॉल्ट लेक सिटी में आखिरी सांस ली। भारत के पर्यावरण इतिहास पर उनकी पुस्तक "रिवर ऑफ - [संताल आदिवासियों का बाहा पर्व, जिसमें सादा पानी डाल मनाते हैं उत्सव](https://climateeast.in/baha-festival-of-santal-tribals-in-jharkhand/) - दुमका: आदिवासी समुदायं के पर्व, परंपराएं और मान्यताएं उन्हें सीधे प्रकृति से जोड़ती हैं। ऐसा ही संतालों का एक पर्व व परंपरा है - बाहा। बाहा पर्व ठंड के आखिरी दिनों व गरमी के शुरुआती दिनों के बीच का उत्सव है, जिसमें लोग आखिरी दिन एक-दूसरे पर सादा पानी डाल कर पर्व मनाते हैं। बाहा - [सिदो-कान्हू विश्वविद्यालय में राजमहल मॉडल कॉलेज सौर ऊजा संचालित पहला संस्थान बना](https://climateeast.in/rajmahal-model-college-became-the-first-solar-powered-institution-in-sido-kanhu-university/) - महाविद्यालय में कई अन्य पहल की गई है, यहां राजमहल पहाड़ी फॉसिल संग्रहालय की स्थापना भी हुई है राजमहल (साहिबगंज) : सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका के एक प्रमुख अंगीभूत कॉलेज, मॉडल कॉलेज, राजमहल ने अपने परिसर में एक नए युग की शुरुआत की है। यह सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय का पहला कॉलेज बन गया है जो - [नाजीर हेम्बरम: एक संताली कवि जिन्हें अनुवाद के लिए मिला साहित्य आकादमी सम्मान](https://climateeast.in/najir-hembrom-a-santali-poet-who-honored-the-sahitya-akademi-award-for-translation/) - दुमका: नाजीर हेम्बरम एक संताली कवि हैं, जिन्हें इस साल संताली भाषा में श्रेष्ठ अनुवाद के लिए साहित्य आकादमी आवार्ड से सम्मानित करने का ऐलान किया गया है। नाजीर हेम्बरम को यह आवार्ड उनके अनुवाद 'हेन्दे सादोम' के लिए दिया जाएगा। हेन्दे सादोम संताली भाषा के दो शब्द हैं, जिसका शाब्दिक अर्थ डार्क हॉर्स है। - [पश्चिम बंगाल: देउचा पचामी में कोयला खनन के खिलाफ आंदोलन, पीबीकेएमएस का समर्थन](https://climateeast.in/deucha-pachami-coal-project-in-west-bengal-pbkms-supports-the-tribals-movement/) - पीबीसीएमएस ने कहा है कि पश्चिम बंगाल सरकार रैयतों से जबरन जमीन नहीं लेने की अपनी घोषित नीति से पीछे हट गई है और पुलिस बल लोगों को डरा रहा है। कोलकाता: पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के देउचा मचामी में प्रस्तावित कोयला खनन का आदिवासी व स्थानीय समुदाय तीव्र विरोध कर रहा है। पश्चिम - [दुमका स्टेशन के नाम पट्ट से ओलचिकी लिपि को मिटाने से आदिवासी समाज में आक्रोश](https://climateeast.in/anger-in-tribal-community-due-to-erasure-of-olchiki-script-from-name-board-of-dumka-station/) - आदिवासी समाज का कहना है कि यह हमारी सांस्कृतिक व भाषाई पहचान का मुद्दा है और ऐसा कृत्य क्षेत्रीय भाषाओं के सम्मान और संवैधानिक अधिकारों पर भी सीधा आघात है। दुमका: दुमका रेलवे स्टेशन के नाम पट्ट पर हिंदी भाषा की देवनागरी लिपि, अंग्रेजी की रोमन लिपि और क्षेत्रीय व जनजातीय भाषा संताली की लिपि - [चाय मजदूरों का वेतन देने में विफल रहे प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, आंदोलन की चेतावनी](https://climateeast.in/raimatang-tea-estate-protest-against-management-for-failing-to-pay-salaries-to-tea-workers/) - टीएमसी नेता द्वारा महिला चाय मजदूरों से किये गए दुर्व्यवहार के खिलाफ राज्य सरकार से कार्रवाई की मांग अलीपुरद्वार (पश्चिम बंगाल) : पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले के राइमाटांग चाय बागान मजदूरों ने तीन मार्च को अपने बकाया वेतन की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। मजदूरों को मजबूरन यह कदम तब उठाना पड़ा जब - [ट्री मैन के नाम से मशहूर बोकारो के पर्यावरण कार्यकर्ता जगदीश महतो का निधन](https://climateeast.in/bokaro-environmental-activist-jagdish-mahto-famous-as-tree-man-passes-away/) - बोेकारो: बोकारो जिले में जंगल बचाने के अपने अभियान के लिए पहचाने जाने वाले जगदीश महतो का रविवार (02 March 2025) को 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया। रविवार सुबह कसमार ब्लॉक के अपने पैतृक आवास हिसीम में उन्होंने अंतिम सांसं ली। झारखंड सरकार ने वर्ष 2023 में जगदीश महतो को ट्री मैन - [दुमका रेलवे स्टेशन के नाम पट्ट में जुटा संताली भाषा व ओलचिकी लिपि, आदिवासी समाज में हर्ष](https://climateeast.in/santali-language-and-olchiki-script-used-in-name-board-of-dumka-railway-station/) - दुमका : दुमका रेलवे स्टेशन का नाम नाम पट्ट में संताली भाषा व ओलिचिकी लिपि में दर्ज किया गया है, जिस पर आदिवासी समाज ने प्रसन्नता जतायी है। दुमका स्टेशन का नाम संताली भाषा व ओलचिकी लिपि से भी लिखे जाने पर आदिवासी समाज के संगठनों ने खुशी जतायी है। आदिवासी समाज व उनके संगठनों - [झारखंड में पत्रकारों व कम्युनिकेटर्स ने सामुदायिक व प्राकृतिक संसाधनों की रिपोर्टिंग पर की खुली चर्चा](https://climateeast.in/journalists-and-communicators-workshop-in-jharkhand-on-commons-reporting-by-asar-and-common-ground/) - कॉमन्स पर रिपोर्टिंग के लिए असर और कॉमन ग्राउंड ने आयोजित की कार्यशाला इस कार्यशाला का आयोजन कॉमन्स संबंधी लेखन पर पत्रकारों की समझ को बेहतर बनाने और उनका नेटवर्क तैयार करने के लिए असर सोशल इम्पैक्ट एडवाइजर्स और कॉमन ग्राउंड की ओर से किया गया। कार्यशाला में राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए आदिवासी - [पलासबोना, अंधारकोठा, श्रीकुंड : साहिबगंज जिले का ड्राइ जोन, जहां बचपन पर है पानी का बोझ](https://climateeast.in/water-crisis-in-sahibganj-district-of-jharkhand/) - पलासबोना, श्रीकुंड और अंधारकोठा गांव के लोग सार्वजनिक जलस्रोतों पर पानी के लिए निर्भर हैं। ऐसे सार्वजनिक स्रोतों से पानी लाने का काम मुख्य रूप से महिलाओं व छोटे बच्चों का है। इस कारण दोनों अतिरिक्त दबाव का सामना करते हैं। साहिबगंज से राहुल सिंह की रिपोर्ट झारखंड के उत्तर पूर्व छोर पर स्थित साहिबगंज - [राजकीय जनजातीय हिजला मेला और दिसोम मरांग बुरु का ऐतिहासिक संदर्भ और महत्व](https://climateeast.in/historical-context-and-significance-of-state-tribal-hijla-fair-and-disom-marang-buru/) - सच्चिदानंद सोरेनसमाज सेवक झारखंड की उपराजधानी दुमका से सटे हिजला पहाड़ी की तलहटी में स्थित है हिजला बस्ती। यह दुमका सदर प्रखंड की सरुवा पंचायत का एक संताल आदिवासी गांव है और दुमका शहर से महज चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसी बस्ती में मयूराक्षी नदी तट व हिजला पहाड़ी के मध्य में - [आंदोलन का असरः हिजला मेले में हिंदी के साथ ओलिचिकी में लगाया गया डिस्प्ले](https://climateeast.in/display-in-olichiki-along-with-hindi-was-put-up-at-hijla-fair-dumka/) - दुमका : हिजला गांव के ग्रामीणों और विभिन्न आदिवासी संगठनों की लगातार मांग करने और आंदोलन का चेतावनी देने पर सोमवार की शाम को मेला प्रशासन ने तोरण द्वार में हिंदी और ओलचिकी से एलइडी डिस्प्ले(लाइट) लगवाया। इन डिस्प्ले को मेला उद्घटान के एक दिन पूर्व किसी कारण वश मेला प्रशासन द्वारा हटवा दिया गया - [IPCC की बैठक में अमेरिका की गैर मौजूदगी से वैश्विक जलवायु सहयोग पर उठे सवाल](https://climateeast.in/usa-absence-in-ipcc-meeting-raises-questions-on-global-climate-cooperation/) - अमेरिका में हुए राजनीतिक बदलाव के बाद जलवायु प्रतिबद्धताओं के प्रति वहां के मौजूदा प्रशासन के रवैये में बदलाव दिख रहा है। हांगझोउ, चीन में इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) का 62वां पूर्ण सत्र शुरू हो चुका है, जिसमें जलवायु परिवर्तन पर सातवीं आकलन रिपोर्ट (AR7) और कार्बन डाइऑक्साइड रिमूवल टेक्नोलॉजीज पर रिपोर्ट तैयार - [बजट2025ः ए‍क सशक्‍त एमएसएमई जलवायु वित्त पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण का आह्वान](https://climateeast.in/budget-2025-and-msme-climate-finance-ecosystem-by-namita-vikas-and-swapna-patil/) - नमिता विकास एवं स्वप्ना पाटिल का आलेख कुटीर, लघु एवं मध्‍यम उद्योग (एमएसएमई) वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था की रीढ़ हैं। भारत के सकल घरेलू उत्‍पाद (जीडीपी) में एमएसएमई क्षेत्र का योगदान 30 प्रतिशत है। वित्‍तीय वर्ष 2025-26 के केन्‍द्रीय बजट के जरिये इस क्षेत्र में नयी ऊर्जा का संचार करने की कोशिश की गयी है। बजट में - [हिजला मेले में ओलिचिकी लिपि में तोरण द्वार व बैनर नहीं लगाए जाने से ग्रामीण व आदिवासी संगठन नाराज, तुरंत सुधार की मांग](https://climateeast.in/tribals-are-angry-due-to-non-installation-of-archway-and-banners-in-olichiki-script-in-hijla-fair-dumka/) - दुमका : 135 वर्ष पुराना ऐतिहासिक राजकीय जनजातीय हिजला मेला महोत्सव दुमका प्रखंड के हिजला गांव में हर साल बसंत के दिनों में आयोजित होता है। इस साल यह मेला 21 फ़रवरी से 28 फरवरी तक आयोजित किया गया है। इस मेले का उदघाटन यहां के प्रधान सुनीलाल हांसदा करते हैं। इस साल इस मेले - [तिस्ता-III परियोजना पर वैज्ञानिक पुनर्मूल्यांकन और लोकतांत्रिक निर्णय की माँग](https://climateeast.in/teesta-iii-project-demand-for-scientific-re-evaluation-and-democratic-decision/) - तिस्ता एक अनोखी ग्लेशियर-निर्मित नदी है जो सिक्किम के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध इलाकों से होकर बहती है। यहाँ लगातार बनाए जा रहे बाँधों ने स्थानीय समुदायों, विशेष रूप से ड्ज़ोंगू के लेपचा समुदाय, में गहरी चिंता और असंतोष उत्पन्न किया है। जब भी उत्तर-पूर्वी भारत की बात होती है, तो अक्सर उसकी - [क्या “Climate Plantations” जलवायु संकट का हल है या नई मुसीबत?](https://climateeast.in/are-climate-plantations-a-solution-to-the-climate-crisis-or-a-new-problem/) - क्या हम पेड़ उगाकर जलवायु परिवर्तन को रोक सकते हैं? सोचिए, अगर हम तेजी से बढ़ने वाले पौधे उगाएं, उन्हें जलाएं, और निकलने वाला CO₂ पकड़कर स्टोर कर दें—क्या इससे ग्लोबल वॉर्मिंग रुक सकती है? इसी विचार पर आधारित है BECCS (Bioenergy with Carbon Capture and Storage) तकनीक। लेकिन एक नई रिसर्च ने इस आइडिया - [कॉमन्स के लिए आदिवासियों के संघर्ष से जुड़ा है हिजला के सांस्कृतिक आयोजन का इतिहास](https://climateeast.in/hijla-fair-history-and-the-struggle-of-the-santal-tribe-for-commons/) - इन दिनों पर्यावरण के क्षेत्र में कॉमन्स शब्द की चर्चा प्रमुखता से हो रही है। हालांकि अंग्रेजी का शब्द कॉमन्स हिंदी भाषियों के बीच कोई नया शब्द नहीं है। सामान्यतः इसका अर्थ एक ऐसी स्थिति, वस्तु या स्थान से लगाया जाता है जिस पर सबका समान रूप से अधिकार हो। तो उसी के अनुरूप पर्यावरण - [संताल आदिवासियों की धार्मिक पुस्तक जोमसिम विनती का डॉ धुनी सोरेन ने किया विमोचन](https://climateeast.in/religious-book-of-santal-tribals-jomsim-binati-launch/) - पुस्तक के लेखक संताल धर्म गुरु व टैगोर साहित्य पुरस्कार से सम्मानित सोमय किस्कू हैं, जिन्होेंने संताली व बांग्ला भाषा में भी कई पुस्तकों की रचना की है दुमका: सारो लुखी गढ़, दुमका में सरी धर्म गुरु बाबा व समाजसेवी व लेखक और टैगोर साहित्य पुरस्कार से सम्मानित सोमय किस्कू दुवारा लिखित पुस्तक “जोमसिम विनती” - [विमला बहुगुणाः सुंदरलाल बहुगुणा की आधारस्तंभ व प्रेरक शक्ति](https://climateeast.in/vimla-bahuguna-the-bedrock-of-support-sundarlal-bahuguna-by-anoop-nautiyal/) - अनूप नौटियालफाउंडर, सोशल डेवलपमेंट एंड कम्युनिटीज फाउंडेशन, उत्तराखंड स्वर्गीय श्रीमती विमला बहुगुणा जी को मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि, जिन्होंने अपने जीवन के 93 वर्ष धरती माता की सेवा में समर्पित कर दिए और सामाजिक, विकासात्मक और पर्यावरणीय सभी उद्देश्यों के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता और दृढ़ इच्छाशक्ति से एक अमिट छाप छोड़ी। अपनी छोटी और दुर्बल - [रेड सैंड बोआ सांप: जिसे आप दोमुहाँ खतरनाक सांप समझते हैं वह शांत स्वभाव का आपका मित्र है](https://climateeast.in/red_sand_boa-plays-a-significant-role-in-the-ecosystem/) - शताब्दी चक्रवर्ती शुष्क क्षेत्रों में पाए जाने वाला सांप रेड सैंड बोआ शांत स्वभाव का होता है। अपनी अनोखी बनावट के लिए जाना जाते वाले इस सांप का शरीर चिकना, मोटा और गहरे लाल-भूरे रंग का होता है। इसकी विशेषता इसकी पूंछ है, जो इसके शरीर जितनी ही मोटी होती है। यह पूंछ अंत में - [हिजला मेले में ओलिचिकी लिपि में तोरण द्वार व बैनर लगवाने की हेमंत सरकार से आदिवासी समाज ने की मांग](https://climateeast.in/tribal-demanded-from-the-government-to-install-archway-and-banner-in-olichiki-script-in-hijla-mela-dumka/) - दुमका: दुमका में आयोजित होने वाले राजकीय जनजातीय हिजला मेला महोत्सव की शुरुआत तीन फरवरी 1890 ई को किया गया था। इस मेले के 135 वर्ष पूरा हो गए हैं। इस वर्ष 21 से 28 फरवरी तक मेला का आयोजित होने वाला है। इसको लेकर हिजला गांव में मंझी बाबा(ग्राम प्रधान) सुनीलाल हांसदा के अध्यक्षता - [भारत के हाशिये के लोगों के लिए बैंक केवाईसी को अनलॉक कर दिया जाए](https://climateeast.in/bank-customer-id-verification-framework-is-making-life-difficult-for-the-poor-by-jean-dreze/) - सख्त केवाईसी मानदंडों के कारण गरीब लोगों को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके कारण कई लोग अपने बैंक खातों तक पहुँचने में असमर्थ हैं। इसी तरह की त्रासदियों को रोकने के लिए केवाईसी ढांचे में तत्काल संशोधन आवश्यक है। ज्यां द्रेज, अर्थशास्त्री जब मैंने उत्तरप्रदेश के सोनभद्र में बैंक की कतार - [झारखंड के ऐतिहासिक गांव हिजला में विकास का एक नमूना, सड़क का निर्माण ऐसे कि खत्म हो जाता है पीसीसी का महत्व](https://climateeast.in/jharkhands-historic-village-hijla-villagers-protest/) - दुमका : दुमका जिले में स्थित हिजला झारखंड का एक एक ऐतिहासिक गांव है, जिसका इतिहास देश की आजादी की लड़ाई और संताल आदिवासियों की गौरवशाली परंपराओं व रीति रिवाज से जुड़ता है। लेकिन, इस गांव में सड़क के निर्माण कार्य से ग्रामीण परेशान हैं। दुमका शहर से मात्र तीन किमी की दूरी पर स्थित - [झारखंड में सामाजिक सुरक्षा स्कीमों में खर्च बढाये सरकार: झारखंड जनाधिकार महासभा](https://climateeast.in/government-should-increase-expenditure-on-social-security-schemes-in-jharkhand-jjm/) - बजट से पहले राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर से मुलाकात के दौरान महासभा के प्रतिनिधिमंडल ने अनियंत्रित खनन से बचाव, लैंड बैंक व भूमि अधिग्रहण कानून संशोधन 2017 को तुरंत रद्द करने की भी उठाई मांग रांची: झारखंड जनाधिकार महासभा के एक प्रतिनिधिमंडल ने 13 फरवरी को राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर से - [कल्लूर बालन: खामोशी से पर्यावरण को सहेजने के सूत्रधार](https://climateeast.in/kallur-balan-a-silent-environmental-activist/) - कहते हैं अकेला चना भांड नहीं फोड़ सकता। लेकिन, केरल के पालक्काड जिले के कल्लूर बालन का पूरा जीवन इस कहावत के उलट था। उन्हें किसी पहचान की जरूरत नहीं है। खामोशी से पर्यावरण को सहेजने के लिए काम करने वाले बालन ने पांच सिंतारा होटलों में होने वाले कार्यक्रम या जलवायु परिवर्तन पर होने - [जलवायु परिवर्तन कर रहा चॉकलेट की मिठास कम, कीमतें 400% तक बढीं](https://climateeast.in/cacao-farming-climate-change/) - वैलेंटाइंस डे आते ही सबसे पहले क्या याद आता है? प्यार, गले लगना, और… चॉकलेट! लेकिन जलवायु परिवर्तन के चलते यह मीठी परंपरा खतरे में है। पश्चिम अफ्रीका, जहां दुनिया की 50% से ज्यादा कोको की खेती होती है, वहां बढ़ता तापमान और अनियमित बारिश किसानों को तबाह कर रही है। चॉकलेट पर जलवायु परिवर्तन - [भारत में भूजल प्रदूषण का संकट गहरा हो रहा है: केंद्रीय भूजल बोर्ड](https://climateeast.in/groundwater-contamination-in-india-central-ground-water-board-report-2024/) - ईशा लोहिया (Esha Lohia) भूजल बोर्ड की ताजा रिपोर्ट से पता चलता है कि जमीन के नीचे का पानी बड़े पैमाने पर दूषित हो गया है। करीब 20% नमूनों में पानी को गंदा करने वाले तत्व (प्रदूषक) तय सीमा से ज्यादा हैं। मुख्य प्रदूषकों में नाइट्रेट, फ्लोराइड, आर्सेनिक और यूरेनियम शामिल हैं। रिपोर्ट में पानी - [संताल आदिवासियों का सवाल, बंगाल, असम व ओडिशा में ओलचिकी लिपि मान्य तो झारखंड में क्यों नहीं?](https://climateeast.in/olchiki-script-is-acceptable-in-bengal-assam-and-odisha-then-why-not-in-jharkhand/) - दुमका: दिसोम मरांग बुरु संताली अरीचली आर लेगचर अखड़ा और ग्रामीणों ने संताली भाषा, ओलचिकी लिपि और शिक्षा को लेकर दुमका प्रखंड के हिजला गांव में अखड़ा के सचिव व हिजला गांव के मंझी बाबा(प्रधान) सुनिलाल हांसदा के अध्यक्षता में 10 फरवरी 2025 को कुल्ही दुड़ूप(बैठक) किया। अखड़ा और ग्रामीणों का कहना है कि संताली - [फ्री होल्ड पर चाय बागानों की 30% जमीन उद्योगपतियों को देने का फैसला गलत : पीबीसीएमएस](https://climateeast.in/tea-gardens-land-on-freehold-to-industrialists-in-west-bengal-is-wrong-decision/) - कोलकाताः पश्मिच बंग चाय मजूर समिति(PBCMS) ने पश्चिम बंगाल सरकार के फ्री होल्ड पर चाय बागानों की जमीन उद्योगपतियों को देने का तीखा विरोध किया है और सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस को यह याद दिलाया है कि वह भूमि अधिकारों के बल पर ही राज्य में सत्ता में आ पायी थी और अब उसके द्वारा - [रिपोर्ताजः पाताल जैसे पातालकोट के गांव, सहमे बच्चे, मुश्किलों से जूझती महिलाएं और घंटों का सफर...](https://climateeast.in/bharia-tribe-life-in-patalkot-chhindwara-madhya-pradesh/) - मध्यप्रदेश से स्वतंत्र पत्रकार सतीश मालवीय छिंदवाड़ा जिले के पातालकोट घाटी रिपोर्टिंग के लिए पहुंचे थे। इस दौरान वे दिलचस्प अनुभवों से गुजरे। एक रिपोर्टर का यह अनुभव आपको पातालकोट की सैर करा सकता है और आप भी उन अनुभवों को उनके शब्दों के माध्यम से थोड़ा अहसास कर सकते हैं। सतीश मालवीय, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश - [जीडीपी में मनरेगा की हिस्सेदारी में छह सालों में 0.56% से घट कर 0.24% हो गई](https://climateeast.in/mgnrega-share-in-gdp-decreased-from-0-56-percent-to-0-24-percent-in-six-years/) - नई दिल्लीः केंद्रीय बजट में इस साल भी मनरेगा का बजट पूर्ववत रखा गया है। नरेगा संघर्ष मोर्चा ने मनरेगा के आवंटन पर एक विश्लेषण प्रस्तुत किया है और कहा है कि पिछले वित्त वर्ष के समान ग्रामीण रोजगार गारंटी एक्ट का बजट 86 हजार करोड़ पर स्थिर है और अगर मुद्रास्फीति से इसका समायोजन - [ओडिशा में प्रस्तावित अस्तारंगा बंदरगाह के खिलाफ स्थानीय समुदाय क्यों उठा रहा है आवाज?](https://climateeast.in/astaranga-port-odisha-and-concern-for-the-local-community/) - भुवनेश्वरः ओडिशा के पुरी जिले के अस्तारंगा में प्रस्तावित बंदरगाह के खिलाफ स्थानीय समुदाय लंबे समय से आवाज उठा रही है। हाल में फिर इसका विरोध शुरू हुआ है। ओडिशा के युवा पर्यावरण कार्यकर्ता व ओडिशा पर्यावरण संरक्षण अभियान के संस्थापक सौम्या रंजन बिस्वाल ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस - [संताली भाषा व ओलचिकि लिपि में पढाने की मांग किस आधार पर कर रहे हैं झारखंड के संताल आदिवासी?](https://climateeast.in/santhal-tribals-of-jharkhand-demanding-education-in-santali-language-and-olchiki-script/) - मुख्यमंत्री को मांग सौंप कर अमल करने की विभिन्न संगठनों ने किया है आग्रहदुमका : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जब दो फरवरी को अपनी पार्टी झामुमो के सम्मेलन में शामिल होने पहुंचे थे तो उन्होंने मंच से हिंदी के साथ संताली में लोगों को संबोधित किया था। अब मुख्यमंत्री से संताल आदिवासी समाज के - [दूसरा चांदमुनी बनाने की हो रही है साजिश, चाय बागानों के साथ कब होगा न्याय?](https://climateeast.in/siliguri-city-center-chandmuni-tea-garden-and-raja-bagan-tea-garden/) - चाय बागान मजदूरों के खून-पसीने से सींची गई जमीन पर उद्योगपतियों व व्यापारियों की नजर टिकी है और सरकार विकास के नाम पर मजदूरों को विस्थापित होने व पलायन को मजबूर कर रही है। किरसेन खड़िया सिलीगुड़ी का चमकता-दमकता "सिटी सेंटर" आज उत्तर बंगाल की पहचान बन चुका है, लेकिन इसकी नींव में दफ़्न हैं - [केंद्रीय बजट 2025 में हरित विकास के लिए सरकार ने क्या ऐलान किया है?](https://climateeast.in/union-budget-2025-green-development-and-sustainable-development/) - केंद्रीय बजट 2025-26 में भारत की सस्टेनेब्ल डेवेल्प्मेंट यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए कई अहम घोषणाएँ की गई हैं। सरकार ने साफ ऊर्जा, घरेलू उत्पादन और कृषि को मजबूती देने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। इस बजट को करदाताओं के अनुकूल बताया जा रहा है, जिसमें कई ऐसे प्रावधान हैं जो क्लीन एनर्जी - [स्थानीय समुदाय की भागीदारी प्रवासी प्रजातियों के अस्तित्व के लिए महत्वपूर्णः रिपोर्ट](https://climateeast.in/community-led-conservation-strategies-for-migratory-species-cms-report/) - बॉनः संयुक्त राष्ट्र वन्यजीव संधि (Convention on the Conservation of Migratory Species of Wild Animals-सीएमएस) की दो नई रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि स्थानीय समुदाय की भागीदारी मध्य एशिया में प्रवासी प्रजातियों के अस्तित्व व संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। इस रिपोर्ट के अनुसार, समुदाय नेतृत्व वाली संरक्षण रणनीतियां प्रवासी प्रजातियों के सफल - [कोशी के लोग बाढ़ की विभीषिका के महीनों बाद भी बेहाल, प्रशासन व सरकार के समक्ष लोगों ने रखी मांग](https://climateeast.in/people-of-kosi-are-still-in-distress-even-months-after-the-flood-disaster/) - सुपौलः पिछले साल मानसून के आखिरी चरण में नेपाल में हुई भारी बारिश के बाद कोशी नदी में आयी प्रलंयकारी बाढ़ को लेकर 30 जनवरी, 2025 को कोशी क्षेत्र के लोगों ने सुपौल के जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष धरना देकर जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार को अपनी मांगों से अवगत कराया है। इस धरना - [आदिवासी हितों की रक्षा के लिए पेसा के अनुरूप हो झारखंड पंचायती राज कानून में संशोधन: महासभा](https://climateeast.in/harkhand-panchayati-raj-act-should-be-amended-in-line-with-pesa-to-protect-tribal-interests-in-jharkhand/) - झारखंड जनाधिकार महासभा का तर्क है कि पंचायती राज कानून में राजस्व गांव को इकाई माना गया है, जबकि पेसा में परंपरागत ग्रामसभा इकाई है। ड्राफ्ट नियमावली के कुछ प्रावधानों पर महासभा ने सवाल उठाया है। रांची: अभी झारखंड में पेसा, 1996 की नियमवाली को लेकर बहस छिड़ी हुई है। इस बहस के दौरान अनेक - [पहली मेट कोल एग्जिट लिस्ट जारी, जनिए क्यों है यह जलवायु संकट की एक अहम वजह](https://climateeast.in/first-metallurgical-coal-exit-list-released/) - मेटलर्जिकल कोल या मेट कोल के विस्तार को रोकने का वक्त अब आ गया है। अब स्टील के उत्पादन में कोल की जरूरत को खत्म करने के लिए नई तकनीकें उपलब्ध हैं। थिंक-टैंक "आगोरा इंडस्ट्री" के मुताबिक, 2040 के आस-पास स्टील उद्योग में कोल का इस्तेमाल पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है। उर्गेवाल्ड - [लॉस एंजेलेस में जंगल में भीषण आग से बढी चिंताएं, आग के अनुकूल हालात में 35 प्रतिशत की वृद्धि](https://climateeast.in/los-angeles-fire-favorable-conditions-increased-by-35-percent/) - लॉस एंजेलेस में जनवरी 2025 की शुरुआत में लगी जंगल की आग ने इतिहास में सबसे विनाशकारी आग के रूप में अपनी छाप छोड़ी है। 28 लोगों की मौत, 10,000 से अधिक घरों का नष्ट होना, और लाखों लोगों का जहरीले धुएं से प्रभावित होना इस त्रासदी की भयावहता को दर्शाता है। वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन - [संताल आदिवासियों की माघ बोंगा का सामाजिक जीवन में क्या है महत्व, जानिए](https://climateeast.in/magh-bonga-importance-in-the-social-life-of-santal-tribals-of-jharkhand/) - दुमका के मसलिया गांव में संताल आदिवासियों का माघ बोंगा (माघ पूजा) संपन्न दुमका : झारखंड के दुमका जिले के मसलिया प्रखंड के मसलिया गांव में “माघ बोंगा” मनाया गया। यह पूजा माघ टंडी(पूजा स्थान) में संपन्न हुई। ग्रामीणों ने कहा कि यह पूजा माघ महीने में मनाया जाता है। यह पूर्णिमा में मनाना अधिक - [प्रमुख एशियाई शहरों पर जलवायु विशेषज्ञ डॉ अंजल प्रकाश का नजरियाः साझी चुनौती, समाधान भी साझा](https://climateeast.in/anjal-prakashs-view-on-asian-cities-common-challenge-common-solution/) - डॉ अंजल प्रकाश प्रमुख शहरों में जलवायु परिवर्तन की समस्या को विभिन्न देशों व दुनिया की साझा चुनौती मानते हैं। वे इसके समाधान के लिए तकनीकी नवाचार, जागरूकता बढाने एवं बेहतर शहरी नियोजन व समुदाय के सशक्तीकरण को जरूरी मानते हैं। “आपने कभी सोचा है, शहर सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारतों और भीड़-भाड़ वाले बाजारों का - [मधु चाय बागान के श्रमिकों का वेतन व न्याय के लिए आंदोलन, श्रम मंत्री ने किया मुलाकात का वादा](https://climateeast.in/madhu-tea-garden-workers-protest-for-salary-and-justice-west-bengal-labor-minister-promises-to-meet/) - मधु चाय बागान के श्रमिकों का वेतन अब भी कई पखवाड़ों का बकाया है। साथ ही उनके पीएफ व ग्रेच्युटी में गड़बड़िया की जाती हैं और सत्ताधारी दल के समर्थकों द्वारा दबाव बनाया जाता है। अलीपुरद्वार (पश्चिम बंगाल) : पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले के मधु चाय बागान के मजदूर पिछले कुछ सप्ताह से अपने - [ट्रंप का दूसरा कार्यकाल और जलवायु परिवर्तन: क्या अब भी उम्मीद है?](https://climateeast.in/donald-trump-second-term-and-climate-change-is-there-still-hope/) - 20 जनवरी, 2025 को ट्रंप फिर से राष्ट्रपति पद की शपथ लेने वाले हैं। ट्रंप के पहले कार्यकाल में जलवायु नीति पर जो रुख था, उससे यह साफ है कि उनके आने से अमेरिका में जलवायु परिवर्तन की दिशा में और मुश्किलें आ सकती हैं। उन्होंने पेरिस समझौते से बाहर निकलने का फैसला लिया था, - [क्या है संताल आदिवासियों का सकरात पर्व, क्या है मान्यताएं व रस्म?](https://climateeast.in/santal-tribals-sakrat-festival-beliefs-and-rituals/) - पूर्वजों व ईष्ट देवताओं को याद करने व गांव को चलाने वालों के प्रति सम्मान प्रकट करने का है यह अवसर दुमका: दिसोम मारंग बुरु युग जाहेर अखड़ा और सरी धर्म अखड़ा द्वारा झारखंड के दुमका जिले में संताल आदिवासियों के सकरात पर्व मनाया गया। दुमका जिले के दुमका प्रखंड के दुंदिया और धतिकबोना गांव - [तेंदुओं के मनुष्यों पर अधिकतर हमले बिना शिकार के उद्देश्य के, निम्न आय वाले आसान शिकार: स्टडी](https://climateeast.in/leopard-attacks-on-people-human-wildlife-conflict-by-shweta-shivakumar/) - हिमाचल प्रदेश में 11 साल की लंबी अवधि में तेंदुओं द्वारा किये गए हमले की प्रकृति व स्वरूप पर एक अध्ययन में इसके विभिन्न पक्षों का खुलासा हुआ है। इस अध्ययन में पाया गया है कि आजीविका के लिए बाहर अधिक वक्त गुजारने वाले व शारीरिक रूप से तेंदुओं के शिकार के दायरे में आने - [अनूठी पहल, विलुप्त होने के कगार पर पहुंचे खूंटवा का 10 सालों बाद आयोजन](https://climateeast.in/khuntwa-a-santal-tribe-tradition-which-was-on-the-verge-of-extinction-organized-after-10-years/) - खूंटवा सोहराय पर्व की एक अहम कड़ी है, जिसमें पशुओं के प्रति सम्मान प्रदर्शित किया जाता है दुमकाः आदिवासी जीवन पद्धति और त्योहार प्रकृति व मौलिक ज्ञान से जुड़े हैं। हर मान्यता की विशिष्टता और वैज्ञानिक महत्व है। इसी क्रम में इस साल सोहराय पर्व के दौरान झारखंड के दुमका जिले के दो गांवों में - [कर्नाटक की घटना के बाद पश्चिम बंगाल में प्रतिबंधित आरएल के उपयोग से मौत, मातृ व जन स्वास्थ्य पर सवाल](https://climateeast.in/maternal-death-in-midnapore-and-ban-on-paschim-banga-pharmaceuticals-ringer-lactate-in-west-bengal/) - कोलकाताः पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर में प्रतिबंधित रिंगर लैक्टेटेड आरएल का महिलाओं पर किये गये उपयोग के बाद राज्य में जन स्वास्थ्य व उसके बीच संचार व सूचनाओं के गैप को लेकर गंभीर सवाल उठ खड़ा हुआ है। मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज एंड ऑस्पिटल में कम से कम चार महिलाओं पर इसका उपयोग किया गया, जिसमें - [मनरेगा का काम शुरू करवाने की मांग को लेकर पश्चिम बंगाल भाजपा मुख्यालय का घेराव](https://climateeast.in/protest-in-front-of-west-bengal-bjp-office-demanding-starting-of-mgnrega/) - पश्चिम बंगाल भाजपा ने पहली बार माना है कि श्रमिकों की मांग जायज है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता व सांसद शमिक भट्टाचार्य ने कहा है कि वे इस मामले को बजट सत्र में उठायेंगे। कोलकाता : पश्चिम बंग खेत मजूर समिति (PBKMS), श्रमजीवी महिला समिति, पश्चिम बंग चा मजूर समिति (PBCMS), सेवा बांग्ला, भूखा मानुष - [बंगाल के मनरेगा मजदूरों के हितों के लिए अगले चरण के जनसंघर्ष की रूपरेखा तय](https://climateeast.in/west-bengal-mgnrega-workers-central-governments-actions-are-unjust-says-pbkms/) - पीबीसीएमएस व अन्य जन संगठनों की मांग, केंद्र रिलीज करे फंड, राज्य शुरू करे कर्मश्री योजना कोलकाता : पश्चिम बंग खेत मजूर समिति(PBCMS), श्रमजीवी महिला समिति, सेवा बांग्ला, भूखा मानुषेर अधिकार अभियान, पश्चिम बंग छात्र युवा संग्रामी मंच ने संयुक्त रूप से नौ जनवरी 2025 को कोलकाता प्रेस क्लब में एक प्रेस कान्फ्रेंस कर पश्चिम - [पश्चिम बंगाल में 93 वन्यजीव प्रजातियों का शिकार, इनमें सात आइयूसीएन रेड लिस्ट में : स्टडी](https://climateeast.in/ritualistic-wildlife-hunts-in-west-bengal/) - शिकार की जाने वाली 34 प्रजातियों की जनसंख्या घटते क्रम में, 25 वन्यजीव भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के शिड्यूल - 1 में हैं। क्लाइमेट ईस्ट डेस्क पश्चिम बंगाल के दो जिलों झारग्राम और पश्चिमी मेदिनीपुर में वन्य जीवों को लेकर किये गए एक अध्ययन में वन्य जीवों के शिकार में चौंकाने वाले खुलासे हुए - [प्रकृति पर्व है सोहराय, पशुओं के प्रति सम्मान व कृषि से जुड़ा है इसका नाता](https://climateeast.in/sohrai-is-a-festival-of-nature-it-is-related-to-respect-for-animals/) - बोध बोदरा सोहराय पर्व भारतीय राज्यांे झारखंड, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, ओडिशा और बिहार का फसल उत्सव पर्व है। इसे पशु उत्सव भी कहा जाता है। यह फसल कटाई के बाद मनाया जाता है और दिवाली त्योहार के दौरान की गोवर्धन पूजा के साथ मेल खाता है। संताल परगना में यह जनवरी माह में मनाया जाता - [सरकारी रिकार्ड में 120 साल पहले लखनऊ में थे 17,030 कुएं, अब हैं मात्र दो, भूजल दोहन का संकट गहरा](https://climateeast.in/groundwater-extraction-in-lucknow/) - लखनऊ समेत देश के कई बड़े शहर भूजल संकट के मुहाने पर खड़े हैं। केंद्रीय भूमिजल बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक दशक में लखनऊ शहर का भूजल स्तर अपने अब तक के निचले स्तर पर पहुंच चुका है। शहर की हर 10 में से 9 हाउसिंग सोसाइटी पीने के पानी के लिए भूजल - [चाय मजदूरों के लिए संघर्ष करने वाले आदिवासी कार्यकर्ता किरसेन सहित सात पर फर्जी मुकदमा](https://climateeast.in/fake-case-against-tribal-tea-union-leader-christian-kharia-in-jalpaiguri-district-of-west-bengal/) - चाय बागान प्रबंधक ने आदिवासी कार्यकर्ता किरसेन के खिलाफ जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया जिसका एफआइआर में उल्लेख तक नहीं है जलपाईगुड़ी: चाय मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले आदिवासी कार्यकर्ता किरसेन खड़िया के खिलाफ पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में स्थित किल्कोट टी एस्टेट ने हत्या के प्रयास का फर्जी मुकदमा दर्ज - [छत्तीसगढ़ में अपनी रिपोर्टिंग के लिए चर्चित पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या](https://climateeast.in/journalist-mukesh-chandrakar-murdered-in-chhattisgarh/) - रायपुर: छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित इलाके बस्तर से अपनी रिपोर्टिंग के लिए चर्चित 33 वर्षीय युवा पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या कर दी गई है। मुकेश चंद्राकर का शव सैप्टिक टैंक में मिला। मुकेश चंद्राकर एक जनवरी 2025 की रात से अपने घर से लापता थे और उनके भाई युकेश चंद्राकर लोगों से उनकी तलाश - [सूनामी से सीख और संकट से बचाव के भावी उपाय](https://climateeast.in/lessons-from-tsunami-and-future-measures-to-prevent-disaster-by-pushpendra-kumar/) - पुष्पेंद्र कुमार 2004 की सूनामी ने कई देशों को प्रभावित किया, जिससे यह वास्तव में वैश्विक आपदा बन गई। यहां हमें छह महत्वपूर्ण सबक पर विचार करना चाहिए। सबसे पहले, तटीय क्षेत्रों को प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करने में मैंग्रोव को महत्व दिया जाए। वे पानी की लहरों के खिलाफ महत्वपूर्ण बफर के रूप में काम - [पुनर्वास के अपने हक की लड़ाई में कोयला खनन से प्रभावित वृद्धा को जेल की सजा](https://climateeast.in/old-woman-affected-by-coal-mining-gets-jail-sentence-for-fighting-for-her-right-to-rehabilitation-in-bokar-district-of-jharkhand/) - राहुल सिंह बोकारो जिले के कारो गांव की कामिनी देवी अपने परिवार व कुछ रिश्तेदारों के साथ अपने खेत के अधिग्रहण से पहले उचित पुनर्वास और अन्य मांगों को लेकर कंपनी के काम का विरोध करने पहुंची थी, जिस पर उन पर सरकारी काम में बाधा डालने का मुकदमा दर्ज करा दिया गया। बोकारो: बोकारो - [बिरसा उद्यान में हैं 91 प्रजातियां संरक्षित, इस साल 18 प्रजातियों के बच्चों का हुआ जन्म](https://climateeast.in/91-species-are-protected-in-birsa-park-in-ranchi-jharkhand/) - बिरसा जैविक उद्यान में अन्य उद्यान से इस साल कई दूसरी प्रजातियों को लाया गया रांची : रांची के ओरमाझी स्थित बिरसा जैविक उद्यान एक पार्क से अधिक अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। बिरसा जैविक उद्यान में घूमते हुए कई बार लगता है कि यह एक उद्यान से बढकर अभ्यारण्य है। बिरसा पार्क - [आरटीआइ से हुआ खुलासा, गृह मंत्रालय के पास झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठिए की कोई जानकारी नहीं](https://climateeast.in/rti-revealed-that-home-ministry-has-no-information-about-bangladeshi-intruders-in-jharkhand/) - झारखंड जनाधिकार महासभा से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता सिराज दत्ता के आरटीआइ आवेदन से सच आया सामने रांची: झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधान मंत्री व गृह मंत्री समेत सभी प्रमुख भाजपा नेताओं ने लगातार बांग्लादेशी घुसपैठियों का हौवा खड़ा करके सांप्रदायिक नफरत फैलाई और ध्रुवीकरण का प्रयास किया। भाजपा ने राज्य में लाखों बांग्लादेशी घुसपैठिये - [केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना का विरोध क्यों कर रहे हैं पन्ना के आदिवासी?](https://climateeast.in/tribal-people-are-opposing-ken-betwa-river-linking-project/) - सतीश भारतीय मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में लोग केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना का विरोध कर रहे हैं। यह विरोध कई व्यापक प्रदर्शनों का रूप ले चुका है। ऐसे ही ‌परियोजना के विरोध में 16 दिसम्बर 2024 को एक बड़ा प्रदर्शन किया गया। इस विरोध प्रदर्शन में लोगों ने परियोजना की विस्थापन प्रक्रिया और प्रशासन के - [संताल परगना स्थापना दिवस पर संताल कटा पोखर में कार्यक्रम आयोजित, राजकीय आयोजन की मांग](https://climateeast.in/program-organized-at-santal-kata-pokhar-on-santal-pargana-foundation-day-demand-for-state-event/) - दुमका: संताल हूल अखड़ा के तत्वावधान में दुमका जिले के रानीश्वर प्रखंड के दिगुली गांव में स्थित संताल हूल के ऐतिहासिक शहीद स्थल संताल काटा पोखर में 169वां संताल परगना स्थापना दिवस 22 दिसंबर को हर्ष और उल्लास से मनाया गया। इस दिन की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता बहुत खास है, क्योंकि यह दिन भारतीय - [आदिवासी अस्मिता व राष्ट्रीय गौरव बोध के लिए जरूरी है संताल परगना स्थापना दिवस को व्यापक मान्यता मिलना](https://climateeast.in/santhal-pargana-foundation-day-important-for-tribal-identity-and-national-pride/) - संताल परगना की स्थापना देश के पहले संगठित विद्रोह 1855 के संताल हूल की परिणति है। इस संगठित विद्रोह के बाद अंग्रेज शासन ने संताल परगना प्रशासनिक क्षेत्र का गठन किया था। सच्चिदानंद सोरेन 22 दिसंबर का दिन झारखंड के संताल परगना क्षेत्र में संताल परगना स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस - [भारत में कृषि वानिकी को अपनाकर जैव विविधता संरक्षण व खाद्य सुरक्षा में सुधार संभव](https://climateeast.in/biodiversity-conservation-and-food-security-by-adopting-agroforestry-in-india/) - जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य को जोड़ने वाला IPBES का 'नेक्सस असेसमेंट': भारत के लिए एक सबक वर्तमान में दुनिया जिन संकटों का सामना कर रही है - जैसे जैव विविधता का नुकसान, पानी की कमी, भोजन की असुरक्षा, स्वास्थ्य पर बढ़ते खतरे और जलवायु परिवर्तन - यह सभी एक-दूसरे से गहराई से जुड़े - [आदिवासी व क्षेत्रीय चेतना का प्रतीक है संताल परगना स्थापना दिवस, लोगों की मांग सरकार घोषित करे राजकीय अवकाश](https://climateeast.in/santal-pargana-foundation-day-is-a-symbol-of-tribal-and-regional-consciousness/) - दुमका : इन दिनों के झारखंड के संताल परगना क्षेत्र में संताल परगना स्थापना दिवस आयोजन का उत्साह चरम पर है। हर वर्ष 22 दिसंबर को संताल परगना स्थापना दिवस मनाया जाता है। संताल परगना क्षेत्र संताल आदिवासाी, पहाड़िया आदिम जनजाति सहित विभिन्न प्रकार के आदिवासी समुदाय का घर है। इस आयोजन के जरिये संताल - [भारत में क्लीन एनर्जी लक्ष्यों के लिए सरकारी सहयोग ज़रूरी : रिपोर्ट](https://climateeast.in/government-support-necessary-for-indias-clean-energy-goals-study/) - साल 2030 तक भारत के क्लीन एनर्जी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सरकार को ऑफ़शोर विंड एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (ईवी) और ग्रीन हाइड्रोजन (जीएच2) जैसे क्षेत्रों में मदद बढ़ानी होगी। यह बात एक नई रिपोर्ट में सामने आई है। क्या कहती है रिपोर्ट? सेंटर फॉर स्टडी ऑफ साइंस, टेक्नॉलॉजी एंड पॉलिसी (सीएसटीईपी) और इंटरनेशनल - [बिहार में विस्थापित मुसहरों की एक बस्ती, जिसका नाम 'कुछ भी नहीं है'](https://climateeast.in/a-settlement-of-displaced-musahars-in-sheohar-district-of-bihar-and-discrimination/) - बिहार के उत्तर पश्चिम छोर पर बसे छोटे से जिले शिवहर में शहर से बामुश्किल तीन किमी की दूरी पर शिवहर-सीतामढ़ी मार्ग के किनारे बसा है रसीदपुर गांव। इस गांव के बगीचे के पीछे एक छोर पर करीब 20-25 मुसहर परिवार का कच्ची मिट्टी, टाटा, प्लास्टिक व पुराने कपड़ों से ढका घर है। इस बस्ती - [भारत के नेट ज़ीरो लक्ष्य पर कोयला आधारित स्टील उत्पादन का खतरा](https://climateeast.in/coal-based-steel-production-and-indias-net-zero-target/) - ग्लोबल एनर्जी मॉनिटर (जीओएम) की हालिया रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि भारत का कोयला आधारित स्टील उत्पादन देश के 2070 तक नेट ज़ीरो लक्ष्य को गंभीर खतरे में डाल सकता है। रिपोर्ट बताती है कि भारत में स्टील उत्पादन के लिए बड़े पैमाने पर कोयले का उपयोग न केवल भारी ग्रीनहाउस गैस एमिशन्स - [वनीकरण भारत में कर सकता है गरीबी मिटाने में मदद, 18 देशों में हुए इस अध्ययन पर गौर कीजिए](https://climateeast.in/afforestation-can-help-in-eradicating-poverty-in-india/) - ज़रा कल्पना कीजिए, महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त गाँव में एक युवा माँ बंजर ज़मीन पर मेहनत कर रही है, लेकिन अपने बच्चों का पेट भरने में असमर्थ है। अब उसी महिला को हरे-भरे पेड़ों की छांव में काम करते हुए देखिए, जहां वो लकड़ी, फल या बांस इकट्ठा कर रही है—ऐसे उत्पाद जो उसे आय, स्थिरता - [संतालों के गौरव का प्रमाण ऐतिहासिक संताल कटा पोखर की चहारदीवारी क्षतिग्रस्त](https://climateeast.in/santals-pride-boundary-wall-of-historical-santal-kata-pond-damaged-in-dumka-district-of-jharkhand/) - दुमका के रानीश्वर से गौतम चटर्जी की रिपोर्ट झारखंड के दुमका जिले के रानीश्वर प्रखंड के दिगुली स्थित ऐतिहासिक संताल कटा पोखर की चहारदीवारी क्षतिग्रस्त हो गई है। यह पोखर 1855 के संताल विद्रोह से जुड़ा है। पश्चिम बंगाल की सीमा से लगे दिगुली गांव में स्थित संताल काटा पोखर का सौंदर्यीकरण किया गया था - [नरेगा संघर्ष मोर्चा ने खारिज किया मनरेगा को लेकर सरकार का आवंटन बढ़ाने का दावा](https://climateeast.in/nrega-sangharsh-morcha-rejects-modi-government-claim-of-increasing-allocation-for-mgnrega/) - नई दिल्लीः नरेगा संघर्ष मोर्चा ने बुधवार (चार दिसंबर 2024) को एक प्रेस कान्फ्रेंस कर महात्मा गांधी रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के संबंध में सरकार के दावे को खारिज कर दिया। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज व कुछ राज्यों से आये मनरेगा कार्यकर्ताओं व श्रमिकों ने अपना पक्ष रखा। वक्ताओं ने कहा कि मनरेगा सूची से - [मछुआरा समुदाय के अधिकारों के लिए फ्रेजरगंज से फरक्का तक एक महीने लंबी गंगा यात्रा](https://climateeast.in/a-month-long-ganga-yatra-from-fraserganj-to-farakka-for-the-rights-of-fishermen-community/) - दक्षिण बंग मत्स्यजीवी फोरम की पहल पर गंगा नदी के अपस्ट्रीम में 500 किमी लंबी यात्रा का आयोजन किया गया हैजगह-जगह नदी के दोनों तटों पर रूककर स्थानीय समुदाय के साथ मीटिंग व संवाद भी किया जा रहा है पश्चिम बंगाल में मछुआरा समुदाय के अधिकारों की रक्षा, जलमार्ग, बंदरगाह व पर्यटन के नाम पर - [प्रकृति की अद्भुत रचना है ऑर्नेट फ्लाइंग स्नेक, इससे जुड़ी गलतफहमियों के न हों शिकार](https://climateeast.in/ornate-flying-snake-takshak-naag-misconceptions-vs-facts/) - रांची में हाल में एक सांप को रेस्क्यू किया गया जिसे तक्षक नाग बता कर मीडिया में खबरें छापी गई, ऐसे में आमलोगों के लिए यह जरूरी है कि वे इस प्रजाति से जुड़ी सच्चाइयों को जानें विवेकानंद कुमारसीनियर जू बॉयोलॉजिस्ट हाल ही में रांची के नामकुम से एक सांप को बचाया गया, जिसे स्थानीय - [मनरेगा: गांवों की खुशहाली की कुंजी रोजगार गारंटी कानून के अहम पड़ाव व चुनौतियां](https://climateeast.in/mgnrega-important-milestones-and-challenges-of-the-rural-employment-guarantee-act-by-james-herenj/) - जेम्स हेरंज राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कानून (नरेगा) जिसके नाम में बाद में महात्मा गांधी का नाम जोड़ कर महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) कर दिया गया, अपने दो दशक के सफर को लगभग पूरा करने वाला है। झारखंड जैसे राज्य में जहां पलायन बड़ी समस्या रही है और बड़ी आदिवासी आबादी है, गरीबी - [सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को डी लिट से किया गया सम्मानित](https://climateeast.in/medha-patkar-honored-with-d-litt/) - महात्मा गांधी मिशन विद्यापीठ, औरंगाबाद की ओर से प्रदान की गई उपाधि सामाजिक कार्यकर्ता व नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर‌ को उनके 45 सालों के लंबे जन संघर्ष व नर्मदा आंदोलन की लड़ाई के लिए डी लिट की उपाधि से सम्मानित किया गया। मेधा पाटकर ने सामाजिक आंदोलन की लड़ाई आदिवासी, किसान, मजदूर, - [बाकू में COP29: जलवायु संकट और अधूरे वादों की कहानी](https://climateeast.in/cop29-story-of-climate-crisis-and-unfulfilled-promises/) - निशान्त बाकू, अज़रबैजान में आयोजित 29वें संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP29) ने दुनिया भर के देशों को एक बार फिर जलवायु परिवर्तन के खिलाफ एकजुट होने का मौका दिया. लेकिन, इस सम्मेलन के अंत में जो हासिल हुआ, उसने यह साबित किया कि वादों और वास्तविकता के बीच की खाई आज भी बहुत गहरी - [कॉन्फ्रेंस ऑफ द पार्टीज से दूर झारखंड के छोटे शहरों में कान्फ्रेंस ऑफ पंचायत की कहानी](https://climateeast.in/climate-change-and-conference-of-panchayat-in-jharkhand/) - झारखंड के लोगों के लिए जलवायु परिवर्तन कोई अमूर्त चीज़ नहीं है। उन्होंने अपनी आंखों के सामने खेतों में दरार को बढ़ते देखा है, उन्होंने बलखाती नदियों और खेतों में अपनी फ़सलों को सूखते हुए देखा है। मुन्ना झा अंतरराष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP-29) के लिए दुनिया भर के देश अज़बैजान में इकट्ठा हैं और - [लालच और सत्ता के दुरुपयोग से संकट के कगार पर पहुंचे सुंदरबन के मछुआरे](https://climateeast.in/unchecked-avarice-and-abuse-of-power-push-sundarban-fishers-to-the-brink/) - मिलन दास सुंदरबन पूंजीवाद का शिकार हो गया है। पर्यटन कारोबार के बेलगाम होने से इस मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र की जैव विविधता खतरे में पड़ गई है। वन विभाग की तानाशाही से इस क्षेत्र के गरीब और हाशिए पर पड़े लोग को बेदखल किए जाने का खतरा है। आजीविका पर लगातार हमले हो रहे हैं। - [ब्राजील ने महत्वाकांक्षी जलवायु कार्ययोजना का किया एलान, क्या कर पाएगा पूरा?](https://climateeast.in/brazil-announces-ambitious-climate-action-plan/) - ब्राजील अगला जलवायु सम्मेलन का नेतृत्व करेगा, इससे पहले ब्राजील के उपराष्ट्रपति जेराल्डो अल्कमिन ने नई जलवायु कार्य योजना की घोषणा कर जलवायु प्रतिबद्धताओं को लेकर विश्व के अन्य देशों की जिम्मेवारियां बढा दी हैं। COP29 जलवायु सम्मेलन में ब्राजील के उपराष्ट्रपति जेराल्डो अल्कमिन ने देश की नई जलवायु योजना का ऐलान किया है। इस - [COP29 में CBAM पर मतभेद: विकासशील व विकसित देशों के बीच नीतियों पर टकराव](https://climateeast.in/cop29-differences-on-carbon-border-adjustment-mechanism-european-commission/) - विकासशील देशों का मानना है कि यूरोपीय संघ का प्रस्तावित कर सीबीएएम लगाने की नीति उनके लिए भारी आर्थिक बोझ बन सकती हैं, और यूरोप के साथ व्यापारिक गतिविधियों को अत्यधिक महंगा कर सकती हैं। बकू, अज़रबैजान में चल रहे COP29 के जलवायु सम्मेलन के पहले दिन का आरंभिक सत्र विवादों के चलते देरी से - [डोनाल्ड ट्रम्प की दोबारा नियुक्ति किस तरह डालेगी एनर्जी ट्रांज़िशन पर असर?](https://climateeast.in/how-will-donald-trumps-re-appointment-affect-the-energy-transition/) - अमेरिका के राष्ट्रपति पद पर डोनाल्ड जे. ट्रम्प की दोबारा जीत के बाद, जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय की "नेट जीरो इंडस्ट्रियल पॉलिसी लैब" ने खुलासा किया है कि अमेरिका के क्लीन एनर्जी से पीछे हटने से वैश्विक बाजारों में करीब $80 बिलियन के नए अवसर पैदा हो सकते हैं, जबकि अमेरिकी कंपनियों को लगभग $50 बिलियन - [बिहार के एक प्रवासी श्रमिक परिवार की कहानी, शिवहर और राजकोट के बीच आना-जाना](https://climateeast.in/story-of-a-migrant-worker-family-from-bihar-poorest-district-sheohar/) - शिवहर से राहुल सिंह की रिपोर्ट सियाराम सहनी और उनकी पत्नी शैल देवी ने अपने जीवन का लंबा वक्त गुजरात में गुजारा और अब उन्होंने बिहार के शिवहर जिले के अपने गांव धरमपुर को तीन साल से स्थायी ठिकाना बना लिया है, हालांकि गुजरात के राजकोट से उनका रिश्ता नहीं टूटा है। सियाराम व शैल - [राजस्थान, गुजरात में एनर्जी ट्रांज़िशन में रफ्तार के लिए नई नीतियों जरूरी : IEEFA रिपोर्ट](https://climateeast.in/new-policies-necessary-to-speed-up-energy-transition-in-rajasthan-gujarat-ieefa-report/) - रिन्यूबल एनर्जी में अग्रणी माने जाने वाले राज्य राजस्थान और गुजरात को अपने एनर्जी ट्रांज़िशन की रफ्तार बनाए रखने और उसे मजबूत करने के लिए नीतिगत सुधारों की जरूरत है। इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंशियल एनालिसिस (IEEFA) की एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्रीन टैरिफ, ग्रीन बजटिंग और विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर फंड - [पशुओं के सम्मान और जीवन में उनके महत्व को बताता है सोहराय पर्व : सोमाई किस्कू](https://climateeast.in/sohrai-festival-tells-about-the-respect-of-animals-and-their-importance-in-life-somai-kisku/) - पशुओं के ससोहराय पर्व में पशुओं की पूजा की जाती है, उन्हें आराम करने का मौका दिया जाता है और नाच-गान किया जाता है। यह पर्व पशुओं के प्रति सम्मान को दर्शाता है, जिनके माध्यम से कृषि आधारित सभ्यता का विकास हो सका। आदिवासी समाज का परंपरागत ज्ञान, मान्यताएं व पद्धतियां पर्यावरण से जुड़ी कई - [कोशी: दो तटबंधों के भीतर हम डूब रहे हैं और सरकार को सिर्फ तटबंध की फिक्र है](https://climateeast.in/kosi-flood-victims-we-are-drowning-within-two-embankments-and-the-government-is-only-concerned-about-the-embankment/) - राजेश कुमार मंडल हम कोशी नदी के बीच के निवासी हैं। हम तीसरी पीढ़ी हैं जो दो तटबंधों के बीच अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं। हमारे दादा ने और फिर हमारे पिता ने ऐसी जिंदगी जी और अब हम तटबंधों के बीच जिंदगी गुजार रहे हैं। हमारे बच्चे भी इसके बीच रहेंगे और न पता - [चाय मजदूर नेता सुमित दीवान व प्रसिद्ध राय की गिरफ्तारी का पीबीसीएमएस ने किया विरोध, रिहाई की मांग](https://climateeast.in/pbcms-protested-against-the-arrest-of-tea-union-leader-sumit-dewan-and-prasidha-roy-in-north-bengal/) - अलीपुरद्वार: पश्चिम बंग चा मजूर समिति पीबीसीएमएस ने उत्तर बंगाल के चाय बागान श्रमिकों के दो साहसी ट्रेड यूनियन नेताओं को सुमित दीवान और प्रसिद्ध राय की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की है। ये दोनों गैर राजनीतिक कार्यकर्ता हैं और हिल प्लांटेशन कर्मचारी संघ से संबद्ध हैं। पीबीसीएमएस ने अपने बयान में कहा है कि - [भारत को जलवायु परिवर्तन से 141 अरब डॉलर का संभावित नुकसान : रिपोर्ट](https://climateeast.in/india-may-losses-of-141-billion-dollar-from-climate-change-the-lancet-countdown-report/) - एक नई रिपोर्ट में यह उजागर किया गया है कि जलवायु परिवर्तन भारत में गंभीर स्वास्थ्य और आर्थिक संकट का कारण बनता जा रहा है। द लैंसेट काउंटडाउन 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की विशाल आबादी गर्मी, सूखा, बाढ़ और वायु प्रदूषण जैसी जलवायु-जनित समस्याओं का सामना कर रही है। गर्मी का बढ़ता प्रभाव - [मौजूदा जलवायु प्रतिज्ञाएँ पर्याप्त नहीं, सदी के अंत तक तापमान में 3.1°C की वृद्धि संभव : संयुक्त राष्ट्र](https://climateeast.in/unep-emissions-gap-report-2024/) - संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की नई रिपोर्ट एक गंभीर चेतावनी देती है: 1.5°C के जलवायु लक्ष्य को प्राप्त करना अभी भी तकनीकी रूप से संभव है, लेकिन इसके लिए G20 देशों को एक ऐतिहासिक कदम उठाकर 2030 तक ग्रीनहाउस गैसों के एमिशन को आधा करना होगा। "नो मोर हॉट एयर… प्लीज़!" शीर्षक वाली यह - [आइयूसीएन का पहला ग्लोबल ट्री असेसमेंट प्रकाशित, 38% पेड़ों के विलुप्त होने का खतरा](https://climateeast.in/more-than-one-in-three-tree-species-worldwide-faces-extinction-iucn-red-list/) - पेड़ों की 47,282 प्रजातियों में कम से कम 16, 425 प्रजातियां विलुप्त होने के खतरे में हैं। आयूसीएन ने अपनी रेड लिस्ट की 60वीं वर्षगांठ के मौके पर पहली बार अपने मूल्यांकन में अधिकांश पेड़ों को शामिल किया है। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कन्जर्वेसन ऑफ नेचर (आइयूसीएन) ने पहली बार ग्लोबल ट्री असेसमेंट यानी वैश्विक वृक्ष - [फोकस के बाहर कोशी दियारा का जनजीवन, समस्या सुलझाने के लिए संवेदनशीलता जरूरी](https://climateeast.in/kosi-river-flood-and-its-impact-on-common-life-by-rahul-yaduka/) - राहुल यादुका तटबंध सिर्फ नदियों को नहीं बांधते। तटबंध केवल स्पेस को खण्डित नहीं करते। तटबंध वास्तव में समय और स्थान को स्थिर कर देते हैं। तटबंध के अन्दर जो कुछ भी रह जाता है, वह अदृश्य और अयोग्य हो जाता है। वहाँ समय रुक जाता है। तटबंधों के भीतर रहने वाले लोगों के जीवन - [बंगाल के चाय बागान मजदूर नियोक्ताओं, दलालों व ईपीएफओ के कुचक्र के हैं शिकार](https://climateeast.in/tea-garden-workers-are-victims-of-the-conspiracy-of-brokers-and-employers-in-north-bengal/) - चाय बागान मजदूरों के एक प्रतिनिधिमंडल ने इपीएफओ अधिकारियों ने मुलाकात कर अपनी शिकायतें रखी है और उसके निबटारे की मांग की हैमजदूर संगठन पश्चिम बंग चा मजूर समिति के अनुसार, अबतक 21 मजदूरों की मौत भूख व इलाज के बिना हुई है सिलीगुड़ीः उत्तर बंगाल के चाय बागानों में भारी अनियमितता व गड़बड़ियां हैं। - [झारखंड में गरीबों का केवाईसी टॉर्चर, ज्यां द्रेज की टीम के जमीनी सर्वे में 60% खाते फ्रीज मिले](https://climateeast.in/kyc-torture-of-poor-in-jharkhand-ground-survey-by-jean-dreze-team-found-60-accounts-frozen-in-rural-area/) - झारखंड में केवाईसी महामारी ने गरीबों को उनके ही पैसे से वंचित कर दिया है : नरेगा वॉच रांचीः झारखंड में कई लोग अपने बैंक खातों से पैसे नहीं निकाल पा रहे हैं, क्योंकि उनके खाते तब तक फ्रीज कर दिए गए हैं, जब तक वे केवाईसी की औपचारिकताएं पूरी नहीं कर लेते। हाल ही - [खनिजों पर टैक्स वसूल सकेंगे राज्य, सुप्रीम कोर्ट के फैसले और झारखंड के विधेयक से उद्योग चिंतित](https://climateeast.in/states-have-the-right-to-collect-tax-on-minerals/) - विशाल कुमार जैन सुप्रीम कोर्ट ने खनिजों पर पिछली तारीख से टैक्स लगाने का अधिकार राज्यों को दे दिया है। कंपनियों को 12 साल में किस्तों में बकाया का भुगतान करना होगा। बकाये टैक्स पर राज्य ब्याज या पेनाल्टी नहीं वसूल सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में राज्यों को खनिज भूमि पर टैक्स लगाने - [फाइटोप्लैंक्टन क्या हैं और इसके बारे हमें जानना क्यों है जरूरी?](https://climateeast.in/phytoplankton-play-a-critical-role-in-marine-ecosystems/) - धरती पर ऑक्सीजन-कार्बन डाइआक्साइड का संतुलन बनाए रखने के लिए ज़िम्मेदार फाइटोप्लैंक्टन की संख्या दिनों-दिन घटती जा रही है, अगर ऐसा ही रहा तो हमारा भविष्य कैसा दिखेगा? आशिका शिवांगी सिंह मानव जीवन, ऑक्सीजन के लिए पेड़ों पर आश्रित है, इसे लेकर तो बहुत बात होती है लेकिन यह सिर्फ आधा सच है। हम पेड़-पौधों - [चक्रवात दाना को लेकर IMD ने क्या कहा है, 24 व 25 अक्टूबर क्या सावधानियां बरतनी होंगी?](https://climateeast.in/cyclone-dana-imd-advisory/) - तेज समुद्री लहरों की वजह से ओडिशा के चार व पश्चिम बंगाल के दो दिलों के निचले इलाके में बाढ़ आने की संभावना है। 25 अक्टूबर की शाम के बाद चक्रवात कमजोर हो जाएगा, इस दौरान मछुआरों को मछली न पकड़ने की चेतावनी दी गई है। क्लाइमेट ईस्ट डेस्क बंगाल की खाड़ी में तेज चक्रवाती - [बदलती जलवायु ने उत्तराखंड की बागवानी का बदला स्वरूप, फल उत्पादन में गिरावट](https://climateeast.in/climate-change-impact-on-the-horticulture-in-uttarakhand/) - क्लाइमेट ट्रेंड्स नामक संस्था की एक ताज़ा रिपोर्ट की मानें तो जलवायु परिवर्तन ने उत्तराखंड की बागवानी, खासकर उष्णकटिबंधीय फलों की खेती पर गहरा असर डाला है। यह हिमालयी राज्य, जो अपनी विविध जलवायु परिस्थितियों के लिए जाना जाता है, पिछले सात वर्षों में फलों की पैदावार में भारी गिरावट का सामना कर रहा है। इसके पीछे मुख्य कारण - [हमारे यहां अच्छे से बारिश नहीं होने से इस बार भी खेती खराब हो गई](https://climateeast.in/paddy-cultivation-suffered-due-to-insufficient-rain-in-east-singhbhum-of-jharkhand/) - झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के एक गांव की कहानी जहां अच्छी बारिश नहीं होने की मार आदिवासी किसान झेलने को मजबूर हैं। रतनी बास्के हमारा गांव झारिया एक छोटा-सा गांव है जो झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका - 1 प्रखंड की भाटीन पंचायत में स्थित है। हमारे गांव में अधिक से अधिकतर - [सोनम वांगचुक के अनशन के 15 दिन पूरे, देश भर से लोगों का मिल रहा समर्थन](https://climateeast.in/sonam-wangchuk-climate-fast-ladakh/) - नई दिल्लीः पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक व उनके साथियों ने रविवार, 20 अक्टूबर को अपने अनशन का 15 दिन पूरा कर लिया। सोनम ने इस मौके पर अपना एक वीडियो संदेश सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह उपवास ऐसा है जिसमें हम खाना-पीना ही नहीं छोड़ते, बल्कि पानी कम, बिजली - [हसदेव में कोयला खनन को लेकर टकराव, परसा कोल ब्लॉक के लिए काटे जाएंगे 95 हजार पेड़](https://climateeast.in/hasdeo-forest-and-coal-mining-about-10-lakh-trees-will-be-cut-for-three-coal-projects/) - 2009 के वन विभाग के सर्वे के आधार पर परसा कोल ब्लॉक के लिए 95 हजार पेड़ों को काटना होगा, 840 हेक्टेयर भूमि के घने जंगल को नुकसान होगा और 700 लोग विस्थापित होंगे। छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के नेता आलोक शुक्ला ने कहा है तीन अलग कोल परियोजनाओं के लिए नौ से दस लाख पेड़ - [क्या आप दुर्लभ प्रजाति येलो मॉनिटर के बारे में जानते हैं?](https://climateeast.in/yellow-monitor-lizard-from-south-asia/) - क्लाइमेट ईस्ट डेस्क येलो मॉनिटर मुख्य रूप से दक्षिण एशिया में पाया जाता है, लेकिन इसका सबसे बड़ा केंद्र पश्चिम बंगाल है। येलो मॉनिटर (Varanus flavescens) छिपकिलियों या सरीसृप वर्ग की एक अहम प्रजाति है जो दक्षिण एशिया में और खासतौर पर पूर्वी भारत में पाई जाती है। पूर्वी भारत में भी पश्चिम बंगाल इसका - [मानसून 2024ः रिकार्ड तोड़ बारिश व आसामान्य तापमान ने जलवायु खतरों के प्रति किया आगाह](https://climateeast.in/monsoon-2024-heavy-rains-and-abnormal-temperatures-warn-against-climate-change/) - बढते तापमान से नींद की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और खासकर बुजुर्गों और कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों के लिए यह स्थिति और खतरनाक बन रही है। इस साल का मानसून भारत के लिए कई रिकॉर्ड तोड़ बारिश और असामान्य रूप से बढ़ते तापमान के साथ समाप्त हुआ। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव साफ़ तौर पर - [कोसी तटबंध के भीतर के बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत कार्य की कोसी नवनिर्माण मंच ने उठाई मांग](https://climateeast.in/kosi-navnirman-manch-raised-demand-for-relief-work-for-inside-kosi-embankment-area/) - मंच ने कहा है कि बाढ का समाधान कोसी-मेची परियोजना या डगमारा में बैराज बना देने में नहीं है। सुपौल : कोसी नव निर्माण मंच (कोएनएम) ने सुपौल के डीएम को 17 सूत्रीय मांग पत्र भेजते हुए तटबंध के भीतर कोसी की भयावह बाढ़ के पीड़ितों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया एसओपी व तय मानदंड - [पश्चिमी भारत में आदिवासी आंदोलनों के अगुवा थे कालूराम काका](https://climateeast.in/kaluram-dhodre-leader-of-tribal-movements-in-western-india/) - आदिवासी एकता परिषद के संस्थापक कालूराम धोडरे का जन्म महाराष्ट्र के पालघर में हुआ था और उन्हें सब प्यार से कालूराम काका कहते थे राहुल बनर्जी पश्चिमी भारत में न्याय के लिए भील आदिवासियों के जन आंदोलन के अगुआ रहे और भूमि सेना और आदिवासी एकता परिषद के संस्थापक कालूराम धोडरे का 10 अक्टूबर 2024 - [कार्बन टैक्स बनाम व्यापार: क्या भारत जलवायु प्रतिबद्धताओं और व्यापारिक हितों को संतुलित कर सकता है?](https://climateeast.in/carbon-tax-vs-trade-can-india-balance-climate-commitments-and-business-interests/) - निशान्त हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूरोपीय संघ (EU) के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) को "एकतरफा और अनुचित" करार दिया। उनका कहना है कि यह नियम भारतीय उद्योगों के लिए हानिकारक है और इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में असंतुलन पैदा होगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि CBAM जैसे मुद्दे भारत और - [कोसी की बाढ़ के खतरे से शहरी इलाके भी अछूते नहीं, नीति पर भी सवाल](https://climateeast.in/urban-areas-are-not-untouched-by-the-danger-of-kosi-floods/) - सुपौल से राहुल सिंह सुपौल शहर से करीब चार किमी की दूरी पर कोसी के किनारे बसा है मुंगरार गांव। इस गांव की मनीषा देवी के घर का चूल्हा सितंबर के आखिरी दिनों में आई बाढ़ के बाद चार दिनों तक बिल्कुल नहीं जला। पांचवे दिन मनीषा और उनकी छोटी गोतनी सरिता कुमारी ने अपने - [ग्राउंड रिपोर्ट: जब स्कूल नहीं बचा, तो बाढ़ के सामने हमारी क्या बिसात](https://climateeast.in/new-ground-report-bihar-flood/) - राहुल सिंह भूबोल/तेतरी/खैसा(दरभंगा): दरभंगा जिले के उमेश सदा का घर कोसी के पश्चिमी तटबंध के ठीक उस हिस्से के सामने कुछ सौ मीटर की दूरी पर था, जहां वह 29 सितंबर 2024 की रात करीब 12 बजे टूट गया। उमेश का परिवार अब इस इलाके के उन सैकड़ों परिवारों में एक है जो तटबंध पर - [बिहार नदी संवाद का घोषणा पत्र](https://climateeast.in/bihar-river-dialogue-manifesto/) - नोट - पटना के ठाकुर प्रसाद कम्युनिटी हॉल में 28 एवं 29 सितंबर 2024 को बिहार नदी संवाद का आयोजन किया गया। यह आयोजन कोसी नवनिर्माण मंच व विभिन्न नदी बचाओ संगठनों एवं सामाजिक संगठनों की साझा पहल पर किया गया। इस नदी संवाद में कई नदी अधिकार कार्यकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार आदि शामिल हुए। - [नेपाल में अतिवृष्टि से अबतक 192 लोगों की मौत, बिहार में तीन नदियों पर छह तटबंध टूटे](https://climateeast.in/192-people-have-died-due-to-heavy-rains-in-nepal-flood-threat-in-bihar/) - क्लाइमेट ईस्ट डेस्क नेपाल में 22 साल बाद इतनी रिकार्ड बारिश, 23 हाइवे क्षतिग्रस्त हुए22 हाइड्रो इलेक्ट्रिक पॉवर प्लांट व नौ ट्रांसमिशन लाइन क्षतिग्रस्तनेपाल से बिहार आने वाली नदियों में जलस्तर बढने से बढा संकट नेपाल में पिछले दिनों हुई भारी बारिश की वजह से 192 लोगों की मौत हो गई और करीब 194 लोग - [तकनीक की वजह से काम और समय पर मजदूरी से दूर हो रहे हैं मनरेगा मजदूर : जन संगठन](https://climateeast.in/mgnrega-workers-are-getting-away-from-work-and-timely-wages-due-to-technology/) - झारखंड सहित कई राज्यों के मनरेगा श्रमिकों ने रांची में दिया धरना, केंद्र व राज्य सरकार के समक्ष रखी मांग रांची: मनरेगा के 200 मज़दूर ने 28 सितंबर 2024, दिन शनिवार को रांची के राजभवन के समक्ष विशाल धरना दिया और मोदी सरकार द्वारा उनके अधिकारों पर लगातार हमलों और नरेगा को व्यवस्थित रूप से - [भारी बारिश में नागीसुरी व किलकॉट की महिला चाय श्रमिकों का आंदोलन](https://climateeast.in/women-tea-workers-of-nagisuri-and-kilkot-movement-for-bonus/) - सिलीगुड़ीः चाय बागान मजदूरों पर हमला जारी है। पीएफ और ग्रेच्युटी से वंचित करने के बाद अब उनके बोनस पर भी हमला हो रहा है। इसके विरोध में महिला चाय मजदूर भारी बारिश के बावजूद 8 किलोमीटर पैदल चलकर 28 सितंबर को चालसा प्रखंड कार्यालय पहुंचीं। कल किलकोट के कामगारों ने स्थानीय सड़क को बंद - [काठमांडू में 322 मिमी बारिश, नेपाल में 38 की मौत, बिहार में बाढ़ का खतरा](https://climateeast.in/flood-threat-in-bihar-after-heavy-rains-in-nepal/) - नेपाल में हो रही भारी बारिश की वजह से सप्तकोसी नदी का जल स्तर काफी बढ गया है। सप्तकोसी का जलस्तर खतरे के निशान पर पहुंचने के बाद कोसी बैराज के सभी 56 स्लुइस गेट खोल दिये गये हैं। नेपाल के प्रकाशन द हिमालयन टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में नेपाल के सुनसरी जिला पुलिस के - [मादा लकड़ग्घा को किया रेस्क्यू, धान खेत का कीटनाशक वाला पानी पीने से बीमार होने की आशंका](https://climateeast.in/female-hyena-rescued-ill-after-drinking-pesticide-laden-water-from-paddy-field-in-chhattisgarh/) - 255 सितंबर को छत्तीसगढ के सूरजपुर वन प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले प्रतापपुर वन क्षेत्र में एक धान के खेत से एक बीमार लकड़बग्घा (striped hyena) को रेस्क्यू किया गया। वह मादा लकड़बग्घा है और बीमार व सुस्त अवस्था में खेत में पड़ी थी। स्थानीय वन कर्मी राहुल सिंह ने सबसे पहले इसे देखा और इसकी - [बंगाल में मनरेगा के बंद होने से भूख, कुपोषण, पलायन, गरीबी में वृद्धि, अन्य राज्यों के मजदूरों ने उठाई आवाज](https://climateeast.in/workers-from-other-states-raised-voice-for-west-bengal-mgnrega-worker/) - पश्चिम बंगाल में मनरेगा को शुरू करवाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को अबतक 4700 मजूदरों भेज चुके हैं पोस्टकार्ड पश्चिम बंगाल में पिछले पौने तीन साल से महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून यानी मनरेगा के तहत काम बंद है। इसको लेकर केंद्र सरकार के समक्ष नरेगा संघर्ष मोर्चा सहित विभिन्न मजदूर संगठनों ने कई - [कार्यस्थल पर लैंगिक हिंसा की सुनवाई के लिए मंच बनाने की नागरिक संगठनों की साझा पहल](https://climateeast.in/public-hearing-on-gender-based-violence-at-the-workplace-in-west-bengal/) - कोलकाता : पश्चिम बंगाल में आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ बलात्कार व हत्या की घटना के बाद स्वतंत्र समूहों, नागरिक संगठनों व सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले लोगों ने लैंगिक हिंसा की शिकायतों पर सुनवाई के लिए एक साझा मंच स्थापित करने की पहल की है। इस मंच के - [इस साल मानसून के महीनों में भी इतनी तीखी गर्मी क्यों महसूस हुई, आंकड़ों से समझिए](https://climateeast.in/why-intense-heat-felt-even-during-the-monsoon-months-this-year/) - क्लाइमेट ईस्ट डेस्क इस साल मानसून के महीने के कई दिन बहुत तेज धूप व गर्मी वाले रहे। अबतक मानसून के महीनों में सितंबर की महीना सबसे कष्टदायक बीता है और मानसून अपने आखिरी दौर में भी है। आखिर क्या वजह रही कि मानसून इतना गर्म गुजरा? वैश्विक तापमान पर रिसर्च करने वाली संस्था क्लाइमेट - [सीबीएएम वर्ष 2026 में होगा लागू, यूरोप के साथ भारत के कारोबार पर पड़ेगा असर](https://climateeast.in/what-is-carbon-border-adjustment-mechanism/) - सीबीएएम सीमेंट, लोहा, एल्युमीनियम और स्टील जैसे ज्‍यादा कार्बन उत्‍सर्जन से बनने वाले सामानों पर लागू होगा यूरोपीय संघ (ईयू) के कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (सीबीएएम) वैश्विक व्यापार को नया आकार दे रहा है और दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं, खास तौर से विकासशील देशों के लिए नई जटिलताएँ भी पेश कर रहा है। अन्य जी7 - [भारत के दो करोड़ से अधिक लोग इस साल 60 दिन खतरनाक गर्मी में रहे : रिपोर्ट](https://climateeast.in/20-million-people-of-india-in-extreme-heat-this-year-report/) - 72 देशों में इस साल गर्मियों का तापमान 1970 के बाद का सबसे अधिक,.ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण भीषण गर्मी से जूझ रहे दो अरब लोग एक नई रिपोर्ट के अनुसार, जून से अगस्त 2024 के बीच, दुनिया भर में लगभग 2 अरब लोग (वैश्विक जनसंख्या का करीब 25%) ऐसे तापमान का सामना कर रहे थे, - [ऑपरेशन भेड़िया में खामियां, वन्यजीवों के आवास विखंडन की बात गौण](https://climateeast.in/operation-wolf-in-uttar-pradesh-and-habitat-fragmentation-of-wildlife/) - उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में जंगली जानवरों के हमले के बाद कई लोगों की मौत हो गई। लोग और वन विभाग का मानना है कि ये हमले भेड़ियों ने किए हैं। वन विभाग ने ड्रोन फुटेज और लोगों के बयानों के आधार माना कि ये हमले भेड़ियों के हैं। इसके बाद कई भेड़ियों को - [जब हम छोटे थे तो बहुत तेज बरखा होती थी, तब खेती भी अच्छी थी](https://climateeast.in/uncertainty-of-rains-worries-farmers-of-lohardaga-in-jharkhand/) - लोहरदगा जिले के बगरू पहाड़ के आसपास के ग्रामीण अच्छी बारिश नहीं होने से चिंतित है, जबकि इस बॉक्साइट खनन क्षेत्र में जंगली पशुओं के ग्रामीण क्षेत्र में प्रवेश करने व फसलों को नुकसान पहुंचाने के मामले बढ रहे हैं। लोहरदगा जिले से राहुल सिंह की रिपोर्ट झारखंड की राजधानी रांची से सटे लोहरदगा जिले - [नर्मदा का संकट: 136 मीटर पहुंचा जलस्तर, कसरावद में जल सत्याग्रह](https://climateeast.in/narmada-river-sardar-sarovar-dam-water-level-reached-136-meters/) - नर्मदा बचाओ आंदोलन ने यह चिंता जतायी है कि जलस्तर बढने से हजारों परिवार डूब के कगार पर खड़े हो गए हैं और कानून कानून एवं न्यायिक आदेेशों का उल्लंघन किया गया है। ऐसे में बिना पुनर्वास डूब नामंजूर है। इसके विरोध में कसरावद गांव में जल सत्याग्रह का शनिवार को आयोजन किया गया है। - [बिहार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में किस तरह आगे बढ़ रहा है और उसकी चुनौतियां क्या हैं?](https://climateeast.in/how-is-bihar-moving-towards-electric-mobility-and-what-are-challenges/) - बिहार में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में उच्च पूंजी लागत, सीमित चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर और बैटरी की उपलब्धता जैसी बाधाएं हैं, लेकिन इलेक्ट्रिक वाहन नीति के ज़रिये राज्य सरकार इससे निबटने के लिए प्रयास कर रही है। बिहार से राहुल सिंह की रिपोर्ट उमाशंकर साह बिहार के शिवहर जिले के निवासी हैं और इलेक्ट्रिक ऑटो चलाकर अपनी आजीविका - [हमारे पास नाव के सिवा कुछ नहीं है](https://climateeast.in/cyclone-and-erosion-in-sundarban-fishermen-livelihood-crisis/) - सुंदरवन, दक्षिण चौबीस परगना जिला राहुल सिंह की रिपोर्ट सुंदरवन क्षेत्र में बार-बार आने वाले चक्रवात व कटाव ने छोटे मछुआरों को अधिक परेशान किया है। 21 साल के मछुआरा शुभंकर जाना के लिए जिंदगी बहुत मुश्किल है। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में पड़ने वाले सुंदरवन डेल्टा क्षेत्र के एक गांव के - [पश्चिम बंगाल सरकार महिला चाय मजदूरों की अनदेखी कर रही है: पश्चिम बंग चा मजूर समिति](https://climateeast.in/west-bengal-government-is-ignoring-women-tea-workers-paschim-bang-cha-mazoor-samity/) - कोलकाता: पश्चिम बंग चा मजूर समिति ने एक प्रेस बयान जारी कर कहा है पश्चिम बंगाल की सरकार महिलाओं के मुद्दे पर लोकलुभावन दावों और घोषणाओं के बीच राज्य की महिला चाय मजदूरों के हितों की उपेक्षा कर रही है। 28 अगस्त 2024 को जारी एक अधिसूचना के अनुसार, पश्चिम बंगाल सरकार ने चाय मजदूरों - [बाढ़ से 15,000 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान होने का अनुमान: त्रिपुरा सीएम](https://climateeast.in/loss-due-to-floods-estimated-to-be-more-than-rs-15000-crore-intripura/) - Loss due to floods estimated to be more than Rs 15,000 crore inTripura - [चीनी सोलर पैनल आयात कम करने के मामले में भारत सबसे आगे](https://climateeast.in/india-is-at-the-forefront-in-reducing-chinese-solar-panel-imports/) - ऊर्जा थिंक टैंक एम्बर के हालिया विश्लेषण में, भारत चीन से सोलर पैनलों के आयात को उल्लेखनीय रूप से कम करने वाला एकमात्र देश बनकर उभरा है. यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब भारत अपनी घरेलू सोलर निर्माण क्षमताओं को बढ़ाने पर सक्रिय रूप से ध्यान केंद्रित कर रहा है. इस विश्लेषण के अनुसार, - [वायु गुणवत्ता के मामले में आइज़वाल मालामाल, दिल्ली का वही बुरा हाल ](https://climateeast.in/aizawl-is-rich-in-terms-of-air-quality-delhi-is-in-the-same-bad-condition/) - वायु प्रदूषण के मामले में देश के दस सबसे ज़्यादा प्रदूषित शहरों की लिस्ट पर नज़र डालें तो लगता है दिल्ली की सर्दी उतनी घातक नहीं जितना दिल्ली का धुआँ है। दरअसल वायु गुणवत्ता पर जारी एक ताज़ा रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले वर्ष के 10 सबसे प्रदूषित शहरों की लिस्ट में अधिकांश दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र - [गर्मी से होने वाली मौतों में भीषण इज़ाफ़ा होने की संभावना: द लैंसेट काउंटडाउन](https://climateeast.in/heat-related-deaths-likely-to-rise-drastically-the-lancet-countdown/) - विश्व विख्यात मेडिकल जर्नल द लैंसेट की एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इस सदी के मध्य तक वैश्विक स्तर पर गर्मी से संबंधित मौतों में 4.7 गुना इज़ाफ़ा होने की संभावना है।द लैंसेट काउंटडाउन ऑन हेल्थ एंड क्लाइमेट चेंज की 8वीं वार्षिक रिपोर्ट में, सीधे तौर पर कहा गया है कि - [नेट ज़ीरो के लिए कार्बन कैप्चर और स्टोरेज पर ज़रूरत से ज़्यादा निर्भरता पड़ेगी महंगी](https://climateeast.in/over-reliance-on-carbon-capture-and-storage-for-net-zero-will-prove-costly/) - ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के स्मिथ स्कूल ऑफ एंटरप्राइज एंड द एनवायरनमेंट की एक हालिया रिपोर्ट से पता चलता है कि 2050 के आसपास नेट ज़ीरो एमिशन हासिल करने के लिए कार्बन कैप्चर एंड स्टोरेज (सीसीएस) पर बहुत अधिक निर्भर रहने की महत्वपूर्ण आर्थिक लागत हो सकती है। अध्ययन से पता चलता है कि नेट ज़ीरो के - [गर्मी से बिहार में तबाही की वजह क्या है?](https://climateeast.in/heat-wave-bihar/) - बिहार में गर्मी से निपटने की योजना होने और कई स्वास्थ्य केंद्रों में सुधार के बावजूद प्रचंड गर्मी ने दर्जनों लोगों की जान ले ली, क्योंकि जिम्मेदार अधिकारी चुनाव संबंधी कार्यों में व्यस्त थे। मोहम्मद इमरान खान 31 मई, 2024 को जारी एक संक्षिप्त प्रेस रिलीज़ में भारतीय राज्य बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग (डीएमडी) ने बताया कि - [जलवायु संकट से 41 अरब डॉलर का नुकसान](https://climateeast.in/climate-crisis-impact-on-global-economy/) - अंतरराष्ट्रीय विकास संस्था क्रिश्चियन एड की एक ताजा रिपोर्ट ने जलवायु संकट की विभीषिका को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले छह महीनों में ही चरम मौसमी घटनाओं ने दुनियाभर में 41 अरब डॉलर से अधिक का आर्थिक नुकसान पहुंचाया है, साथ ही 2,500 से ज्यादा लोगों की जान ले ली है। ये आंकड़े ## Pages - [होम](https://climateeast.in/) - Climate East covers stories on climate change, energy, water, wildlife, and rural India. ground reports, and updates on environmental issues shaping our future. - [गर्म होते दिन से प्रभावित हो रही है कॉफी की फसल, आपूर्ति पर दबाव का खतरा](https://climateeast.in/गर्म-होते-दिन-से-प्रभावित/) - 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक का तापमान काफी की फसल के लिए प्रतिकूल माना जाता है। 25 प्रमुख कॉफी उत्पादक देश, जो वैश्विक उत्पादन का 97 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करते हैं, जलवायु परिवर्तन के कारण कॉफी की फसल के लिए अधिक हानिकारक गर्मी का सामना कर रहे हैं। नई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन - [Copyright & Terms of Use](https://climateeast.in/copyright-terms-of-use/) - हमारी समाचार वेबसाइट पर प्रकाशित मौलिक सामग्री, तसवीर व वीडियो का कॉपीराइट हमारे पास सुरक्षित है। हमारी वेबसाइट का संदर्भ व हाइपर लिंक का प्रयोग कर उसे पुनः प्रकाशित किया जा सकता है। तसवीरें भी हमारी क्रेडिट लाइन के साथ प्रकाशित की जा सकती है। यह एक आदर्श पुनर्प्रकाशन प्रक्रिया है, जिसका हम भी पालन - 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